झारखंड Switch to English
हज़ारीबाग भारत का पहला पर्ल फार्मिंग क्लस्टर बना
चर्चा में क्यों?
झारखंड के हज़ारीबाग ज़िले को भारत का पहला पर्ल फार्मिंग क्लस्टर घोषित किया गया है, जिसका उद्देश्य जलीय कृषि-आधारित ग्रामीण आजीविका और स्थायी आय सृजन को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु:
- पहला पर्ल क्लस्टर: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत हज़ारीबाग को आधिकारिक तौर पर भारत के पहले पर्ल फार्मिंग क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है, जो मत्स्य पालन क्षेत्र में एक बड़ा कदम है।
- उद्देश्य: इस परियोजना का उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से पर्ल फार्मिंग को बढ़ावा देना, ग्रामीण रोज़गार को मज़बूत करना और उत्पादन, प्रशिक्षण एवं विपणन के लिये एक व्यवस्थित पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
- प्रशिक्षण: उत्पादकता और उद्यमिता बढ़ाने के लिये महिला स्वयं सहायता समूहों सहित किसानों को पर्ल फार्मिंग की उन्नत तकनीकों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
- प्रभाव: इस पहल से उच्च-मूल्य वाली ग्रामीण आय उत्पन्न होने की उम्मीद है, क्योंकि पारंपरिक कृषि की तुलना में पर्ल फार्मिंग में लाभ की महत्त्वपूर्ण संभावनाएँ हैं।
- प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY):
- इसे 10 सितंबर, 2020 को लॉन्च किया गया था।
- यह मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।
- राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) PMMSY के तहत प्रशिक्षण, जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को लागू करने के लिये नोडल एजेंसी है।
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और पढ़ें: PMMSY |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
भारत का पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम गुजरात में लॉन्च किया गया
चर्चा में क्यों?
भारत ने गुजरात में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित अपना पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू किया है, जो राजमार्ग टोल संग्रह के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है।
मुख्य बिंदु:
- प्रणाली: भारत का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोल सिस्टम गुजरात में NH-48 के सूरत-भरूच खंड पर शुरू किया गया है।
- यह प्रणाली टोल बूथों और भौतिक अवरोधों को हटा देती है, जिससे वाहन बिना रुके राजमार्ग की गति से गुज़र सकते हैं।
- उपयोग की गई तकनीक: इसमें स्वचालित टोल कटौती के लिये ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और FASTag एकीकरण का उपयोग किया जाता है।
- उद्देश्य: इस प्रणाली का उद्देश्य व्यस्त राजमार्ग गलियारों में भीड़भाड़ को कम करना, यात्रा के समय में कटौती करना, ईंधन दक्षता में सुधार करना और उत्सर्जन को कम करना है।
- बैरियर-लेस प्रणाली यात्रियों तथा माल की त्वरित आवाजाही की सुविधा प्रदान करके ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ (जीवन की सुगमता) और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ (व्यापार करने की सुगमता) को बढ़ावा देगी।
- संस्थागत भूमिका: यह पहल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा कार्यान्वित की गई है।
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और पढ़ें: ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, NHAI |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
दो भारतीय पत्रकारों ने प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार जीता
चर्चा में क्यों?
भारतीय पत्रकार आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने ब्लूमबर्ग के लिये नैटली ओबिको पियर्सन के साथ मिलकर तैयार किये गए अपने प्रोजेक्ट ‘trAPPed’ के लिये 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री' श्रेणी में प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार जीता है।
मुख्य बिंदु:
- पुरस्कार विजेता प्रोजेक्ट: ‘trAPPed’ प्रोजेक्ट भारत में बढ़ते डिजिटल सर्विलांस (निगरानी), साइबर धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों के खतरे पर प्रकाश डालता है।
- यह एक भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट की कहानी को प्रस्तुत करता है, जिसे कथित तौर पर साइबर अपराधियों ने डराने-धमकाने और निगरानी की रणनीति का उपयोग करके उसके फोन के माध्यम से अपने जाल में फँसा लिया था।
- पुलित्ज़र बोर्ड ने इसे एक ‘रोमांचक विवरण’ के रूप में वर्णित किया है, जो उभरते हुए तकनीक-आधारित अपराधों को उजागर करने के लिये विज़ुअल स्टोरीटेलिंग और अन्वेषणात्मक पत्रकारिता का प्रभावी ढंग से मेल कराता है।
- भारतीय पत्रकारिता को वैश्विक पहचान: यह पुरस्कार भारतीय अन्वेषणात्मक और विज़ुअल पत्रकारिता को मिल रही बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय मान्यता को रेखांकित करता है।
- साइबर अपराध पर ध्यान: यह डिजिटल स्कैम, ऑनलाइन निगरानी और साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क द्वारा उत्पन्न वैश्विक चुनौती को उजागर करता है।
- विज़ुअल स्टोरीटेलिंग का उदय: यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे ग्राफिक कथाएँ और सचित्र रिपोर्टिंग जटिल तकनीकी एवं सामाजिक मुद्दों को सरल बना सकती हैं।
- प्रेस स्वतंत्रता और अन्वेषणात्मक पत्रकारिता: यह पुरस्कार डिजिटल युग में उभरते खतरों को उजागर करने में स्वतंत्र पत्रकारिता के महत्त्व को सुदृढ़ करता है।
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और पढ़ें: पुलित्ज़र पुरस्कार |

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