जी.ई.ए.सी. सदस्यों की नियुक्ति के संबंध में विवाद

चर्चा में क्यों?

हाल ही में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं वन विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति parliamentary standing committee ने ‘जी.एम. फसल और पर्यावरण पर इसके प्रभाव’ (GM crop and its impact on environment) पर अपनी 301वीं रिपोर्ट पेश की है, जिसमें जी.एम. फसलों के संबंध में कुछ महत्त्वपूर्ण सिफारिशें प्रस्तुत की गई हैं।

 जी.ई.ए.सी. क्या है?

  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम (Environment Protection Act), 1986 के अंतर्गत गठित  जी.ई.ए.सी. (Genetic Engineering Appraisal Committee - GEAC) पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (Ministry of Environment and Forests) की एक सर्वोच्च संस्था है जिसे 'खतरनाक सूक्ष्मजीवों/आनुवंशिक रूप से निर्मित जीवों या कोशिकाओं के निर्माण, उपयोग, आयात, निर्यात तथा  भंडारण के नियमों' (Rules for Manufacture, Use, Import, Export and Storage of Hazardous Microorganisms/Genetically Engineered Organisms or Cells) के तहत गठित किया गया है ।
  • जी.ई.ए.सी. प्रायोगिक क्षेत्र परीक्षणों सहित पर्यावरण में आनुवंशिक रूप से इंजीनियर्ड जीवों और उत्पादों के संचालन से संबंधित प्रस्तावों के अनुमोदन के लिये प्रमुख उत्तरदायी निकाय है।

 जी.ई.ए.सी. पर पैनल द्वारा की गई कुछ महत्त्वपूर्ण टिप्पणियाँ 

  • आपको बता दे कि पिछले कुछ समय से देश की सर्वोच्च जैव प्रौद्योगिकी नियामक संस्था जी.ई.ए.सी. के कुछ सदस्यों की नियुक्ति के संबंध में विवाद की स्थिति बनी हुई है। जिसके चलते न केवल इसका कार्य बाधित हो रहा है बल्कि संस्था की छवि भी धूमिल हो रही है।
  • यही कारण है कि समिति द्वारा इस संबंध में पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जी.ई.ए.सी. के सदस्यों की नियुक्ति, उनकी पहचान, आदि के चयन के लिये अपनाए जाने वाले मापदंडों के बारे में भी चिंता व्यक्त की गई है।

पृष्ठभूमि

  • आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति (Genetic Engineering Appraisal Committee - GEAC) का गठन पहली बार 28 मई 1990 को किया गया था।
  • इसके पश्चात् इसे तीन साल की अवधि के लिये 11 मार्च, 2013 को अंतिम बार गठित किया गया। 
  • इसके बाद, सक्षम प्राधिकारी (competent authority) के अनुमोदन पर समिति के कार्यकाल को नई समिति के पुनर्गठन तक के लिये बढ़ा दिया गया।