केरल बना शहरी नीति बनाने वाला भारत का पहला राज्य | 18 Feb 2026

चर्चा में क्यों?

केरल देश का पहला राज्य बन गया है जिसने दीर्घकालिक विकास को दिशा देने और तीव्र शहरीकरण का प्रभावी प्रबंधन करने के उद्देश्य से एक व्यापक शहरी नीति तैयार की है।

मुख्य बिंदु:

  • विज़न 2050: यह नीति वर्ष 2050 तक राज्य को जलवायु-स्मार्ट शहरों और कस्बों के एक सतत नेटवर्क के रूप में देखने की परिकल्पना करती है, जिसमें वैज्ञानिक योजना तथा सतत शासन पर विशेष ज़ोर दिया गया है।
  • स्वीकृति: स्थानीय स्वशासन विभाग द्वारा लगभग दो वर्षों की तैयारी के बाद, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में केरल मंत्रिमंडल ने इस मसौदा नीति को स्वीकृति दी।
    • इस पहल की पहली घोषणा वर्ष 2023-24 के राज्य बजट में की गई थी और रोडमैप तैयार करने के लिये राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों से युक्त केरल शहरी नीति आयोग का गठन किया गया।
  • परामर्श: आयोग ने मार्च 2025 में नव केरल शहरी नीति रिपोर्ट प्रस्तुत की और कोच्चि में आयोजित एक वैश्विक सम्मेलन से प्राप्त सुझावों को नीति में शामिल किया गया।
    • आयोग के आकलन के अनुसार, वर्ष 2050 तक केरल की शहरी जनसंख्या लगभग 80% तक पहुँचने की संभावना है, जिसके लिये सक्रिय और समावेशी शहरी शासन की आवश्यकता होगी।
  • प्रमुख फोकस क्षेत्र: इस नीति में कानूनों और संस्थागत प्रणालियों में सुधार, क्षमता निर्माण, अवसंरचना विकास, जन-केंद्रित सेवाएँ तथा स्थानिक योजना जैसे प्रमुख विषयगत क्षेत्रों को रेखांकित किया गया है।
    • इसका उद्देश्य शहरीकरण के लाभों का उपयोग करते हुए असमानताओं को कम करना, सामाजिक समर्थन प्रणालियों को सुदृढ़ करना तथा शहरी क्षेत्रों में अवसंरचना की गुणवत्ता में सुधार करना है।

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