उत्तर प्रदेश Switch to English
प्रयागराज में नॉर्थ टेक सिम्पोजियम
चर्चा में क्यों?
सेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने नॉर्थ टेक सिम्पोजियम में भाग लिया और स्वदेशी रक्षा नवाचार तथा आत्मनिर्भरता में भारत की प्रगति को रेखांकित किया।
मुख्य बिंदु:
- भागीदारी: सेना प्रमुख (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम में भाग लिया।
- उन्होंने सशस्त्र बलों, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच सहयोग के माध्यम से रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता को सुदृढ़ करने पर ज़ोर दिया।
- थीम: “रक्षा त्रिवेणी संगम – जहाँ प्रौद्योगिकी, उद्योग और सैनिकता का संगम होता है।”
- उद्देश्य: इस सिम्पोजियम का उद्देश्य रक्षा प्रौद्योगिकियों की त्वरित खरीद, नवाचार और तैनाती के लिये हितधारकों के बीच समन्वय को मज़बूत करना था।
- प्रौद्योगिकी एकीकरण: आधुनिक युद्ध में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन, रोबोटिक्स और उन्नत निगरानी प्रणालियों जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष ज़ोर दिया गया।
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और पढ़ें: आत्मनिर्भरता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता |
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मैड्रिड ओपन 2026
चर्चा में क्यों?
इटली के जैनिक सिनर ने अलेक्ज़ेंडर ज़्वेरेव को हराकर मैड्रिड ओपन 2026 पुरुष एकल खिताब जीत लिया, जिससे पुरुष टेनिस में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्थापित हुआ।
- मार्टा कोस्त्युक ने भी महिला एकल खिताब जीतते हुए मीरा आंद्रेएवा को पराजित किया।
मुख्य बिंदु:
- पुरुष वर्ग में जीत: विश्व नंबर 1 जैनिक सिनर ने अलेक्ज़ेंडर ज़्वेरेव को हराकर 2026 मैड्रिड ओपन का खिताब अपने नाम किया।
- वह लगातार पाँच ATP मास्टर्स 1000 खिताब जीतने वाले इतिहास के पहले खिलाड़ी बन गए।
- यह सिनर का पहला मैड्रिड ओपन खिताब था।
- महिला वर्ग में जीत:
- यूक्रेन की 23 वर्षीय मार्टा कोस्त्युक ने महिला एकल फाइनल में विश्व नंबर 8 मीरा आंद्रेएवा को हराया और अपनी क्ले-कोर्ट जीत की लय को 11 मैचों तक बढ़ाया।
- यह उनका पहला WTA 1000 खिताब था।
- वह नवीनतम WTA रैंकिंग में विश्व नंबर 23 से बढ़कर अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ 15वें स्थान पर पहुँचने वाली हैं।
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रोहित जैन RBI के डिप्टी गवर्नर नियुक्त
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने रोहित जैन को भारतीय रिज़र्व बैंक का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है।
मुख्य बिंदु:
- नियुक्ति: रोहित जैन को भारतीय रिज़र्व बैंक का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया है, जिसे मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा अनुमोदित किया गया।
- उत्तराधिकारी: वे टी. रबी शंकर का स्थान लेते हैं, जिन्होंने RBI में अपना कार्यकाल पूरा किया।
- कार्यकाल: उनकी नियुक्ति मई 2026 से प्रभावी तीन वर्ष की अवधि के लिये है।
- पूर्व पद: नियुक्ति से पहले वे RBI में कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यरत थे और प्रमुख पर्यवेक्षी ज़िम्मेदारियाँ संभाल रहे थे।
- संरचना: भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अनुसार, केंद्रीय बैंक में चार डिप्टी गवर्नर होते हैं—दो RBI के भीतर से, एक वाणिज्यिक बैंकिंग क्षेत्र से और एक अर्थशास्त्री जो मौद्रिक नीति विभाग का प्रमुख होता है।
- RBI: भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना 1 अप्रैल, 1935 को भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के तहत की गई थी।
- इसे वर्ष 1949 में राष्ट्रीयकृत किया गया।
- इसकी स्थापना प्रारंभ में कोलकाता में हुई थी, लेकिन वर्ष 1937 में इसे स्थायी रूप से मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया।
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मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 करने की स्वीकृति दी
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत का सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 37 करने (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।
मुख्य बिंदु:
- भारत के संविधान का अनुच्छेद 124: यह सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना का प्रावधान करता है और यह बताता है कि न्यायाधीशों की संख्या संसद द्वारा कानून के माध्यम से निर्धारित की जाएगी।
- सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956: यह न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या निर्धारित करता है। अंतिम बड़ा संशोधन वर्ष 2019 में हुआ था, जब न्यायाधीशों की संख्या 31 से बढ़ाकर 34 की गई थी।
- 2026 (प्रस्तावित): 37 न्यायाधीश
- भारत के संविधान का अनुच्छेद 145: सर्वोच्च न्यायालय को अपनी कार्यप्रणाली और प्रक्रिया को विनियमित करने के लिये नियम बनाने का अधिकार प्रदान करता है, जिसमें पीठ का गठन भी शामिल है।
- आवश्यकता: वर्ष 2026 तक भारत का सर्वोच्च न्यायालय में लगभग 80,000 से अधिक लंबित मामले हैं, जिनमें संवैधानिक मामले तथा दीवानी/फौजदारी अपीलें शामिल हैं।
- न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात कम: भारत में प्रति दस लाख जनसंख्या पर लगभग 21 न्यायाधीश हैं (निचली न्यायपालिका सहित), जो अमेरिका जैसे देशों (~100+) की तुलना में काफी कम है।
- विशेष अनुमति याचिकाओं (SLPs) का बोझ: भारत के संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत, बड़ी संख्या में अपीलें सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचती हैं, जिससे कार्यभार बढ़ जाता है।
- त्वरित न्याय पर ध्यान: सरकार ने कहा है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से सर्वोच्च न्यायालय अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, लंबित मामलों में कमी आएगी और समयबद्ध न्याय तक पहुँच को सुदृढ़ किया जा सकेगा।
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और पढ़ें: सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 |
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वर्ष 2026 में सर्वाधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) वाले शहर
चर्चा में क्यों?
हालिया 2026 के AQI-आधारित वैश्विक रैंकिंग के अनुसार, वायु प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय चिंता बना हुआ है, जिसमें विकासशील देशों के साथ-साथ कुछ अप्रत्याशित क्षेत्र भी सूची में शामिल हैं। यह रैंकिंग वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर आधारित है, जहाँ अधिक मान खराब वायु गुणवत्ता और अधिक स्वास्थ्य जोखिम को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु:
- विश्व के 10 सबसे प्रदूषित शहर (2026) हालिया वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) आधारित वैश्विक आँकड़ों (2026) के अनुसार, निम्नलिखित शहर विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं:
- कोभ- AQI 208
- डूंगरवन- AQI 196
- क्लोनमेल- AQI 192
- काशगर- AQI 162
- बीकानेर- AQI 160
- पटना- AQI 154
- औरंगाबाद- AQI 152
- बेगुसराय- AQI 150
- अबू धाबी - AQI 146
- मुज़फ्फरपुर- AQI 136
- अप्रत्याशित रुझान: आयरलैंड के तीन कस्बे—कोभ, डूंगरवनऔर क्लोनमेल सूची में शीर्ष पर हैं। यह दर्शाता है कि प्रदूषण अब केवल पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों तक ही सीमित नहीं रह गया है।
- भारत की उच्च उपस्थिति: शीर्ष 10 में भारत के पाँच शहर शामिल हैं, जो वाहनों के उत्सर्जन, निर्माण की धूल, बायोमास जलाने और औद्योगिक प्रदूषण जैसी निरंतर चुनौतियों को दर्शाते हैं।
- पश्चिम एशिया की प्रविष्टि: अबू धाबी की उपस्थिति रेगिस्तानी धूल, जलवायु परिस्थितियों और शहरी उत्सर्जन की भूमिका को उजागर करती है।
- प्रदूषण के विविध स्रोत: वायु प्रदूषण औद्योगिक गतिविधियों, मौसम के मिजाज (जैसे तापमान व्युत्क्रमण) और स्थानीय मानवीय गतिविधियों के मिश्रण से प्रभावित होता है।
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कैबिनेट ने ‘कपास उत्पादकता मिशन’ को स्वीकृति दी
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कपास उत्पादकता मिशन (MCP) को ₹5,659.22 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ स्वीकृति दी है, जिसे वर्ष 2030–31 तक लागू किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य कपास उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना और वैश्विक वस्त्र बाज़ारों में भारत की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु:
- मिशन के उद्देश्य: बेहतर बीजों और वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से कपास की उत्पादकता बढ़ाना।
- आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना: एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास के आयात पर निर्भरता को कम करना।
- किसानों की आय बढ़ाना: कपास किसानों की आय/लाभ बढ़ाना।
- निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाना: वर्ष 2030-31 तक वैश्विक कपड़ा मूल्य शृंखला में भारत की स्थिति को मज़बूत करना।
- अनुसंधान और विकास (R&D): भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) जैसे संस्थानों के माध्यम से उच्च उपज देने वाली, जलवायु-अनुकूल और कीट-प्रतिरोधी कपास की किस्मों का विकास करना।
- प्रौद्योगिकी अपनाना: आधुनिक कृषि पद्धतियों, सटीक कृषि और मशीनीकरण को बढ़ावा देना।
- कीट प्रबंधन: 'पिंक बोलवर्म' (गुलाबी सुंडी) जैसे कीटों के प्रकोप से निपटने के लिये एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) पर ध्यान केंद्रित करना।
- गुणवत्ता में सुधार: वैश्विक वस्त्र मानकों को पूरा करने के लिये बेहतर फाइबर गुणवत्ता पर ज़ोर देना।
- क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण: बेहतर परिणामों के लिये प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में केंद्रित हस्तक्षेप करना।
- चुनौतियाँ: भारत विश्व स्तर पर कपास के सबसे बड़े उत्पादकों और उपभोक्ताओं में से एक है। हालाँकि, ब्राज़ील और चीन जैसे वैश्विक दिग्गजों की तुलना में उत्पादकता अभी भी काफी कम (लगभग 450-500 किलोग्राम लिंट/हेक्टेयर) बनी हुई है।
- समस्याएँ: कीटों के हमले (विशेष रूप से पिंक बोलवर्म), जलवायु परिवर्तनशीलता और पैदावार में ठहराव जैसे मुद्दों ने उत्पादन को प्रभावित किया है।
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तमिलनाडु ने वर्ष 2025 में समुद्री मछलियों की सबसे अधिक लैंडिंग दर्ज की
चर्चा में क्यों?
ICAR–केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान द्वारा जारी नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में तमिलनाडु समुद्री मछली उत्पादन में शीर्ष राज्य के रूप में उभरा, जिसने गुजरात को पीछे छोड़ दिया और भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण बदलाव को दर्शाया।
मुख्य बिंदु:
- शीर्ष उत्पादक: तमिलनाडु ने वर्ष 2025 में लगभग 6.85 लाख टन समुद्री मछलियों की लैंडिंग (मछलियों का पकड़े जाने के बाद तट पर लाया जाना) दर्ज की, जो सभी राज्यों में सबसे अधिक है।
- राष्ट्रीय उत्पादन: भारत का कुल समुद्री मछली उत्पादन लगभग 35.7 लाख टन तक पहुँचा, जो वर्ष 2024 की तुलना में लगभग 3% की वृद्धि दर्शाता है।
- राज्य रैंकिंग (2025):
- तमिलनाडु – 6.85 लाख टन
- गुजरात – गिरावट (लगभग 15% कमी)
- केरल – लगभग 6.24 लाख टन
- प्रमुख प्रजातियाँ:
- भारतीय मैकेरल (लगभग 2.7 लाख टन) – सबसे अधिक उतारी गई
- सेफालोपोड्स और ऑयल सार्डिन भी महत्त्वपूर्ण
- तमिलनाडु की बढ़त: पश्चिमी तट के राज्यों की तुलना में तमिलनाडु में अपेक्षाकृत स्थिर परिस्थितियाँ रहीं।
- अवसंरचना और तटीय लाभ: तमिलनाडु के पास लंबी तटरेखा है, जहाँ अनेक मत्स्य बंदरगाह और लैंडिंग केंद्र हैं, जो बड़े पैमाने पर समुद्री मछली पकड़ने का समर्थन करते हैं।
- यंत्रीकृत मत्स्यन का विकास: यंत्रीकृत मछली पकड़ने वाली नौकाओं के बढ़ते योगदान से कुल लैंडिंग में सुधार हुआ।
- महत्त्व: वर्ष 2025 में तमिलनाडु का शीर्ष समुद्री मछली उत्पादक के रूप में उभरना भारत के मत्स्य क्षेत्र में क्षेत्रीय स्थिरता और संरचनात्मक बदलावों को दर्शाता है।
झारखंड Switch to English
झारखंड के मुख्यमंत्री ने जनगणना में सरना धार्मिक संहिता की मांग की
चर्चा में क्यों?
हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आगामी जनगणना में जनजातीय समुदायों के लिये अलग सरना धार्मिक संहिता को शामिल करने की मांग की है।
मुख्य बिंदु:
- मांग: झारखंड सरकार ने जनगणना में सरना धर्म के अनुयायियों के लिये एक अलग धार्मिक संहिता की मांग की है।
- हेमंत सोरेन ने औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर जनजातीय समुदाय की चिंताओं को उजागर किया।
- उन्होंने प्रभावी नीति-निर्माण और संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिये सटीक एवं तथ्य-आधारित डेटा संग्रह की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
- सरना धर्म: सरना धर्म की विशेषता प्रकृति पूजा, ग्राम देवताओं के प्रति श्रद्धा तथा विशिष्ट अनुष्ठानिक परंपराएँ हैं।
- सरना धार्मिक संहिता को अन्य धर्मों के अनुयायियों से जनजातीय समुदायों की अलग पहचान सुनिश्चित करने और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिये आवश्यक माना जाता है।
- प्रस्ताव: झारखंड विधानसभा पहले ही अलग सरना संहिता के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित कर चुकी है।
- यह कदम जनजातीय समुदायों के लिये अधिक लक्षित कल्याणकारी नीतियों को लागू करने और उनके संवैधानिक संरक्षण को मज़बूत करने में सहायक होगा।
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राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स Switch to English
BWF थॉमस और उबर कप 2026
चर्चा में क्यों?
BWF थॉमस एवं उबर कप 2026 में दक्षिण कोरिया ने महिला फाइनल में चीन को हराकर उबर कप जीता, जबकि चीन ने पुरुषों का थॉमस कप खिताब अपने नाम किया।
मुख्य बिंदु:
- टूर्नामेंट: थॉमस कप (पुरुष) और उबर कप (महिला) द्विवार्षिक अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन टीम चैंपियनशिप हैं, जिनका आयोजन बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन द्वारा किया जाता है।
- इस टूर्नामेंट में थॉमस कप का 34वाँ और उबर कप का 31वाँ संस्करण आयोजित किया गया।
- उबर कप विजेता: दक्षिण कोरिया ने महिला टीम फाइनल में गत चैंपियन चीन को हराकर उबर कप खिताब जीता। यह दक्षिण कोरिया का तीसरा खिताब है, इससे पहले वह वर्ष 2010 और 2022 में जीत चुका है।
- स्वर्ण – चीन
- रजत – फ्राँस
- कांस्य – डेनमार्क, भारत
- थॉमस कप विजेता: चीन ने पुरुषों के फाइनल में फ्राँस को हराकर थॉमस कप जीता और अपना 12वाँ खिताब हासिल किया।
- स्वर्ण – दक्षिण कोरिया
- रजत – चीन
- कांस्य – जापान, इंडोनेशिया
- स्थान: यह टूर्नामेंट 24 अप्रैल से 3 मई, 2026 तक डेनमार्क के फोरम हॉर्सेंस में आयोजित किया गया।
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और पढ़ें: थॉमस कप |

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