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मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाकर 37 करने की स्वीकृति दी
- 06 May 2026
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चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत का सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर 37 करने (भारत के मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।
मुख्य बिंदु:
- भारत के संविधान का अनुच्छेद 124: यह सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना का प्रावधान करता है और यह बताता है कि न्यायाधीशों की संख्या संसद द्वारा कानून के माध्यम से निर्धारित की जाएगी।
- सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956: यह न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या निर्धारित करता है। अंतिम बड़ा संशोधन वर्ष 2019 में हुआ था, जब न्यायाधीशों की संख्या 31 से बढ़ाकर 34 की गई थी।
- 2026 (प्रस्तावित): 37 न्यायाधीश
- भारत के संविधान का अनुच्छेद 145: सर्वोच्च न्यायालय को अपनी कार्यप्रणाली और प्रक्रिया को विनियमित करने के लिये नियम बनाने का अधिकार प्रदान करता है, जिसमें पीठ का गठन भी शामिल है।
- आवश्यकता: वर्ष 2026 तक भारत का सर्वोच्च न्यायालय में लगभग 80,000 से अधिक लंबित मामले हैं, जिनमें संवैधानिक मामले तथा दीवानी/फौजदारी अपीलें शामिल हैं।
- न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात कम: भारत में प्रति दस लाख जनसंख्या पर लगभग 21 न्यायाधीश हैं (निचली न्यायपालिका सहित), जो अमेरिका जैसे देशों (~100+) की तुलना में काफी कम है।
- विशेष अनुमति याचिकाओं (SLPs) का बोझ: भारत के संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत, बड़ी संख्या में अपीलें सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचती हैं, जिससे कार्यभार बढ़ जाता है।
- त्वरित न्याय पर ध्यान: सरकार ने कहा है कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से सर्वोच्च न्यायालय अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर सकेगा, लंबित मामलों में कमी आएगी और समयबद्ध न्याय तक पहुँच को सुदृढ़ किया जा सकेगा।
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और पढ़ें: सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 |