उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026 | 11 Mar 2026

चर्चा में क्यों?

उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने राज्य में अवैध जुआ और सट्टेबाज़ी की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिये उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक, 2026 को मंजूंरी दे दी है। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य औपनिवेशिक काल के सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1867 को अधिक कड़े प्रावधानों और दंड के साथ प्रतिस्थापित करना है।

मुख्य बिंदु:

  • उद्देश्य: यह विधेयक राज्य में अवैध जुआ, सट्टेबाज़ी नेटवर्क और जुआ घरों को नियंत्रित करने के लिये अधिक कड़े कानूनी प्रावधानों तथा सख्त दंड का प्रावधान करता है।
    • यह कानून सार्वजनिक द्यूत अधिनियम, 1867 का स्थान लेगा, जिसे आधुनिक सट्टेबाज़ी और संगठित द्यूत गतिविधियों से निपटने में पुराना तथा अप्रभावी माना जाता था।
  • जुआ खेलने पर दंड:
    • सड़कों या गलियों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने पर 3 महीने तक का कारावास या ₹5,000 तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
    • किसी आवास के अंदर जुआ गतिविधियों का आयोजन करने पर 2 वर्ष तक का कारावास या ₹10,000 तक का जुर्माना हो सकता है।
    • जुआ घर (गैंबलिंग डेन) चलाने पर 5 वर्ष तक का कारावास और ₹1 लाख तक का जुर्माना हो सकता है, जबकि संगठित सट्टेबाजी नेटवर्क को 3–5 वर्ष तक का कारावास तथा ₹10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है।
  • प्रवर्तन शक्तियाँ: यह विधेयक पुलिस को जुआ गतिविधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के लिये अधिक अधिकार देता है, जिसमें छापेमारी, गिरफ्तारी और सट्टेबाज़ी से जुड़े अवैध संपत्तियों की ज़ब्ती शामिल है।
    • यह कानून भौतिक जुआ घरों के साथ-साथ आधुनिक संगठित सट्टेबाज़ी नेटवर्क दोनों को अपने दायरे में लाता है, जिससे व्यापक नियामक व्यवस्था सुनिश्चित होती है।
  • मुख्य फोकस: सरकार का उद्देश्य जुआ गतिविधियों से जुड़े सामाजिक मुद्दों जैसे आर्थिक संकट, अपराध और शोषण को कम करना है।
  • महत्त्व: प्रस्तावित कानून राज्य में कानून प्रवर्तन को मज़बूत करने, संगठित सट्टेबाज़ी गिरोहों पर नियंत्रण लगाने और जुए से जुड़ी सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं को दूर करने का प्रयास करता है।

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