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स्टेट पी.सी.एस.

  • 07 May 2026
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बिहार Switch to English

राजगीर ज़ू सफारी-आधारित एनीमेशन 'द वाइल्ड कॉल' ने दादा साहब फाल्के पुरस्कार 2026 जीता

चर्चा में क्यों? 

 बिहार के राजगीर ज़ू सफारी से प्रेरित एनिमेटेड फिल्म ‘द वाइल्ड कॉल’ (The Wild Call) को 16वें दादा साहब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2026 में सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म के रूप में सम्मानित किया गया है। 

मुख्य बिंदु:

  • पुरस्कार: ‘द वाइल्ड कॉल’ को 16वें दादा साहब फाल्के फिल्म फेस्टिवल 2026 में सर्वश्रेष्ठ एनीमेशन फिल्म का पुरस्कार मिला, जो भारतीय और स्वतंत्र सिनेमा में उत्कृष्टता को मान्यता देता है। 
    • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार द्वारा निर्मित इस फिल्म का निर्देशन नवीनध एस. फरीद और अज़हरुद्दीन सुलेमान द्वारा किया गया था। 
    • फिल्म का संगीत जिब्रान वैबोधा (Ghibran Vaibodha) द्वारा तैयार किया गया है, जो इसके समग्र इमर्सिव (तल्लीन कर देने वाले) अनुभव को बढ़ाता है। 
    • इस परियोजना की देखरेख क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक गोपाल सिंह और सफारी के निदेशक रामसुंदर एम. द्वारा की गई थी। 
  • थीम: यह फिल्म जलवायु परिवर्तन, आवास संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व जैसे विषयों पर प्रकाश डालती है।
  • तकनीक: यह एक उन्नत 180-डिग्री इमर्सिव एनीमेशन परियोजना है, जिसे वन्यजीवों को देखने का यथार्थवादी अनुभव प्रदान करने और पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
  • इको-टूरिज़्म को बढ़ावा: यह फिल्म राजगीर ज़ू सफारी को एक आधुनिक इको-टूरिज़्म गंतव्य के रूप में प्रदर्शित करती है, जो वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति-आधारित पर्यटन के क्षेत्र में बिहार के प्रयासों को बढ़ावा देती है।

और पढ़ें: दादा साहब फाल्के, राजगीर ज़ू सफारी


मध्य प्रदेश Switch to English

कान्हा टाइगर रिज़र्व में बाघिन और शावकों की मौत

चर्चा में क्यों? 

वन विभाग ने मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिज़र्व में एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत के संबंध में सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसने वन्यजीव सुरक्षा तथा वन प्रबंधन पर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न कर दी हैं। 

मुख्य बिंदु:

  • घटना: कान्हा टाइगर रिज़र्व (मध्य प्रदेश) में एक बाघिन और उसके चार शावक मृत पाए गए, जिससे वन अधिकारियों द्वारा आधिकारिक जाँच शुरू कर दी गई है। इसमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) होने का संदेह जताया गया है। 
    • इन मौतों के साथ इस वर्ष राज्य में बाघों की कुल मृत्यु की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। 
    • वन विभाग ने मौत के संभावित कारणों पर एक विस्तृत जाँच रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंप दी है। 
  • कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV): यह वायरस श्वसन, जठरांत्र और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है तथा प्राय: संक्रमित पालतू या आवारा कुत्तों के संपर्क में आने से फैलता है।
  • वन्यजीव संरक्षण का मुद्दा: यह घटना बाघ संरक्षण, आवास प्रबंधन और संवेदनशील वन्यजीव आबादी की निगरानी के संबंध में गंभीर चिंताओं को उजागर करती है।
  • कान्हा टाइगर रिज़र्व:
    • इसकी स्थापना वर्ष 1955 में हुई थी और वर्ष 1973 में इसे 'कान्हा टाइगर रिज़र्व' घोषित किया गया था।
    • यह मध्य भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है।
    • मध्य प्रदेश के अन्य टाइगर रिज़र्व में संजय-डुबरी, पन्ना, सतपुड़ा, बांधवगढ़ और पेंच शामिल हैं।

और पढ़ें: कान्हा टाइगर रिज़र्व, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV)


झारखंड Switch to English

हज़ारीबाग भारत का पहला पर्ल फार्मिंग क्लस्टर बना

चर्चा में क्यों? 

झारखंड के हज़ारीबाग ज़िले को भारत का पहला पर्ल फार्मिंग क्लस्टर घोषित किया गया है, जिसका उद्देश्य जलीय कृषि-आधारित ग्रामीण आजीविका और स्थायी आय सृजन को बढ़ावा देना है। 

मुख्य बिंदु:

  • पहला पर्ल क्लस्टर: प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत हज़ारीबाग को आधिकारिक तौर पर भारत के पहले पर्ल फार्मिंग क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है, जो मत्स्य पालन क्षेत्र में एक बड़ा कदम है।
  • उद्देश्य: इस परियोजना का उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से पर्ल फार्मिंग को बढ़ावा देना, ग्रामीण रोज़गार को मज़बूत करना और उत्पादन, प्रशिक्षण एवं विपणन के लिये एक व्यवस्थित पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है।
  • प्रशिक्षण: उत्पादकता और उद्यमिता बढ़ाने के लिये महिला स्वयं सहायता समूहों सहित किसानों को पर्ल फार्मिंग की उन्नत तकनीकों में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
  • प्रभाव: इस पहल से उच्च-मूल्य वाली ग्रामीण आय उत्पन्न होने की उम्मीद है, क्योंकि पारंपरिक कृषि की तुलना में पर्ल फार्मिंग में लाभ की महत्त्वपूर्ण संभावनाएँ हैं।
  • प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY): 
    • इसे 10 सितंबर, 2020 को लॉन्च किया गया था।
    • यह मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।
    • राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) PMMSY के तहत प्रशिक्षण, जागरूकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को लागू करने के लिये नोडल एजेंसी है।

और पढ़ें: PMMSY


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

भारत का पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम गुजरात में लॉन्च किया गया

चर्चा में क्यों? 

भारत ने गुजरात में मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) तकनीक पर आधारित अपना पहला बैरियर-लेस टोल सिस्टम शुरू किया है, जो राजमार्ग टोल संग्रह के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का प्रतीक है। 

मुख्य बिंदु:

  • प्रणाली: भारत का पहला मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) बैरियर-लेस टोल सिस्टम गुजरात में NH-48 के सूरत-भरूच खंड पर शुरू किया गया है। 
    • यह प्रणाली टोल बूथों और भौतिक अवरोधों को हटा देती है, जिससे वाहन बिना रुके राजमार्ग की गति से गुज़र सकते हैं। 
  • उपयोग की गई तकनीक: इसमें स्वचालित टोल कटौती के लिये ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे और FASTag एकीकरण का उपयोग किया जाता है।
  • उद्देश्य: इस प्रणाली का उद्देश्य व्यस्त राजमार्ग गलियारों में भीड़भाड़ को कम करना, यात्रा के समय में कटौती करना, ईंधन दक्षता में सुधार करना और उत्सर्जन को कम करना है।
    • बैरियर-लेस प्रणाली यात्रियों तथा माल की त्वरित आवाजाही की सुविधा प्रदान करके ‘ईज़ ऑफ लिविंग’ (जीवन की सुगमता) और ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ (व्यापार करने की सुगमता) को बढ़ावा देगी। 
  • संस्थागत भूमिका: यह पहल सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा कार्यान्वित की गई है। 

और पढ़ें: ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस, NHAI


मध्य प्रदेश Switch to English

इंदौर BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी करेगा

चर्चा में क्यों? 

भारत अपनी BRICS अध्यक्षता के तहत जून 2026 में इंदौर में BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक की मेज़बानी करेगा। 

मुख्य बिंदु:

  • कार्यक्रम और स्थान: BRICS कृषि मंत्रियों की बैठक मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित की जाएगी। 
  • आयोजक: इस कार्यक्रम की मेज़बानी भारत द्वारा वर्ष 2026 में अपनी BRICS अध्यक्षता के हिस्से के रूप में की जा रही है।
  • प्रतिभागी: बैठक में BRICS सदस्य देशों (ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) के कृषि मंत्री भाग लेंगे।
  • केंद्र बिंदु: यह बैठक खाद्य सुरक्षा, आधुनिक कृषि पद्धतियों, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और किसानों के कल्याण पर केंद्रित होगी।
    • यह जलवायु-अनुकूल कृषि, डिजिटल कृषि, आपूर्ति शृंखला, अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग और ज्ञान के आदान-प्रदान पर भी ध्यान केंद्रित करेगी। 
  • BRICS: ‘BRIC' शब्द का प्रतिपादन अर्थशास्त्री जिम ओ'नील (Jim O’Neill) ने वर्ष 2001 में किया था। 
    • मूल रूप से BRIC में ब्राज़ील, रूस, भारत और चीन शामिल थे।
    • वर्ष 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद 'BRICS' का गठन हुआ।

और पढ़ें: BRICS 


बिहार Switch to English

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने बिहार के बोधगया का दौरा किया

चर्चा में क्यों? 

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने मई 2026 में अपनी तीन दिवसीय भारत की राजकीय यात्रा के दौरान बिहार के गया का दौरा किया। 

मुख्य बिंदु:

  • आगमन: तो लाम गया (बिहार) पहुँचे, जो उनकी भारत की आधिकारिक राजकीय यात्रा की शुरुआत थी। 
    • अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने बोधगया का भ्रमण किया और बौद्ध धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थल महाबोधि मंदिर में प्रार्थना की। 
  • महत्त्व: यह यात्रा भारत और वियतनाम के बीच सांस्कृतिक एवं सभ्यतागत संबंधों को उजागर करती है, विशेष रूप से साझा बौद्ध विरासत के माध्यम से।
  • राष्ट्रपति के रूप में पहली यात्रा: वर्ष 2026 में वियतनाम के राष्ट्रपति का पदभार सॅंभालने के बाद तो लाम की यह पहली भारत यात्रा है।
  • महाबोधि मंदिर:
    • माना जाता है कि सम्राट अशोक ने बोधि वृक्ष का सम्मान किया था और तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व (BCE) में महाबोधि मंदिर का निर्माण करवाया था।
    • यह स्थल उस स्थान की स्मृति में है, जहाँ गौतम बुद्ध ने पवित्र बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया था।
    • इसे वर्ष 2002 में UNESCO विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।

और पढ़ें: महाबोधि मंदिर, UNESCO विश्व धरोहर स्थल


राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English

दो भारतीय पत्रकारों ने प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार जीता

चर्चा में क्यों? 

भारतीय पत्रकार आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा ने ब्लूमबर्ग के लिये नैटली ओबिको पियर्सन के साथ मिलकर तैयार किये गए अपने प्रोजेक्ट ‘trAPPed’ के लिये 'इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री' श्रेणी में प्रतिष्ठित पुलित्ज़र पुरस्कार जीता है। 

मुख्य बिंदु:

  • पुरस्कार विजेता प्रोजेक्ट: ‘trAPPed’ प्रोजेक्ट भारत में बढ़ते डिजिटल सर्विलांस (निगरानी), साइबर धोखाधड़ी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ घोटालों के खतरे पर प्रकाश डालता है। 
    • यह एक भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट की कहानी को प्रस्तुत करता है, जिसे कथित तौर पर साइबर अपराधियों ने डराने-धमकाने और निगरानी की रणनीति का उपयोग करके उसके फोन के माध्यम से अपने जाल में फँसा लिया था।
    • पुलित्ज़र बोर्ड ने इसे एक ‘रोमांचक विवरण’ के रूप में वर्णित किया है, जो उभरते हुए तकनीक-आधारित अपराधों को उजागर करने के लिये विज़ुअल स्टोरीटेलिंग और अन्वेषणात्मक पत्रकारिता का प्रभावी ढंग से मेल कराता है।
  • भारतीय पत्रकारिता को वैश्विक पहचान: यह पुरस्कार भारतीय अन्वेषणात्मक और विज़ुअल पत्रकारिता को मिल रही बढ़ती अंतर्राष्ट्रीय मान्यता को रेखांकित करता है।
  • साइबर अपराध पर ध्यान: यह डिजिटल स्कैम, ऑनलाइन निगरानी और साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क द्वारा उत्पन्न वैश्विक चुनौती को उजागर करता है।
  • विज़ुअल स्टोरीटेलिंग का उदय: यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे ग्राफिक कथाएँ और सचित्र रिपोर्टिंग जटिल तकनीकी एवं सामाजिक मुद्दों को सरल बना सकती हैं।
  • प्रेस स्वतंत्रता और अन्वेषणात्मक पत्रकारिता: यह पुरस्कार डिजिटल युग में उभरते खतरों को उजागर करने में स्वतंत्र पत्रकारिता के महत्त्व को सुदृढ़ करता है।

और पढ़ें: पुलित्ज़र पुरस्कार


छत्तीसगढ़ Switch to English

छत्तीसगढ़ की नदियाँ हुईं प्रदूषित, उच्च न्यायालय ने प्रणालीगत विफलता पर जताई कड़ी नाराज़गी

चर्चा में क्यों? 

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने प्रमुख नदियों में प्रदूषण के खतरनाक स्तर को लेकर राज्य अधिकारियों की कड़ी आलोचना की है। न्यायालय ने इसे एक ‘प्रणालीगत विफलता’ करार दिया और स्थिति को ‘परेशान करने वाली तथा प्रतिगामी स्थिति’ बताया है। 

मुख्य बिंदु:

  • प्रदूषित नदियाँ: खबरों के अनुसार, औद्योगिक अपशिष्टों, सीवेज और ठोस अपशिष्ट के अनियंत्रित बहाव के कारण खारुन, शिवनाथ तथा अरपा जैसी नदियाँ अत्यधिक प्रदूषित हो गई हैं।
  • प्रणालीगत शासन की विफलता: न्यायालय ने माना कि यह प्रदूषण नियामक निकायों और प्रवर्तन तंत्र की विफलता को दर्शाता है।
  • मौलिक अधिकारों का उल्लंघन: नदियों का गिरता स्तर भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत 'जीवन के अधिकार' को प्रभावित करता है, जिसमें स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार भी शामिल है।
  • समन्वय की कमी: शहरी स्थानीय निकायों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों जैसे विभागों के बीच खराब तालमेल।
  • मानकों का उल्लंघन: उद्योगों और नगर पालिकाओं द्वारा पर्यावरणीय मानकों का पालन करने में विफलता।
  • कानूनी और संस्थागत ढाँचा:  जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 जल प्रदूषण के निवारण और नियंत्रण तथा जल की गुणवत्ता बनाए रखने का प्रावधान करता है।
  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पानी की गुणवत्ता की निगरानी करते हैं तथा नियमों को लागू करते हैं।
  • राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT): पर्यावरणीय विवादों का न्यायनिर्णयन करता है और पर्यावरण कानूनों का प्रवर्तन सुनिश्चित करता है।

और पढ़ें: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT)


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