छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 | छत्तीसगढ़ | 27 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
छत्तीसगढ़ आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 को 23 फरवरी, 2026 को राज्य विधानसभा में वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसमें एक सुदृढ़ और अनुकूल अर्थव्यवस्था को रेखांकित किया गया है, जो व्यापक क्षेत्रीय विकास के बल पर राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रही है तथा वर्ष 2028 तक राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) को दोगुना कर ₹10 लाख करोड़ तक पहुँचाने के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करती है।
मुख्य बिंदु:
समष्टि-आर्थिक परिदृश्य
- वास्तविक GSDP वृद्धि: स्थिर मूल्यों (2011–12) पर 8.11% की दर से बढ़कर ₹3,58,293 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान।
- नाममात्र GSDP वृद्धि: वर्तमान मूल्यों पर 11.57% आँकी गई है, जो लगभग ₹6.31 लाख करोड़ तक पहुँचने का संकेत देती है।
- प्रति व्यक्ति आय (PCI): ₹1,79,244 तक पहुँचने की संभावना, जो विगत वर्ष (₹1,62,848) की तुलना में 10.07% की वृद्धि दर्शाती है।
राजकोषीय संकेतक एवं प्रबंधन
- राजकोषीय घाटा: GSDP के 2.97% (₹18,900 करोड़) पर लक्षित, जो FRBM अधिनियम की 3% सीमा के भीतर है।
- राजस्व अधिशेष: ₹2,804 करोड़ (GSDP का 0.4%) आँकी गई है, जो विगत वर्ष के घाटे से उल्लेखनीय सुधार दर्शाती है।
- पूंजीगत व्यय (कैपेक्स): ₹26,341 करोड़ आवंटित (कुल बजट का 16% तथा GSDP का 4.14%), जिसमें दीर्घकालिक परिसंपत्ति निर्माण को प्राथमिकता दी गई है।
- ऋण-GSDP अनुपात: राज्य का लक्ष्य वर्ष 2027–28 तक बकाया ऋण को GSDP के 24% तक कम करना है।
रणनीतिक विषय: GYAN और GATI
यह सर्वेक्षण वर्ष 2030 के दृष्टिकोण के अनुरूप दो प्रमुख ढाँचों पर आधारित है—
- GYAN (लक्षित समूह): Gareeb (गरीब), Yuva (युवा), Annadata (अन्नदाता) और Naari (नारी) पर फोकस।
- GATI (विकास के प्रेरक तत्त्व):
- G – Good Governance (सुशासन): डिजिटल ट्रैकिंग, अटल मॉनिटरिंग पोर्टल
- A – Accelerating Infrastructure (अवसंरचना का तीव्र विकास): सड़कें, बायपास, रिंग रोड
- T – Technology (प्रौद्योगिकी): ई-धरती, बिज़नेस इंटेलिजेंस यूनिट्स
- I – Industrial Growth (औद्योगिक विकास): नई औद्योगिक नीति 2024–2029
क्षेत्रीय प्रदर्शन
- GSDP में क्षेत्रीय योगदान (वर्तमान मूल्य):
- कृषि: 20.64%
- उद्योग: 46.59% (खनन और विनिर्माण के कारण प्रमुख योगदान)
- सेवा क्षेत्र: 32.77%
- कृषि एवं संबद्ध गतिविधियाँ: 7.49% की वृद्धि दर के साथ छत्तीसगढ़ एक प्रमुख कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उच्च उत्पादन, सिंचाई समर्थन और प्रौद्योगिकी अपनाने के कारण कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन सुदृढ़ रहा है।
- संबद्ध क्षेत्रों के विस्तार से ग्रामीण आय में वृद्धि हुई है तथा फसल उत्पादन के अतिरिक्त भी रोज़गार के नए अवसर सृजित हुए हैं।
- नीतिगत संदर्भ: कृषि वृद्धि को बनाए रखने के लिये जल अवसंरचना, फसल विविधीकरण, कृषि-बाज़ार संपर्क और मूल्य शृंखलाओं में निरंतर निवेश आवश्यक है।
- उद्योग: 7.21% की वृद्धि दर के साथ औद्योगिक क्षेत्र में दो अंकों की वृद्धि राज्य में बढ़ते निवेश और विनिर्माण गतिविधियों को दर्शाती है।
- व्यवसाय सुगमता और औद्योगिक अवसंरचना सुधार हेतु सरकारी पहलें सकारात्मक परिणाम दे रही हैं।
- रणनीतिक प्रभाव: औद्योगिक विकास से राजस्व आधार मज़बूत होता है, रोज़गार सृजन होता है और संरचनात्मक परिवर्तन को गति मिलती है।
- सेवा क्षेत्र: 9.11% की वृद्धि दर के साथ सेवा क्षेत्र विकास का प्रमुख चालक रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और संबंधित सेवाओं में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है।
- नीतिगत दृष्टिकोण: बढ़ती उपभोक्ता मांग और डिजिटल अपनाने के साथ सेवा क्षेत्र सतत विकास तथा रोज़गार सृजन की प्रबल संभावनाएँ रखता है।
अवसंरचना और सार्वजनिक निवेश
- सिंचाई नेटवर्क, ग्रामीण सड़कों तथा कनेक्टिविटी परियोजनाओं का विस्तार राज्य की विकास रणनीति की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
- डिजिटल अवसंरचना और विशेषीकृत आर्थिक क्षेत्रों पर केंद्रित प्रयासों का उद्देश्य निवेश आकर्षित करना तथा क्षेत्रीय प्रतिस्पर्द्धात्मकता को सुदृढ़ करना है।
प्रमुख नीतिगत पहल एवं कल्याणकारी योजनाएँ
- कृषक उन्नति योजना: किसानों को समर्थन देने के लिये ₹10,000 करोड़ का पर्याप्त प्रावधान किया गया है।
- महतारी वंदन योजना: विवाहित महिलाओं को नकद सहायता प्रदान करने हेतु ₹5,500 करोड़ आवंटित किये गए हैं।
- अवसंरचना एवं कनेक्टिविटी: दूर-दराज़ क्षेत्रों के लिये मुख्यमंत्री मोबाइल टावर योजना की शुरुआत तथा जगदलपुर, बिलासपुर और अंबिकापुर में हवाई अड्डों का विकास।
- शैक्षिक प्रगति: राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT), छह फिजियोथेरेपी कॉलेजों की स्थापना तथा नवा रायपुर में ‘एजुकेशन सिटी’ का विकास।
- स्वास्थ्य: शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के लिये ₹1,500 करोड़ का प्रावधान।
प्रमुख चुनौतियाँ
- नकद अंतरण: सर्वेक्षण में चेतावनी दी गई है कि बिना शर्त नकद अंतरणों का तीव्र विस्तार (वित्त वर्ष 2026 में ₹1.7 लाख करोड़) राजकोषीय स्थिरता के लिये जोखिम उत्पन्न कर सकता है।
- शहरीकरण और स्वास्थ्य: सतत शहरीकरण ढाँचों की आवश्यकता के साथ-साथ दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच से जुड़ी कमियों को दूर करना एक बड़ी चुनौती है।