सोन नदी जल-बंटवारे समझौते को स्वीकृति मिली | 15 Jan 2026

चर्चा में क्यों?

बिहार कैबिनेट ने इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के निर्माण को स्वीकृति दी है, जो झारखंड के साथ सोन नदी जल साझा करने के विवाद को दोनों राज्यों के बीच एक मसौदा समझौता पत्र (MoU) के माध्यम से सुलझाने के बाद संभव हुआ।

मुख्य बिंदु:

  • CWC की स्वीकृति: केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने जल साझा करने के मसौदा समझौते को स्वीकृति दी।
  • कैबिनेट की स्वीकृति: बिहार कैबिनेट ने झारखंड के साथ मसौदा MoU पर हस्ताक्षर करने के लिये  जल संसाधन विभाग के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी।
    • रोहतास ज़िले (बिहार) में इंद्रपुरी जलाशय परियोजना के निर्माण को सक्षम बनाना है।
  • विवाद की पृष्ठभूमि: वर्ष 1973 के बाणसागर समझौते के तहत अविभाजित बिहार को सोन नदी का 7.75 मिलियन एकड़ फीट (MAF) जल आवंटित किया गया था।
    • विभाजन के बाद: झारखंड ने अपने लिये स्पष्ट हिस्से की मांग की, जिससे लंबी बातचीत हुई।
  • जल आवंटन सूत्र: अनुमोदित व्यवस्था के अनुसार, अविभाजित बिहार को पहले आवंटित हिस्से में से बिहार को 5.75 MAF और झारखंड को 2.0 MAF मिलेगा।
  • सिंचाई लाभ: इस परियोजना से बिहार के आठ ज़िलों में सिंचाई की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।
    • भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना कृषि एवं ग्रामीण आजीविका का समर्थन कर रहे हैं।
  • संघीय समन्वय: यह समझौता पूर्वी क्षेत्रीय परिषद में चर्चाओं के माध्यम से सुलझाया गया, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत कार्य करती है।
  • आर्थिक और सामाजिक प्रभाव: जल उपलब्धता में सुधार से कृषि उत्पादन, खाद्य सुरक्षा और बिहार के जल-संकट प्रभावित क्षेत्रों में क्षेत्रीय विकास को सहारा मिलेगा।

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