परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह में भारत को रूस का समर्थन

चर्चा में क्यों?

हाल ही में रूस द्वारा भारत को परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह (Nuclear Suppliers’ Group) में शामिल करने हेतु समर्थन जारी रखने की बात कही गई है। रूस द्वारा यह आश्वासन दिया गया है कि 15वीं आर.आई.सी. (Russia, India, China - RIC) विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन के साथ इस मुद्दे के संबंध में पुन: बातचीत की जाएगी।

चीन का पक्ष

  • चीन अंतर्राष्ट्रीय परमाणु व्यापार को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इस 48-सदस्यीय समूह के विस्तार के लिये एक मानदंड-आधारित करने के दृष्टिकोण का समर्थन करता है।

एन.एस.जी. क्या है?

  • परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह (एनएसजी) 48 देशों का समूह है। इसका लक्ष्य परमाणु सामग्री, तकनीक एवं उपकरणों के निर्यात को नियंत्रित करना है। परमाणु हथियार बनाने के लिये इस्‍तेमाल की जाने वाली सामग्री की आपूर्ति से लेकर नियंत्रण तक सभी इसी के दायरे में आते हैं।
  • परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह परमाणु प्रौद्योगिकी और हथियारों के वैश्विक निर्यात पर नियंत्रण रखता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परमाणु ऊर्जा का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिये ही किया जाए।
  • इसका गठन 1974 में भारत के परमाणु परीक्षण के प्रतिक्रियास्वरूप किया गया था।  वर्तमान में इसके 48 सदस्य राष्ट्र हैं।

पृष्ठभूमि

  • भारत द्वारा वर्ष 2008 में एनएसजी की सदस्यता की मांग की गई थी, लेकिन इसके आवेदन के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया। 
  • वस्तुतः इसका मुख्य कारण एनपीटी या अन्य परमाणु अप्रचलन पर परीक्षण करने पर हस्ताक्षर करने संबंधी आवश्यकता है। हालाँकि, भारत को सभी परमाणु निर्यातकों के साथ परमाणु व्यापार करने के लिये एक विशेष छूट प्राप्त है, तथापि अभी तक भारत की एनएसजी में सदस्यता के संदर्भ में निणर्य नहीं लिया जा रहा है।

एनपीटी क्या है?  

  • एनपीटी अर्थात् परमाणु अप्रसार संधि, परमाणु हथियारों का विस्तार रोकने और परमाणु तकनीक के शांतिपूर्ण ढंग से इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का एक हिस्सा है। 
  • एनपीटी की घोषणा 1970 में हुई थी  और अब तक संयुक्त राष्ट्र संघ के 188 सदस्य देशों ने इसके पक्ष में समर्थन दिया है।
  • इस संधि पर हस्ताक्षर करने वाले देश भविष्य में परमाणु हथियार विकसित नहीं कर सकते। 
  • भारत, पाकिस्तान, इज़राइल, उत्तरी कोरिया और दक्षिण सूडान संयुक्त राष्ट्र के ऐसे सदस्य देश हैं, जिन्होंने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं। 
  • हालाँकि, वे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिये परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन इसकी निगरानी अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के पर्यवेक्षक करते हैं। 

भारत को NSG की सदस्यता की आवश्यकता क्यों हैं?

  • रूस के अलावा भारत ने अमेरिका और फ्राँस के साथ भी असैन्य परमाणु समझौता किया हुआ है। 
  • फ्राँसीसी परमाणु कंपनी अरेवा जैतापुर, महाराष्ट्र में परमाणु बिजली संयंत्र लगा रही है और अमेरिकी कंपनियाँ गुजरात के मिठी विर्दी और आंध्र प्रदेश के कोवाडा में संयंत्र लगाने की तैयारी में हैं। 
  • एनएसजी की सदस्यता हासिल करने से भारत इन संयंत्रों के लिये परमाणु तकनीक और यूरेनियम बिना किसी विशेष समझौते के हासिल कर सकेगा। 
  • परमाणु संयंत्रों से निकलने वाले कचरे का निस्तारण करने में भी सदस्य राष्ट्रों से मदद मिलेगी। देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिये यह ज़रूरी है कि भारत को एनएसजी में प्रवेश मिले।
  • पेरिस जलवायु सम्मलेन में प्रकट की गई अपनी प्रतिबद्धता के अनुसार भारत जीवाश्म ईंधन पर अपनी निर्भरता को कम करने के साथ-साथ अपनी ऊर्जा मांग का कुल 40% स्वच्छ ऊर्जा के रूप में उत्पादित करना चाहता है। स्पष्ट रूप से इसके लिये भारत को परमाणु ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने हेतु इस समूह की सदस्यता लेना आवश्यक है। 
  • भारत परमाणु ऊर्जा व्यापार में भागीदार बनने का इच्छुक है। इसके लिये परमाणु ऊर्जा से संबंधित अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी प्राप्त करने के लिये NSG की सदस्यता ज़रूरी है।  
  • देश में नवाचार को बढ़ावा देने के लिये परमाणु ऊर्जा उपकरणों के व्यावसायीकरण को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। 
  •  NSG सदस्यता से भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को और सशक्त रूप दिया जा सकता है। इस समूह की सदस्यता भारत की संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के दावे को और मज़बूती प्रदान करेगी।

एन.एस.जी. की सदस्यता प्राप्त करने के क्या-क्या लाभ हैं?

  • परमाणु मामलों के बारे में समय पर जानकारी।
  • सूचना के आदान-प्रदान के माध्यम से योगदान। 
  • साख (credentials) की पुष्टि। 
  • सुसंगतता और समन्वय के एक साधन के रूप में कार्य करना।

वासेनार अरेंजमेंट क्या है?  

  • इसकी स्थापना जुलाई, 1996 में वासेनार (नीदरलैंड्स) में की गई थी तथा इसी वर्ष सितंबर से इसने कार्य करना शुरू कर दिया। यह परमाणु आपूर्तिकर्त्ता समूह और मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम की तरह ही परमाणु अप्रसार की देखरेख करने वाली संस्था है। 
  • वासेनार अरेंजमेंट सदस्य देशों के बीच परंपरागत हथियारों और प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण में पारदर्शिता को बढ़ावा देता है। 
  • इसके सदस्‍यों को यह सुनिश्चित करना होता है कि परमाणु प्रौद्योगिकी के हस्‍तांतरण का दुरुपयोग न हो और इसका इस्‍तेमाल सैन्‍य क्षमताओं को बढ़ाने में न किया जाए। 
  • साथ ही यह भी सुनिश्‍चित करना होता है कि ये प्रौद्योगिकियाँ आतंकवादियों के हाथ न लगे। 
  • इसके अलावा परंपरांगत हथियारों और दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं और प्रौद्योगिकी के निर्यात पर नियंत्रण भी इसके उद्देश्यों में शामिल है। इसका मुख्यालय वियना में है।
  • कुछ दिन पूर्व परमाणु हथियार अप्रसार नियंत्रण करने वाले एक बड़े समूह में भारत को प्रवेश मिल गया, जब परमाणु हथियारों के निर्यात पर नियंत्रण रखने वाले वासेनार अरेंजमेंट में भारत की सदस्यता स्वीकार कर ली गई।  
  • भारत क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा तथा उत्कृष्ट निर्यात नियंत्रण पर निगरानी रखने वाली संस्था वासेनार अरेंजमेंट (Wassenaar Arrangement-WA) का 42वां सदस्य बन गया है।