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छत्तीसगढ़ स्टेट पी.सी.एस.

  • 07 May 2026
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छत्तीसगढ़ Switch to English

छत्तीसगढ़ की नदियाँ हुईं प्रदूषित, उच्च न्यायालय ने प्रणालीगत विफलता पर जताई कड़ी नाराज़गी

चर्चा में क्यों? 

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रमुख नदियों में प्रदूषण के खतरनाक स्तर को लेकर राज्य अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। न्यायालय ने इसे एक ‘प्रणालीगत विफलता’ करार दिया और स्थिति को ‘परेशान करने वाली तथा प्रतिगामी स्थिति’ बताया है। 

मुख्य बिंदु:

  • प्रदूषित नदियाँ: खबरों के अनुसार, औद्योगिक अपशिष्टों, सीवेज और ठोस अपशिष्ट के अनियंत्रित बहाव के कारण खारुन, शिवनाथ तथा अरपा जैसी नदियाँ अत्यधिक प्रदूषित हो गई हैं।
  • प्रणालीगत शासन की विफलता: न्यायालय ने माना कि यह प्रदूषण नियामक निकायों और प्रवर्तन तंत्र की विफलता को दर्शाता है।
  • मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: नदियों का गिरता स्तर भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन के अधिकार' को प्रभावित करता है, जिसमें स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार भी शामिल है।
  • समन्वय की कमी: शहरी स्थानीय निकायों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों जैसे विभागों के बीच खराब तालमेल।
  • मानकों का उल्लंघन: उद्योगों और नगर पालिकाओं द्वारा पर्यावरणीय मानकों का पालन करने में विफलता।
  • कानूनी और संस्थागत ढाँचा:  जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 जल प्रदूषण के निवारण और नियंत्रण तथा जल की गुणवत्ता बनाए रखने का प्रावधान करता है।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पानी की गुणवत्ता की निगरानी करते हैं तथा नियमों को लागू करते हैं।
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT): पर्यावरणीय विवादों का न्यायनिर्णयन करता है और पर्यावरण कानूनों का प्रवर्तन सुनिश्चित करता है।

और पढ़ें: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

भारत का पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम गुजरात में लॉन्च किया गया

चर्चा में क्यों? 

भारत ने गुजरात में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित अपना पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू किया है, जो राजमार्ग टोल संग्रह के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। 

मुख्य बिंदु:

  • प्रणाली: भारत का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोल सिस्टम गुजरात में NH-48 के सूरत-भरूच खंड पर शुरू किया गया है। 
    • यह प्रणाली टोल बूथों और भौतिक अवरोधों को हटा देती है, जिससे वाहन बिना रुके राजमार्ग की गति से गुज़र सकते हैं। 
  • उपयोग की गई तकनीक: इसमें स्वचालित टोल कटौती के लिये ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और FASTag एकीकरण का उपयोग किया जाता है।
  • उद्देश्य: इस प्रणाली का उद्देश्य व्यस्त राजमार्ग गलियारों में भीड़भाड़ को कम करना, यात्रा के समय में कटौती करना, ईंधन दक्षता में सुधार करना और उत्सर्जन को कम करना है।
    • बैरियर-लेस प्रणाली यात्रियों तथा माल की त्वरित आवाजाही की सुविधा प्रदान करके ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ (जीवन की सुगमता) और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ (व्यापार करने की सुगमता) को बढ़ावा देगी। 
  • संस्थागत भूमिका: यह पहल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा कार्यान्वित की गई है। 

और पढ़ें: ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, NHAI


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दो भारतीय पत्रकारों ने प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार जीता

चर्चा में क्यों? 

भारतीय पत्रकार आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने ब्लूमबर्ग के लिये नैटली ओबिको पियर्सन के साथ मिलकर तैयार किये गए अपने प्रोजेक्ट ‘trAPPed’ के लिये 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री' श्रेणी में प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार जीता है। 

मुख्य बिंदु:

  • पुरस्कार विजेता प्रोजेक्ट: ‘trAPPed’ प्रोजेक्ट भारत में बढ़ते डिजिटल सर्विलांस (निगरानी), साइबर धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों के खतरे पर प्रकाश डालता है। 
    • यह एक भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट की कहानी को प्रस्तुत करता है, जिसे कथित तौर पर साइबर अपराधियों ने डराने-धमकाने और निगरानी की रणनीति का उपयोग करके उसके फोन के माध्यम से अपने जाल में फँसा लिया था।
    • पुलित्ज़र बोर्ड ने इसे एक ‘रोमांचक विवरण’ के रूप में वर्णित किया है, जो उभरते हुए तकनीक-आधारित अपराधों को उजागर करने के लिये विज़ुअल स्टोरीटेलिंग और अन्वेषणात्मक पत्रकारिता का प्रभावी ढंग से मेल कराता है।
  • भारतीय पत्रकारिता को वैश्विक पहचान: यह पुरस्कार भारतीय अन्वेषणात्मक और विज़ुअल पत्रकारिता को मिल रही बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय मान्यता को रेखांकित करता है।
  • साइबर अपराध पर ध्यान: यह डिजिटल स्कैम, ऑनलाइन निगरानी और साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क द्वारा उत्पन्न वैश्विक चुनौती को उजागर करता है।
  • विज़ुअल स्टोरीटेलिंग का उदय: यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे ग्राफिक कथाएँ और सचित्र रिपोर्टिंग जटिल तकनीकी एवं सामाजिक मुद्दों को सरल बना सकती हैं।
  • प्रेस स्वतंत्रता और अन्वेषणात्मक पत्रकारिता: यह पुरस्कार डिजिटल युग में उभरते खतरों को उजागर करने में स्वतंत्र पत्रकारिता के महत्त्व को सुदृढ़ करता है।

और पढ़ें: पुलित्ज़र पुरस्कार


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