राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों के लिये दो बच्चों का नियम खत्म | 07 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
राजस्थान ने लगभग 30 वर्ष पुराने उस नियम को समाप्त कर दिया है, जिसके तहत दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया गया था। इसके साथ ही कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के आधार पर होने वाली अयोग्यता को भी समाप्त कर दिया गया है।
मुख्य बिंदु:
- विधायी परिवर्तन: राजस्थान विधानसभा ने राज्य के पंचायती राज तथा नगरपालिका कानूनों में संशोधन पारित करते हुए स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारों के लिये दो-बच्चों की पात्रता शर्त तथा कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) के आधार पर अयोग्यता को समाप्त कर दिया है।
- यह नीति वर्ष 1995 में जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की गई थी, जिसके तहत दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को पंचायत और नगरपालिका चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाता था।
- प्रावधान को हटाना: राज्य सरकार का तर्क है कि यह नियम भेदभावपूर्ण और जनसंख्या नियंत्रण के दृष्टिकोण से प्रभावी नहीं था तथा इससे कई योग्य नागरिकों को स्थानीय स्तर की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने से रोका जाता था।
- कुष्ठ रोग आधारित अयोग्यता: पहले कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाता था।
- इस संशोधन के माध्यम से इस प्रतिबंध को आधुनिक चिकित्सीय समझ तथा कुष्ठ रोग से संबंधित भेदभाव-विरोधी सिद्धांतों के अनुरूप समाप्त कर दिया गया है।
- केंद्रीय कानून के अनुरूप: यह परिवर्तन दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की भावना और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधारों के अनुरूप है, जो कुष्ठ रोग से मुक्त हुए या उसके साथ जीवन जी रहे व्यक्तियों के प्रति किसी भी प्रकार के भेदभाव को हतोत्साहित करते हैं।
- प्रभाव: इस सुधार से पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों में लोकतांत्रिक भागीदारी के विस्तार की उम्मीद है, जिससे अधिक नागरिक परिवार के आकार या पूर्व बीमारी की स्थिति की परवाह किये बिना चुनाव लड़ सकेंगे।
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