जल संचय जन भागीदारी अभियान 2.0 | राजस्थान | 06 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल तथा राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने हाल ही में जल संचय जन भागीदारी 2.0 पहल की उच्च-स्तरीय समीक्षा की।
मुख्य बिंदु:
- पहल: जल संचय जन भागीदारी (JSJB) एक सामुदायिक पहल है, जो जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण पर केंद्रित है।
- यह जल शक्ति अभियान: कैच द रेन के व्यापक ढाँचे के अंतर्गत संचालित होती है।
- यह पहल कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण, झीलों तथा तालाबों के पुनर्स्थापन तथा छतों पर वर्षा जल संचयन प्रणालियों को प्रोत्साहित करती है।
- पूर्व प्रदर्शन: राजस्थान, जिसने अभियान के प्रथम चरण में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया था, अब वर्ष 2026 के मानसून से पहले भूजल पुनर्भरण बढ़ाने के लिये प्रयासों को तीव्र गति दे रहा है।
- राष्ट्रीय प्रदर्शन: राजस्थान इस अभियान में अग्रणी राज्य के रूप में उभरा है, जहाँ वर्तमान चरण के अंतर्गत 88,000 से अधिक कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा 42,000 परियोजनाएँ प्रगति पर हैं।
- 3C रणनीति: यह अभियान ‘3C’ के मूलमंत्र पर आधारित है अर्थात सामुदायिक भागीदारी, कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) का लाभ उठाना और स्थायी परिणामों के लिये लागत को अनुकूलित करना।
- विकेंद्रीकृत अवसंरचना :
- लक्ष्य : सामान्य ज़िलों को कम-से-कम 10,000 कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण करने का कार्य सौंपा गया है; नगर निगमों का भी लक्ष्य 10,000 संरचनाएँ स्थापित करना है।
- मुख्य उद्देश्य : छत पर वर्षा जल संचयन, रिचार्ज पिट और बंद पड़े बोरवेलों के पुनरुद्धार जैसी कम लागत वाली संरचनाओं का निर्माण।
- वित्तीय अभिसरण: इस पहल के लिये वित्तीय संसाधनों को मनरेगा (अतिदोहन वाले ब्लॉकों में 65% निधि जल कार्यों के लिये निर्धारित), अटल भूजल योजना तथा 15वें वित्त आयोग के माध्यम से सुव्यवस्थित किया गया है।
रवि शंकर प्रसाद लोकसभा विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 06 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विशेषाधिकार समिति के लिये संसद के 15 सदस्यों को मनोनीत किया, जिसका कार्यकाल 3 मार्च, 2026 से प्रभावी हो गया है।
मुख्य बिंदु:
- अध्यक्ष: पटना साहिब से लोकसभा सांसद रवि शंकर प्रसाद को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
- विशेषाधिकार समिति संसद के विशेषाधिकारों के उल्लंघन या सदन की अवमानना से संबंधित मामलों की जाँच करती है तथा उपयुक्त कार्रवाई की सिफारिश करती है।
- इस समिति को शिकायतों की जाँच करने, व्यक्तियों को तलब करने, आवश्यक दस्तावेज़ मांगने तथा जाँच-पड़ताल करने का अधिकार भी प्राप्त है। जाँच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
- उद्देश्य: यह समिति संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों की रक्षा करती है, जिससे सांसद बिना किसी बाधा या भय के अपने विधायी कर्त्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
- भारत में संसदीय विशेषाधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत प्रदान किये गए हैं, जो संसद और उसके सदस्यों को कुछ शक्तियाँ, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ प्रदान करता है।
- विशेषाधिकार का उल्लंघन: यह तब माना जाता है जब सांसदों के कार्यों में बाधा, धमकी या हस्तक्षेप किया जाए अथवा सदन के अधिकार को प्रभावित किया जाए।
- जाँच के बाद समिति अपनी सिफारिशें अध्यक्ष या सदन को प्रस्तुत करती है, जिनमें उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार चेतावनी, फटकार या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई शामिल हो सकती है।
- महत्त्व: यह समिति संसद की गरिमा, अधिकार और स्वतंत्रता की रक्षा करने तथा विधायी व्यवस्था के भीतर अनुशासन बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अलेक्ज़ेंडर स्टब रायसीना संवाद 2026 में मुख्य अतिथि | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 06 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
भारत ने नई दिल्ली में रायसीना संवाद 2026 के 11वें संस्करण की मेज़बानी की, जिसमें फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर स्टब मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
मुख्य बिंदु:
- मुख्य अतिथि: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति अलेक्ज़ेंडर स्टब ने मार्च 2026 में भारत का दौरा किया ।
- फिनलैंड के राष्ट्रपति के रूप में पदभार सॅंभालने के बाद यह उनकी भारत की पहली यात्रा थी।
- रायसीना संवाद: रायसीना संवाद भारत का प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन है, जो भू-राजनीति (Geopolitics) और भू-अर्थशास्त्र (Geo-economics) से संबंधित विषयों पर आयोजित किया जाता है। इसमें वैश्विक नेता, नीति-निर्माता तथा विशेषज्ञ प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं।
- इस संवाद का आयोजन ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन (ORF) द्वारा भारत के विदेश मंत्रालय के सहयोग से किया जाता है।
- विषय: संवाद का 2026 संस्करण मार्च 2026 में ‘संस्कार: अभिकथन, समायोजन, उन्नति’ विषय के साथ आयोजित किया गया था।
- उद्देश्य: डिजिटलीकरण, सतत विकास, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में भारत-फिनलैंड सहयोग को सशक्त करना।
- महत्त्व: रायसीना संवाद में भागीदारी और इस यात्रा ने भारत-फिनलैंड के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित किया तथा वैश्विक भू-राजनीतिक विमर्श में भारत की बढ़ती भूमिका को भी उजागर किया।
9 राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में राज्यपालों के पदस्थापन में परिवर्तन (मार्च 2026) को राष्ट्रपति की स्वीकृति | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 06 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में राज्यपालों और उपराज्यपालों के पदस्थापन में परिवर्तन को स्वीकृति प्रदान की।
मुख्य बिंदु:
- पदस्थापन में परिवर्तन:
- राष्ट्रपति भवन ने दिल्ली, लद्दाख, तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और नागालैंड सहित नौ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में राज्यपालों और उपराज्यपालों के पदों में परिवर्तन की घोषणा की है।
- पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस का त्याग-पत्र राष्ट्रपति द्वारा नए नियुक्तियों की घोषणा से पहले ही स्वीकार कर लिया गया था।
- प्रमुख नियुक्तियाँ:
- आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया (इससे पहले वे तमिलनाडु के राज्यपाल थे)।
- शिव प्रताप शुक्ला तेलंगाना के राज्यपाल नियुक्त किये गए।
- जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
- नंद किशोर यादव नागालैंड के राज्यपाल नियुक्त किये गए।
- सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल) को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
- अतिरिक्त परिवर्तन:
- केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को तमिलनाडु के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया।
- लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त किया गया।
- लेफ्टिनेंट गवर्नर की नियुक्तियाँ:
- दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया तथा पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का उपराज्यपाल नियुक्त किया गया।
- कार्यान्वयन:
- ये नियुक्तियाँ संबंधित नियुक्त व्यक्तियों द्वारा अपने कार्यालयों का कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से प्रभावी होंगी।
- महत्त्व:
- इस प्रकार के परिवर्तन से अनुभवी प्रशासकों तथा राजनीतिक नेतृत्व को महत्त्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर नियुक्त कर शासन व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जाता है, साथ ही केंद्र तथा राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाता है।
जनगणना 2027 के शुभंकर 'प्रगति' और 'विकास' का अनावरण | राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स | 06 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
अमित शाह ने हाल ही में जनगणना 2027 के लिये आधिकारिक शुभंकर ‘प्रगति’ (महिला) और ‘विकास’ (पुरुष) का अनावरण किया। इसके साथ ही भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना प्रक्रिया को समर्थन देने के लिये डिजिटल प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किये गए।
मुख्य बिंदु:
- प्रतीक: प्रगति और विकास नामक शुभंकर जनगणना 2027 के जनसंचार प्रतीकों के रूप में कार्य करेंगे, जो नागरिकों के अनुकूल तरीके से जनगणना के बारे में जानकारी प्रसारित करने में मदद करेंगे।
- समानता का प्रतिनिधित्व: ये राष्ट्र निर्माण में महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी का प्रतीक हैं तथा वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना के अनुरूप हैं।
- उद्देश्य: इन्हें ‘हितैषी जन राजदूत (Friendly Public Ambassadors)’ के रूप में तैयार किया गया है, ताकि जनगणना की प्रक्रिया को अधिक सहज, सहभागितापूर्ण तथा नागरिक-केंद्रित बनाया जा सके।
- भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना: जनगणना 2027 भारत के इतिहास में पहली डिजिटल जनगणना होगी।
- डेटा संग्रह की प्रक्रिया परंपरागत कागज़-आधारित विधियों के स्थान पर सुरक्षित मोबाइल एप्लीकेशन एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपन्न की जाएगी।
- स्व-गणना (Self-Enumeration) की शुरुआत: नागरिकों को स्व-गणना (SE) पोर्टल के माध्यम से अपने परिवार से संबंधित जानकारी ऑनलाइन प्रस्तुत करने का विकल्प दिया जाएगा।
- जानकारी प्रस्तुत करने के बाद परिवारों को एक स्व-गणना ID प्राप्त होगी, जिसका सत्यापन फील्ड दौरे के दौरान गणनाकर्त्ता (Enumerators) द्वारा किया जाएगा।
- जाति गणना: वर्ष 1931 के बाद पहली बार दशकीय जनगणना में सभी समुदायों की व्यापक जाति गणना शामिल की जाएगी।
- कानूनी आधार: यह जनगणना अधिनियम, 1948 तथा जनगणना नियम, 1990 के अंतर्गत आयोजित की जाती है।