तेलंगाना में प्रोजेक्ट संजीवनी लॉन्च किया गया | 20 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
तेलंगाना सरकार ने 'प्रोजेक्ट संजीवनी' की शुरुआत की है, जो भारत का पहला पूर्णतः एकीकृत ट्रॉमा केयर और हाईवे रेस्क्यू (राजमार्ग बचाव) प्रोटोकॉल है।
मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य: 'प्रोजेक्ट संजीवनी' का लक्ष्य राजमार्गों पर समन्वित आपातकालीन ट्रॉमा केयर (आघात चिकित्सा) को मज़बूत करके सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मृत्यु को कम करना है।
- इस परियोजना को 99-दिवसीय कार्य योजना (प्रजा पालन प्रगति प्रणलिका) के तहत तेलंगाना के 'अराइव अलाइव' (Arrive Alive) सड़क सुरक्षा सप्ताह के हिस्से के रूप में शुरू किया गया था।
- इस पहल को हैदराबाद और आदिलाबाद के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (NH-44) के 251 किलोमीटर लंबे खंड पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जाएगा।
- इसे भारत की पहली पूर्णतः एकीकृत राजमार्ग ट्रॉमा रेस्क्यू प्रणाली के रूप में वर्णित किया गया है।
- सहयोग: यह परियोजना वर्टिस फाउंडेशन के सहयोग से तेलंगाना सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ मिलकर सेवलाइफ फाउंडेशन (SaveLIFE Foundation) द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।
- आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली: टोल प्लाज़ा पर तैनात त्वरित प्रतिक्रिया टीमों के 10 मिनट के भीतर दुर्घटना स्थलों पर पहुँचने की उम्मीद है।
- एंबुलेंस टीमें मौके पर ही मरीजों का आकलन करेंगी और अस्पतालों को पहले ही अलर्ट कर देंगी, ताकि पीड़ितों को ‘गोल्डन आवर’ (दुर्घटना के बाद का पहला महत्त्वपूर्ण घंटा) के भीतर उपचार मिल सके।
- राष्ट्रीय मॉडल: इस परियोजना को पूरे भारत में राजमार्ग ट्रॉमा रिस्पॉन्स के लिये एक 'रेप्लिकेबल मॉडल' (अनुकरणीय मॉडल) के रूप में डिज़ाइन किया गया है, जिसे अन्य राज्यों में भी विस्तारित किया जा सकता है।
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