NGT ने यूपी में सुआव नदी को पुन: नदी के रूप में बहाल करने का आदेश दिया | 02 Mar 2026

चर्चा में क्यों?

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह राजस्व अभिलेखों और राजपत्र अधिसूचनाओं में सुआव की आधिकारिक श्रेणी को नाला/ड्रेन से बदलकर नदी के रूप में दर्ज करे।

मुख्य बिंदु:

  • वर्गीकरण: NGT ने बलरामपुर के ज़िलाधिकारी को तीन माह के भीतर आधिकारिक अभिलेखों में संशोधन कर सुआव की कानूनी स्थिति को नाले के बजाय नदी के रूप में पुनर्स्थापित करने तथा इस संशोधन को राजपत्र और स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित करने का आदेश दिया।
    • अधिकरण ने सुआव की पहचानी गई बाढ़-समभूमि क्षेत्रों में, सक्रिय बाढ़ क्षेत्र का विधिवत सीमांकन होने तक नए निर्माण या अवसंरचना विकास पर रोक लगा दी।
  • महत्त्व: सुआव, बलरामपुर ज़िले में राप्ती नदी की एक सहायक नदी है। 
    • लगभग 120 किलोमीटर के प्रवाह में राप्ती नदी में मिलने से पूर्व यह आर्द्रभूमियों, झीलों और तालाबों को जल प्रदान करते हुए बाढ़ नियंत्रण तथा भूजल पुनर्भरण में अहम योगदान देती है। राप्ती स्वयं गंगा बेसिन का हिस्सा है।
  • पहचान: अधिकरण ने बीसवीं सदी के प्रारंभिक गजेटियरों (राजपत्रों) का उल्लेख करते हुए सुआव को एक महत्त्वपूर्ण सहायक नदी बताया और कहा कि दशकों से भूमि पुनःअधिग्रहण, अतिक्रमण तथा विकास गतिविधियों के कारण इसे गलत रूप से नाला वर्गीकृत कर दिया गया।
  • निगरानी: NGT ने प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरणों को शोधन किये गए सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट सहित जल गुणवत्ता की निगरानी करने का निर्देश दिया तथा ज़िला गंगा समितियों को सुआव की पारिस्थितिकी पुनर्स्थापना हेतु समुदाय-आधारित नदी पुनर्जीवन मॉडल अपनाने को कहा।
  • कानूनी परिणाम: अधिकरण ने चेतावनी दी कि उसके आदेशों की अवहेलना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 26 के तहत दंडनीय अपराध होगी।

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