100 अरब रुपए से अधिक की इसरो परियोजनाओं को मंज़ूरी

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (Polar Satellite Launch Vehicle -PSLV) के छठे चरण तथा जीएसएलवी एमके-III निरंतरता कार्यक्रम के प्रथम चरण को वित्तीय सहायता देने हेतु मंज़ूरी दी है।

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान

  • PSLV, विश्व के सर्वाधिक विश्वसनीय प्रमोचन वाहनों (Launch vehicles) में से एक है।
  • यह गत 20 वर्षों से भी अधिक समय से अपनी सेवाएँ उपलब्ध करा रहा है। इसने चंद्रयान-1, मंगल ओर्बिट मिशन (Mars orbits mission), स्पेस कैप्सूल रिकवरी एक्सपरिमेंट Space capsule recovery experiment), भारतीय क्षेत्रीय दिशा-निर्देशन उपग्रह प्रणाली (Indian Regional Navigation Satellite System-IRNSS) आदि जैसे अनेक ऐतिहासिक मिशनों के लिये उपग्रहों का प्रमोचन किया है।

ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान कार्यक्रम हेतु वित्तीय सहायता

  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत 30 PSLV परिचालन प्रक्षेपण को वित्‍तीय सहायता प्रदान करने की मंज़ूरी दी गई है। इसके लिये कुल 6,131 करोड़ रुपए के कोष की आवश्‍यकता है।
  • यह कार्यक्रम पृथ्‍वी अवलोकन, दिशा सूचक और अंतरिक्ष विज्ञान के लिये उपग्रह के प्रक्षेपण की आवश्‍यकता को भी पूरा करेगा। इससे भारतीय अंतरिक्ष उद्योग में उत्‍पादन भी जारी रहेगा।

प्रमुख प्रभाव

  • PSLV के परिचालन से देश पृथ्‍वी अवलोकन, आपदा प्रबंधन, दिशा सूचक और अंतरिक्ष विज्ञान के लिये उपग्रह प्रक्षेपण क्षमता में आत्‍मनिर्भर बना है।
  • PSLV को जारी रखने के कार्यक्रम से राष्‍ट्रीय ज़रूरतों के अधिक उपग्रह प्रक्षेपण में क्षमता और आत्‍मनिर्भरता बढ़ेगी।
  • PSLV को जारी रखने के कार्यक्रम के छठे चरण के दौरान अधिकतम भारतीय उद्योग की भागीदारी से प्रतिवर्ष आठ प्रक्षेपण करने की उपग्रह प्रक्षेपण की मांग पूरी होगी। 2019-2024 की अवधि के दौरान सभी परिचालन अभियान संपन्‍न हो जाएंगे।
  • PSLV जारी रखने का कार्यक्रम 2008 में शुरू किया गया था और इसके चार चरण पूरे हो चुके हैं तथा 2019-20 के पहले छह माह तक पाँचवें चरण के संपन्‍न होने की आशा है।
  • छठे चरण की मंज़ूरी से 2019-20 से 2023-24 के पहले तीन माह के दौरान उपग्रह प्रक्षेपण अभियान में मदद मिलेगी।

पृष्‍ठभूमि 

  • PSLV सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट (Sun-Synchronous Polar Orbit - SSPO), जीयो-सिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (Geo-synchronous Transfer Orbit - GTO) और लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit - LEO) प्रक्षेपण अभियान में बहुपयोगी प्रक्षेपणयान (versatile launch vehicle) के रूप में उभरा है।
  • हाल ही में 12 अप्रैल, 2018 को PSLV-C41 के सफल प्रक्षेपण के साथ ही PSLV ने तीन विकास और 43 परिचालन प्रक्षेपण संपन्‍न किये हैं तथा पिछले 41 प्रक्षेपण भी सफल रहे हैं।
  • PSLV ने अपनी उत्‍पादन क्षमता से स्‍वयं को राष्‍ट्रीय उपग्रह के लिये कार्य-यान के तौर पर स्‍थापित किया है, जिससे व्‍यावसायिक प्रक्षेपण के अवसरों पर तेज़ी से कार्य किया जा सकेगा।

जियो-सिंक्रोनस (भू-समकालिक) उपग्रह प्रक्षेपण वाहन मार्क-III
[Geo-synchronous Satellite Launch Vehicle Mark-III (GSLV Mk-III)]

  • जीएसएलवी एमके-III निरंतरता कार्यक्रम के प्रथम चरण के लिये वित्तीय सहायता को मंज़ूरी दी गई है, इसमें 10 GSLV Mk-III उड़ानें शामिल हैं तथा इनकी कुल अनुमानित लागत 4338.20 करोड़ रुपए है।
  • इस 4338.20 करोड़ रुपए में दस GSLV Mk-III वाहन, आवश्यक सुविधा वृद्धि, कार्यक्रम प्रबंधन और प्रक्षेपण अभियान की लागत भी शामिल है।

जीएसएलवी एमके-III

  • यह तीन चरण वाला वाहन है जिसे जीटीओ में भारी संचार उपग्रह ले जाने की आवश्यकता को पूरा करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।
  • 43.498 मीटर की कुल ऊँचाई और 4 मीटर के कोर व्यास के साथ वाहन का द्रव्यमान 640 टन है।
  • वाहन पर दो ठोस स्ट्रैप-ऑन मोटर्स-एस200, एक कोर द्रव बूस्टर चरण–एल 110, और एक क्रायोजेनिक ऊपरी चरण-सी25 है। भारी पेलोड को समायोजित करने के लिये इसमें 5 मीटर व्यास के ओगिव आकार की पेलोड फेअरिंग (ogive shaped payload fairing) की गई है।

प्रमुख बिंदु

  • GSLV Mk-III निरंतरता कार्यक्रम-चरण 1 परिचालन उड़ानों का पहला चरण है जो देश की उपग्रह संचार आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु 4 टन वर्ग के संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षमता प्रदान करेगा।
  • GSLV Mk-III के परिचालन से 4 टन संवर्ग के संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षम होने के कारण देश आत्मनिर्भर हो जाएगा और जिससे यह हमारे देश के अंतरिक्ष के बुनियादी ढाँचे को बनाए रखने, इसे मज़बूत करने तथा विदेशी प्रक्षेपण पर निर्भरता को कम करने में मददगार साबित होगा।
  • GSLV Mk-III निरंतरता कार्यक्रम के प्रथम चरण के अंतर्गत ग्रामीण ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिये उच्च प्रवाह उपग्रहों की राष्ट्रीय मांग को पूरा करने, डीटीएच, वीसैट और टेलीविज़न प्रसारणकर्त्ताओं के लिये ट्रांसपोंडर की उपलब्धता को बढ़ाने तथा बनाए रखने हेतु संचार उपग्रहों की प्रक्षेपण आवश्यकता को पूरा करेगा।
  • GSLV Mk-III प्रक्षेपण वाहन की परिचालन उड़ानों का पहला चरण होगा और इसकी मंज़ूरी से 2019-2024 की अवधि के दौरान यह उपग्रहों के प्रक्षेपण को पूरा करने में सहायक सिद्ध होगा। 

पृष्ठभूमि

  • GSLV Mk-III को जीटीओ (Geosynchronous Transfer Orbit - GTO) में उपग्रहों के 4 टन वर्ग में प्रक्षेपित करने के लिये विकसित किया गया है।
  • इसने 2014 में एक प्रयोगात्मक उड़ान (experimental flight) LVM3-X और 2017 में एक विकास उड़ान (developmental flight) GSLV MkIII-D1 को पूरा कर लिया है।
  • दूसरी विकास उड़ान को इस वर्ष 2018 के जुलाई-सितंबर में पूरा किया जाएगा।
  • निरंतरता कार्यक्रम-चरण 1 संचार उपग्रहों के 4 टन वर्ग के लिये अंतरिक्ष तक स्वतंत्र पहुँच में सक्षम कर देगा।
  • राष्ट्रीय आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ प्रक्षेपण सेवाओं के लिये अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में अपनी वाणिज्यिक क्षमता को बढ़ावा देने हेतु संचार उपग्रहों के 4 टन वर्ग प्रक्षेपण में GSLV Mk-III एक लागत प्रभावी वाहन के रूप में स्थापित होगा।