मुंद्रा बंदरगाह: ऑटोमोटिव निर्यात के लिये भारत का उभरता केंद्र | 13 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) द्वारा प्रबंधित गुजरात का मुंद्रा पोर्ट, आधिकारिक तौर पर चेन्नई और एन्नोर जैसे पारंपरिक केंद्रों को पीछे छोड़ते हुए भारत का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल निर्यात गेटवे बन गया है। यह बदलाव भारत के समुद्री लॉजिस्टिक्स और ‘मेक इन इंडिया’ पहल में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।
मुख्य बिंदु:
- विकास के प्रमुख कारक: उत्तरी और पश्चिमी ऑटोमोबाइल क्लस्टर (हरियाणा, राजस्थान और गुजरात) से इसकी निकटता अंतर्देशीय लॉजिस्टिक्स लागत को कम करती है।
- उत्कृष्ट बुनियादी ढाँचा: इस बंदरगाह में एक समर्पित रो-रो (Roll-on/Roll-off - Ro-Ro) टर्मिनल और एक विशाल पार्किंग यार्ड है, जो किसी भी समय 15,000 से अधिक वाहनों को संभालने में सक्षम है।
- डीप ड्राफ्ट क्षमता: मुंद्रा बंदरगाह विश्व के सबसे बड़े 'प्योर कार एंड ट्रक कैरियर्स' (PCTCs) को जगह दे सकता है, जिससे वैश्विक निर्माताओं के लिये बड़े पैमाने की बचत बढ़ जाती है।
- निर्यात में उछाल: मारुति सुजुकी, निसान और टोयोटा जैसे प्रमुख मूल उपकरण निर्माता (OEMs) ने अपने कम 'टर्नअराउंड समय' (जहाजों के आने-जाने में लगने वाला समय) के कारण अपने निर्यात वॉल्यूम को तेज़ी से मुंद्रा की ओर स्थानांतरित कर दिया है।
- वैश्विक पहुँच: यह बंदरगाह मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरोप के बाज़ारों में जाने वाले भारतीय निर्मित वाहनों के लिये प्राथमिक निकास बिंदु के रूप में कार्य करता है।
- आर्थिक और नीतिगत प्रभाव: मुंद्रा के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के साथ एकीकरण ने विनिर्माण संयंत्रों से ‘लास्ट-माइल’ कनेक्टिविटी (अंतिम छोर तक संपर्क) में काफी सुधार किया है।
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