रामकुमार मुखोपाध्याय को मिलेगा सरस्वती सम्मान 2025 | 28 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
बंगाली लेखक रामकुमार मुखोपाध्याय को उनके उपन्यास 'हरा पार्वती कथा' के लिये प्रतिष्ठित 35वें सरस्वती सम्मान 2025 के लिये चुना गया है।
मुख्य बिंदु:
- पुरस्कार विजेता: प्रसिद्ध बंगाली लेखक रामकुमार मुखोपाध्याय को सरस्वती सम्मान 2025 के लिये चुना गया है।
- उन्हें यह सम्मान उनके बंगाली उपन्यास ‘हरा पार्वती कथा’ के लिये दिया गया है।
- यह उपन्यास वर्ष 2020 में प्रकाशित हुआ था तथा यह संस्कृति, पौराणिक कथाओं और समाज के विषयों को दर्शाता है।
- लेखक के विषय में: उनका जन्म वर्ष 1956 में कोलकाता में हुआ था। वे एक विख्यात बंगाली उपन्यासकार और कहानीकार हैं, जिन्होंने आधुनिक बंगाली साहित्य में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।
- सरस्वती सम्मान:
- स्थापना: इस पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1991 में के. के. बिड़ला फाउंडेशन द्वारा की गई थी।
- पात्रता: रचना भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किसी भी भाषा में लिखी होनी चाहिये।
- इसमें ₹15 लाख का नकद पुरस्कार, एक प्रशस्ति पत्र और एक पट्टिका प्रदान की जाती है।
- यह पुरस्कार किसी भारतीय नागरिक द्वारा लिखे गए और विगत 10 वर्षों के भीतर प्रकाशित साहित्यिक कार्यों को मान्यता देता है।
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