कुरील द्वीप विवाद

प्रिलिम्स के लिये:

राजनयिक ब्लूबुक, कुरील द्वीप विवाद, कुरील द्वीप समूह से संबंधित संधियाँ और समझौते।

मेन्स के लिये:

द्वितीय विश्व युद्ध, अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ और समझौते, कुरील द्वीप विवाद।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में जापान द्वारा राजनयिक/डिप्लोमैटिक ब्लूबुक (Diplomatic Bluebook) के नवीनतम संस्करण में चार द्वीपों का वर्णन किया गया है जिनके स्वामित्व को लेकर जापान का रूस के साथ विवाद है।

  • यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बीच दोनों पक्षों ने अपने  सामान्य संबंधों को रेखांकित किया।
  • रूस इन द्वीपों को कुरील द्वीप समूह के रूप में संदर्भित करता है, जबकि जापान उन्हें उत्तरी क्षेत्र कहता है।
  • दक्षिण कोरिया के साथ उत्तरी क्षेत्रों को लेकर जापान का भी कुछ ऐसा ही विवाद है। दक्षिण कोरिया द्वारा इसे दोक्दो द्वीप (Dokdo Islands) कहा जाता है। 

राजनयिक/डिप्लोमैटिक ब्लूबुक:

  • जापान की डिप्लोमैटिक ब्लूबुक जापान की विदेश नीति और जापान में विदेश मंत्रालय द्वारा प्रकाशित अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति पर एक वार्षिक रिपोर्ट है।
  • सितंबर 1957 में इसके पहले अंक के बाद से प्रतिवर्ष इसका प्रकाशन किया जाता है।

कुरील द्वीप समूह की भौगोलिक स्थिति और इसका महत्त्व: 

  • अवस्थिति:
    • कुरील द्वीप होक्काइदो जापानी द्वीप से रूस के कामचटका प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे तक फैले हुए हैं जो ओखोटस्क सागर को उत्तरी प्रशांत महासागर से अलग करते हैं। 
    • द्वीपों की यह शृंखला प्रशांत (रिंग ऑफ फायर) की परिक्रमा करते हुए भूगर्भीय रूप से अस्थिर बेल्ट का हिस्सा है तथा इसमें कम-से-कम 100 ज्वालामुखी स्थित हैं, जिनमें से 35 अभी भी सक्रिय हैं और कई गर्म झरने विद्यमान हैं।
  • महत्त्व:
    • प्राकृतिक संसाधन: द्वीप समृद्ध मछली पकड़ने के क्षेत्र हैं और माना जाता है कि तेल व गैस के अपतटीय भंडार भी हैं।
    • सांस्कृतिक महत्व: जापानी लोग विशेष रूप से होक्काइदो में द्वीपों से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं।

Russia-Japan-Talks

कुरील द्वीप विवाद ( Kuril Islands Dispute):

  • भूमिका: 
    • जापान और रूस के बीच कुरील द्वीप विवाद दक्षिण कुरील द्वीप समूह की संप्रभुता को लेकर है।
    • दक्षिण कुरील द्वीप समूह में एटोरोफू द्वीप (Etorofu Island), कुनाशीरी द्वीप (Kunashiri Island), शिकोटन (Shikotan) द्वीप और हबोमाई द्वीप (Habomai Island) शामिल हैं।
      • इन द्वीपों पर जापान द्वारा दावा किया जाता है लेकिन रूस द्वारा सोवियत संघ के उत्तराधिकारी राज्य के रूप में इस पर कब्ज़ा कर लिया गया है। 
  • शिमोडा की संधि (1855):
    • वर्ष 1855 में जापान और रूस ने शिमोडा की संधि का समापन किया, जिसने जापान को चार सबसे दक्षिणी द्वीपों और शेष शृंखला का नियंत्रण रूस को दिया।
  • सेंट पीटर्सबर्ग की संधि (1875):
    • वर्ष 1875 में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित सेंट पीटर्सबर्ग की संधि में रूस ने सखालिन द्वीप के निर्विरोध नियंत्रण के बदले कुरील का कब्ज़ा जापान को सौंप दिया।
    • हालाँकि द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में सोवियत संघ द्वारा इन द्वीपों को फिर से जब्त कर लिया गया था।
  • याल्टा समझौता (1945):
    • वर्ष 1945 में याल्टा समझौतों (वर्ष 1951 में जापान के साथ औपचारिक रूप से शांति संधि) के हिस्से के रूप में द्वीपों को सोवियत संघ को सौंप दिया गया था और जापानी आबादी को स्वदेश लाया गया तथा सोवियत संघ द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
  • सैन फ्रांसिस्को शांति संधि (1951): 
    • वर्ष 1951 में मित्र राष्ट्रों और जापान के बीच हस्ताक्षरित सैन फ्रांसिस्को शांति संधि में कहा गया है कि जापान को "कुरील द्वीपों पर सभी अधिकार एवं दावा" छोड़ देना चाहिये, लेकिन यह उन पर सोवियत संघ की संप्रभुता को भी मान्यता नहीं देता है।
      • द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल मुख्य राष्ट्र:
        • धुरी शक्तियाँ (जर्मनी, इटली और जापान)
        • मित्र राष्ट्र (फ्राँस, ग्रेट ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ तथा चीन)।
  • जापान-सोवियत संयुक्त घोषणा (1956):
    • द्वीपों पर विवाद ने द्वितीय विश्व युद्ध को समाप्त करने के लिये एक शांति संधि के समापन को रोक दिया है।
    • वर्ष 1956 में जापान-सोवियत संयुक्त घोषणा द्वारा जापान और रूस के बीच राजनयिक संबंध बहाल किये गए।
    • उस समय रूस ने जापान के निकटतम दो द्वीपों को देने की पेशकश की लेकिन जापान ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया क्योंकि दोनों द्वीपों में विचारधीन भूमि का केवल 7% ही हिस्सा था।

वर्तमान परिदृश्य:

  • समझौतों की एक लंबी शृंखला के बावजूद विवाद जारी है और जापान अभी भी दक्षिणी द्वीपों पर ऐतिहासिक अधिकारों का दावा करता है तथा सोवियत संघ वर्ष 1991 से रूस को उन द्वीपों को जापानी संप्रभुता में वापस करने के लिये बार-बार मनाने का प्रयास करता रहा है। 
  • वर्ष 2018 में रूसी राष्ट्रपति और जापानी प्रधानमंत्री ने पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन के मौके पर मुलाकात की और जापानी प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 1956 की घोषणा के आधार पर बातचीत करने के लिये सहमत होने पर क्षेत्रीय विवाद को समाप्त करने का निर्णय लिया।
    • इससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि जापान ने रूस के साथ शांति बनाए रखने के लिये दो द्वीपों को छोड़ दिया है।  
  • हालांँकि रूस ने संकेत दिया कि वर्ष 1956 में जापान और सोवियत संघ द्वारा हस्ताक्षरित संयुक्त घोषणा में न तो हबोमाई व शिकोटन को वापस करने के आधार का उल्लेख है, न ही यह स्पष्ट करता है कि द्वीपों पर किस देश की संप्रभुता है।  
  • इसके अलावा वर्ष 2019 में जापानी प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका देश द्वीपों पर नियंत्रण वापस लेने के पक्ष में नहीं है।
  • जापान यह भी मानता है कि द्वीप राष्ट्र के क्षेत्र का एक अंतर्निहित हिस्सा हैं।  
  • इसलिये जापान ने उल्लेख किया कि क्षेत्रीय मुद्दे के समाधान के बाद उसका उद्देश्य शांति-संधि पर हस्ताक्षर करना है। 

स्रोत: द हिंदू