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राजगीर ज़ू सफारी-आधारित एनीमेशन 'द वाइल्ड कॉल' ने दादा साहब फाल्के पुरस्कार 2026 जीता
चर्चा में क्यों?
बिहार के राजगीर ज़ू सफारी से प्रेरित एनिमेटेड फिल्म ‘द वाइल्ड कॉल’ (The Wild Call) को 16वें दादा साहब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2026 में सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म के रूप में सम्मानित किया गया है।
मुख्य बिंदु:
- पुरस्कार: ‘द वाइल्ड कॉल’ को 16वें दादा साहब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2026 में सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म का पुरस्कार मिला, जो भारतीय और स्वतंत्र सिनेमा में उत्कृष्टता को मान्यता देता है।
- पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार द्वारा निर्मित इस फिल्म का निर्देशन नवीनध एस. फरीद और अज़हरुद्दीन सुलेमान द्वारा किया गया था।
- फिल्म का संगीत जिब्रान वैबोधा (Ghibran Vaibodha) द्वारा तैयार किया गया है, जो इसके समग्र इमर्सिव (तल्लीन कर देने वाले) अनुभव को बढ़ाता है।
- इस परियोजना की देखरेख क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक गोपाल सिंह और सफारी के निदेशक रामसुंदर एम. द्वारा की गई थी।
- थीम: यह फिल्म जलवायु परिवर्तन, आवास संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व जैसे विषयों पर प्रकाश डालती है।
- तकनीक: यह एक उन्नत 180-डिग्री इमर्सिव एनीमेशन परियोजना है, जिसे वन्यजीवों को देखने का यथार्थवादी अनुभव प्रदान करने और पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
- इको-टूरिज़्म को बढ़ावा: यह फिल्म राजगीर ज़ू सफारी को एक आधुनिक इको-टूरिज़्म गंतव्य के रूप में प्रदर्शित करती है, जो वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति-आधारित पर्यटन के क्षेत्र में बिहार के प्रयासों को बढ़ावा देती है।
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और पढ़ें: दादा साहब फाल्के, राजगीर ज़ू सफारी |
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वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने बिहार के बोधगया का दौरा किया
चर्चा में क्यों?
वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने मई 2026 में अपनी तीन दिवसीय भारत की राजकीय यात्रा के दौरान बिहार के गया का दौरा किया।
मुख्य बिंदु:
- आगमन: तो लाम गया (बिहार) पहुँचे, जो उनकी भारत की आधिकारिक राजकीय यात्रा की शुरुआत थी।
- अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने बोधगया का भ्रमण किया और बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थल महाबोधि मंदिर में प्रार्थना की।
- महत्त्व: यह यात्रा भारत और वियतनाम के बीच सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों को उजागर करती है, विशेष रूप से साझा बौद्ध विरासत के माध्यम से।
- राष्ट्रपति के रूप में पहली यात्रा: वर्ष 2026 में वियतनाम के राष्ट्रपति का पदभार सॅंभालने के बाद तो लाम की यह पहली भारत यात्रा है।
- महाबोधि मंदिर:
- माना जाता है कि सम्राट अशोक ने बोधि वृक्ष का सम्मान किया था और तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व (BCE) में महाबोधि मंदिर का निर्माण करवाया था।
- यह स्थल उस स्थान की स्मृति में है, जहाँ गौतम बुद्ध ने पवित्र बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था।
- इसे वर्ष 2002 में UNESCO विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।
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और पढ़ें: महाबोधि मंदिर, UNESCO विश्व धरोहर स्थल |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
भारत का पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम गुजरात में लॉन्च किया गया
चर्चा में क्यों?
भारत ने गुजरात में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित अपना पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू किया है, जो राजमार्ग टोल संग्रह के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है।
मुख्य बिंदु:
- प्रणाली: भारत का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोल सिस्टम गुजरात में NH-48 के सूरत-भरूच खंड पर शुरू किया गया है।
- यह प्रणाली टोल बूथों और भौतिक अवरोधों को हटा देती है, जिससे वाहन बिना रुके राजमार्ग की गति से गुज़र सकते हैं।
- उपयोग की गई तकनीक: इसमें स्वचालित टोल कटौती के लिये ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और FASTag एकीकरण का उपयोग किया जाता है।
- उद्देश्य: इस प्रणाली का उद्देश्य व्यस्त राजमार्ग गलियारों में भीड़भाड़ को कम करना, यात्रा के समय में कटौती करना, ईंधन दक्षता में सुधार करना और उत्सर्जन को कम करना है।
- बैरियर-लेस प्रणाली यात्रियों तथा माल की त्वरित आवाजाही की सुविधा प्रदान करके ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ (जीवन की सुगमता) और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ (व्यापार करने की सुगमता) को बढ़ावा देगी।
- संस्थागत भूमिका: यह पहल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा कार्यान्वित की गई है।
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और पढ़ें: ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, NHAI |
राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
दो भारतीय पत्रकारों ने प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार जीता
चर्चा में क्यों?
भारतीय पत्रकार आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने ब्लूमबर्ग के लिये नैटली ओबिको पियर्सन के साथ मिलकर तैयार किये गए अपने प्रोजेक्ट ‘trAPPed’ के लिये 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री' श्रेणी में प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार जीता है।
मुख्य बिंदु:
- पुरस्कार विजेता प्रोजेक्ट: ‘trAPPed’ प्रोजेक्ट भारत में बढ़ते डिजिटल सर्विलांस (निगरानी), साइबर धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों के खतरे पर प्रकाश डालता है।
- यह एक भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट की कहानी को प्रस्तुत करता है, जिसे कथित तौर पर साइबर अपराधियों ने डराने-धमकाने और निगरानी की रणनीति का उपयोग करके उसके फोन के माध्यम से अपने जाल में फँसा लिया था।
- पुलित्ज़र बोर्ड ने इसे एक ‘रोमांचक विवरण’ के रूप में वर्णित किया है, जो उभरते हुए तकनीक-आधारित अपराधों को उजागर करने के लिये विज़ुअल स्टोरीटेलिंग और अन्वेषणात्मक पत्रकारिता का प्रभावी ढंग से मेल कराता है।
- भारतीय पत्रकारिता को वैश्विक पहचान: यह पुरस्कार भारतीय अन्वेषणात्मक और विज़ुअल पत्रकारिता को मिल रही बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय मान्यता को रेखांकित करता है।
- साइबर अपराध पर ध्यान: यह डिजिटल स्कैम, ऑनलाइन निगरानी और साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क द्वारा उत्पन्न वैश्विक चुनौती को उजागर करता है।
- विज़ुअल स्टोरीटेलिंग का उदय: यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे ग्राफिक कथाएँ और सचित्र रिपोर्टिंग जटिल तकनीकी एवं सामाजिक मुद्दों को सरल बना सकती हैं।
- प्रेस स्वतंत्रता और अन्वेषणात्मक पत्रकारिता: यह पुरस्कार डिजिटल युग में उभरते खतरों को उजागर करने में स्वतंत्र पत्रकारिता के महत्त्व को सुदृढ़ करता है।
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और पढ़ें: पुलित्ज़र पुरस्कार |

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