भारत का पहला पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क लेह, लद्दाख में स्थापित किया जाएगा | 22 Apr 2026
चर्चा में क्यों?
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर सिंधु घाट, लेह में भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क की आधारशिला रखी, जिसका उद्देश्य क्षेत्र की प्राचीन शैल-चित्र (रॉक आर्ट) विरासत का संरक्षण करना है।
मुख्य बिंदु:
- लॉन्च: लेह में सिंधु नदी के तट पर स्थित सिंधु घाट पर लद्दाख की प्रागैतिहासिक शैल-नक्काशियों (रॉक कार्विंग्स) के संरक्षण हेतु इस परियोजना की आधारशिला रखी गई।
- उद्देश्य: इस पार्क का उद्देश्य सदियों पुराने पेट्रोग्लिफ्स (शैल-चित्र/नक्काशियाँ) का संरक्षण करना है, जो प्रारंभिक मानव जीवन, व्यापार मार्गों, आस्था प्रणालियों और पारिस्थितिक इतिहास को दर्शाते हैं। इनमें से कई पर्यटन, अवसंरचना विकास और पर्यावरणीय कारकों के कारण खतरे में हैं।
- लद्दाख में सिंधु और ज़ांस्कर नदियों के किनारे लगभग 400 पेट्रोग्लिफ स्थल स्थित हैं, जो इसे दक्षिण एवं मध्य एशिया के सबसे समृद्ध शैल-कला क्षेत्रों में से एक बनाते हैं।
- कार्यान्वयन: धरोहर स्थलों के संयुक्त संरक्षण और प्रबंधन के लिये अभिलेखागार, पुरातत्त्व एवं संग्रहालय विभाग तथा भारतीय पुरातत्त्व सर्वेक्षण (ASI) के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए।
- संवेदनशील और अलग-थलग पड़े शैल-चित्रों को सावधानीपूर्वक संरक्षण पार्क में स्थानांतरित किया जाएगा, ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके तथा उन्हें शैक्षिक वातावरण में व्यवस्थित रूप से प्रदर्शित किया जा सके।
- सांस्कृतिक महत्त्व: इन पेट्रोग्लिफ्स को ‘ओपन-एयर म्यूज़ियम्स’ माना जाता है, जो प्रागैतिहासिक से ऐतिहासिक काल तक मानव सभ्यता का सतत अभिलेख प्रस्तुत करते हैं और लद्दाख को एक सांस्कृतिक तथा व्यापारिक संगम के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
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