भारतीय सेना की कोणार्क कोर ने स्ट्रेला-10 मिसाइल का सफल परीक्षण किया | 24 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
भारतीय सेना की कोणार्क कोर ने पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में स्ट्रेला-10 अल्प-दूरी वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली का सफलतापूर्वक सटीक परीक्षण किया, जिसमें तीव्र गति से उड़ रहे निम्न-ऊँचाई वाले हवाई लक्ष्य पर सीधा प्रहार किया गया।
मुख्य बिंदु:
- लक्ष्य निष्क्रियकरण: इस अभ्यास का उद्देश्य निम्न-ऊँचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों, जैसे दुश्मन के लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर तथा बढ़ते हुए आत्मघाती ड्रोन को निष्क्रिय करना था।
- परिचालन परिवेश: पोखरण के मरुस्थलीय क्षेत्र में आयोजित इस अभ्यास में अत्यधिक तापमान और उड़ती रेत जैसी चरम परिस्थितियों में प्रणाली के प्रदर्शन का परीक्षण किया गया।
- स्ट्रेला-10 वायु रक्षा प्रणाली: यह प्रणाली ट्रैकयुक्त, बख्तरबंद MT-LB वाहन पर स्थापित होती है, जिससे यह ऊबड़-खाबड़ भूभाग, रेतीले टीले और पक्की सड़कों पर उच्च गति से प्रभावी रूप से संचालन कर सकती है।
- प्रकार: अल्प-दूरी सतह-से-वायु मिसाइल (SAM)
- उद्गम: रूसी मूल की प्रणाली (इसके उन्नत संस्करण सेवा में)
- लक्ष्य साधन तकनीक: रडार-आधारित प्रणालियों के विपरीत, स्ट्रेला-10 अवरक्त (इन्फ्रारेड) सीकर तकनीक का उपयोग करती है। यह शत्रु विमानों या ड्रोन के इंजनों से निकलने वाली ऊष्मा-छाप (हीट सिग्नेचर) पर लॉक-ऑन करती है।
- संलग्नता सीमा: यह प्रणाली सामान्यतः 6 से 10 किलोमीटर की प्रभावी संलग्नता सीमा में कार्य करती है और अग्रसर टैंक तथा पैदल सेना टुकड़ियों के लिये एक ‘मोबाइल किले’ (चलते-फिरते दुर्ग) सुरक्षा प्रदान करती है।
- परिचालन सिद्धांत: यह एक अल्प-दूरी वायु रक्षा परत के रूप में कार्य करती है, जिसे निम्न-ऊँचाई से होने वाले घुसपैठ प्रयासों के विरुद्ध त्वरित प्रतिक्रिया हेतु डिज़ाइन किया गया है।
- VSHORADS का विकास: यद्यपि स्ट्रेला-10 एक प्रमुख परिसंपत्ति बनी हुई है, भारत समानांतर रूप से स्वदेशी क्षमताओं को भी आगे बढ़ा रहा है। DRDO आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिये लगभग 6 किमी रेंज वाली स्वदेशी चौथी पीढ़ी की VSHORADS विकसित कर रहा है।
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