IIT कानपुर ने 30 वर्षों के उपग्रह आँकड़ों का प्रयोग करके सूर्य के आंतरिक और अदृश्य हिस्सों का मानचित्रण किया | 03 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) कानपुर ने 30 वर्षों के उपग्रह अवलोकनों को एक उन्नत संगणकीय मॉडल में समाहित कर सूर्य के आंतरिक और अदृश्य चुंबकीय क्षेत्र का पहला त्रि-आयामी मानचित्र तैयार किया है, जिससे सौर गतिकी की समझ में वृद्धि हुई है।
मुख्य बिंदु:
- उपलब्धि: IIT कानपुर की शोध टीम ने एक त्रि-आयामी (3D) डायनेमो मॉडल विकसित किया है, जो तीन दशकों के सौर चुंबकीय क्षेत्र के अवलोकनों को समाहित कर सूर्य की आंतरिक चुंबकीय संरचना का मानचित्र तैयार करता है।
- यह अध्ययन IIT कानपुर के भौतिकी विभाग के सौम्यदीप चटर्जी के नेतृत्व में किया गया।
- डेटा स्रोत: इस मॉडल में NASA के SOHO और SDO जैसे उपग्रहों द्वारा लंबे समय तक एकत्र किये गए आँकड़ों का उपयोग किया गया है, जिन्होंने दशकों से सूर्य की सतह के चुंबकीय क्षेत्रों का विस्तृत विवरण प्रदान किया है।
- सौर डायनेमो मानचित्रण: यह शोध सौर डायनेमो पर केंद्रित है जो सूर्य के गहरे आंतरिक भाग में होने वाली वह प्रक्रिया है, जिसके कारण सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है और जो सनस्पॉट, सौर ज्वालाओं तथा कोरोनल मास इजेक्शन को संचालित करती है।
- 3D मॉडल की अंतर्दृष्टि: अवलोकनात्मक आँकड़ों को उन्नत संगणकीय तकनीकों के साथ जोड़कर यह मॉडल समय के साथ बड़े-पैमाने पर चुंबकीय पैटर्न के विकास को उजागर करता है तथा आंतरिक चुंबकीय क्षेत्रों की तीव्रता, संरचना और परिवर्तन का अनुमान लगाने में सक्षम बनाता है।
- अंतरिक्ष मौसम की प्रासंगिकता: सूर्य के अदृश्य चुंबकीय क्षेत्र का मानचित्रण सौर चक्रों और अंतरिक्ष-मौसम घटनाओं की भविष्यवाणी क्षमता को बेहतर बनाता है, जो पृथ्वी पर उपग्रहों, विद्युत ग्रिड, GPS और संचार प्रणालियों को बाधित कर सकती हैं।
- यह मॉडल आगामी सौर चक्रों की अधिकतम तीव्रता का आकलन करने में भी सहायक है, जो तकनीकी अवसंरचना की सुरक्षा के लिये अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
- बिग डेटा: यह अध्ययन दर्शाता है कि विशाल अवलोकनात्मक आँकड़ों को संगणकीय मॉडलिंग के साथ जोड़कर पहले अप्राप्य रहे वैज्ञानिक निष्कर्षों को कैसे उजागर किया जा सकता है।
SOHO (सोलर एंड हेलियोस्फेरिक ऑब्ज़र्वेटरी):
- NASA और ESA का संयुक्त मिशन।
- वर्ष 1995 में प्रक्षेपित।
- पृथ्वी और सूर्य के बीच लैग्रांज पॉइंट L1 पर स्थापित।
- सूर्य के आंतरिक भाग, सतह, कोरोना, सौर पवन तथा कोरोनल मास इजेक्शन (CMEs) का अध्ययन करता है।
SDO (सोलर डायनेमिक्स ऑब्ज़र्वेटरी):
- NASA का मिशन।
- ‘लिविंग विद अ स्टार’ (LWS) कार्यक्रम के अंतर्गत वर्ष 2010 में प्रक्षेपित।
- पृथ्वी के चारों ओर भू-समकालिक कक्षा (जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट) में परिक्रमा करता है।
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