दिल्ली सरकार ने ANMOL योजना शुरू की | 27 Mar 2026
चर्चा में क्यों?
दिल्ली सरकार ने शिशु मृत्यु दर को कम करने और आनुवंशिक तथा चयापचय संबंधी विकारों की प्रारंभिक पहचान में सुधार के लिये नए ANMOL योजना (नवजात शिशुओं की उन्नत निगरानी और इष्टतम जीवन-देखभाल) के तहत सभी नवजात शिशुओं के लिये बड़े पैमाने पर निशुल्क जेनेटिक परीक्षण कार्यक्रम शुरू किया है।
मुख्य बिंदु:
- कार्यक्रम: ANMOL योजना के तहत दिल्ली के सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में सभी नवजात शिशुओं की 56 आनुवंशिक एवं चयापचय संबंधी विकारों के लिये निशुल्क जाँच की जाएगी, जिनमें जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म, फिनाइलकीटोनूरिया व सिस्टिक फाइब्रोसिस शामिल हैं।
- केरल भारत का एकमात्र राज्य है, जहाँ श्रवण क्षमता, जन्मजात हृदय दोषों और चयापचय विकारों के लिये पूर्ण पैमाने पर निशुल्क नवजात स्क्रीनिंग कार्यक्रम लागू किया गया है।
- उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य गंभीर वंशानुगत रोगों की पहचान लक्षण प्रकट होने से पहले करना है, ताकि समय रहते उपचार और देखभाल सुनिश्चित कर दिव्यांगता या मृत्यु को रोका जा सके।
- लाभ: इस योजना के तहत निशुल्क सेवाएँ प्रदान करने से परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा और महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच को बढ़ावा मिलेगा।
- जाँच प्रक्रिया: इस स्क्रीनिंग में नवजात शिशुओं के पैर की एड़ी से एक छोटी रक्त की बूंद (Heel prick) लेकर विशेष प्रयोगशालाओं में उसका विश्लेषण किया जाता है, जिससे रोग के लक्षण दिखाई देने से पहले ही वंशानुगत बीमारियों का पता लगाया जा सके।
- महत्त्व: आनुवंशिक विकारों की शीघ्र पहचान और समय पर हस्तक्षेप से अपरिवर्तनीय दिव्यांगताओं को रोका जा सकता है, दीर्घकालिक स्वास्थ्य में सुधार होता है और शिशु मृत्यु दर को कम करने में सहायता मिलती है जो भारत में एक महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है।
- शिशु मृत्यु दर (IMR): किसी विशेष वर्ष में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं की मृत्यु की संख्या।
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