वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को क्रैफ़ोर्ड पुरस्कार 2026 मिला | 05 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
भारतीय मूल के जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज द्वारा भूविज्ञान में वर्ष 2026 का क्रैफोर्ड पुरस्कार प्रदान किया गया है, जिसे प्रायः ‘भूविज्ञान का नोबेल’ कहा जाता है, क्योंकि इसका महत्त्व उन क्षेत्रों में भी है जो नोबेल पुरस्कारों के अंतर्गत नहीं आते।
मुख्य बिंदु:
- प्रमुख योगदान: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने रामनाथन को “अल्पकालिक जलवायु प्रदूषकों (SLCP) और ग्रीनहाउस प्रभाव की भूमिका की वैज्ञानिक समझ को विस्तारित करने में उनके अग्रणी योगदान” के लिये चयनित किया।
- नॉन-CO₂ ग्रीनहाउस गैसों की खोज (1975): उन्होंने प्रथम बार यह प्रमाणित किया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), जो पूर्व में केवल ओज़ोन परत के क्षरण से सबंधित माने जाते थे, प्रभावशाली ग्रीनहाउस गैसों के रूप में भी कार्य करते हैं।
- वायुमंडलीय ब्राउन मेघ (ABC): उनके शोध में दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र के ऊपर बने कालिख और धूल के विशाल ब्राउन मेघ की उपस्थिति को रेखांकित किया गया।
- उन्होंने यह प्रदर्शित किया कि ये कण (ब्लैक कार्बन) सूर्य विकिरण को अवशोषित कर वायुमंडल को गर्म करते हैं तथा साथ-ही-साथ पृथ्वी की सतह को ठंडा करते हैं, जिससे मानसूनी प्रवृत्तियाँ प्रभावित होती हैं।
- क्रैफोर्ड पुरस्कार:
- इसकी स्थापना वर्ष 1980 में उद्योगपति होल्गर क्रैफोर्ड और उनकी पत्नी अन्ना-ग्रेटा द्वारा की गई थी।
- पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज (यही संस्था नोबेल पुरस्कार भी प्रदान करती है)।
- क्षेत्र : यह सम्मान उन क्षेत्रों में दिया जाता है जो नोबेल पुरस्कार की परिधि में सम्मिलित नहीं हैं, जैसे- गणित, खगोल विज्ञान, भूविज्ञान तथा जीव विज्ञान।