झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 | 23 Feb 2026

चर्चा में क्यों?

झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा राज्य विधानसभा में प्रस्तुत किया गया, जिसमें राज्य की आर्थिक कार्यप्रणाली, संरचनात्मक परिवर्तनों, सामाजिक प्रगति तथा भावी संभावनाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP): वर्ष 2025-26 के लिये  झारखंड का वास्तविक GSDP लगभग ₹3,21,892 करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है, जिसमें लगभग 6.17% की वृद्धि दर्ज की जाएगी। यह महामारी काल से उबरने के बाद निरंतर आर्थिक विस्तार को दर्शाता है।
    • वर्तमान मूल्यों पर राज्य की अर्थव्यवस्था के 2025-26 में ₹5.6 लाख करोड़ को पार करने तथा 2026-27 में लगभग ₹6.1 लाख करोड़ तक पहुँचने की संभावना है।
    • ये अनुमान महामारी के बाद की प्रारंभिक तीव्र वृद्धि की तुलना में कुछ हद तक मंदी को दर्शाते हैं, फिर भी संरचनात्मक समेकन और पुनरुद्धार के अनुरूप मध्य-6% की सतत विकास दर बनाए रखते हैं।
  • विकास की तुलना और संदर्भ: वर्ष 2024-25 में आर्थिक वृद्धि लगभग 7.02% आँकी गई है, जो राष्ट्रीय औसत (लगभग 6.5%) से अधिक है। यह क्रमिक चार वर्षों तक 7% से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है, जो राज्य की आर्थिक दृढ़ता और गति को रेखांकित करता है।
  • प्रति व्यक्ति आय: वर्ष 2025-26 के सर्वेक्षण का एक महत्त्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि झारखंड की प्रति व्यक्ति आय पहली बार ₹1 लाख के स्तर को पार कर गई है। वर्ष 2024-25 में वर्तमान मूल्यों पर यह ₹1,16,663 तक पहुँच गई।
    • अनुमान: वर्तमान मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय के और बढ़ने का अनुमान है—
      • ₹1,25,677 (2025–26) और 
      • ₹1,35,195 (2026–27)
    • वास्तविक मूल्यों (स्थिर कीमतों) पर प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2025-26 में लगभग ₹71,944 तथा वर्ष 2026-27 में लगभग ₹65,670 तक पहुँचने का अनुमान है।
    • महत्त्व: प्रति व्यक्ति आय का ₹1 लाख के स्तर को पार करना एक प्रतीकात्मक और आर्थिक उपलब्धि है, जो झारखंड की अर्थव्यवस्था में बढ़ी हुई उत्पादकता तथा परिवारों की आय में सुधार को दर्शाता है।

क्षेत्रीय संरचना एवं संरचनात्मक परिवर्तन:

  • सेवा क्षेत्र: सेवा क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदानकर्त्ता बनकर उभरा है। सकल राज्य मूल्यवर्द्धन (GSVA) में इसकी हिस्सेदारी वर्षों के दौरान उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है और यह कृषि तथा उद्योग दोनों से आगे निकल चुका है।
    • सेवा क्षेत्र के अंतर्गत निर्माण गतिविधियों में तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है, जो बढ़ते शहरीकरण और अवसंरचना परियोजनाओं का प्रतिबिंब है।
  • औद्योगिक क्षेत्र: औद्योगिक क्षेत्र झारखंड के विकास का एक केंद्रीय आधार बना हुआ है।
    • ऐतिहासिक आँकड़ों के अनुसार, हाल के वर्षों में औद्योगिक गतिविधियों का राज्य के GSVA में लगभग 44.1% योगदान रहा है, जिससे झारखंड छत्तीसगढ़ और ओडिशा के साथ भारत के शीर्ष तीन औद्योगीकृत राज्यों में शामिल हो गया है।
    • यह राज्य की आर्थिक संरचना में खनन, भारी उद्योगों तथा मध्यम एवं लघु उद्यमों के महत्त्व को दर्शाता है।
  • कृषि एवं संबद्ध गतिविधियाँ: वर्ष 2025-26 में कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों का GSVA में योगदान लगभग 12.3% रहा, जो पहले की तुलना में कम है, किंतु निरपेक्ष रूप में इसका मूल्य बढ़ा है। यह कृषि उत्पादन में विस्तार बनाए रखते हुए अर्थव्यवस्था के विविधीकरण का संकेत देता है।
    • हाल के वर्षों में कृषि का निरपेक्ष GSVA ₹28,470 करोड़ से बढ़कर अनुमानित ₹38,200 करोड़ हो गया है, जो उत्पादकता में वृद्धि को दर्शाता है।
  • मुद्रास्फीति एवं मूल्य स्थिरता: आर्थिक सर्वेक्षण में मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है जो वर्ष 2023-24 में लगभग 6% से घटकर वर्ष 2024-25 में और कम स्तर पर आ गई।
    • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच मुद्रास्फीति का अंतर भी कम हो गया है, जिससे क्षेत्रों के बीच अधिक समान मूल्य स्थिरता परिलक्षित होती है।
    • RBI की ऊपरी सहनशील सीमा के भीतर या उससे नीचे मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखना उपभोक्ता विश्वास को बढ़ावा देता है तथा नागरिकों की वास्तविक क्रय-शक्ति में वृद्धि करता है, विशेषकर ऐसे राज्य में जहाँ ग्रामीण आबादी का अनुपात अधिक है।
  • बहुआयामी गरीबी में कमी: झारखंड में बहुआयामी गरीबी में तीव्र गिरावट देखी गई है—
    • वर्ष 2015-16 में 42.10% से घटकर वर्ष 2019-21 में लगभग 28.81% तक अर्थात 13 प्रतिशत अंकों से अधिक की कमी।
    • यह गिरावट राष्ट्रीय औसत से अधिक है और आर्थिक वृद्धि तथा लक्षित सामाजिक हस्तक्षेपों के संयुक्त प्रभाव को दर्शाती है, जिनमें विद्युत उपलब्धता, स्वच्छता, स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन तथा पेयजल जैसी आवश्यक सेवाएँ शामिल हैं।
    • प्रमुख योजनाएँ:
      • मैया सम्मान योजना: 18-50 वर्ष की महिलाओं को ₹2,500 मासिक सहायता प्रदान करने हेतु ₹13,363 करोड़ (बजटीय राजस्व प्राप्तियों का 11%) का प्रावधान किया गया है।
      • शिक्षा: झारखंड छात्र अनुसंधान एवं नवाचार नीति 2025 पर विशेष ज़ोर दिया गया है, साथ ही कौशल और फिन-टेक के लिये दो नए विश्वविद्यालयों की स्थापना का प्रस्ताव है।
  • सामाजिक प्रगति: शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और ग्रामीण संपर्क जैसी सामाजिक अवसंरचना में निरंतर सुधार व्यापक मानव विकास परिणामों की नींव रखता है, जो प्रायः सतत आर्थिक विस्तार के साथ जुड़े होते हैं।
  • MSME का विस्तार: राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की संख्या में तीव्र वृद्धि देखी गई है।
    • वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में 83,000 से अधिक नए उद्यम पंजीकरण दर्ज किये  गए, जिनसे 3.34 लाख से अधिक लोगों को रोज़गार मिला। इनमें से 99% से अधिक इकाइयाँ सूक्ष्म उद्यमों की हैं।
    • एक सशक्त MSME पारितंत्र रोज़गार सृजन के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, विशेषकर अर्द्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में तथा यह स्थानीय आपूर्ति शृंखलाओं को भी मज़बूत करता है।
  • औद्योगिक विविधीकरण: सेवा और उद्योग क्षेत्रों में विस्तार कृषि पर निर्भरता से हटकर विविधीकृत आर्थिक संरचना की ओर संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है, जो दीर्घकालिक रोज़गार सृजन हेतु आवश्यक है।
  • राजकोषीय परिप्रेक्ष्य: यद्यपि विस्तृत राजकोषीय तालिकाओं के लिये आधिकारिक राज्य आर्थिक सर्वेक्षण दस्तावेज़ ही प्रमुख स्रोत है, स्वतंत्र रिपोर्टों से यह संकेत मिलता है कि—
    • बजट आवंटनों में समय के साथ उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और राज्य के गठन के बाद से कुल राजकोषीय आकार में लगभग 20 गुना विस्तार हुआ है।
    • स्वयं के राजस्व स्रोतों में औसत वार्षिक दर से सुदृढ़ वृद्धि हुई है, जो बेहतर राजस्व संग्रहण को दर्शाती है।
  • विकास की संभावनाएँ: अगले वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिये झारखंड की अर्थव्यवस्था में लगभग 5.96% की वृद्धि का अनुमान है, जो चालू वर्ष की तुलना में थोड़ा कम है, किंतु यह मध्यम अवधि की सतत विकास पथ के भीतर बनी हुई है।
    • विकास दर में यह नरमी महामारी-पश्चात तीव्र उछाल से संरचनात्मक समेकन और दीर्घकालिक स्थिरता की ओर संक्रमण के रूप में देखी जा रही है।
  • दीर्घकालिक लक्ष्य: पूर्ववर्ती आर्थिक सर्वेक्षणों में महत्त्वाकांक्षी आर्थिक विस्तार लक्ष्यों का अनुमान लगाया गया है, जैसे वर्ष 2029-30 तक झारखंड को ₹10 लाख करोड़ (₹10 ट्रिलियन) की अर्थव्यवस्था बनाना, जो निरंतर नीतिगत समर्थन और निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगा।
  • बैंकिंग: 2025 तक राज्य में बैंक शाखाओं की संख्या बढ़कर 3,449 और ATM की संख्या 3,338 हो गई।
  • विद्युत क्षेत्र: अगस्त 2025 तक स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 3,212.95 मेगावाट तक पहुँच गई। वित्त वर्ष 2026 के बजट में उपभोक्ताओं को विद्युत सब्सिडी देने के लिये ₹5,005 करोड़ का प्रावधान किया गया है।