छत्तीसगढ़ में आदि परब 2026 महोत्सव | 17 Mar 2026

चर्चा में क्यों?

छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में दो दिवसीय जनजातीय सांस्कृतिक उत्सव 'आदि परब 2026' का आयोजन किया गया , जिसमें संपूर्ण भारत के जनजातीय समुदायों की समृद्ध कला, संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित किया गया।

मुख्य बिंदु:

  • परिचय: आदि परब 2026 एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य प्रदर्शनियों, प्रस्तुतियों और संवादों के माध्यम से जनजातीय पहचान, विरासत और पारंपरिक ज्ञान को बढ़ावा देना है।
    • यह महोत्सव मार्च 2026 में नवा रायपुर अटल नगर स्थित जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के परिसर में आयोजित किया गया था।
    • छत्तीसगढ़ के लगभग 43 जनजातीय समुदायों के साथ-साथ मध्य प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड जैसे राज्यों के प्रतिभागियों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया।
  • विषय: इस महोत्सव का आयोजन ‘परंपरा से पहचान तक’ विषय के अंतर्गत किया गया।
  • उद्देश्य: इस आयोजन का उद्देश्य जनजातीय कला, संस्कृति, परंपराओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करना और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित करना था।
  • सांस्कृतिक विविधता: इस महोत्सव में जनजातीय कला, हस्तशिल्प, पारंपरिक वेशभूषा, व्यंजन और लोक प्रस्तुतियों की प्रदर्शनियाँ शामिल थीं, जो विभिन्न जनजातीय जीवन शैलियों का प्रतिनिधित्व करती थीं। 
    • आदि परिधान: एक विशेष आदिवासी परिधान प्रदर्शनी में विभिन्न आदिवासी समूहों के पारंपरिक परिधानों और सांस्कृतिक विशेषताओं को एक ही मंच पर प्रदर्शित किया गया।
    • आदि रंग: जनजातीय चित्रकला महोत्सव में प्रकृति, पर्यावरण और जनजातीय जीवन से संबंधित विषयों पर आधारित कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया।
    • आदि हाट: जनजातीय शिल्प मेले में हस्तशिल्प, वन उत्पाद तथा पारंपरिक वस्तुओं का प्रदर्शन और बिक्री की गई, जिससे स्थानीय कारीगरों और उनकी आजीविका को बढ़ावा मिला।
  • सरकारी पहल: यह कार्यक्रम राज्य के जनजातीय विकास विभाग के अंतर्गत जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा जनजातीय मामलों के मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया गया था।
  • महत्त्व: यह महोत्सव सांस्कृतिक संरक्षण को बढ़ावा देता है, जनजातीय कारीगरों का समर्थन करता है, पर्यटन को प्रोत्साहित करता है तथा जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सुदृढ़ करता है। 

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