विशेष/देश देशांतर : G-20 और भारत

संदर्भ


दुनिया तेज़ी से बदल रही है साथ ही विश्व की अर्थव्यवस्था भी उसी तेज़ी के साथ बदल रही है इस उथल-पुथल भरे दौर में करवट लेती वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ कदम बढ़ाना अपरिहार्य है। इससे सामंजस्य बिठाना और साथ ही विकास के मानदंडों को बनाए रखना किसी चुनौती से कम नहीं है। ऐसे माहौल में विकसित और विकासशील देशों के बीच आपसी संवाद और बेहतर तालमेल होना बेहद अहम है और यही वज़ह है कि G-20 जैसे एक वैश्विक आर्थिक मंच की परिकल्पना की गई। सितंबर 1999 में अस्तित्व में आने के बाद अब G-20 विश्व का सबसे शक्तिशाली आर्थिक मंच बन गया है। यह एक ऐसा मंच है जो विविधता और संपूर्णता में विश्वास रखता है। इस बार जी-20 का 13वाँ शिखर सम्मेलन अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स में संपन्न हुआ। भारत की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया।

पृष्ठभूमि

  • 1997 के एक बड़े एशियन वित्तीय संकट के बाद यह निर्णय लिया गारा था कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं को एकजुट होना चाहिये।
  • इसके लिये इन देशों के वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंकों के गवर्नर्स की एक बैठक आयोजित करने की आवश्यकता महसूस की गई ताकि किसी भी प्रकार के वित्तीय संकट से बचा जा सके।
  • इसकी स्थापना 1999 में 7-देशों अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, फ़्राँस और इटली के विदेश मंत्रियों ने की थी।
  • G-20 का उद्देश्य वैश्विक वित्त को प्रबंधित करना था। 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद इन देशों के प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों की बैठक शुरू हुई।
  • UN, IMF और विश्व बैंक के स्टाफ स्थायी होते हैं तथा इनके हेड क्वार्टर भी होते हैं, जबकि G-20 का स्थायी स्टाफ नहीं होता है और न ही इसका हेड क्वार्टर ही है। यह सिर्फ एक फोरम मात्र है।
  • इस वैश्विक अर्थव्यवस्था में वित्तीय मार्केट, टैक्स, राजकोषीय नीति, आर्थिक भगोड़ों से संबंधित मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा कृषि, रोज़गार तथा ऊर्जा संबंधी विषय भी शामिल हैं।
  • पर्यावरण तथा सतत् विकास भी G-20 में शामिल प्रमुख मुद्दे हैं।
  • इस समूह का दुनिया की 85 प्रतिशत अर्थव्यवस्था और 75 प्रतिशत व्यापार पर नियंत्रण है।

उद्देश्य

  • G-20 का गठन सदस्य देशों के बीच अंतर्राष्ट्रीय नीति में सहयोग, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संरचना में सुधार, वैश्विक वित्तीय संकट को टालने के उपाय, सदस्य देशों के आर्थिक विकास और सतत् विकास को बढ़ावा देने के मकसद से किया गया।
  • इस संगठन का घोषित लक्ष्य विकसित और विकासशील देशों को एक मंच पर लाना और दुनिया के आर्थिक मुद्दों पर आम राय बनाने की कोशिश करना है।

G-20 शिखर सम्मेलन के मुख्य मुद्दे

  • G-20 का 13वाँ शिखर सम्मेलन कई मायने में काफी खास है। इस सम्मेलन के दौरान इस समूह के नेताओं द्वारा 10 साल पहले अस्तित्व में आए G-20 के कार्यों की समीक्षा के साथ ही आने वाले दशक की नई चुनौतियों से निपटने के तरीके और समाधान पर भी चर्चा की गई।
  • इस बार के जी-20 शिखर सम्मेलन की थीम सम्मेलन की थीम ‘न्यायपूर्ण और सतत् विकास के लिये आम सहमति’ (Building Consenus for fare and sustainable development) है।
  • इस दौरान G-20 शिखर सम्मेलन में जुटे देशों के नेताओं द्वारा वैश्विक अर्थव्यवस्था, श्रम बाज़ारों के भविष्य और लिंग समानता के मुद्दे पर भी चर्चा की गई।
  • इसके अलावा इस बार के एजेंडे में मैक्रो इकोनॉमिक पॉलिसी, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विश्व व्यापार संगठन में सुधार, वित्तीय विनियमन, कराधान और व्यापार के मुद्दे भी शामिल हैं।
  • इसके साथ ही सम्मेलन का मुख्य फोकस भविष्य के विकास के लिये आधारभूत संरचना और खाद्य सुरक्षा पर है।
  • विश्व के प्रमुख व्यापार भागीदारों, विशेष रूप से चीन से आयात पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाया गया टैरिफ का मुद्दा भी चर्चा का विषय रहा।
  • इस सम्मेलन में डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोनों शामिल हुए।
  • अमेरिका ने हाल ही में चीन से आयात होने वाली वस्तुओं पर 250 बिलियन अमेरिकी डॉलर का टैरिफ लगभग था जिसका चीन ने कड़ा विरोध किया था।
  • चीन को उम्मीद है कि वह अमेरिका को टैरिफ कम करने के लिये मना लेगा। अमेरिका ने घोषणा की है कि वह चीनी वस्तुओं पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर देगा, जबकि चीन चाहता है कि टैरिफ की यह दर अधिकतम 10 प्रतिशत रहे।
  • वर्तमान समय में विश्व की बदलती परिस्थिति में खासकर वणिज्य को लेकर चीन और अमेरिका के बीच विवाद छिड़ा हुआ है। इस पर सारी दुनिया की नज़र है कि क्या इससे आर्थिक स्थिति खराब हो सकती है।
  • 2008 में जब G-20 के बारे में परिकल्पना की गई थी उस वक्त विश्व आर्थिक संकट से गुज़र रहा था क्योंकि अमेरिका की आर्थिक स्थिति खराब थी और उसे बेहतर बनाने के लिये G-20 के सारे नेताओं ने जो प्रेमवर्क अपनाया उसमें ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट फॉर आल’ मुख्य एजेंडा था।
  • आज की तारीख में देखें तो चीन और अमेरिका के बीच विवाद चल रहा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह अभी भी टैरिफ लगाएंगे, इस नज़रिये से भी यह सम्मेलन महत्त्वपूर्ण है।

भारत के मुख्य मुद्दे

  • सम्मेलन के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा के बीच एक संशोधित उत्तरी अमेरिकी मुक्त व्यापार पर समझौता हुआ जिसे संयुक्त राज्य अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा समझौता नाम दिया गया है।
  • इसके साथ ही अमेरिका और इन देशों के बीच इंटरमीडिएट रेंज परमाणु फोर्सेज संधि पर चर्चा की गई।
  • सम्मेलन के दौरान इसके सदस्य देशों को जलवायु परिवर्तन और असमानता से उत्पन्न होने वाली समस्याओं से निपटने के लिये साहसिक कदम उठाने का संदेश दिया गया है।
  • अगर भारत की बात करें तो भारत शुरू से ही G-20 के सभी सम्मेलनों में प्रमुखता से शामिल रहा है। इस बार के शिखर सम्मेलन में भारत के प्रमुख मुद्दों में तेल की कीमतों में स्थिरता, आंतकी फंडिंग को रोकने और धन शोधन का मुद्दा शामिल है।
  • इसके अलावा विश्व व्यापार संगठन में सुधार का मुद्दा भी भारत के एजेंडे में शामिल है। भारत चाहता है कि G-20 केवल व्यापार का मुद्दा नहीं रहे, चाहे यह दो देशों के बीच हो या अन्य देशों के बीच।
  • विश्व बैंक द्वारा पिछले महीने जारी ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस की सूची में भारत के 23 अंकों के छलांग के साथ 77वें पायदान पर आने से दुनिया की नज़रें भारत पर टिकी हुई हैं।
  • पिछले साल भी टी-20 देशों ने भारत के सतत् और समावेशी विकास के लिये उठाए जा रहे कदमों और वैश्विक अर्थव्यवस्था हेतु भारत के योगदान को अहम बताया था।
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था, टिकाऊ विकास, जलवायु परिवर्तन और भगोड़ा आर्थिक अपराधियों पर कार्यवाही कुछ ऐसे मुद्दे हैं जिनसे पूरी दुनिया का हित जुड़ा हुआ है। भारत का मानना है कि इन मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ना चाहिये।

G-20 शिखर सम्मेलन : प्रमुख बिंदु

  • जी-20 यूरोपीय संघ और दुनिया की 19 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसके सदस्य दुनिया के सबसे ताकतवर और सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं।
  • दो दिन के इस सम्मेलन की शुरुआत 30 नवंबर को हुई, इस सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया।
  • सम्मेलन में अमेंरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, फ्राँस के राष्ट्रपति एमेमुल मैक्रान, जर्मनी की चांसलर एंजिला मार्केल, कनाडा के प्रधानमंत्री जास्टिन त्रुदो, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ मेज़बान देश अर्जेंटीना के राष्ट्रपति मेंरिशियो मैक्री ने हिस्सा लिया।
  • इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की महासचिव एंटोनिया कोटरेज भी शामिल हुईं।
  • इस समूह के इतिहास मे पहली बार इसका शिखर सम्मेलन दक्षिण अमेरिका के किसी देश में हो रहा है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्यूनस आयर्स में ब्रिक्स देशों के नेताओ के साथ अनौपचारिक बैठक में शामिल हुए। इसमें उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश नए औद्योगिक क्रांति में सहयोग करने के लिये उत्सुक हैं।
  • ब्रिक्स देशों में भारत के अलावा ब्राज़ील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं।

2018 का G-20 शिखर सम्मेलन भारत के लिये क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  • जी-20 शिखर बैठक के अलावा भी कई देशों ने बैठकें कीं। जैसे- भारत-चीन-रूस के बीच 12 साल बाद त्रिपक्षीय संवाद हुआ। इस लिहाज़ से अर्जेंटीना की राजधानी में हुई यह शिखर बैठक काफी महत्त्वपूर्ण रही।
  • भारत ने इस वैश्विक मंच से एक बार फिर सुरक्षा और आतंकवाद का जो मुद्दा उठाया है, वह भारत की चिंता को रेखांकित करता है।
  • भारत के लिये आतंकवाद का मुद्दा गंभीर इसलिये है क्योंकि लंबे समय से भारत पड़ोसी देश पाकिस्तान की ओर से सीमापार आतंकवाद की मार झेल रहा है। पाकिस्तान भारत के कश्मीर और पंजाब में किस तरह आतंक फैला रहा है तथा कश्मीर को लेकर भारत के खिलाफ दुनिया में दुष्प्रचार करता रहा है, यह किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में वैश्विक मंच से आतंकवाद के खिलाफ भारत की चिंता जायज़ है।
  • भारत ने संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद रोधी ढाँचे को मज़बूत बनाने पर बल दिया है, ताकि आतंकियों को हथियारों की खरीद के लिये पहुँचाए जाने वाले पैसे पर रोक लगाई जा सके।
  • एक बड़ी उपलब्धि यह भी रही कि शिखर सम्मेलन से अलग भारत, रूस और चीन के नेताओं की एक साथ वार्ता हुई, जिसमें बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली और मुक्त अर्थव्यवस्था पर चर्चा की गई।
  • जलवायु संकट के मुद्दे पर भारत ने पुरज़ोर तरीके से अपना पक्ष रखा, जो बड़े देशों के नेताओं के लिये यह स्पष्ट संदेश है कि अगर जलवायु संकट के लिये वे दुनिया के छोटे और गरीब मुल्कों को दोषी ठहराते रहेंगे तो यह संकट हल होने की बजाय और बढ़ेगा।
  • शिखर सम्मेलन में चीन और अमेरिका सबसे ज़्यादा छाए रहे। चीन दुनिया की ऐसी महाशक्ति बन गया है जो अमेरिका को खुल कर चुनौती दे रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार युद्ध ने सबकी नींद उड़ा दी है। रूस के साथ चीन के रिश्ते अमेरिका की परेशानियों को और बढ़ा रहे हैं।
  • भारत के लिये यह सम्मेलन इस कारण से भी महत्त्वपूर्ण रहा है कि 2022 में जी-20 की बैठक की मेज़बानी उसके हिस्से में आई है।

भारत के 9 सूत्रीय एजेंडे पर सहमति


भगोड़े आर्थिक अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिये अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कायम करने की कवायद में भारत को ठोस सफलता मिली है। G-20 की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेश की गई 9 सूत्रीय कार्यवाही योजना को लेकर सदस्य देशों के बीच सहमति बनी है। ये हैं-

  1. भगोड़े आर्थिक अपराधियों से संयुक्त रूप से निपटने के लिये G-20 देशों के बीच प्रभावी और सक्रिय सहयोग प्रक्रिया हेतु प्लेटफॉर्म बने।
  2. ऐसे अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही और उनके जल्द प्रत्यर्पण के लिये सदस्य देशों के बीच सहयोग।
  3. G-20 देशों को ऐसा ढाँचागत तंत्र बनाना चाहिये जिससे भगोड़े आर्थिक अपराधियों का एक-दूसरे के देश में प्रवेश रोका जा सके। कोई देश उनके लिये सुरक्षित पनाहगाह न बने।
  4. भ्रष्टाचार के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांत प्रभावी तरीके से लागू हों।
  5. अंतर्राष्ट्रीय फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) के ज़रिये ऐसी प्रणाली बने जिससे संबंधित संस्थाओं और वित्तीय ख़ुफ़िया इकाइयों (फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट) के बीच सही समय पर सूचनाओं का आदान-प्रदान हो सके।
  6. FATF को भगोड़े आर्थिक अपराधियों की परिभाषा तय करने की ज़िम्मेदारी दी जाए।
  7. भगौड़े आर्थिक अपराधियों की पहचान, प्रत्यर्पण और उनके खिलाफ कार्रवाई के लिये FATF को मानक बनाने चाहिये जिन पर सभी G-20 देश सहमत हों।
  8. प्रत्यर्पण और कानूनी मदद के मौजूदा नियमों में कमियों और सफल प्रत्यर्पण के मामलों के अनुभव एक-दूसरे से साझा करने के लिये प्लेटफॉर्म तैयार किया जाए।
  9. G-20 फोरम द्वारा भगोड़े आर्थिक अपराधियों की संपत्ति का पता लगाने के लिये प्रयास किये जाने पर विचार हो जिससे कि अपराधियों से बकाया कर्ज़ की वसूली की जा सके।

G-20 की कुछ उपलब्धियाँ

  • जी 20 की प्रमुख उपलब्धियों में 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान आपातकालीन वित्तपोषण की त्वरित व्यवस्था शामिल है।
  • यह राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की निगरानी व्यवस्था में सुधार करके अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधारों के लिये भी काम करता है।
  • पिछले कुछ वर्षों में G-20 भी दुनिया को प्रभावित करने वाले लगभग सभी मुद्दों पर चर्चा करने के लिये एक मंच बन गया है।

जी-20 की सोच और उसका सफर

  • दुनिया के सबसे अधिक शाक्तिशाली और विकासशील देशों के संगठन का नाम है G-20, इसमें अमेरिका और जर्मनी जैसे औद्योगिक देशों के साथ-साथ ब्राज़ील और चीन जैसी अर्थव्यवस्थाएँ भी शामिल हैं।
  • दरअसल, G-20 अंतर्राष्ट्रीय और वित्तीय मुद्दों पर सहयोग के लिये 19 अर्थव्यवस्थाओं और यूरोपीय संघ की सरकारों का एक प्रमुख मंच है।
  • G-20 देश वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 90 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का 80 प्रतिशत और दुनिया की कुल आबादी के दो-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • 1997 के पहले एशियाई संकट के बाद दुनिया के कई देशों ने इसकी ज़रूरत महसूस की।
  • 19 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और यूरोपीय संघ के वित्त मंत्रियों व केंद्रीय बैंक के गर्वनरों ने सितंबर 1999 में G-20 का गठन किया।
  • इसमें विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं का मिला-जुला प्रतिनिधित्व है। दुनिया के ये देश किसी भी आर्थिक संकट से निपटने और दुनिया की वित्तीय सेहत सुधारने पर चर्चा करने के लिये इस मंच को साझा करते हैं।
  • G-20 की पहली बैठक दिसंबर, 1999 में बर्लिन में हुई, इसके बाद वैश्विक वित्तीय संकट का सामना करने के लिये अंतर्राष्ट्रीय सहमति और राजनीतिक इच्छाशक्ति के मद्देनज़र G-20 की पहली शिखर वार्ता 2008 में आयोजित की गई।
  • इस शिखर वार्ता में नेताओं ने विश्वास जताया कि बाज़ार मुक्त व्यापार और निवेश प्रणालियों से परिपूर्ण हो।
  • विनियमित वित्तीय बाज़ार, गतिशीलता, नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देते हैं। इसके ज़रिये आर्थिक विकास, रोज़गार में बढ़ोतरी के साथ-साथ गरीबी हटाने में भी काफी मदद मिलेगी।
  • वर्ष 2008 में इस बात पर ध्यान दिया गया था कि कैसे वित्तीय स्थिरता लाई जाए परंतु पिछले 10 सालों में देखा गया है कि इसका दायरा बहुत बढ़ गया है। इसमें कर, वित्तीय लेनदेन, जलवायु परिवर्तन, व्यापार और विकास के मुद्दे भी जुड़ गए हैं। इन सभी मुद्दों पर बातचीत की जा रही है।
  • G-20 में अफ्रीका महाद्वीप से दक्षिण अफ्रीका शामिल है तो उत्तरी अमेरिका की ओर से कनाडा, मेक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका, दक्षिण अमेरिका की ओर से अर्जेंटीना और ब्राज़ील जैसे देश शामिल हैं।
  • पूर्व एशिया से तीन देश चीन, जापान और दक्षिण कोरिया हैं। दक्षिण एशिया से इंडोनेशिया और मध्य पूर्व एशिया से तीन देश यानी चीन, जापान और दक्षिण कोरिया हैं। दक्षिण एशिया से भारत इसका प्रतिनिधित्व करता है। दक्षिण-पूर्व एशिया से इंडोनेशिया और मध्य-पूर्व एशिया से सऊदी अरब शामिल हैं।
  • यूरेशिया से रूस और टर्की के अलावा यूरोप से यूरोपीय संघ, फ़्राँस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन इसके सदस्य हैं। ओशियानिया से आस्ट्रेलिया शामिल है।
  • जी-20 कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जैसे- वित्तीय स्थिरता बोर्ड, अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर संगठन, संयुक्त राष्ट्र संघ, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, आर्थिक सहयोग और विकास संगठन, संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व बैंक और विश्व व्यापार संगठन से सलाह लेता है।
  • इन संगठनों के प्रतिनिधियों को G-20 की अहम बैठकों में आमंत्रित किया जाता है।

निष्कर्ष


वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल के बीच संपन्न हुई G-20 समूह की शिखर बैठक से निकले नतीजे भारत के लिहाज़ से सकारात्मक हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संरक्षणवाद और अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के अलावा आर्थिक प्रतिबंध, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, यूरोपीय संघ की मुश्किलें, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अशांति तथा गहराती शरणार्थी समस्या जैसी चुनौतियों के मद्देनज़र इस सम्मेलन पर दुनिया भर की निगाहें टिकी हुई थीं। हालाँकि इसमें भाग ले रहे राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों द्वारा कोई ऐसी बड़ी घोषणा नहीं की गई है जिसके आधार पर तात्कालिक तौर पर किसी नतीजे पर पहुँचा जा सके किंतु जो समझौते हुए हैं तथा एकजुटता बढ़ी है, उससे भविष्य में बेहतरी की उम्मीदें ज़रूर बढ़ी हैं। अमेरिका और चीन ने कुछ समय के के लिये टैरिफ को लेकर प्रतिस्पर्द्धा को स्थगित कर दिया है, तो अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा के बीच नए समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं।  दुनिया के प्रति-दिन बदलते माहौल में आर्थिक विकास के लिये विकासशील देशों के बीच आपसी संवाद और तालमेल बेहद अहम है। इस प्रकार तमाम देश आपसी सहयोग और समझदारी से न सिर्फ वैश्विक चुनौतियों का सामना कर सकते हैं बल्कि खुद को भी आर्थिक तौर पर मज़बूत बना सकते हैं।