CSIR-CRRI और JSW स्टील ने तमिलनाडु में स्टील स्लैग सड़कें बनाने के लिये साझेदारी की | 28 Jan 2026
चर्चा में क्यों?
औद्योगिक अपशिष्ट को उपयोगी अवसंरचना में बदलने की एक ऐतिहासिक पहल के तहत केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CSIR-CRRI) ने तमिलनाडु में इस्पात निर्माण के उप-उत्पाद स्टील स्लैग का उपयोग कर सड़कें बनाने के लिये JSW स्टील लिमिटेड, सलेम वर्क्स के साथ साझेदारी की है।
मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य: इस्पात निर्माण से निकलने वाले औद्योगिक उप-उत्पादों (अपशिष्ट) को सड़क निर्माण के लिये उच्च गुणवत्ता वाले एग्रीगेट्स में परिवर्तित करना।
- इससे सतत, पर्यावरण-अनुकूल सड़कें बनने की उम्मीद है और पर्यावरणीय प्रभाव में उल्लेखनीय कमी आएगी।
- तकनीकी फोकस: परियोजना में CSIR-CRRI द्वारा विकसित पेटेंट प्राप्त स्टील स्लैग रोड तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिसे पहले गुजरात, झारखंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है।
- वैलोरीकरण प्रक्रिया: यह सहयोग इलेक्ट्रिक ऑप्टिमाइज़ेशन फर्नेस (EOF) और लैडल रिफाइनिंग फर्नेस (LRF) से निकलने वाले स्टील स्लैग को बिटुमिनस सड़कों के लिये प्रसंस्कृत एग्रीगेट्स में तकनीकी-आर्थिक रूप से परिवर्तित करने पर केंद्रित है।
- प्रदर्शन परियोजना: समझौते के हिस्से के रूप में, क्षेत्र के प्रदर्शन और स्थायित्व को प्रमाणित करने के लिये सलेम के पास एक प्रदर्शन सड़क खंड का निर्माण किया जाएगा।
- संस्थागत नेतृत्व: समझौता ज्ञापन (MoA) पर CSIR की महानिदेशक और DSIR की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी की उपस्थिति में दोनों संगठनों के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ हस्ताक्षर किये गए।
- सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा: औद्योगिक अपशिष्ट को निर्माण संसाधन के रूप में उपयोग कर भारत की संसाधन दक्षता और सतत विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाता है।
- पर्यावरणीय लाभ: कार्बन फुटप्रिंट तथा प्राकृतिक एग्रीगेट्स पर निर्भरता कम करने में सहायता करता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और पर्यावरणीय क्षरण में कमी आती है।
- क्षेत्रीय प्रभाव: यह तमिलनाडु में स्टील स्लैग सड़क तकनीक का पहला प्रयोग है, जो आगे चलकर अन्य भारतीय राज्यों में इसके व्यापक प्रसार का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
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