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बिहार स्टेट पी.सी.एस.

  • 29 Nov 2025
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बिहार में वन और इको-टूरिज़्म अवसंरचना का उन्नयन

चर्चा में क्यों?

बिहार सरकार ने अनेक ज़िलों में वन अवसंरचना तथा इको-टूरिज़्म सुधार परियोजनाओं के लिये 10 करोड़ रुपये की मंज़ूरी दी है, जिसका उद्देश्य संरक्षण प्रयासों, आगंतुक सुविधाओं तथा वन सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करना है।

मुख्य बिंदु 

वन अवसंरचना परियोजनाओं के बारे में:

  • इस वित्तीय सहायता से विशेष रूप से वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व (VTR), गौतम बुद्ध वन्यजीव अभयारण्य तथा रोहतास और कैमूर के वन क्षेत्रों में वन मार्गों, विश्राम गृहों, व्याख्या केंद्रों तथा निगरानी टावरों के उन्नयन को गति मिलेगी।
  • मुख्य उद्देश्य गश्ती मार्गों, शिकार-रोधी बुनियादी ढाँचे तथा वन कर्मियों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को सुदृढ़ बनाना है।
  • डिजिटल निगरानी प्रणालियों, कैमरा-आधारित मॉनिटरिंग तथा वन्यजीव संरक्षण के लिये नए फील्ड स्टेशनों की स्थापना हेतु भी धनराशि स्वीकृत की गई है।

इको-पर्यटन विकास के बारे में:

  • इस योजना का उद्देश्य वाल्मीकि नगर, कैमूर पहाड़ियों और रोहतास पठार के आसपास इको-टूरिज़्म को सशक्त बढ़ाना है, जिसके अंतर्गत आगंतुक सुविधाओं, साइनेज एवं व्याख्या तंत्र, प्रकृति मार्ग, पर्यावरण-अनुकूल कॉटेजों तथा सौर-आधारित सुविधाओं का उन्नयन शामिल है।
  • सरकार का लक्ष्य समुदाय-प्रबंधित पारिस्थितिकी-पर्यटन को प्रोत्साहित करना है, जिसमें आजीविका सृजन के लिये वन-किनारे के स्थानीय गाँवों को शामिल किया जाएगा।

वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व (VTR)

  • यह बिहार के पश्चिम चंपारण ज़िले में तराई क्षेत्र में स्थित है और एक प्रमुख ईको-टूरिज़्म तथा जैवविविधता हॉटस्पॉट है।
  • यह रिज़र्व भारत–नेपाल सीमा पर स्थित है और प्रत्यक्ष रूप से चितवन राष्ट्रीय उद्यान से संबद्ध है, जिससे यह एक महत्त्वपूर्ण अंतर-सीमावर्ती संरक्षण क्षेत्र बन जाता है।
  • इसके नदी तंत्र पर मुख्यतः गंडक (नारायणी) नदी का प्रभुत्व है, जो विस्तृत बाढ़ के मैदान, घास के मैदान, साल वन और तराई आर्द्रभूमि का निर्माण करती है।
  • वनस्पति में आर्द्र पर्णपाती वन, नदी-तटीय वन तथा सवाना-जैसी घास भूमियाँ शामिल हैं।
  • यह रिज़र्व बाघ, तेंदुआ, भारतीय गौर, भालू, सांभर, चीतल, हिरन, लकड़बग्घा तथा उपयुक्त नदी खंडों में गंगेटिक डॉल्फ़िन जैसी प्रजातियों को आश्रय प्रदान करता है।

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हेरिटेज सर्किट हेतु अल्ट्रा-लक्ज़री कारवाँ सेवा

चर्चा में क्यों?

बिहार सरकार ने राज्य के प्रमुख विरासत स्थलों पर फाइव स्टार अनुभव प्रदान करने हेतु अल्ट्रा-लक्ज़री कारवाँ सेवा की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य उच्च स्तरीय घरेलू और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना है।

मुख्य बिंदु

  • इस पहल के तहत राज्य के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर प्रीमियम यात्रा की सुविधा प्रदान करने के लिये अल्ट्रा-लक्ज़री पर्यटक जहाज़ (Fleet) लॉन्च किया गया है, जिसका उद्देश्य उच्च स्तरीय देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना है।
  • कारवाँ फाइव स्टार सुविधाओं से सुसज्जित हैं, जिनमें सुखद इंटीरियर्स, निजी सुइट, किचनेट, आधुनिक शौचालय, मनोरंजन इकाइयाँ और पर्यटक अनुभव को बढ़ाने के लिये मनोरम खिड़कियाँ शामिल हैं।
  • यह कारवाँ क्यूरेटेड हेरिटेज सर्किट पर संचालित होंगे, जिससे पर्यटकों को नालंदा, राजगीर, बोधगया, वैशाली, विक्रमशिला और पटना के गांधी सर्किट जैसे स्थलों का अवलोकन करने का अवसर मिलेगा।
  • यह पहल बिहार की विस्तृत पर्यटन-विकास रणनीति के तहत शुरू की गई है, जो विरासत संरक्षण के साथ-साथ उच्च-मूल्य, कम-प्रभाव वाले पर्यटन के माध्यम से राजस्व वृद्धि पर केंद्रित है।

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