झारखंड
झारखंड के मुख्यमंत्री ने जनगणना में सरना धार्मिक संहिता की मांग की
- 06 May 2026
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चर्चा में क्यों?
हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आगामी जनगणना में जनजातीय समुदायों के लिये अलग सरना धार्मिक संहिता को शामिल करने की मांग की है।
मुख्य बिंदु:
- मांग: झारखंड सरकार ने जनगणना में सरना धर्म के अनुयायियों के लिये एक अलग धार्मिक संहिता की मांग की है।
- हेमंत सोरेन ने औपचारिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर जनजातीय समुदाय की चिंताओं को उजागर किया।
- उन्होंने प्रभावी नीति-निर्माण और संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिये सटीक एवं तथ्य-आधारित डेटा संग्रह की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।
- सरना धर्म: सरना धर्म की विशेषता प्रकृति पूजा, ग्राम देवताओं के प्रति श्रद्धा तथा विशिष्ट अनुष्ठानिक परंपराएँ हैं।
- सरना धार्मिक संहिता को अन्य धर्मों के अनुयायियों से जनजातीय समुदायों की अलग पहचान सुनिश्चित करने और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिये आवश्यक माना जाता है।
- प्रस्ताव: झारखंड विधानसभा पहले ही अलग सरना संहिता के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित कर चुकी है।
- यह कदम जनजातीय समुदायों के लिये अधिक लक्षित कल्याणकारी नीतियों को लागू करने और उनके संवैधानिक संरक्षण को मज़बूत करने में सहायक होगा।
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