बिहार में दूसरा टाइगर रिज़र्व | बिहार | 05 Jan 2026
चर्चा में क्यों?
बिहार सरकार ने कैमूर वन्यजीव अभयारण्य को राज्य के दूसरे टाइगर रिज़र्व के रूप में विकसित करने की स्वीकृति प्रदान की।
मुख्य बिंदु
- प्रशासनिक स्वीकृति: इस प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है तथा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से अंतिम स्वीकृति की प्रतीक्षा की जा रही है।
- बिहार का प्रथम टाइगर रिज़र्व: वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व है, जो भारत–नेपाल सीमा के समीप पश्चिमी चंपारण ज़िले में अवस्थित है।
- पर्यावास का विस्तार: प्रस्तावित रिज़र्व बाघों के प्रसार हेतु अतिरिक्त पर्यावास उपलब्ध कराकर वाल्मीकि टाइगर रिज़र्व पर दबाव को कम करेगा।
- गलियारे का सामरिक महत्त्व: कैमूर क्षेत्र बिहार और मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों को जोड़ने वाले एक महत्त्वपूर्ण वन्यजीव गलियारे के रूप में कार्य करता है।
- जैव विविधता का मूल्य: यह क्षेत्र समृद्ध वनस्पति, विविध जीव-जंतुओं, पठारी भू-आकृतियों, झरनों तथा शेरगढ़ किले जैसे ऐतिहासिक स्थलों से समृद्ध है।
- कैमूर वन्यजीव अभयारण्य:
- वनस्पति: यहाँ शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं, जिनमें साल, सागौन, महुआ, बाँस, जामुन तथा विभिन्न औषधीय पौधे शामिल हैं।
- जीव-जंतु: इस क्षेत्र में बाघ, तेंदुआ, चिंकारा, सांभर, नीलगाय, मोर, गरुड़, सर्प तथा अनेक स्थानिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- संरक्षणात्मक प्रभाव:टाइगर रिज़र्व घोषित करने से जैव विविधता संरक्षण को सुदृढ़ता मिलेगी, अवैध शिकार पर प्रभावी नियंत्रण होगा तथा पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को प्रोत्साहन प्राप्त होगा।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA)
- यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है।
- इसकी स्थापना वर्ष 2006 में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों में संशोधन करके की गई। प्राधिकरण की पहली बैठक नवंबर 2006 में हुई थी।
- यह राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के प्रयासों का ही परिणाम है कि देश में विलुप्त होते बाघों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
