हिमाचल प्रदेश में देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन | 14 Feb 2026
चर्चा में क्यों?
पहाड़ी पर्यटन और पुष्पोत्पादन को एक महत्त्वपूर्ण बढ़ावा देते हुए, CSIR–हिमालयी जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (IHBT) ने काँगड़ा ज़िले के पालमपुर में स्थित अपना ट्यूलिप गार्डन आधिकारिक रूप से आम जनता के लिये खोल दिया है।
मुख्य बिंदु:
- दूसरा ट्यूलिप गार्डन: यह देश का दूसरा प्रमुख ट्यूलिप गार्डन है, जो श्रीनगर (जम्मू एवं कश्मीर) स्थित इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन के बाद आता है, जो एशिया का सबसे बड़ा और सबसे प्रसिद्ध ट्यूलिप गार्डन है।
- रणनीतिक स्थान: लगभग 1,290 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह उद्यान धौलाधार पर्वतमाला की विशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियों का लाभ उठाता है।
- विविधता और विस्तार: उद्यान में 50,000 से अधिक ट्यूलिप हैं, जो लाल, पीले, गुलाबी और सफेद सहित कई किस्मों तथा रंगों में हैं।
- अनुसंधान एकीकरण: यह केवल एक वाणिज्यिक उद्यान नहीं है, बल्कि CSIR-IHBT, पालमपुर द्वारा प्रबंधित एक अनुसंधान-सह-प्रदर्शन प्लॉट है।
- यह स्वदेशी बल्ब उत्पादन के परीक्षण का केंद्र है, जिससे नीदरलैंड से आयात पर भारत की निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है।
- पुष्पोत्पादन को बढ़ावा: यह उद्यान स्थानीय किसानों के लिये एक ‘तकनीकी केंद्र’ के रूप में कार्य करता है और हिमाचल प्रदेश में ट्यूलिप की कृषि को एक उच्च-मूल्य नकदी फसल के रूप में उसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता प्रदर्शित करता है।
- पर्यटन परिपथ: यह उद्यान काँगड़ा पर्यटन परिपथ में एक नया आयाम जोड़ता है और ‘शोल्डर सीज़न’ (देर शीतकाल/प्रारंभिक वसंत) के दौरान पर्यटकों को आकर्षित करता है, जब पारंपरिक हिम-पर्यटन धीरे-धीरे कम होने लगता है।
- जैव-विविधता संरक्षण: संस्थान इस मंच का उपयोग आगंतुकों को हिमालयी पुष्प विविधता के महत्त्व के बारे में जागरूक करने के लिये करता है।
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