आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

संदर्भ

हाल ही में भारत सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence- AI) मिशन पर नीति आयोग एवं इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology- MeitY) के बीच मतभेद को हल करने हेतु एक समिति का गठन किया है। इस समिति में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, नीति आयोग के सीईओ और MeitY के सचिव शामिल हैं एवं इसकी अध्यक्षता मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन कर रहे हैं। ध्यातव्य है कि भारत अपनी अर्थव्यवस्था को डिज़िटल अर्थव्यवस्था बनाने के साथ-साथ सरकारी काम-काज को AI से जोड़ने हेतु प्रतिबद्ध है।

  • ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्यक्रम के लिये नीति आयोग ने 7,000 करोड़ रुपए के बजट हेतु व्यय वित्त समिति (EFC) से मंज़ूरी प्राप्त की है, जबकि MeitY ने इसके लिये EFC को 400 करोड़ रुपए का एक अलग प्रस्ताव भेजा था।
  • इस कार्यक्रम हेतु नीति आयोग ने 7,500 करोड़ रुपए की लागत से पाँच उत्कृष्ट अनुसंधान संस्थानों, 20 अंतर्राष्ट्रीय केंद्रों एवं ‘ऐरावत’ नामक क्लाउड कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है।

Artificial Intellignece research

  • प्रस्ताव के अनुसार, सभी AI मिशन की निगरानी एक टास्क फोर्स द्वारा की जाएगी, जिसका नेतृत्व सभी मंत्रालयों और राज्यों के विशेषज्ञों के अलावा NITI Aayog के सदस्य करेंगे।
  • वहीं MeitY के कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्रों में अनुप्रयोगों के साथ-साथ एक राष्ट्रीय AI पोर्टल लॉन्च करना शामिल है।

ज्ञातव्य है कि 28-29 जून, 2019 को ओसाका में संपन्न हुए G- 20 के दो दिवसीय शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री ने डिज़िटल अर्थव्यवस्था एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्त्व को रेखांकित किया। उन्होंने डिज़िटल अर्थव्यवस्था एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने हेतु सरकार को 5 ‘I’ को प्रोत्साहन देने की बात कही है। यहाँ 5 ‘I’ का अर्थ है-

  1. Inclusiveness (समावेशन)
  2. Indigenization (स्वदेशीकरण)
  3. Innovation (नवाचार)
  4. Investment in infrastructure (अवसंरचना में निवेश)
  5. International cooperation (अंतर्राष्ट्रीय सहयोग)।

क्या है AI ?

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंप्यूटर विज्ञान की वह शाखा है जो कंप्यूटर के इंसानों की तरह व्यवहार करने की धारणा पर आधारित है। इसके जनक जॉन मैकार्थी हैं।
  • यह मशीनों की सोचने, समझने, सीखने, समस्या हल करने और निर्णय लेने जैसी संज्ञानात्मक कार्यों को करने की क्षमता को सूचित करता है।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर शोध की शुरुआत 1950 के दशक में हुई थी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का अर्थ है कृत्रिम तरीके से विकसित बौद्धिक क्षमता।
  • इसके ज़रिये कंप्यूटर सिस्टम या रोबोटिक सिस्टम तैयार किया जाता है, जिसे उन्हीं तर्कों के आधार पर संचालित करने का प्रयास किया जाता है जिसके आधार पर मानव मस्तिष्क कार्य करता है।
  • AI पूर्णतः प्रतिक्रियात्मक (Purely Reactive), सीमित स्मृति (Limited Memory), मस्तिष्क सिद्धांत (Brain Theory) एवं आत्म-चेतन (Self Conscious) जैसी अवधारणाओं पर कार्य करता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर 7-सूत्री रणनीति

  • इससे पहले अक्तूबर,2017 में केंद्र सरकार ने 7-सूत्री रणनीति तैयार की थी, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने के लिये भारत की सामरिक योजना का आधार तैयार करेगी। इनमें प्रमुख हैं:
  • मानव-मशीन की बातचीत के लिये विकासशील विधियाँ बनाना।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और R&D के साथ एक सक्षम कार्यबल का निर्माण करना।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक, कानूनी और सामाजिक निहितार्थों को समझना तथा उन पर काम करना।
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी को मानक मानकर और बेंचमार्क के माध्यम से मापन का मूल्यांकन करना।

लाभ

  • NITI आयोग के अनुमान के अनुसार, AI को अपनाने एवं बढ़ावा देने से वर्ष 2035 तक भारत की GDP में 957 बिलियन डॉलर की वृद्धि के साथ ही और वर्ष 2035 तक भारत की वार्षिक वृद्धि दर को 1.3 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है।
  • कृषि में अनुप्रयोग से यह किसानों की आय तथा कृषि उत्पादकता बढ़ाने और अपव्यय को कम करने में योगदान कर सकता है।
  • AI गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुँच को बढ़ा सकता है। इसकी मदद से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है एवं शिक्षा तक लोगों की पहुँच को बढ़ाया जा सकता है। इसकी सहायता से प्रशासन में दक्षता को बढ़ाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त व्यापार एवं वाणिज्य में इसका लाभ सिद्ध है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता टास्क फोर्स

इसका गठन वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय , भारत सरकार द्वारा किया गया है।

मिशन:

  • AI प्रौद्योगिकियों की तैनाती में तेजी लाने के लिये नीति और कानूनी ढाँचे का निर्माण।
  • AI का अनुप्रयोग कर आर्थिक लाभ प्राप्त करना।
  • विशिष्ट उद्योग, अनुसंधान कार्यक्रम और सरकार हेतु पाँच वर्षीय अनुशंसाएँ।

विज़न: आर्थिक, राजनीतिक और कानूनी प्रक्रियाओं में AI को अपनाना ताकि भारत को AI-युक्त अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने का लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता मिले।

निष्कर्ष

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विगत कई दशकों से चर्चा के केंद्र में रहा एक ज्वलंत विषय है। वैज्ञानिक इसके अच्छे और बुरे परिणामों को लेकर समय-समय पर विचार-विमर्श करते रहते हैं। आज दुनिया तकनीक के माध्यम से तेज़ी से बदल रही है। विकास को गति देने और लोगों को बेहतर सुख-सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिये प्रत्येक क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा रहा है। बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण और भूमंडलीकरण ने जहाँ विकास की गति को तेज़ किया है, वहीं इसने कई नई समस्याओं को भी जन्म दिया है, जिनका समाधान करने के लिये नित नए उपाय अपनाए जाते हैं। जहाँ वैज्ञानिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अनेकानेक लाभ गिनाते हैं, वहीं वे यह भी मानते हैं कि इसके आने से सबसे बड़ा नुकसान मनुष्यों को ही होगा, क्योंकि उनका काम मशीनों से लिया जाएगा, जो स्वयं ही निर्णय लेने लगेंगी और यदि उन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो वे मानव सभ्यता के लिये हानिकारक हो सकती हैं। ऐसे में इनके इस्तेमाल से पहले लाभ और हानि दोनों को संतुलित करने कीआवश्यकता होगी।