Sambhav-2025

दिवस: 91: भारत में बढ़ते साइबर धोखाधड़ी के मामलों के प्रभावों का विश्लेषण कीजिये। साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और डिजिटल वित्तीय लेन-देन को सुरक्षित बनाने के लिये कौन-से प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं? (250 शब्द)

18 Mar 2025 | सामान्य अध्ययन पेपर 3 | विज्ञान-प्रौद्योगिकी

दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर

हल करने का दृष्टिकोण:

  • परिचय में, भारत में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में वृद्धि और इसके प्रभाव का संक्षेप में उल्लेख कीजिये।
  • बढ़ती साइबर धोखाधड़ी के कारण और निहितार्थ पर चर्चा कीजिये।
  • डिजिटल वित्तीय लेन-देन की सुरक्षा के लिये कदम बताइये।
  • उचित निष्कर्ष दीजिये।

परिचय:

भारत में वित्त वर्ष 2024 में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में चार गुना वृद्धि देखी गई है, जिससे 20 मिलियन डॉलर का वित्तीय नुकसान हुआ है। यह उछाल डिजिटल वित्तीय लेन-देन में उपभोक्ता के विश्वास को खतरे में डालता है, व्यवसायों को प्रभावित करता है और साइबर सुरक्षा नियमों में खामियों को उजागर करता है। इस बढ़ते खतरे का मुकाबला करने के लिये, तकनीकी उन्नयन, नियामक सुधार और जन-जागरूकता पहल महत्त्वपूर्ण हैं।

मुख्य भाग:

भारत में बढ़ती साइबर धोखाधड़ी के निहितार्थ:

  • आर्थिक प्रभाव:
    • वित्त वर्ष 2024 में 20 मिलियन डॉलर का घाटा भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और फिनटेक क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास कम करेगा।
    • MSME, स्टार्टअप और व्यक्तिगत उपभोक्ता वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं, जिससे लघु उद्यम एवं ऑनलाइन कारोबार बाधित हो रहा है।
    • धोखाधड़ी की प्रतिपूर्ति और सुरक्षा उपायों के उन्नयन के कारण बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं को अधिक लागत वहन करनी पड़ती है।
  • सामाजिक और मनोवैज्ञानिक परिणाम:
    • पीड़ितों को मानसिक परेशानी और डिजिटल लेन-देन का डर महसूस होता है, जिससे डिजिटल बैंकिंग का विकास धीमा हो जाता है।
    • सीमित डिजिटल साक्षरता वाले बुज़ुर्ग और ग्रामीण आबादी असमान रूप से प्रभावित होती है, जिससे वित्तीय असुरक्षा उत्पन्न होती है।
    • डिजिटल प्लेटफॉर्म में विश्वास की कमी टियर-2 और टियर-3 शहरों में कैशलेस लेन-देन को अपनाने में बाधा उत्पन्न करती है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएँ:
    • सीमा पार साइबर अपराध बढ़ गए हैं, विदेशी हैकिंग समूह भारतीय वित्तीय प्लेटफॉर्मों को निशाना बना रहे हैं
    • धोखाधड़ी वाले डिजिटल लेन-देन आतंकवाद के वित्तपोषण, धन शोधन और संगठित साइबर अपराध सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं।
  • कानूनी और डिजिटल गिरफ्तारी की चुनौतियाँ:
    • डिजिटल गिरफ्तारियों पर स्पष्ट कानूनी ढाँचे की कमी से साइबर कानूनों के दुरुपयोग और डिजिटल परिसंपत्तियों को अनधिकृत रूप से फ्रीज़ करने की चिंता बढ़ जाती है
    • विदेशी अधिकार क्षेत्र से काम करने वाले साइबर अपराधियों के लिये सुपरिभाषित प्रत्यर्पण नीतियों का अभाव।

साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के कारण:

  • तीव्र डिजिटल विस्तार:
    • भारत का UPI लेन-देन वर्ष 2023 में 139 ट्रिलियन रुपए से अधिक हो गया, जिससे यह साइबर अपराधियों के लिये एक आकर्षक लक्ष्य बन गया
    • मज़बूत सुरक्षा तंत्र के बिना फिनटेक प्लेटफॉर्मों को तेज़ी से अपनाने से वित्तीय लेन-देन में कमज़ोरियाँ उजागर होती हैं।
  • साइबर जागरूकता का अभाव:
    • कई उपयोगकर्त्ता फिशिंग हमलों, धोखाधड़ी वाली वेबसाइटों और घोटाले वाली कॉलों की पहचान करने में विफल रहते हैं, जिसके परिणामस्वरूप अक्सर वित्तीय धोखाधड़ी होती है।
    • ग्रामीण भारत में डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम सीमित हैं, जिससे साइबर भेद्यता बढ़ रही है।
  • कमज़ोर साइबर सुरक्षा बुनियादी ढाँचा:
    • साइबर सुरक्षा कानूनों में नियामक अंतराल के कारण साइबर अपराधियों की अपर्याप्त ट्रैकिंग और दंडात्मक कार्रवाई होती है
    • डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के कमज़ोर प्रवर्तन के कारण उपयोगकर्त्ताओं के डेटा उल्लंघन की संभावना बनी रहती है।
  • साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के उपाय:
    • साइबर सुरक्षित भारत पहल (2018): सरकारी अधिकारियों, विशेषकर CISO के लिये साइबर सुरक्षा जागरूकता और प्रशिक्षण को बढ़ाता है।
    • CERT-In: साइबर खतरों की पहचान करता है, उन्हें रोकता है और उन पर प्रतिक्रिया देता है, साथ ही अलर्ट, परामर्श एवं सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी करता है।
    • राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा रणनीति (NCSS) 2023 (ड्राफ्ट): साइबर अनुकूलन, डेटा संरक्षण, क्षमता निर्माण और निजी क्षेत्र के सहयोग पर केंद्रित है।
    • I4C (भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र): धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिये 1930 हेल्पलाइन सहित साइबर अपराध की रोकथाम और जाँच का समन्वय करता है।
    • साइबर स्वच्छता केंद्र: मैलवेयर, बॉटनेट का पता लगाता है और हटाता है तथा निशुल्क सुरक्षा उपकरण प्रदान करता है
    • डिजिटल फोरेंसिक को सुदृढ़ बनाना: साइबर अपराध मामलों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की जाँच के लिये IT अधिनियम, 2000 की धारा 79A के तहत 15 फोरेंसिक प्रयोगशालाएँ अधिसूचित की गईं।
    • डिजिटल इंडिया का साइबर सुरक्षा विस्तार: साइबर खतरों से डिजिटल लेन-देन और नागरिक डेटा को सुरक्षित करने के लिये NIC के तहत राष्ट्रीय डेटा सेंटर एवं क्लाउड विस्तार।
  • वित्तीय संस्थाओं की भूमिका: बैंकों को वास्तविक समय पर धोखाधड़ी संबंधी अलर्ट लागू करना चाहिये तथा ग्राहकों के लिये नियमित साइबर सुरक्षा कार्यशालाएँ आयोजित करनी चाहिये।
    • उच्च मूल्य के लेन-देन के लिये अनिवार्य बहु-कारक प्रमाणीकरण (MMF) और बायोमेट्रिक सत्यापन।
  • जन जागरूकता और प्रशिक्षण: साइबर अपराधों की तत्काल रिपोर्टिंग के लिये 1930 साइबर धोखाधड़ी हेल्पलाइन का प्रचार-प्रसार।
    • बेहतर पहुँच के लिये स्थानीय भाषाओं में क्षेत्रीय साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान शुरू करना।

साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने और डिजिटल वित्तीय लेन-देन की सुरक्षा के उपाय:

  • वित्तीय संस्थाओं एवं निजी क्षेत्र की भूमिका:
    • साइबर स्वच्छता प्रशिक्षण: बैंकों और फिनटेक कंपनियों को ग्राहकों के लिये नियमित रूप से साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने चाहिये।
    • सुरक्षित डिजिटल बैंकिंग अवसंरचना: AI-संचालित धोखाधड़ी का पता लगाने, एन्क्रिप्टेड भुगतान गेटवे और वास्तविक समय खतरे की निगरानी को लागू करना।
    • उपयोगकर्त्ता-अनुकूल धोखाधड़ी रिपोर्टिंग तंत्र: समर्पित बैंकिंग हॉटलाइन और चैटबॉट के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिये प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
  • जन-जागरूकता और डिजिटल साक्षरता को मज़बूत करना:
    • व्यवसायों और MSME के लिये साइबर सुरक्षा कार्यशालाएँ: फिशिंग, मैलवेयर सुरक्षा और सुरक्षित लेन-देन पर उद्योग-विशिष्ट प्रशिक्षण आयोजित करें।
    • बहुभाषी जागरूकता अभियान: क्षेत्रीय भाषा अभियानों के माध्यम से साइबर सुरक्षा शिक्षा को बढ़ावा देना, विविध आबादी तक पहुँच सुनिश्चित करना।
    • साइबर सुरक्षा उपकरणों के उपयोग को प्रोत्साहित करें: सुरक्षित लेन-देन के लिये पासवर्ड मैनेजर, VPN और डिजिटल पहचान सत्यापन उपकरणों को बढ़ावा दें।
  • सहयोग एवं तकनीकी नवाचार:
    • सार्वजनिक-निजी साइबर सुरक्षा साझेदारी: बैंकों, फिनटेक स्टार्टअप्स और IT फर्मों को साइबर खतरे की खुफिया जानकारी साझा करने में सहयोग करने के लिये प्रोत्साहित करें।
    • नियमित नैतिक हैकिंग और सुरक्षा ऑडिट: वित्तीय प्रणालियों में कमज़ोरियों का पता लगाने के लिये स्वतंत्र साइबर सुरक्षा आकलन का संचालन करें।
    • सुरक्षित डिजिटल प्रथाओं के लिये प्रोत्साहन: सुरक्षित बैंकिंग प्रथाओं, जैसे दो-कारक प्रमाणीकरण, का उपयोग करने वाले ग्राहकों के लिये छूट या पुरस्कार प्रदान करें।

निष्कर्ष:

साइबर धोखाधड़ी में वृद्धि के लिये मज़बूत नियमन, उन्नत सुरक्षा उपाय और सार्वजनिक जागरूकता की आवश्यकता है। एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण भारत के डिजिटल वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा कर सकता है और सुरक्षित लेन-देन सुनिश्चित कर सकता है

दिवस- 72: भारत में व्यापक स्वास्थ्य सेवा प्राप्त करने की दिशा में ग्रामीण-शहरी असमानताओं को दूर करने के लिये सार्वभौमिक पहुँच, निवारक देखभाल और डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों के समन्वय की क्या भूमिका है? व्याख्या कीजिये। (250 शब्द)

22 Feb 2025 | सामान्य अध्ययन पेपर 2 | राजव्यवस्था

दृष्टिकोण / व्याख्या / उत्तर

हल करने का दृष्टिकोण:

  • भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास में स्वास्थ्य सेवा के महत्त्व का संक्षेप में परिचय दीजिये।
  • भारतीय स्वास्थ्य सेवा में सार्वभौमिक पहुँच, निवारक देखभाल और डिजिटल स्वास्थ्य समाधान की आवश्यकता को समझाइये।
  • कुछ आँकड़ों और तथ्यों के साथ बिंदुओं को पुष्ट कीजिये।
  • उचित निष्कर्ष दीजिये।

परिचय : 

1.4 बिलियन की आबादी वाला भारत अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे, उच्च आउट-ऑफ-पॉकेट व्यय (OOPE) और ग्रामीण-शहरी असमानताओं सहित महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य देखभाल चुनौतियों का सामना कर रहा है। व्यापक स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिये, भारत को स्वास्थ्य सेवा असमानताओं को पाटने के लिये सार्वभौमिक पहुँच, निवारक देखभाल और डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये।

मुख्य भाग: 

सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच सुनिश्चित करना

  • आवश्यकता:
    • बुनियादी ढाँचे का अंतराल: 75% स्वास्थ्य सुविधाएँ शहरी क्षेत्रों में हैं, जबकि 65% भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं।
    • सीमित वित्तपोषण और संसाधन: हालाँकि भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, लेकिन वित्त वर्ष 2023 में इसका स्वास्थ्य सेवा व्यय जीडीपी का मात्र 2.1% रहा, जो अधिकांश देशों के 5-12.5% ​​व्यय की तुलना में काफी कम है।
    • डॉक्टरों की कमी: भारत में वर्ष 2022 में प्रति 1,511 लोगों पर 1 डॉक्टर होगा। (WHO मानक: 1:1,000)।
  • व्यक्तिगत खर्च पर निर्भरता: राष्ट्रीय स्वास्थ्य लेखा (NHA) के अनुसार, भारत में कुल स्वास्थ्य व्यय का 39.4% हिस्सा जेब से किये जाने वाले खर्च से आता है, जिससे परिवारों पर गंभीर वित्तीय भार पड़ता है।
  • सरकारी पहल:
    • आयुष्मान भारत-PMJYE: 10 करोड़ कमज़ोर परिवारों को ₹5 लाख का बीमा कवरेज प्रदान करता है।
    • स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (HWC): इसका उद्देश्य पूरे भारत में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करना है।
    • राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NUHM): शहरी मलिन बस्तियों की आबादी पर ध्यान केंद्रित करता है।
  • आगामी कदम: राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में उल्लिखित अनुसार, सामुदायिक स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना और सेवाओं को मज़बूत करने पर विशेष ध्यान देते हुए, वर्ष 2025 तक सरकारी स्वास्थ्य सेवा व्यय को सकल घरेलू उत्पाद के 2.5% तक बढ़ाना।

निवारक स्वास्थ्य सेवा को मज़बूत बनाना

  • आवश्यकता:
    • मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी गैर-संचारी बीमारियाँ (NCD) 63% मौतों का कारण बनती हैं
    • खराब स्वच्छता और कुपोषण के कारण शिशु और मातृ मृत्यु दर उच्च है
  • सरकारी प्रयास:
    • स्वच्छ भारत अभियान (SBA): बेहतर स्वच्छता के माध्यम से जलजनित रोगों में कमी।
    • पोषण अभियान: बच्चों में कुपोषण और बौनेपन से निपटना।
    • मिशन इंद्रधनुष: पूरे भारत में टीकाकरण कवरेज का विस्तार।
  • आगामी कदम: व्यापक जागरूकता अभियान को बढ़ावा देना, गैर-संचारी रोगों के लिये स्क्रीनिंग का विस्तार करना तथा पारंपरिक चिकित्सा (आयुष) को प्राथमिक देखभाल में एकीकृत करना।

डिजिटल स्वास्थ्य समाधान का लाभ उठाना

  • आवश्यकता:
    • टेलीमेडिसिन: दूरस्थ विशेषज्ञ परामर्श की सुविधा प्रदान कर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच की स्वास्थ्य सेवाओं की खाई को कम करता है।
    • कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): रोग का शीघ्र पता लगाने और निदान में मदद करती है।
    • राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (NDHM): निर्बाध रोगी देखभाल के लिये इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड स्थापित करता है।
  • सरकारी पहल:
    • ई-संजीवनी: 1.4 करोड़ टेली-परामर्श (2023) की सुविधा प्रदान की गई, जिससे दूर-दराज़ के क्षेत्रों में पहुँच में सुधार हुआ।
    • CoWIN प्लेटफॉर्म: कुशल COVID-19 वैक्सीन वितरण सुनिश्चित किया गया

निष्कर्ष

भारत का स्वास्थ्य सेवा भविष्य सार्वभौमिक पहुँच, निवारक देखभाल और डिजिटल नवाचार में निहित है, जो स्वास्थ्य को राष्ट्रीय प्रगति के स्तंभ में बदल देगा। सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय बढ़ाकर और ग्रामीण-शहरी असमानताओं को कम करके, भारत एक समावेशी, सतत् और भविष्य के लिये तैयार स्वास्थ्य सेवा प्रणाली विकसित कर सकता है।