दृष्टि के NCERT कोर्स के साथ करें UPSC की तैयारी और जानें
ध्यान दें:

State PCS Current Affairs



राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स

कैबिनेट ने ‘कपास उत्पादकता मिशन’ को स्वीकृति दी

  • 06 May 2026
  • 14 min read

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कपास उत्पादकता मिशन (MCP) को ₹5,659.22 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ स्वीकृति दी है, जिसे वर्ष 2030–31 तक लागू किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य कपास उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करना और वैश्विक वस्त्र बाज़ारों में भारत की प्रतिस्पर्द्धात्मकता को बढ़ाना है। 

मुख्य बिंदु: 

  • मिशन के उद्देश्य: बेहतर बीजों और वैज्ञानिक पद्धतियों के माध्यम से कपास की उत्पादकता बढ़ाना। 
    • आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना: एक्स्ट्रा-लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास के आयात पर निर्भरता को कम करना।
    • किसानों की आय बढ़ाना: कपास किसानों की आय/लाभ बढ़ाना। 
    • निर्यात प्रतिस्पर्द्धात्मकता बढ़ाना: वर्ष 2030-31 तक वैश्विक कपड़ा मूल्य शृंखला में भारत की स्थिति को मज़बूत करना।
  • अनुसंधान और विकास (R&D): भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) जैसे संस्थानों के माध्यम से उच्च उपज देने वाली, जलवायु-अनुकूल और कीट-प्रतिरोधी कपास की किस्मों का विकास करना।
    • प्रौद्योगिकी अपनाना: आधुनिक कृषि पद्धतियों, सटीक कृषि और मशीनीकरण को बढ़ावा देना।
    • कीट प्रबंधन: 'पिंक बोलवर्म' (गुलाबी सुंडी) जैसे कीटों के प्रकोप से निपटने के लिये  एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) पर ध्यान केंद्रित करना।
    • गुणवत्ता में सुधार: वैश्विक वस्त्र मानकों को पूरा करने के लिये बेहतर फाइबर गुणवत्ता पर ज़ोर देना।
    • क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण: बेहतर परिणामों के लिये प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में केंद्रित हस्तक्षेप करना। 
  • चुनौतियाँ: भारत विश्व स्तर पर कपास के सबसे बड़े उत्पादकों और उपभोक्ताओं में से एक है। हालाँकि, ब्राज़ील और चीन जैसे वैश्विक दिग्गजों की तुलना में उत्पादकता अभी भी काफी कम (लगभग 450-500 किलोग्राम लिंट/हेक्टेयर) बनी हुई है। 
  • समस्याएँ: कीटों के हमले (विशेष रूप से पिंक बोलवर्म), जलवायु परिवर्तनशीलता और पैदावार में ठहराव जैसे मुद्दों ने उत्पादन को प्रभावित किया है।
close
Share Page
images-2
images-2