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मध्य प्रदेश स्टेट पी.सी.एस.

  • 07 May 2026
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कान्हा टाइगर रिज़र्व में बाघिन और शावकों की मौत

चर्चा में क्यों? 

वन विभाग ने मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिज़र्व में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत के संबंध में सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसने वन्यजीव सुरक्षा तथा वन प्रबंधन पर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न कर दी हैं। 

मुख्य बिंदु:

  • घटना: कान्हा टाइगर रिज़र्व (मध्य प्रदेश) में एक बाघिन और उसके चार शावक मृत पाए गए, जिससे वन अधिकारियों द्वारा आधिकारिक जाँच शुरू कर दी गई है। इसमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) होने का संदेह जताया गया है। 
    • इन मौतों के साथ इस वर्ष राज्य में बाघों की कुल मृत्यु की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। 
    • वन विभाग ने मौत के संभावित कारणों पर एक विस्तृत जाँच रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंप दी है। 
  • कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV): यह वायरस श्वसन, जठरांत्र और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है तथा प्राय: संक्रमित पालतू या आवारा कुत्तों के संपर्क में आने से फैलता है।
  • वन्यजीव संरक्षण का मुद्दा: यह घटना बाघ संरक्षण, आवास प्रबंधन और संवेदनशील वन्यजीव आबादी की निगरानी के संबंध में गंभीर चिंताओं को उजागर करती है।
  • कान्हा टाइगर रिज़र्व:
    • इसकी स्थापना वर्ष 1955 में हुई थी और वर्ष 1973 में इसे 'कान्हा टाइगर रिज़र्व' घोषित किया गया था।
    • यह मध्य भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है।
    • मध्य प्रदेश के अन्य टाइगर रिज़र्व में संजय-डुबरी, पन्ना, सतपुड़ा, बांधवगढ़ और पेंच शामिल हैं।

और पढ़ें: कान्हा टाइगर रिज़र्व, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV)


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इंदौर BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी करेगा

चर्चा में क्यों? 

भारत अपनी BRICS अध्यक्षता के तहत जून 2026 में इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी करेगा। 

मुख्य बिंदु:

  • कार्यक्रम और स्थान: BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित की जाएगी। 
  • आयोजक: इस कार्यक्रम की मेज़बानी भारत द्वारा वर्ष 2026 में अपनी BRICS अध्यक्षता के हिस्से के रूप में की जा रही है।
  • प्रतिभागी: बैठक में BRICS सदस्य देशों (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के कृषि मंत्री भाग लेंगे।
  • केंद्र बिंदु: यह बैठक खाद्य सुरक्षा, आधुनिक कृषि पद्धतियों, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और किसानों के कल्याण पर केंद्रित होगी।
    • यह जलवायु-अनुकूल कृषि, डिजिटल कृषि, आपूर्ति शृंखला, अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग और ज्ञान के आदान-प्रदान पर भी ध्यान केंद्रित करेगी। 
  • BRICS: ‘BRIC' शब्द का प्रतिपादन अर्थशास्त्री जिम ओ'नील (Jim O’Neill) ने वर्ष 2001 में किया था। 
    • मूल रूप से BRIC में ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन शामिल थे।
    • वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद 'BRICS' का गठन हुआ।

और पढ़ें: BRICS 


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

भारत का पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम गुजरात में लॉन्च किया गया

चर्चा में क्यों? 

भारत ने गुजरात में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित अपना पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू किया है, जो राजमार्ग टोल संग्रह के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। 

मुख्य बिंदु:

  • प्रणाली: भारत का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोल सिस्टम गुजरात में NH-48 के सूरत-भरूच खंड पर शुरू किया गया है। 
    • यह प्रणाली टोल बूथों और भौतिक अवरोधों को हटा देती है, जिससे वाहन बिना रुके राजमार्ग की गति से गुज़र सकते हैं। 
  • उपयोग की गई तकनीक: इसमें स्वचालित टोल कटौती के लिये ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और FASTag एकीकरण का उपयोग किया जाता है।
  • उद्देश्य: इस प्रणाली का उद्देश्य व्यस्त राजमार्ग गलियारों में भीड़भाड़ को कम करना, यात्रा के समय में कटौती करना, ईंधन दक्षता में सुधार करना और उत्सर्जन को कम करना है।
    • बैरियर-लेस प्रणाली यात्रियों तथा माल की त्वरित आवाजाही की सुविधा प्रदान करके ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ (जीवन की सुगमता) और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ (व्यापार करने की सुगमता) को बढ़ावा देगी। 
  • संस्थागत भूमिका: यह पहल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा कार्यान्वित की गई है। 

और पढ़ें: ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, NHAI


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

दो भारतीय पत्रकारों ने प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार जीता

चर्चा में क्यों? 

भारतीय पत्रकार आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने ब्लूमबर्ग के लिये नैटली ओबिको पियर्सन के साथ मिलकर तैयार किये गए अपने प्रोजेक्ट ‘trAPPed’ के लिये 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री' श्रेणी में प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार जीता है। 

मुख्य बिंदु:

  • पुरस्कार विजेता प्रोजेक्ट: ‘trAPPed’ प्रोजेक्ट भारत में बढ़ते डिजिटल सर्विलांस (निगरानी), साइबर धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों के खतरे पर प्रकाश डालता है। 
    • यह एक भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट की कहानी को प्रस्तुत करता है, जिसे कथित तौर पर साइबर अपराधियों ने डराने-धमकाने और निगरानी की रणनीति का उपयोग करके उसके फोन के माध्यम से अपने जाल में फँसा लिया था।
    • पुलित्ज़र बोर्ड ने इसे एक ‘रोमांचक विवरण’ के रूप में वर्णित किया है, जो उभरते हुए तकनीक-आधारित अपराधों को उजागर करने के लिये विज़ुअल स्टोरीटेलिंग और अन्वेषणात्मक पत्रकारिता का प्रभावी ढंग से मेल कराता है।
  • भारतीय पत्रकारिता को वैश्विक पहचान: यह पुरस्कार भारतीय अन्वेषणात्मक और विज़ुअल पत्रकारिता को मिल रही बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय मान्यता को रेखांकित करता है।
  • साइबर अपराध पर ध्यान: यह डिजिटल स्कैम, ऑनलाइन निगरानी और साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क द्वारा उत्पन्न वैश्विक चुनौती को उजागर करता है।
  • विज़ुअल स्टोरीटेलिंग का उदय: यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे ग्राफिक कथाएँ और सचित्र रिपोर्टिंग जटिल तकनीकी एवं सामाजिक मुद्दों को सरल बना सकती हैं।
  • प्रेस स्वतंत्रता और अन्वेषणात्मक पत्रकारिता: यह पुरस्कार डिजिटल युग में उभरते खतरों को उजागर करने में स्वतंत्र पत्रकारिता के महत्त्व को सुदृढ़ करता है।

और पढ़ें: पुलित्ज़र पुरस्कार


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