मिर्ज़ापुर में पूर्वांचल का पहला यार्न प्रोसेसिंग प्लांट | 01 Jan 2026
चर्चा में क्यों?
पूर्वांचल का पहला यार्न प्रोसेसिंग प्लांट उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर ज़िले में स्थापित किया जाएगा।
मुख्य बिंदु
- उद्देश्य: इस संयंत्र का प्रमुख उद्देश्य कालीन उद्योग को स्थानीय स्तर पर संसाधित धागे की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना है, जिससे अन्य राज्यों पर निर्भरता में कमी आएगी।
- आर्थिक महत्त्व: मिर्ज़ापुर–भदोही क्षेत्र हस्तनिर्मित कालीनों के उत्पादन एवं निर्यात का एक प्रमुख राष्ट्रीय केंद्र है, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में महत्त्वपूर्ण योगदान देता है।
- निवेश मॉडल: यह परियोजना सार्वजनिक–निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के अंतर्गत विकसित की जा रही है।
- निवेश: संयंत्र के लिये लगभग 8 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश का प्रस्ताव किया गया है।
- कारीगरों को लाभ: इस परियोजना से स्थानीय बुनकरों और कालीन निर्माताओं को कच्चे माल की लागत में कमी, गुणवत्ता युक्त धागे की समयबद्ध उपलब्धता तथा उत्पादन क्षमता में वृद्धि का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।
- समय-सीमा: संयंत्र को अप्रैल 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
- नीतिगत समर्थन: राज्य सरकार उत्तर प्रदेश वस्त्र एवं परिधान नीति, 2022 जैसी नीतिगत पहलों के माध्यम से वस्त्र और कालीन क्षेत्र को सुदृढ़ करने हेतु सक्रिय प्रयास कर रही है।
- क्षेत्रीय विशिष्टता: मिर्ज़ापुर संयंत्र विशेष रूप से पूर्वांचल क्षेत्र के कालीन और ऊन उद्योगों के लिये समर्पित पहला यार्न प्रोसेसिंग प्लांट है।