बिहार में सोलर-प्लस-बैटरी स्टोरेज परियोजना का शुभारंभ | 09 Jan 2026

चर्चा में क्यों?

  • बिहार ने लखीसराय ज़िले के कजरा में स्थापित सौर-प्लस-बैटरी भंडारण परियोजना के प्रथम चरण का सफलतापूर्वक परिचालन शुरू कर दिया है।

मुख्य बिंदु 

  • कार्यान्वयन एजेंसी: इस परियोजना का क्रियान्वयन राज्य की स्वामित्व वाली बिहार राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) द्वारा किया जा रहा है।
  • परियोजना क्षमता: परियोजना की कुल क्षमता 301 मेगावाट सौर ऊर्जा है, जिसमें 495 मेगावाट-घंटे की बैटरी भंडारण क्षमता शामिल है, जिससे यह पूर्वी भारत की सबसे बड़ी सौर-ऊर्जा-भंडारण परियोजनाओं में शामिल होती है।
  • चरण-I: पहले चरण में 185 मेगावाट सौर क्षमता के साथ 254 मेगावाट-घंटे की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) शामिल है
  • प्रयुक्त तकनीक: बैटरी स्टोरेज सिस्टम में लिथियम आयरन फॉस्फेट (LiFePO₄) तकनीक का उपयोग किया गया है, जो उच्च तापीय स्थिरता और सुरक्षा के लिये जानी जाती है।
  • BESS की भूमिका: BESS दिन के समय उत्पन्न अतिरिक्त सौर ऊर्जा का भंडारण कर शाम के चरम मांग घंटों के दौरान विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करती है।
  • ग्रिड एकीकरण: परियोजना से उत्पादित विद्युत का निष्कासन 132 kV ट्रांसमिशन प्रणाली के माध्यम से किया जाता है, जिससे राज्य विद्युत ग्रिड के साथ निर्बाध एकीकरण सुनिश्चित होता है।
  • चरण-II: शेष 116 मेगावाट सौर ऊर्जा और 241 मेगावाट-घंटे की BESS को जनवरी, 2027 तक चालू करने की योजना है।
  • रणनीतिक महत्त्व: यह परियोजना नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने तथा परंपरागत जीवाश्म-ईंधन आधारित विद्युत पर निर्भरता कम करने के बिहार के दीर्घकालिक लक्ष्य का समर्थन करती है।
  • पर्यावरणीय महत्त्व: सौर-प्लस-भंडारण परियोजनाएँ कार्बन उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि तथा सतत् विद्युत उत्पादन को प्रोत्साहन देती हैं।