भारतीय चित्रकला (भाग-2)

अजंता चित्रकला

  • महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में सह्याद्रि की पहाड़ियों में स्थित अजंता में कुल 30 गुफाएँ हैं।
  • घोड़े की नाल के आकार (अर्द्धवृत्ताकार) की ये गुफाएँ वगुर्ना नदी घाटी के बाएँ छोर पर एक आग्नेय चट्टान को काटकर बनाई गई हैं, जिसके निष्पादन में 8 शताब्दियों का समय (2nd Cent. B.C to 7th Cent. A.D) लगा।
  • गुफाओं की दीवारों (भित्ति) तथा छतों पर बनाए गए चित्रों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण चित्र जातक कथाओं (बुद्ध) से जुड़ा हुआ है।
  • अजंता की गुफा संख्या 9 और 10 में प्राचीनतम चित्रकलाएँ हैं जिनकी समानता अमरावती की मूर्तिकला और सातवाहन काल (2nd B.C) की मानव आकृतियों की वेशभूषा, आभूषणों तथा जातीय विशेषताओं से है।
  • गुफा संख्या 16&17 के चित्र पाँचवी सदी के दौरान बने हैं, इनमें आंध्र और वाकाटक शासकों की चर्चा भी है।
  • 16वीं गुफा में सर्वश्रेष्ठ चित्र मरणासन्न राजकुमारी तथा महात्मा बुद्ध के उपदेश का है।
  • गुफा संख्या 1, 2 और 5 के चित्र पाँचवी सदी से छठी सदी में यानी सबसे बाद में बने।
  • इन गुफाओं (1, 2, 5) में अत्यधिक अलंकरण और आभूषणीय अभिकल्पों के साथ जातक की कहानियों को चित्रित किया गया है।
  • गुफा संख्या एक में पद्मपाणि अवलोकितेश्वर, मार-विजय तथा चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय और ईरान के ससानी साम्राज्य के बादशाह खुसरो द्वितीय के साथ दूतों के आदान-प्रदान का चित्र भी है।
  • अजंता की चित्रकला में रेखाओं के ज़रिये गहरे-चमकदार गुलाबी, भूरे, सिन्दूरी, हरे आदि रंगों से ऐसा चित्र बनाया गया है, जिसकी चमक हज़ारों साल बाद भी शेष है।
  • अजंता के चित्रों की एक खास विशेषता इसके पात्रों का स्वभाव चित्रण है।

बाघ गुफाओं की चित्रकला

  • ये गुफाएँ मध्य प्रदेश में धार ज़िले की कुकशी तहसील में स्थित विंध्य पर्वत श्रेणी में अवस्थित हैं।
  • बाघ में कुल नौ गुफाएँ हैं जो अजंता के समकालीन हैं।
  • बाघ की गुफाओं में बौद्ध धर्म के अलावा सामान्य जीवन के चित्र भी बहुतायत में मिलते हैं। यानी ये अजंता की तुलना में अधिक सांसारिक और मानवीय हैं।
  • बाघ की चित्रकलाएँ अजंता की गुफा संख्या एक और दो की चित्रकलाओं के सादृश्य हैं; यानी अलंकृत एवं आभूषण युक्त चित्र।
  • शैलीगत दृष्टि से अजंता और बाघ दोनों समान हैं किंतु बाघ का खाका भी प्रभावशाली है।
भारत में प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थस्थल
बौद्ध तीर्थस्थल राज्य
स्पितुक मठ, शे (Shey) मठ लद्दाख (जम्मू-कश्मीर)
धनखड़ मठ, की (Key) मठ, ताबो मठ हिमाचल प्रदेश
तवांग मठ अरणाचल प्रदेश
रूमटेक मठ सिक्किम
महाबोधि मंदिर, बोधगया बिहार
घूम मठ पश्चिम बंगाल
ललितागिरि, वज्रगिरी और रत्नागिरि ओडिशा
चूड़ामणि विहार (नागापट्टनम), कांचीपुरम मठ तमिलनाडु
नालंदा, विक्रमशिला, ओदंतपुरी महाविहार बिहार
सिरपुर बुद्ध विहार छत्तीसगढ़



बादामी चित्रकला

  • उत्तरी कर्नाटक के बागलाकोट ज़िले के मालप्रभा नदी बेसिन में बादामी नामक जगह स्थित है जिसकी स्थापना का काल छठी शताब्दी माना जाता है।
  • चालुक्य वंश के कला संरक्षक राजा मंगलेश को इसका श्रेय दिया जाता है।
  • बादामी या वातापी में ब्राह्मण-हिन्दू धर्म, जैन धर्म से संबंधित चित्रकला का प्राचीनतम साक्ष्य है।
  • यहाँ शिव-पार्वती, नटराज तथा इंद्र सभा का चित्रण दर्शनीय है।
  • वातापी कला में चित्र बनाने की प्रविधि बाघ और अजंता से मिलती-जुलती है।
  • अजंता, बाघ और बादामी की चित्रकलाएँ, उत्तर तथा दक्षिण की शास्त्रीय परंपरा का उत्तम प्रतिनिधित्व करती हैं।

सित्तनवासल चित्रकला

  • तमिलनाडु के पुदुकोट्टई ज़िले में सित्तनवासल की गुफाओं में स्थित मंदिरों की दीवारों पर नौवीं सदी के दौरान चित्र बनाए गए हैं।
  • ये गुफाएँ सिद्धों, शैव और जैन धर्म से जुड़े लोगों की रही हैं।
  • सित्तनवासल की चित्रकलाएँ जैन विषयों और प्रतीक प्रयोगों से गहरे रूप से जुड़ी हुई हैं, लेकिन अजंता के समान ही मानदंड एवं तकनीकों का प्रयोग करती हैं।
  • यहाँ के मंदिर की छत पर एक सघन कमल वन चित्रित किया गया है।
  • यहाँ के चित्रों में पांड्य राजा-रानी और एक नर्तकी के चित्र को प्रशंसा मिली है।

एलोरा चित्रकला की विशेषताएँ

  • इसे मराठी में वेरूललेणी या वेरूल की गुफाएँ कहते हैं जो अजंता की गुफाओं से मात्र 9 किलोमीटर दूर हैं।
  • माना जाता है कि इन गुफाओं में 300 ई. सन् से एक हज़ार ईस्वी तक चित्रांकन का काम हुआ है।
  • यह भारत के तीनों प्राचीन धर्मों (हिन्दू, जैन एवं बौद्ध) से जुड़ा हुआ है।
  • यहाँ की गुफाओं में कैलाश, लंकेश्वर, इंद्र-सभा और गणेश के चित्र दीवारों पर मिलते हैं।
  • एलोरा की चित्रकलाएँ अजंता के शास्त्रीय मानदंड से भिन्न हैं, यानी इनमें कला-कौशल के ह्रास के संकेत स्पष्ट दिखते हैं।
  • एलोरा की चित्रकलाओं की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण लाक्षणिक विशेषताएँ हैं- सिर को असाधारण रूप से मोड़ना, भुजाओं के कोणीय मोड़, गुप्त अंगों का अवतल मोड़, तीखी प्रक्षिप्त नाक और बड़े-बड़े नेत्र।
  • एलोरा की चित्रकला मध्यकालीन विशेषताओं का संकेत भी देती है।
  • एलोरा की गुफा-मंदिर सं. 32 में उड़ती हुई आकृतियों व बादलों का दृश्य अत्यंत सुन्दर है।