मध्य प्रदेश बजट 2026–27 | 19 Feb 2026

चर्चा में क्यों?

मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने भोपाल में राज्य विधानसभा में वित्त वर्ष 2026–27 का बजट प्रस्तुत किया, जिसमें महिला सशक्तीकरण, किसान कल्याण, अवसंरचना, स्वास्थ्य और वित्तीय अनुशासन को सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया गया।

मुख्य बिंदु:

  • रिकॉर्ड बजट परिव्यय: वित्त वर्ष 2026–27 के लिये कुल बजट आकार ₹4.38 लाख करोड़ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाता है और विकासोन्मुख विस्तारात्मक व्यय को प्रतिबिंबित करता है।
    • सरकार ने कोई नया कर नहीं लगाया है और मौजूदा कर दरों को यथावत रखा है, ताकि आर्थिक स्थिरता बनी रहे और नागरिकों व व्यवसायों पर कर भार कम हो।
  • बजट के प्रमुख आँकड़े (₹ करोड़ में):
    • कुल प्राप्तियाँ: 3,89,397
    • कुल व्यय: 3,88,925
    • राजस्व प्राप्तियाँ: 3,08,703
    • राजस्व व्यय: 3,08,659
    • पूंजीगत प्राप्तियाँ: 80,694
    • पूंजीगत व्यय: 80,266
    • राजस्व अधिशेष: 44
    • राजकोषीय घाटा: GSDP का 3.87%
    • अनुदान राशि (Appropriation Amount): 4,38,317
    • GSDP: 18,48,274
    • प्रति व्यक्ति आय: ₹1,52,615 (2024–25)
  • क्षेत्रवार प्रावधान (₹ करोड़ में):
    • कृषि क्षेत्र: 38,850
    • स्वास्थ्य एवं महिला कल्याण: 56,478
    • शिक्षा: 45,358
    • एससी/एसटी/ओबीसी: 24,024
    • अवसंरचना: 49,084
    • शहरी एवं ग्रामीण विकास: 61,665
    • सांस्कृतिक संवर्द्धन: 2,069
    • रोज़गार: 6,104
  • प्रमुख योजनाओं के लिये प्रावधान (₹ करोड़ में):
    • मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना: 23,883
    • विकसित भारत – रोज़गार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) की गारंटी: 10,428
    • अटल गृह ज्योति योजना: 6,033
    • राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NUHM/NRHM): 4,600
    • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: 2,000
    • लाड़ली लक्ष्मी योजना: 1,801
  • महिला-केंद्रित आवंटन: महिलाओं से जुड़ी योजनाओं के लिये लगभग ₹1.27 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें लाड़ली बहना योजना जैसे प्रमुख कार्यक्रमों को निरंतर समर्थन शामिल है, जिससे महिलाओं के वित्तीय समावेशन और सामाजिक सुरक्षा को सुदृढ़ किया जाएगा।
    • बजट में राज्य भर में महिला श्रमिकों की सुरक्षा और रोज़गार तक पहुँच सुनिश्चित करने के लिये 5,700 कार्यरत महिलाओं के छात्रावासों के निर्माण का भी प्रावधान किया गया है।
  • ‘किसान कल्याण वर्ष’ की घोषणा: वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में घोषित किया गया है, जिसके तहत कृषि, सिंचाई, फसल खरीद और सहायक क्षेत्रों के लिये आवंटन बढ़ाया गया है।
  • कृषि एवं सिंचाई को बढ़ावा: सिंचाई के विस्तार, किसानों के लिये सोलर पंपों की व्यवस्था और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खरीद तंत्र को मज़बूत करने के लिये महत्त्वपूर्ण निवेश का प्रस्ताव किया गया है।
  • ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज पर विशेष ध्यान: ग्रामीण सड़कों, जल जीवन मिशन के तहत पेयजल आपूर्ति तथा ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के लिये आवंटन बढ़ाया गया है, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास को गति मिल सके।
  • ग्रामीण रोज़गार को समर्थन: ग्रामीण रोज़गार गारंटी को सुदृढ़ करने के लिये वीबी ग्राम आरजी योजना के तहत ₹10,428 करोड़ का प्रावधान किया गया है। साथ ही, विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों के लिये प्रधानमंत्री जनमन योजना हेतु ₹900 करोड़ का आवंटन किया गया है।
  • शहरी अवसंरचना का विस्तार: बजट में मेट्रो रेल विस्तार, शहरी आवास, ई-बसों और स्मार्ट सिटी पहलों के लिये धनराशि का प्रावधान किया गया है, जिससे शहरी केंद्रों का आधुनिकीकरण किया जा सके।
  • स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करना: स्वास्थ्य सेवाओं के लिये लगभग ₹23,000 करोड़ का आवंटन किया गया है। इसमें नए अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, स्वास्थ्य अवसंरचना का विस्तार तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार शामिल है।
  • शिक्षा एवं कौशल विकास: विद्यालयी शिक्षा पर व्यय में वृद्धि, शिक्षकों की भर्ती, कॉलेजों के उन्नयन तथा युवाओं के लिये रोज़गार सृजन हेतु कौशल विकास कार्यक्रमों पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
    • उद्यमिता को प्रोत्साहित करने, स्वरोज़गार योजनाओं और औद्योगिक विकास के माध्यम से रोज़गार सृजन के लिये भी विशेष प्रावधान किये गए हैं।
  • औद्योगिक एवं रोज़गार समर्थन: बजट में MSME, स्टार्ट-अप्स एवं निवेश प्रोत्साहन के लिये प्रोत्साहन तथा अवसंरचना उपलब्ध कराकर औद्योगिकीकरण और रोज़गार सृजन को बढ़ावा देने का प्रावधान किया गया है, जिससे आर्थिक विकास को गति मिले।
  • समावेशी विकास का ढाँचा: यह बजट GYANII (गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी, अवसंरचना, उद्योग) नामक छह-सूत्रीय विकास ढाँचे के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन, युवा सशक्तीकरण, कृषि समर्थन, महिला सशक्तीकरण, अवसंरचना विकास और औद्योगिक वृद्धि को एक साथ आगे बढ़ाना है।
  • अवसंरचना और आर्थिक विकास: ग्रामीण सड़कों, संपर्क व्यवस्था, केन–बेतवा लिंक जैसी सिंचाई परियोजनाओं तथा सार्वजनिक सेवाओं के विस्तार सहित अवसंरचना विकास के लिये बड़ी धनराशि का प्रावधान किया गया है।
    • इसके अलावा, राज्य के इतिहास में पहली बार ₹1 लाख करोड़ से अधिक के पूंजीगत निवेश का प्रावधान भी किया गया है।
  • ऊर्जा और नवीकरणीय क्षेत्र पर ज़ोर: नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और ग्रामीण विद्युतीकरण में निवेश का उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना तथा सतत विकास को प्रोत्साहित करना है।
  • वित्तीय अनुशासन और घाटा प्रबंधन: सरकार ने FRBM सीमाओं के भीतर नियंत्रित राजकोषीय घाटे का अनुमान प्रस्तुत किया है तथा राजस्व अधिशेष का संकेत दिया है, जो वित्तीय विवेकशीलता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  • ऋण और कर्ज प्रबंधन: बजट सत्र से पहले राज्य ने ₹5,600 करोड़ का ऋण लिया, साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि कर्ज का स्तर प्रबंधनीय सीमाओं के भीतर बना हुआ है।
  • आर्थिक वृद्धि संकेतक: राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण में लगभग 8% की अनुमानित विकास दर दर्ज की गई है, जो निरंतर आर्थिक विस्तार को दर्शाती है।
  • रोलिंग बजट का नवाचार: पहली बार राज्य ने रोलिंग बजट प्रणाली अपनाई है। यह एक अनुकूल वित्तीय योजना पद्धति है, जिसमें तय 12 माह की अवधि से आगे बढ़कर बजट की प्रगति के साथ अतिरिक्त महीनों या तिमाहियों को जोड़ा जा सकता है।
    • इसका उद्देश्य वित्तीय प्रतिक्रिया क्षमता और योजना निर्माण को बेहतर बनाना है।
  • महत्त्व: बजट योजना में समावेशी कल्याण को प्राथमिकता दी गई है, जो महिलाओं, किसानों और गरीब वर्गों के लिये सामाजिक-आर्थिक समर्थन की दिशा में बदलाव का संकेत देती है।