रवि शंकर प्रसाद लोकसभा विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष | 06 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विशेषाधिकार समिति के लिये संसद के 15 सदस्यों को मनोनीत किया, जिसका कार्यकाल 3 मार्च, 2026 से प्रभावी हो गया है।
मुख्य बिंदु:
- अध्यक्ष: पटना साहिब से लोकसभा सांसद रवि शंकर प्रसाद को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
- विशेषाधिकार समिति संसद के विशेषाधिकारों के उल्लंघन या सदन की अवमानना से संबंधित मामलों की जाँच करती है तथा उपयुक्त कार्रवाई की सिफारिश करती है।
- इस समिति को शिकायतों की जाँच करने, व्यक्तियों को तलब करने, आवश्यक दस्तावेज़ मांगने तथा जाँच-पड़ताल करने का अधिकार भी प्राप्त है। जाँच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
- उद्देश्य: यह समिति संसद सदस्यों के विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों की रक्षा करती है, जिससे सांसद बिना किसी बाधा या भय के अपने विधायी कर्त्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
- भारत में संसदीय विशेषाधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत प्रदान किये गए हैं, जो संसद और उसके सदस्यों को कुछ शक्तियाँ, विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ प्रदान करता है।
- विशेषाधिकार का उल्लंघन: यह तब माना जाता है जब सांसदों के कार्यों में बाधा, धमकी या हस्तक्षेप किया जाए अथवा सदन के अधिकार को प्रभावित किया जाए।
- जाँच के बाद समिति अपनी सिफारिशें अध्यक्ष या सदन को प्रस्तुत करती है, जिनमें उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार चेतावनी, फटकार या अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई शामिल हो सकती है।
- महत्त्व: यह समिति संसद की गरिमा, अधिकार और स्वतंत्रता की रक्षा करने तथा विधायी व्यवस्था के भीतर अनुशासन बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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