काशी विश्वनाथ मंदिर में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित | 11 Apr 2026

चर्चा में क्यों?

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में प्राचीन भारतीय समय-गणना परंपराओं पर आधारित ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ स्थापित की गई है, जिसका उद्देश्य समय और खगोलीय घटनाओं की गणना की पारंपरिक वैदिक प्रणाली को पुनर्जीवित करना है।

मुख्य बिंदु:

  • स्थापना: 700 किलोग्राम वज़नी विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा प्रस्तुत किया गया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में मंदिर परिसर में इसका अनावरण किया गया।
    • आधुनिक 24-घंटे की घड़ी के विपरीत, यह वैदिक घड़ी सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक समय की गणना करती है और एक दिन को 30 मुहूर्तों में विभाजित करती है, जिसमें प्रत्येक मुहूर्त लगभग 48 मिनट का होता है।
    • यह घड़ी पारंपरिक हिंदू पंचांग के प्रमुख तत्त्वों को प्रदर्शित करती है, जैसे—तिथि (चंद्र दिवस), नक्षत्र (तारामंडल), चंद्रमा की कलाएँ, ग्रहण, त्योहार तथा अन्य खगोलीय जानकारी।
  • बहु-समय प्रारूप: वैदिक समय के साथ-साथ यह घड़ी भारतीय मानक समय (IST) और ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) भी प्रदर्शित करती है, जिससे पारंपरिक ज्ञान तथा आधुनिक तकनीक का समन्वय होता है।
  • उद्देश्य: इस पहल का उद्देश्य प्राचीन भारतीय ‘काल गणना’ प्रणाली को पुनर्जीवित करना और आगंतुकों को भारत की पारंपरिक वैज्ञानिक एवं खगोलीय ज्ञान प्रणालियों से परिचित कराना है।
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