भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ऑस्सिलेशन ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा हुआ | 31 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेनसेट ने सफलतापूर्वक अपना ऑस्सिलेशन ट्रायल पूरा कर लिया है, जो देश में स्वच्छ और हरित रेल परिवहन को शुरू करने के प्रयासों में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य बिंदु:
- परीक्षण: भारत की पहली हाइड्रोजन-चालित ट्रेनसेट का ऑस्सिलेशन ट्रायल सुरक्षा और प्रदर्शन मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
- यह परीक्षण भारतीय रेल की तकनीकी शाखा, अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (RDSO) द्वारा किया गया, जो परीक्षण और प्रमाणन के लिये ज़िम्मेदार है।
- यह ट्रेनसेट वर्तमान में विश्व की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन (10 कोच) है और 2400 किलोवाट की शक्ति क्षमता के साथ सबसे शक्तिशाली ट्रेनों में से एक है।
- ट्रेन का विकास: इस हाइड्रोजन-चालित ट्रेनसेट का निर्माण चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा किया गया है।
- मार्ग: यह ट्रेन हरियाणा में जींद और सोनीपत के बीच संचालित होने की संभावना है।
- ट्रेन को ईंधन उपलब्ध कराने के लिये जींद में एक समर्पित हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र स्थापित किया गया है।
- हरित प्रौद्योगिकी: हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करती हैं और केवल जलवाष्प छोड़ती हैं, जिससे यह पर्यावरण के अनुकूल परिवहन का विकल्प बनती हैं।
- वैश्विक महत्त्व: इस पहल के साथ भारत जर्मनी, स्वीडन, जापान और चीन जैसे उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जाएगा, जहाँ हाइड्रोजन-चालित ट्रेनें संचालित हो रही हैं।
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