पीआरएस कैप्सूल्स

जुलाई 2018 | 14 Nov 2018 | विविध

PRS कैप्सूल जुलाई 2018

PRS की प्रमुख हाइलाइट्स

  1.  भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक 2018
  2.  डाटा प्राइवेसी पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट
  3.  मध्यस्थता और सुलह (संशोधन) विधेयक, 2018
  4.  कमर्शियल अदालत (संशोधन विधेयक), 2018
  5.  जुआ खेलने और सट्टेबाज़ी के कानूनी ढाँचे पर विधि आयोग की रिपोर्ट
  6.  भ्रष्टाचार निरोधक विधेयक, 2018
  7.  दिवाला एवं दिवालियापन संहिता (संशोधन) विधेयक, 2018
  8.  शिक्षा का अधिकार (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2017
  9.  राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय विधेयक, 2018
  10.  सरकार द्वारा छह उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थानों की घोषणा
  11.  डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018 को मंज़ूरी
  12.  होम्योपैथी केंद्रीय परिषद का अधिग्रहण करने के लिये विधेयक
  13.  भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2018
  14.  मानव तस्‍करी (निवारण, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक, 2018
  15.  पेट्रोलियम क्षेत्र में बचाव, सुरक्षा और पर्यावरण पहलुओं पर स्थायी समिति की रिपोर्ट
  16.  आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक, 2018
  17.  पूर्वोत्तर में सुरक्षा की स्थिति पर स्थायी समिति की रिपोर्ट
  18.  सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक
  19.  मॉब हिंसा तथा लिंचिंग की जाँच के लिये उच्चस्तरीय समिति का गठन 
  1. भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक, 2018

चर्चा में क्यों?

भगोड़ा आर्थिक अपराधी विधेयक को संसद ने पारित कर दिया है। यह विधेयक ऐसे आर्थिक अपराधियों की संपत्ति को ज़ब्त करने का प्रयास करता है जो आपराधिक मुकदमे से बचने के लिये देश छोड़ चुके हैं।

कौन है भगोड़ा आर्थिक अपराधी?

भगोड़ा आर्थिक अपराधी को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है जिसके खिलाफ किसी अपराध (अनुसूची में दर्ज) के संबंध में गिरफ्तारी को लेकर वारंट जारी किया गया है। इसके अतिरिक्त उस व्यक्ति ने-

  1. मुक़दमे से बचने के लिये देश छोड़ दिया है या
  2. मुकदमे का सामना करने से बचने के लिये देश लौटने से इनकार कर दिया हो।

अनुसूची में दर्ज अपराधों में से कुछ प्रमुख अपराध इस प्रकार हैं-

  1. नकली सरकारी स्टाम्प या करेंसी बनाना।
  2. पर्याप्त धन न होने के कारण चेक का भुनाया न जाना।
  3. मनी लॉन्ड्रिंग।
  4. क्रेडिटर्स के साथ लेन-देन में धोखाधड़ी करना।

यह विधेयक केंद्र सरकार को अधिसूचना के ज़रिये इस अनुसूची में संशोधन की अनुमति देता है। 

भगोड़ा आर्थिक अपराधी की घोषणा

आवेदन पर सुनवाई के बाद विशेष अदालत किसी व्यक्ति को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर सकती है।

विशेष अदालत निम्नलिखित संपत्तियों को ज़ब्त कर सकती है-

  1. अपराध से प्राप्त आय।
  2. बेनामी संपत्ति।
  3. भारत में या विदेश में कोई अन्य संपत्ति।

ज़ब्ती के बाद संपत्ति से संबंधित सभी अधिकार और टाइटल केंद्र सरकार में निहित होंगे लेकिन केंद्र सरकार संपत्ति से जुड़ी सभी देनदारियों से मुक्त होगी।

केंद्र सरकार इन संपत्तियों के प्रबंधन या निस्तारण के लिये एक प्रशासक नियुक्त कर सकती है।

सिविल दावा दायर करने पर रोक : यह विधेयक सिविल अदालत या न्यायाधिकरण को यह अनुमति देता है कि वे किसी ऐसे व्यक्ति, जिसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है को सिविल दावा दायर करने या अपनी सफाई देने की अनुमति न दे।

विशेष अदालत : विशेष अदालत प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग कर सकती हैं, विशेष अदालत की शक्तियाँ सिविल अदालत के समान ही होंगी। इन शक्तियों में शामिल हैं:

  1. यह मानकर किसी स्थान में प्रवेश करना कि व्यक्ति भगोड़ा आर्थिक अपराधी है, और
  2. यह निर्देश देना कि किसी इमारत की तलाशी ली जाए या दस्तावेज़ों को ज़ब्त किया जाए।

2. डाटा प्राइवेसी पर विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट

भारत के लिये डेटा संरक्षण फ्रेमवर्क पर विशेषज्ञों की समिति (जिसके अध्यक्ष अध्यक्ष न्यायमूर्ति बी.एन. श्रीकृष्ण हैं) ने अपनी रिपोर्ट तथा विधेयक का मसौदा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौंप दिया। इसे डेटा संरक्षण से संबंधित मुद्दों की जाँच करने, उन्हें संबोधित करने के तरीकों की सिफारिश करने तथा डेटा संरक्षण विधेयक का मसौदा तैयार करने हेतु अगस्त 2017 में गठित किया गया था।

समिति ने पाया कि विनियामक फ्रेमवर्क को किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत डेटा के संबंध में उसके हितों तथा कंपनी, जैसे- सेवा प्रदाता जिसके पास डेटा है, के हितों के बीच संतुलन स्थापित करना होगा।

समिति ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति तथा सेवा प्रदाता के बीच के संबंध को भरोसेमंद रिश्ते के रूप में देखना चाहिये। ऐसा सेवा प्राप्त करने हेतु सेवा प्रदाता पर किसी व्यक्ति की निर्भरता के कारण होता है। इसलिये, डेटा प्रोसेस करने वाले सेवा प्रदाता का यह दायित्व बनता है कि किसी व्यक्ति के डेटा के इस्तेमाल में सावधानी बरते और केवल अधिकृत उद्देश्यों के लिये इसका उपयोग करे।

मुख्य प्रावधान:

3.मध्‍यस्‍थता और सुलह (संशोधन) विधयेक, 2018

प्रमुख विशेषताएँ

समय-सीमा में छूट: अधिनियम, 1996 के तहत मध्यस्थता न्यायाधिकरणों को सभी मध्यस्थता कार्यवाहियों के लिये 12 महीने की अवधि के भीतर अपना निर्णय देना आवश्यक है। विधेयक में अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता हेतु इस प्रतिबंध को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है।

4. कमर्शियल अदालत (संशोधन विधेयक), 2018

कमर्शियल अदालतें, उच्च न्यायालयों की कमर्शियल डिवीज़न और कमर्शियल अपीलीय डिवीज़न (संशोधन) विधेयक, 2018 को लोकसभा में पेश किया गया। यह विधेयक कमर्शियल अदालतें, उच्च न्यायालयों की कमर्शियल डिवीज़न और कमर्शियल अपीलीय डिवीज़न अधिनियम, 2015 में संशोधन करता है।

विधेयक के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान

5. सट्टेबाजी और जुए के लिये कानूनी ढाँचे पर विधि आयोग की रिपोर्ट

भारत के लॉ कमीशन ने एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें इस बात की जाँच की गई कि क्या भारत में सट्टेबाजी को वैध बनाया जा सकता है। 2016 में सर्वोच्च न्यायालय ने कमीशन से सट्टेबाजी को विनियमित करने के लिये कानून बनाए जाने की संभावना की जाँच करने को कहा था।  

कमीशन द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट के अनुसार, सट्टेबाजी और जुए पर प्रतिबंध वांछनीय है, लेकिन इसे पूरी तरह से रोकना बहुत मुश्किल है। इसलिये कमीशन ने सट्टेबाजी और जुए को विनियमित करने का सुझाव दिया है।

महत्त्वपूर्ण सिफारिशें:

6. भ्रष्टाचार निवारण विधेयक, 2018

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 में संशोधन करने के लिये संसद द्वारा भ्रष्टाचार निवारण विधेयक, 2018 पारित किया गया।

मुख्य विशेषताएँ

मामलों की सुनवाई के लिये समयावधि: विधेयक के अनुसार, दो वर्ष के भीतर विशेष न्यायाधीश द्वारा मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का प्रयास किया जाना चाहिये। अभिलिखित कारणों की वज़ह से इस अवधि को एक बार में छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है। हालाँकि सुनवाई पूरी करने की कुल अवधि चार वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिये।

7. इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2018

संदर्भ

23 जुलाई, 2018 को इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2018 को पेश किया गया। यह विधेयक इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता, 2016 में संशोधन करता है तथा इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2018 का स्थान लेता है जिसे 6 जून, 2018 को जारी किया गया था।

प्रमुख विशेषताएँ

कमिटी ने मार्च 2018 में अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए कई सुझाव दिये, जैसे-सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम दर्जे के उपक्रमों को संहिता के कुछ प्रावधानों से छूट दी जाए, रियल इस्टेट के पट्टेदारों को फाइनेंसियल क्रेडिटर्स के तौर पर देखा जाए। इसके बाद 6 जून, 2018 को इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी संहिता (संशोधन) अध्यादेश, 2018 जारी किया गया।

8. निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2017 

संदर्भ

निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2017 लोकसभा द्वारा पास कर दिया गया है। परंतु यह अभी राज्यसभा में लंबित है। नो डिटेंशन प्रावधान को हटाने के लिये निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 में संशोधन हेतु लोकसभा में निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार (संशोधन) विधेयक, 2017 पेश किया गया था।

निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009

इस अधिनियम के अंतर्गत छह से चौदह वर्ष के बीच के सभी बच्चों को अपने पड़ोस के स्कूल में प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 1-8) प्राप्त करने का अधिकार है। इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, प्राथमिक शिक्षा समाप्त होने तक किसी भी बच्चे को किसी भी कक्षा में रोका नहीं जा सकता है। अगली कक्षा में स्वतः प्रमोशन से यह सुनिश्चित होता है कि पहले की कक्षा में बच्चे को न रोकने के परिणामस्वरूप वह स्कूल नहीं छोड़ता है।

हाल ही के वर्षों में विशेषज्ञ कमेटियों ने इस अधिनियम के नो डिटेंशन प्रावधान की समीक्षा की और यह सुझाव दिया कि इसे हटा दिया जाए या चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाय।

विधेयक की मुख्य विशेषताएँ

मुख्य मुद्दे एवं विश्लेषण

9. राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय विधेयक, 2018

संदर्भ

23 जुलाई, 2018 को लोकसभा में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय विधेयक पेश किया गया। यह विधेयक राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय अध्यादेश, 2018 का स्थान लेता है जिसे 31 मई, 2018 को जारी किया गया था। इस विधेयक के तहत मणिपुर में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रावधान है।

विश्वविद्यालय की स्थापना

राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय के मुख्यालय की स्थापना मणिपुर में की जाएगी। यह मुख्यालय दूरस्थ क्षेत्रों में कैंपस, कॉलेज या क्षेत्रीय केंद्रों की स्थापना करने में सक्षम होगा।

विश्वविद्यालय के कार्य इस प्रकार हैं:

  1. शारीरिक शिक्षा पर शोध
  2. खेल के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को मज़बूती देना

विश्वविद्यालय के प्राधिकार

  1. कोर्ट (सभा), जो विश्वविद्यालय की व्यापक नीतियों की समीक्षा करेगा तथा उनके विकास के लिये उचित उपाय सुझाएगा।
  2. कार्यकारी परिषद, जो मुख्य कार्यकारी की भूमिका निभाएगी।
  1. खेल अध्ययन बोर्ड अनुसंधान के विषयों को मंज़ूरी देगा और शिक्षण के मानदंडों में सुधर के लिये उपाय सुझाएगा।
  2. वित्त समिति विभिन्न पदों के सृजन से संबंधित प्रस्तावों की जाँच करेगी और विश्वविद्यालय द्वारा किये जाने वाले व्यय की सीमा के संबंध में सुझाव देगी।

केंद्र सरकार की भूमिका

केंद्र सरकार विश्वविद्यालय के कामकाज की समीक्षा और निरिक्षण करेगी। कार्यकारी परिषद केंद्र द्वारा प्रस्तुत निरीक्षण के निष्कर्षों के आधार पर कार्रवाई करेगी। यदि निश्चित समय-सीमा के अंदर परिषद कार्रवाई नहीं करती है तो केंद्र सरकार बाध्यकारी निर्देश जारी कर सकती है। 

10 .सरकार द्वारा छह उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थानों की घोषणा

हाल ही में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने छह उच्च शिक्षा संस्थानों को उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थान घोषित किया। गौरतलब है कि मंत्रालय ने अनुसंधान कार्य को बढ़ाने और भारतीय शैक्षणिक संस्थानों की वैश्विक रैंकिंग में सुधार के लिये विश्व स्तरीय विश्वविद्यालय बनाने की अपनी योजना के तहत छह उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थानों की घोषणा की है।

मंत्रालय द्वारा चुने गए संस्थान: घोषित किये गए इन छह संस्थानों में से 3 संस्थान सार्वजानिक क्षेत्र से जबकि अन्य 3 निजी क्षेत्र से हैं।

सार्वजनिक क्षेत्र :

निजी क्षेत्र :

उत्कृष्ट शैक्षणिक संस्थानों की विशेषताएँ: 

11. डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018 को मंज़ूरी 

चर्चा में क्यों?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2018 (DNA Technology (Use and Application) Regulation Bill, 2018) को मंज़ूरी दे दी है जो कानून प्रवर्तन एजेंसियों को डीएनए के नमूने एकत्र करने, ‘डीएनए प्रोफाइल’ बनाने और अपराधों की फोरेंसिक जाँच के लिये विशेष डेटाबेस तैयार करने की अनुमति देता है।

विधेयक का उद्देश्य 

इस विधेयक का उद्देश्य अपराधों की जाँच दर में बढ़ोतरी के साथ देश की न्यायिक प्रणाली को समर्थन देने एवं उसे सुदृढ़ बनाने के लिये डीएनए आधारित फोरेंसिक प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग को विस्तारित करना है।

प्रमुख बिंदु 

12. होम्योपैथी केंद्रीय परिषद का अधिग्रहण करने के लिये विधेयक 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में लोकसभा द्वारा होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2018 पारित किया गया। इसके अंतर्गत होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 में संशोधन करने का प्रावधान किया गया है।

विधेयक के प्रमुख प्रावधान

संशोधन की आवश्यकता क्यों है?

पृष्ठभूमि

13. भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2018

भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2018 भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण अधिनियम, 2008 में संशोधन करता है। इसी अधिनियम के तहत भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण (AERA) की स्थापना की गई थी। AERA प्रतिवर्ष 15 लाख से अधिक यात्रियों के आवागमन की क्षमता वाले नागरिक हवाई अड्डे पर प्रदान की जाने वाली वैमानिक सेवाओं के लिये टैरिफ तथा अन्य शुल्कों को विनियमित करता है। यह इन हवाई अड्डों में सेवाओं के मानक प्रदर्शन पर भी नज़र रखता है।

विधेयक की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं-

इस विधेयक के अनुसार AERA (i) टैरिफ (ii) टैरिफ संरचना या (iii) कुछ मामलों में विकास शुल्क का निर्धारण नहीं करेगा। इसमें ऐसे मामले को शामिल किया जाएगा जिसमें टैरिफ की रकम नीलामी के दस्तावेज़ का हिस्सा थी और जिसके आधार पर हवाई अड्डे के संचालन का फैसला लिया गया था। नीलामी के दस्तावेज़ में ऐसे टैरिफ को शामिल करने से पहले AERA से परामर्श लिया जाएगा, जो अधिसूचना के रूप में होगी। 

14. मानव तस्‍करी (निवारण, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक, 2018

संदर्भ: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने लोकसभा में मानव तस्करी (निवारण, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक, 2018 प्रस्तुत किया। यह विधेयक तस्करी के शिकार लोगों की समस्याओं के निवारण, संरक्षण और पुनर्वास का प्रावधान करता है।

विधेयक की प्रमुख विशेषताएँ

  1. जिन मार्गों के बारे में जानकारी है (Known Routes) उनकी निगरानी करना।
  2. स्रोत, पारगमन और गंतव्य बिंदुओं पर नज़र रखना, प्रवर्तन (enforcement) और बचाव संबंधी कदम उठाना।
  3. कानून का प्रवर्तन करने वाली एजेंसियों और गैर-सरकारी संगठनों तथा दूसरे साझेदारों के बीच समन्वय स्थापित करना।
  4. ख़ुफ़िया सूचनाओं को साझा करने और परस्पर कानूनी सहायता के लिये विदेशी प्राधिकरणों के साथ अंतर्राष्ट्रीय समन्वय को बढ़ावा देना।
  1. राज्य तस्करी रोधी समिति की सिफारिशों के अनुसार, विधेयक के अंतर्गत फॉलो-अप की कार्रवाई करना।
  2. राहत और पुनर्वास सेवाएँ प्रदान करना।
  1. तस्करी को रोकना और लोगों का बचाव करना।
  2. पीड़ितों एवं गवाहों को सुरक्षा प्रदान करना।
  3. तस्करी संबंधी अपराधों में जाँच एवं कार्रवाई करना।
  4. जिन ज़िलों में ATU नहीं होगी वहाँ उपरोक्त कार्य स्थानीय पुलिस द्वारा किये जाएंगे।
  1. पीड़ितों को मुआवज़ा देना।
  2. पीड़ितों को उनके देश भेजना।
  3. पीड़ितों को समाज में दोबारा एकीकृत करना इत्यादि।
  1. तस्करी के गंभीर रूप के लिये 10 साल के सश्रम कारावास की सज़ा दी जाएगी उल्लेखनीय है कि इस सज़ा को आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है।
  2. ऐसी किसी सामग्री, जिसका परिणाम मानव तस्करी हो सकता है, को प्रकाशित करने पर 05 से 10 वर्ष के बीच कारावास की सज़ा हो सकती है और 50,000 रुपए से एक लाख रुपए तक ज़ुर्माना भरना पड़ सकता है।

15. पेट्रोलियम क्षेत्र में बचाव, सुरक्षा और पर्यावरणीय पहलुओं पर स्थायी समिति की रिपोर्ट

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस पर स्थायी समिति ने ‘पेट्रोलियम क्षेत्र में बचाव, सुरक्षा और पर्यावरणीय पहलुओं’ पर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

मुख्य अवलोकन और सिफारिशें:

नियमों के पालन में विफलता पर दंड दिया जाना चाहिये। पेट्रोलियम मंत्रालय और अन्य एजेंसियों, जिन्हें सुरक्षा नियमों के प्रवर्तन की ज़िम्मेदारी सौपी गई है, को SOPs के उल्लंघन के किसी भी मामले के लिये उत्तरदायित्व तय करना चाहिये।

16. आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक, 2018

संदर्भ

भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 और यौन अपराधों से बाल सुरक्षा (पॉक्सो) अधिनियम, 2012 तथा महिलाओं से बलात्कार से संबंधित अन्य दूसरे कानूनों में संशोधन करने हेतु आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक, 2018 को लोकसभा में पेश किया गया था। गौरतलब है कि 21 अप्रैल, 2018 को केंद्र सरकार ने आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश, 2018 जारी किया था।

प्रमुख विशेषताएँ

प्रमुख मुद्दे और विश्लेषण

पॉक्सो एक्ट, 2012 के अनुसार, नाबालिगों से बलात्कार के मामले में पीड़ित लड़का या लड़की (और अपराधी भी किसी भी लिंग का हो सकता है) हो सकता है। IPC, 1860 के अनुसार, बलात्कार तभी माना जा सकता है जब अपराधी पुरुष हो और पीड़ित महिला। विधि आयोग (2000) की रिपोर्ट और जस्टिस वर्मा कमिटी (2013) ने सुझाव दिया था कि बलात्कार की परिभाषा जेंडर न्यूट्रल होनी चाहिये तथा पुरुष एवं महिला, दोनों पर लागू होनी चाहिये। अध्यादेश इस बारे में कुछ नहीं कहता है।

17. स्थायी समिति ने पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा की स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की

मुख्य सिफारिशें

सिफारिश: समिति ने सिफारिश की कि केंद्र और राज्य सरकार इस मुद्दे पर चर्चा करें और असम में AFSPA की आवश्यकता के संदर्भ में किसी निष्कर्ष पर पहुँचें।

18. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक 

यह विधेयक लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम 2006 में संशोधन करता है।

विधेयक के प्रावधान

  1. विनिर्माण क्षेत्र वाले उद्यमों को संयत्र और मशीनरी में निवेश के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
  2. सेवाएँ प्रदान करने वाले उद्यमों को उपकरणों में निवेश के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। 

19. मॉब हिंसा तथा लिंचिंग की जाँच के लिये उच्चस्तरीय समिति का गठन

देश में मॉब हिंसा तथा लिंचिंग की घटनाओं की समीक्षा और इनका समाधान करने के लिये एक समिति का गठन किया गया है।

समिति की सदस्यता

समिति की अध्यक्षता केंद्रीय गृह सचिव करेंगे और इसमें निम्नलिखित को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा-

  1. सचिव, न्याय विभाग।
  2. सचिव, विधि कार्य विभाग।
  3. सचिव, विधायी विभाग।
  4. सचिव, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता।

समिति को चार सप्ताह के भीतर सरकार के समक्ष अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करनी होंगी।

इस अवधि के पश्चात्, समिति की सिफारिशों पर विचार करने के लिये मंत्रियों के एक समूह का गठन किया जाएगा।

मंत्रियों के समूह की सदस्यता

इसकी अध्यक्षता गृह मंत्री करेंगे तथा इसमें निम्नलिखित को सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा-

  1. विदेश मंत्री।
  2. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री, नौवहन मंत्री तथा जल संसाधन, नदी विकास और गंगा कायाकल्प मंत्री।
  3. विधि एवं न्याय मंत्री।
  4. सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय।

समूह की सिफारिशें प्रधानमंत्री को सौंपी जाएंगी।