गुजरात में हाई-रिस्क पैथोजेन हेतु भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित BSL-4 लैब | 16 Jan 2026

चर्चा में क्यों?

गुजरात में भारत की पहली राज्य-वित्तपोषित बायोसेफ्टी लेवल-4 (BSL-4) प्रयोगशाला की आधारशिला रखी गई। यह सुविधा भारत में उच्च-संरक्षण अनुसंधान के विकेंद्रीकरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है, जो पहले केवल केंद्रीय सरकारी संस्थानों तक सीमित था।

मुख्य बिंदु:

  • समेकित परिसर: यह लैब बहु-स्तरीय संरचना के रूप में तैयार की गई है, जिसमें BSL-4, BSL-3 और BSL-2 मॉड्यूल शामिल हैं।
  • पशु अनुसंधान: महत्त्वपूर्ण रूप से, इसमें ABSL-3 और ABSL-4 (एनिमल बायोसेफ्टी लेवल) मॉड्यूल भी शामिल हैं, जो वैज्ञानिकों को घातक वायरस के जीवित प्राणियों के साथ परस्पर क्रिया का अध्ययन करने में सक्षम बनाते हैं, जो वैक्सीन विकास की एक आवश्यक प्रक्रिया है।
  • वित्तपोषण मॉडल: भारत की मौजूदा BSL-4 लैब्स (जैसे पुणे स्थित NIV) जो ICMR द्वारा केंद्रीय रूप से वित्तपोषित है, उनसे अलग यह परियोजना पहली ऐसी पहल है जिसे किसी राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित और प्रबंधित किया जा रहा है।
  • समयरेखा: COVID-19 महामारी से स्थानीय स्तर पर निदान क्षमता और आत्मनिर्भरता की आवश्यकता का एहसास होने के बाद, इस उच्च-सुरक्षा केंद्र की योजना का प्रारंभ वर्ष 2022 के मध्य में किया गया।
  • महामारी तैयारी: यह सुविधा गुजरात को ‘डिज़ीज़ X’ या किसी नए वायरल प्रकोप की पहचान और अनुसंधान स्थानीय स्तर पर करने में सक्षम बनाएगी, जिससे सभी नमूनों को पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और प्रतिक्रिया समय में महत्त्वपूर्ण बचत होगी।
  • वन हेल्थ दृष्टिकोण: एनिमल बायोसेफ्टी (ABSL) मॉड्यूल्स को एकीकृत करके, यह लैब ‘वन हेल्थ’ फ्रेमवर्क का समर्थन करती है, जो मानवीय, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के बीच संबंध को स्वीकार करती है तथा जूनोटिक रोग प्रसार को रोकने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

बायोसेफ्टी लेवल (BSL)

  • BSL-1 और BSL-2: इनका उपयोग मध्यम जोखिम वाले रोगजनकों (जैसे E. coli या सामान्य फ्लू) के लिये किया जाता है, जो मनुष्यों में हल्की बीमारी उत्पन्न करते हैं।
  • BSL-3: इसका उपयोग स्वदेशी या विदेशी रोगजनकों के लिये किया जाता है, जो गंभीर या संभावित रूप से घातक बीमारी का कारण बन सकते हैं और वायु के माध्यम से फैल सकते हैं (उदाहरण: क्षय रोग, SARS-CoV-2)।
  • BSL-4 (उच्च-संरक्षण स्तर): यह स्तर अत्यंत खतरनाक एवं दुर्लभ रोगजनकों के लिये होता है, जो जीवन-घातक बीमारी का उच्च जोखिम उत्पन्न करते हैं, जिनके लिये कोई ज्ञात टीका या उपचार उपलब्ध नहीं होता और जो एरोसोल के माध्यम से आसानी से फैल सकते हैं।
    • उदाहरण: इबोला, मारबर्ग और निपाह वायरस।

और पढ़ें: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, वन हेल्थ दृष्टिकोण