मध्य प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 | 18 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
मध्य प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को 17 फरवरी, 2026 को राज्य विधानसभा में पेश किया गया। यह सर्वेक्षण सेवा क्षेत्र में उच्च वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि के कारण राज्य की अर्थव्यवस्था के मज़बूत विस्तार पर प्रकाश डालता है।
मुख्य बिंदु:
- सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP): राज्य का नाममात्र GSDP वर्ष 2025–26 के लिये लगभग ₹16.69 लाख करोड़ आँका गया है, जो सशक्त आर्थिक विस्तार को दर्शाता है।
- नाममात्र वृद्धि दर: नाममात्र वृद्धि दर 11.14% अनुमानित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में आर्थिक गतिविधियों में तेज़ी को प्रतिबिंबित करती है।
- वास्तविक वृद्धि दर: वास्तविक रूप से (2011–12 के स्थिर मूल्यों पर), राज्य की अर्थव्यवस्था के 8.04% की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जो मुद्रास्फीति समायोजन के बाद भी मज़बूत वृद्धि को दर्शाता है।
- राजकोषीय घाटा: वर्ष 2025–26 के लिये राजकोषीय घाटा GSDP का 4.6% रहने का अनुमान है।
- प्रति व्यक्ति आय: सर्वेक्षण में प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाई गई है, जो वर्तमान मूल्यों पर वर्ष 2025–26 में ₹1,69,050 तक पहुँच गई है। यह वर्ष 2011–12 में ₹38,497 थी अर्थात एक दशक में चार गुने से अधिक की वृद्धि।
- स्थिर मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय ₹76,971 अनुमानित है, जो जीवन स्तर में वास्तविक सुधार को दर्शाती है।
- राजकोषीय संतुलन: राज्य के वर्ष 2025–26 में ₹2,618 करोड़ के राजस्व अधिशेष प्राप्त करने का अनुमान है।
- कर राजस्व वृद्धि अधिक होने की उम्मीद है, वर्ष 2025-26 में यह लगभग 13.57% रहने का अनुमान है।
- ऋण स्थिरता: ऋण–GSDP अनुपात 31.3% अनुमानित है, जो हाल के अतीत की तुलना में बेहतर और सतत ऋण प्रबंधन को दर्शाता है।
- GSDP में क्षेत्रवार योगदान: सर्वेक्षण प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में विविधीकरण तथा संतुलित वृद्धि को दर्शाते हुए क्षेत्रवार योगदान की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करता है।
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क्षेत्र |
GSDP में हिस्सेदारी (2025-26) |
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प्राथमिक क्षेत्र (Primary) |
43.09% |
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द्वितीयक क्षेत्र (Secondary) |
19.79% |
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तृतीयक/सेवा क्षेत्र (Tertiary) |
37.12% |
- वृद्धि रुझान: तृतीयक क्षेत्र में 15.8% की दर से सर्वाधिक तेज़ वृद्धि दर्ज की गई। प्राथमिक क्षेत्र 7.31% और द्वितीयक क्षेत्र 9.93% की दर से बढ़ा।
- कृषि एवं ग्रामीण विकास: प्राथमिक क्षेत्र का महत्त्व बना हुआ है, जिसमें फसल उत्पादन, पशुपालन तथा संबद्ध गतिविधियों में सुधार हुआ है।
- ग्रामीण सड़कों और आवास कार्यक्रमों जैसे अवसंरचना विस्तार से आजीविका की मज़बूती तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संरचनात्मक परिवर्तन को बढ़ावा मिला है।
- उद्योग और निवेश: 1,028 इकाइयों को औद्योगिक भूमि का आवंटन तथा ₹1.17 लाख करोड़ से अधिक के प्रस्तावित निवेश से औद्योगिक विश्वास में सुधार का संकेत मिलता है।
- इन निवेशों से लगभग 1.7 लाख रोज़गार सृजन का अनुमान है, जो राज्य की रोज़गार चुनौती से निपटने में सहायक होगा।
- सेवाएँ, स्टार्टअप और पर्यटन: सेवा क्षेत्र ने व्यापार, परिवहन, आतिथ्य और डिजिटल सेवाओं के सहारे तीव्र वृद्धि दर्ज की है।
- राज्य में 1,723 स्टार्टअप और 103 इनक्यूबेशन केंद्र हैं, जो बढ़ती उद्यमशील गतिविधियों को दर्शाते हैं।
- पर्यटन और उससे जुड़ी सेवा गतिविधियाँ GSDP तथा रोज़गार सृजन में महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं।
- शिक्षा: प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य तक पहुँच गई है, जो सार्वभौमिक शिक्षा पहुँच में प्रगति को दर्शाती है।
- उच्च प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर घटकर 6.3% रह गई है।
- शिक्षा के लिये बजटीय आवंटन कुल व्यय का 10.37% है, जो मानव पूंजी विकास के लिये एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत प्राथमिकता को दर्शाता है।
- स्वास्थ्य: आयुष्मान स्वास्थ्य कवरेज के विस्तार और मातृ मृत्यु दर जैसे प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार से सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के सुदृढ़ होने का संकेत मिलता है।
- रणनीतिक लक्ष्य: राज्य का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है और वर्ष 2029 तक बजट तथा GSDP को दोगुना करने का उद्देश्य रखा गया है।