दिवस: 91: भारत में बढ़ते साइबर धोखाधड़ी के मामलों के प्रभावों का विश्लेषण कीजिये। साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और डिजिटल वित्तीय लेन-देन को सुरक्षित बनाने के लिये कौन-से प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं? (250 शब्द)
18 Mar 2025 | सामान्य अध्ययन पेपर 3 | विज्ञान-प्रौद्योगिकी
हल करने का दृष्टिकोण:
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भारत में वित्त वर्ष 2024 में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में चार गुना वृद्धि देखी गई है, जिससे 20 मिलियन डॉलर का वित्तीय नुकसान हुआ है। यह उछाल डिजिटल वित्तीय लेन-देन में उपभोक्ता के विश्वास को खतरे में डालता है, व्यवसायों को प्रभावित करता है और साइबर सुरक्षा नियमों में खामियों को उजागर करता है। इस बढ़ते खतरे का मुकाबला करने के लिये, तकनीकी उन्नयन, नियामक सुधार और जन-जागरूकता पहल महत्त्वपूर्ण हैं।
भारत में बढ़ती साइबर धोखाधड़ी के निहितार्थ:
साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के कारण:
साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और डिजिटल वित्तीय लेन-देन की सुरक्षा के उपाय:
साइबर धोखाधड़ी में वृद्धि के लिये मज़बूत नियमन, उन्नत सुरक्षा उपाय और सार्वजनिक जागरूकता की आवश्यकता है। एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण भारत के डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा कर सकता है और सुरक्षित लेन-देन सुनिश्चित कर सकता है।
दिवस- 72: भारत में व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने की दिशा में ग्रामीण-शहरी असमानताओं को दूर करने के लिये सार्वभौमिक पहुँच, निवारक देखभाल और डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों के समन्वय की क्या भूमिका है? व्याख्या कीजिये। (250 शब्द)
हल करने का दृष्टिकोण:
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1.4 बिलियन की आबादी वाला भारत अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे, उच्च आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय (OOPE) और ग्रामीण-शहरी असमानताओं सहित महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य देखभाल चुनौतियों का सामना कर रहा है। व्यापक स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिये, भारत को स्वास्थ्य सेवा असमानताओं को पाटने के लिये सार्वभौमिक पहुँच, निवारक देखभाल और डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये।
सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच सुनिश्चित करना
निवारक स्वास्थ्य सेवा को मज़बूत बनाना
डिजिटल स्वास्थ्य समाधान का लाभ उठाना
भारत का स्वास्थ्य सेवा भविष्य सार्वभौमिक पहुँच, निवारक देखभाल और डिजिटल नवाचार में निहित है, जो स्वास्थ्य को राष्ट्रीय प्रगति के स्तंभ में बदल देगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय बढ़ाकर और ग्रामीण-शहरी असमानताओं को कम करके, भारत एक समावेशी, सतत् और भविष्य के लिये तैयार स्वास्थ्य सेवा प्रणाली विकसित कर सकता है।