CAFE-2 विनियम और BS-VI चरण (II) के मानदंड

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ऑटो इंडस्ट्री ने सरकार से अनुरोध किया है कि लॉकडाउन के प्रभावों को देखते हुए कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (Corporate Average Fuel Efficiency-2) के नियमों और BS-VI के चरण (II) के मानकों को लागू करने की अवधि को अप्रैल 2024 तक बढ़ा दिया जाए।

  • CAFE-2 तथा BS-VI के चरण (II) के मानदंडों को लागू करने के लिये क्रमशः वर्ष 2022 और अप्रैल 2023 की अवधि तय की गई है।

प्रमुख बिंदु

कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता विनियम:

  • भारत सहित कई विकसित और विकासशील देशों में कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता विनियम लागू किये गए हैं।
  • ये वाहनों की ईंधन खपत या ईंधन दक्षता में सुधार और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन को कम करते हैं। इस प्रकार ईंधन के लिये तेल पर निर्भरता कम होने के साथ ही प्रदूषण पर नियंत्रण पाने में भी मदद मिलती है।
  • कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता विनियम ऑटो निर्माताओं के लिये बिक्री-मात्रा के भारित औसत (Sales-Volume Weighted Average) को संदर्भित करता है। CAFE का विचार इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicle) सहित अधिक ईंधन कुशल मॉडल का उत्पादन और बिक्री कर ईंधन दक्षता लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिये  निर्माताओं को सहयोग प्रदान करना है।

भारत में प्रमोचन:

  • CAFE मानकों को पहली बार वर्ष 2017 में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम (Energy Conservation Act), 2001 के तहत केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय (Union Ministry of Power) द्वारा अधिसूचित किया गया था।
    • यह विनियमन वर्ष 2015 के ईंधन खपत मानकों के अनुसार है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक वाहनों की ईंधन दक्षता को 35% तक बढ़ाना है।
  • सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (Ministry of Road Transport and Highway) प्रत्येक वित्तीय वर्ष के अंत में ऑटोमोबाइल निर्माताओं द्वारा वार्षिक ईंधन की खपत की निगरानी और रिपोर्टिंग करने के लिये ज़िम्मेदार एक नोडल एजेंसी है।
  • इस विनियमन को दो चरणों में पेश किया गया था, जिसके तहत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को वर्ष 2022-23 तक 130 ग्राम/किमी. और वर्ष 2022-23 तक 113 ग्राम/किमी. करना है।

 प्रयोज्यता:

  • यह मानक पेट्रोल, डीज़ल, तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) और संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) के उपयोग वाले यात्री वाहनों के लिये लागू है।

BS-VI चरण (II) मानदंड:

  • भारत स्टेज उत्सर्जन मानक आतंरिक दहन और इंजन तथा स्पार्क इग्निशन इंजन के उपकरण से उत्सर्जित वायु प्रदूषण को विनियमित करने के मानक हैं।
  • इन मानकों का उद्देश्य तीन क्षेत्रों (उत्सर्जन नियंत्रण, ईंधन दक्षता और इंजन डिज़ाइन) में सुधार करना है।
  • केंद्र सरकार ने वाहन निर्माताओं के लिये 1 अप्रैल, 2020 से केवल BS-VI (BS6) वाहनों का निर्माण, बिक्री और पंजीकरण करना अनिवार्य  कर दिया है।
    • BS-VI को यूरो-VI मानदंडों के अनुरूप बनाया गया है।
  • BS-VI उत्सर्जन मानदंडों के अनुसार पेट्रोल वाहनों को नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx) उत्सर्जन में 25%, डीज़ल इंजन वाहनों को हाइड्रो काडीज़लर्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड (HC and NOx) में 43% तथा उनके NOx के स्तर को 68% एवं पार्टिकुलेट मैटर के स्तर को 82% तक कम करना होगा।
  • ईंधन में सल्फर सामग्री का होना चिंता का एक प्रमुख कारण है। BS-VI ईंधन में सल्फर की मात्रा BS-IV ईंधन की तुलना में बहुत कम होती है। इसे BS-IV के तहत निर्धारित मात्रा 50 mg/kg से BS-VI में 10 mg/kg तक घटाया जाता है।
  • वर्ष 2023 के बाद से शुरू किये जाने वाले कुछ उपायों में नियामक अधिकारियों द्वारा इन-सर्विस अनुपालन, बाज़ार निगरानी और स्वतः वाहन परीक्षण, निर्माताओं द्वारा वेबसाइटों पर उत्सर्जन डेटा का सार्वजनिक प्रकटीकरण आदि को शामिल किया गया है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस