भारत लगाएगा लद्दाख में दो नए टेलीस्कोप | 12 Feb 2026

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय बजट 2026-27 में भारत सरकार ने लद्दाख में अपनी भू-आधारित खगोल विज्ञान अवसंरचना के व्यापक विस्तार को स्वीकृति दी है, जिसमें दो नए मेगा-टेलीस्कोप की स्थापना तथा एक मौजूदा सुविधा के उन्नयन को शामिल किया गया है।

मुख्य बिंदु:

  • नई टेलीस्कोप परियोजनाएँ: नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप और नेशनल लार्ज ऑप्टिकल–नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप की स्थापना।
  • नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST): सूर्य की सतह और वायुमंडल का उच्च-रिज़ॉल्यूशन में अवलोकन करने हेतु।
    • स्थान: पैंगोंग त्सो झील के निकट, लद्दाख।
    • वैज्ञानिक फोकस: सौर चुंबकीय क्षेत्र, सौर ज्वालाएँ (फ्लेयर), कोरोनल मास इजेक्शन तथा अंतरिक्ष मौसम संबंधी घटनाएँ।
  • महत्त्व: पूर्ण होने पर NLST भारत की तीसरी भू-आधारित सौर वेधशाला होगी। यह तमिलनाडु स्थित कोडाइकनाल सौर वेधशाला और राजस्थान स्थित उदयपुर सौर वेधशाला जैसी मौजूदा सुविधाओं का पूरक बनेगी तथा भारत की आदित्य-L1 अंतरिक्ष वेधशाला से प्राप्त आँकड़ों को भी सुदृढ़ करेगी।
  • नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इन्फ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT): गहन अंतरिक्ष अनुसंधान के लिये एक उन्नत ऑप्टिकल और निकट-अवरक्त टेलीस्कोप।
    • वैज्ञानिक अनुप्रयोग: एक्सोप्लैनेट, तारकीय और आकाशगंगीय विकास, ब्रह्मांड विज्ञान, सुपरनोवा तथा दूरस्थ आकाशगंगाओं का अध्ययन।
  • महत्त्व: अपने बड़े संग्रहण क्षेत्र और उच्च ऊँचाई वाले स्थान के कारण NLOT गहन अंतरिक्ष अवलोकन के लिये क्षेत्र की सबसे शक्तिशाली ऑप्टिकल टेलीस्कोप में से एक होगा।
  • हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT) का उन्नयन: HCT को 3.7 मीटर के खंडित प्राथमिक दर्पण वाले टेलीस्कोप में उन्नत किया जाएगा, जिससे इसकी संवेदनशीलता और ऑप्टिकल-अवरक्त तरंगदैर्ध्य क्षेत्र में कवरेज में सुधार होगा।
    • वैज्ञानिक प्रभाव: उन्नत HCT गहन अवलोकन को संभव बनाएगा तथा अंतर्राष्ट्रीय वेधशालाओं और इस कार्यक्रम के अंतर्गत निर्मित नए टेलीस्कोप का पूरक बनेगा।
  • लद्दाख क्यों?: उच्च ऊँचाई, स्वच्छ और शुष्क आकाश तथा कम वायुमंडलीय विक्षोभ के कारण लद्दाख को खगोलीय अवलोकन के लिये एक आदर्श स्थल के रूप में पहचाना गया है। यहाँ पहले से ही कई महत्त्वपूर्ण ऑप्टिकल और उच्च-ऊर्जा खगोल विज्ञान सुविधाएँ स्थापित हैं।