Publish Date : 21-04-2024
Question 1:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- दिल्ली सल्तनत के राजस्व प्रशासन में राजस्व वसूली के प्रभारी को ‘आमिल’ कहा जाता था।
- दिल्ली के सुल्तानों की इक्ता प्रणाली एक प्राचीन देशी संस्था थी।
- ‘मीर बख्शी’ का पद दिल्ली के खिलजी सुल्तानों के शासनकाल में अस्तित्व में आया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 2
केवल 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: (a)
व्याख्या:
- दिल्ली सल्तनत में किसानों से सीधे राजस्व एकत्र करने और भूमि की माप का काम आमिलों पर निर्भर था। अत: कथन 1 सही है।
- इक्ता प्रणाली विशेष रूप से फारस के बूईद राजवंश द्वारा पश्चिम एशिया में विकसित की गई, जिसने इस प्रणाली को औपचारिक रूप दिया।
- भारत में इक्ता को इल्तुतमिश (मामलुक वंश) द्वारा एक संस्थागत दर्जा प्रदान किया गया था।
- इक्ता प्रणाली के तहत साम्राज्य की भूमि को इक्ता नामक विभिन्न भागों में विभाजित कर अधिकारियों जिन्हें ‘इक्तदार ’के रूप में जाना जाता था, को सौंप दिया जाता था। अत: कथन 2 सही नहीं है।
- गियास-उद-दीन बलबन (1266-1287 ई.) ने ‘दीवान-ए-अर्ज़’ नामक एक सैन्य विभाग की स्थापना की थी, जिसके तहत शाही सेना के गठन और रखरखाव के लिये ‘अरिजी-मामलिक’ नामक अधिकारी ज़िम्मेदार होता था।
- अलाउद्दीन खिलजी ने दीवान-ए-अर्ज़ विभाग की दक्षता बढ़ाने के लिये ‘दाग’ प्रणाली (यानी घोड़ों को चिह्नित करना) की शुरुआत की जिसका उद्देश्य घोड़ों की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ उनकी गिनती की प्रणाली में सुधार लाना था।
- मीर बख्शी मुगलकालीन भारत के दौरान सैन्य विभाग के प्रमुख हुआ करते थे। अत: कथन 3 सही नहीं है।
Question 2:
सहायक संधि प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- भारत में इसकी शुरुआत लॉर्ड वेलेज़ली ने की थी।
- इसको अपनाने वाले भारतीय राज्य के शासक को अपने क्षेत्र के भीतर ब्रिटिश सेना की स्थायी तैनाती स्वीकार करने के लिये मजबूर किया गया था।
- जब राज्य समय पर धन का भुगतान करने में विफल रहा, तो उसे भुगतान के बदले में अपने क्षेत्रों के कुछ हिस्सों को कंपनी को सौंपने के लिये कहा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन- से सही हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- सहायक संधि प्रणाली की शुरुआत फ्राँसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के गवर्नर जोसेफ फ्रांकोइस डुप्लेक्स ने की थी, जिन्होंने 1740 के दशक के अंत में हैदराबाद के निज़ाम और कर्नाटक क्षेत्र में अन्य भारतीय राजकुमारों के साथ संधियाँ की थीं। संभवतः डुप्लेक्स ने ही सबसे पहले भारतीय शासकों को युद्ध लड़ने के लिये किराये पर यूरोपीय सेनाएँ दीं।
- सहायक गठबंधन प्रणाली का उपयोग लॉर्ड वेलेज़ली द्वारा किया गया था (जो 1798-1805 तक गवर्नर जनरल थे) भारत में साम्राज्य बनाने के लिये। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- इस प्रणाली के तहत, सहयोगी भारतीय राज्य के शासक को अपने क्षेत्र के भीतर ब्रिटिश सेना की स्थायी तैनाती स्वीकार करने और उसके रखरखाव के लिये सब्सिडी का भुगतान करने के लिये मजबूर किया गया था। अतः कथन 2 सही है।
- अंतिम चरण में धन या सुरक्षा शुल्क आमतौर पर उच्च स्तर पर तय किया जाता था, जब राज्य समय पर धन का भुगतान करने में विफल रहते थे तो उनसे भुगतान के बदले में अपने क्षेत्रों के कुछ हिस्सों को कंपनी को सौंपने के लिये कहा जाता था। अतः कथन 3 सही है।
Question 3:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| युद्ध |
संबंधित संधि |
| बक्सर का युद्ध |
श्रीरंगपट्टनम की संधि |
| तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध |
बसीन की संधि |
| पूना का युद्ध |
इलाहाबाद की संधि |
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- 22 अक्टूबर, 1764 को बक्सर के युद्ध के बाद मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय और ईस्ट इंडिया कंपनी के रॉबर्ट क्लाइव के बीच 16 अगस्त, 1765 को इलाहाबाद की संधि पर हस्ताक्षर किये गए थे। अतः युग्म 1 सही सुमेलित नहीं है।
- वर्ष 1792 की श्रीरंगपट्टनम की संधि ने तृतीय आंग्ल-मैसूर युद्ध को समाप्त कर दिया। इसके हस्ताक्षरकर्त्ताओं में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से लॉर्ड कॉर्नवालिस तथा हैदराबाद के निज़ाम एवं मराठा साम्राज्य के प्रतिनिधि और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान शामिल थे। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- बसीन की संधि द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा संघ के पेशवा, बाजीराव द्वितीय के बीच एक समझौता हुआ था, इस पर पूना के युद्ध के बाद 31 दिसंबर, 1802 को वर्तमान बसीन में हस्ताक्षर किये गए थे। अतः युग्म 3 सही सुमेलित नहीं है।
Question 4:
बंगाल में द्वैध शासन प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- बंगाल में वॉरेन हेस्टिंग्स द्वारा द्वैध शासन प्रणाली शुरू की गई थी।
- द्वैध शासन प्रणाली के तहत कंपनी ने बंगाल के सूबेदार से दीवानी कार्यों का अधिग्रहण किया।
- इस प्रणाली के कारण प्रशासनिक व्यवस्था असंतुलित होने के साथ यह बंगाल के लोगों के लिये विनाशकारी साबित हुई।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- रॉबर्ट क्लाइव ने बंगाल में द्वैध शासन प्रणाली (अर्थात कंपनी और नवाब दोनों का शासन) शुरू की थी, जिसमें दीवानी (अर्थात राजस्व एकत्र करना) और निज़ामत (अर्थात पुलिस और न्यायिक कार्य) दोनों कार्य कंपनी के नियंत्रण में आ गए। वॉरेन हेस्टिंग्स ने वर्ष 1772 में द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया था। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- कंपनी ने दीवानी के कार्य सम्राट से और निज़ामत के कार्य बंगाल के सूबेदार से प्राप्त किये थे। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- द्वैध शासन प्रणाली के कारण प्रशासनिक व्यवस्था असंतुलित हो गई और यह बंगाल के लोगों के लिये विनाशकारी साबित हुई। इस दौरान प्रशासन तथा लोक कल्याण की परवाह न तो कंपनी और न ही नवाब को थी। अतः कथन 3 सही है।
Question 5:
भारत में इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शुरुआती उद्यमों के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं?
- अंग्रेज़ों ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री सूरत में स्थापित की थी।
- सर थॉमस रो मुगल दरबार के पहले अंग्रेज़ राजदूत थे।
- वर्ष 1757 में प्लासी के युद्ध से भारत में ब्रिटिश राजनीतिक प्रभुत्व की शुरुआत हुई थी।
- अंग्रेज़ों ने शुरू में मसाला व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया तथा बाद में कपड़ा व्यापार की ओर रुख किया था।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1, 2, और 3
केवल 2, 3 और 4
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर:D
व्याख्या:
- अंग्रेज़ों ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री सूरत में नहीं, बल्कि मसूलीपट्टनम में स्थापित की। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- सर थॉमस रो जहाँगीर के शासनकाल के दौरान मुगल दरबार में आने वाले पहले अंग्रेज़ी राजदूत थे। अतः कथन 2 सही है।
- वर्ष 1757 में प्लासी के युद्ध से भारत में ब्रिटिश राजनीतिक प्रभुत्व की शुरुआत हुई थी और यह युद्ध ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी तथा बंगाल के नवाब सिराज-उद-दौला के बीच हुआ था। अतः कथन 3 सही है।
- अंग्रेज़ों ने शुरू में मसाला व्यापार पर ध्यान केंद्रित किया तथा बाद में अपना ध्यान कपड़ा व्यापार पर केंद्रित किया था। अतः कथन 4 सही है।
अतः विकल्प D सही है।
Question 6:
15वीं और 16वीं शताब्दी के दौरान भारत में पुर्तगालियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों में से कौन-से सही हैं?
- भारत में पुर्तगालियों ने अपनी पहली फैक्ट्री कालीकट में स्थापित की थी।
- कालीकट में वास्को डी गामा के आगमन के परिणामस्वरूप यूरोप से भारत तक प्रत्यक्ष समुद्री मार्गों की शुरुआत हुई थी।
- अल्बुकर्क की 'ब्लू वाटर पॉलिसी' की नीति का उद्देश्य हिंद महासागर के व्यापार पर प्रभुत्व स्थापित करना था।
- मसाला व्यापार में पुर्तगालियों के प्रभुत्व के कारण भारतीय मसाला व्यापारियों का पतन हुआ।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1, 2, और 3
केवल 3 और 4
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर:C
व्याख्या:
- पुर्तगालियों ने वर्ष 1500 में, कालीकट में भारत में अपनी पहली फैक्ट्री स्थापित की थी। अतः कथन 1 सही है।
- वर्ष 1498 में वास्को डी गामा के कालीकट आगमन के परिणामस्वरूप यूरोप से भारत तक प्रत्यक्ष समुद्री मार्गों की शुरुआत हुई थी। अतः कथन 2 सही है।
- अल्बुकर्क की 'ब्लू वाटर पॉलिसी' का उद्देश्य प्रमुख समुद्री मार्गों पर नियंत्रण हासिल करके हिंद महासागर के व्यापार पर प्रभाव स्थापित करना था। अतः कथन 3 सही है।
- मसाला व्यापार में पुर्तगाली प्रभुत्व के कारण प्रत्यक्ष रूप से भारतीय मसाला व्यापारियों का पतन नहीं हुआ था बल्कि इसके परिणामस्वरूप अन्य यूरोपीय शक्तियों के साथ प्रतिस्पर्द्धा और संघर्ष को बढ़ावा मिला था। अतः कथन 4 सही नहीं है।
अतः विकल्प C सही है।
Question 7:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| अधिकारी |
कार्य |
| 1.बरीद |
संदेश लेखक |
| 2.वाकिया नवीस |
गुप्तचर अधिकारी |
| 3.मीर समन |
शाही सामान का प्रभारी |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 3
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
मुगल प्रशासन के अंतर्गत विभिन्न अधिकारी
- कानूनगो: ये वंशानुगत ज़मींदार के साथ-साथ स्थानीय अधिकारी भी होते थे।
- फौजदार: कानून-व्यवस्था का प्रभारी।
- अमलगुज़ार: भू-राजस्व का आकलन और संग्रह करने वाले अधिकारी।
- वजीर: राजस्व विभाग का प्रमुख
- मीर बख्शी: सैन्य विभाग का प्रमुख
- बरीद: गुप्तचर विभाग का अधिकारी
- वाकिया नवीस: संदेश लेखक
- मीर समन: शाही सामान का प्रभारी
Question 8:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- पुर्तगाली गवर्नर अल्बुकर्क, कृष्णदेव राय के समकालीन थे।
- कृष्ण देव राय ने यवनराज स्थापनाचार्य अर्थात यवन साम्राज्य के पुनर्स्थापक की उपाधि धारण की।
- कृष्ण देव राय ने तेलुगु और संस्कृत दोनों में किताबें लिखीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- कृष्ण देव राय ने पुर्तगाली गवर्नर अल्बुकर्क के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखे। अतः कथन 1 सही है।
- उन्होंने यवनराज स्थापनाचार्य यानी यवन साम्राज्य के पुनर्स्थापक, अभिनव भोज, आंध्र भोज और आंध्र पितामह की उपाधियाँ धारण की। अतः कथन 2 सही है।
- वह तेलुगु और संस्कृत दोनों के प्रतिभाशाली विद्वान थे, जिनमें से केवल दो कार्य मौजूद हैं: तेलुगु कार्य 'अमुक्तमाल्यदा' और संस्कृत नाटक 'जांबवती कल्याणम'। अतः कथन 3 सही है।
Question 9:
शिवाजी के अष्ट-प्रधान के संबंध में निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
- सर-ए-नौबत - सेनापति
- पंडित राव - समारोहों का दायित्व
- सुमंत - धर्मार्थ और धार्मिक प्रशासन
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
केवल 1 और 2
केवल 1
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- शिवाजी एक महान प्रशासक थे। उन्होंने प्रशासन की एक प्रभावी प्रणाली की नींव रखी। सरकार का प्रधान राजा होता था। अष्टप्रधान नामक मंत्रिपरिषद उसकी सहायता करती थी। हालाँकि प्रत्येक मंत्री सीधे शिवाजी के प्रति उत्तरदायी था।
- पेशवा - वित्त और सामान्य प्रशासन। बाद में यह प्रधानमंत्री का पद बन गया था।
- सर-ए-नौबत या सेनापति - सैन्य कमांडर, यह एक मानद पद था।
- अमात्य - महालेखाकार।
- वाकयानवीस - गुप्तचर, डाक एवं घरेलू मामलों की देख-रेख करता था।।
- सचिव - पत्राचार।
- सुमंत - विदेश मंत्री।
- न्यायाधीश - न्याय।
- पंडित राव - धर्मार्थ और धार्मिक प्रशासन
Question 10:
सिख गुरुओं के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- गुरुमुखी लिपि का प्रतिपादन सिखों के दूसरे गुरु अंगद ने किया था जो थे।
- गुरु अर्जुन देव ने आदि ग्रंथ का संकलन किया था जो सिखों का पवित्र ग्रंथ है।
- आदि ग्रंथ के पूरा होने के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष आदि महोत्सव मनाया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
केवल 1 और 2
केवल 1 और 3
केवल 2 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- 10 गुरुओं में से दूसरे गुरु गुरु अंगद देव ने गुरुमुखी (पंजाबी का लिखित रूप) लिपि का प्रतिपादन किया था। उन्होंने गुरु नानक देव द्वारा शुरू किये गए लंगर की व्यवस्था को लोकप्रिय बनाने के साथ विस्तारित किया था। अतः कथन 1 सही है।
- सिखों के पवित्र ग्रंथ, आदि ग्रंथ का संकलन गुरु अर्जुन देव ने किया था। उन्होंने गोइंदवाल साहिब के पास में तरनतारन साहिब शहर की स्थापना की थी। सम्राट जहाँगीर के आदेश पर उन्हें मृत्युदंड की सजा देने के बाद शहीदों के सरताज की उपाधि से सम्मानित किया गया था। अतः कथन 2 सही है।
- आदि महोत्सव, वर्ष 2007 से जनजातीय मामलों के मंत्रालय के तहत TRIFED द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय जनजातीय उत्सव है। इसमें जनजातीय संस्कृति, शिल्प, गैस्ट्रोनॉमी, व्यापार और पारंपरिक कला का आयोजन होता है। अतः कथन 3 सही नहीं है।
- वर्ष 2023 की इसकी थीम "आदिवासी शिल्प, संस्कृति, भोजन और वाणिज्य की भावना का उत्सव" है। यह महोत्सव आदिवासी कारीगरों को अपने व्यवसाय को बढ़ावा देने के साथ-साथ अपने उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं को बेचने के लिये एक मंच प्रदान करता है। यह भारत की विविध जनजातीय विरासत और उनकी रचनात्मकता का उत्सव है।
Question 11:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन का नेतृत्त्व अलवार नामक संत कवियों ने किया था।
- भक्ति आंदोलन में मोक्ष की प्राप्ति हेतु अनुष्ठान और समारोह करने पर बल दिया गया था।
- उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन का प्रसार रामानंद ने किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
केवल 1 और 2
केवल 1 और 3
केवल 2 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- भक्ति आंदोलन इस सिद्धांत पर आधारित था कि ईश्वर और मनुष्य के बीच संबंध किसी भी अनुष्ठान या धार्मिक समारोह को करने के बजाय प्रेम और पूजा के माध्यम से स्थापित होता है। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- दक्षिण भारत में अलवर संतों द्वारा भक्ति आंदोलन शुरू किया गया था और उत्तर भारत में इसका प्रसार रामानंद ने किया था। अतः कथन 1 और 3 दोनों सही हैं।
Question 12:
'वैभाषिक' निम्नलिखित में से किस एक का उप-भाग है?
जैन धर्म
आजीविक
बौद्ध धर्म
वैष्णव धर्म
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- सर्वास्तिवाद, (संस्कृत: "डॉक्ट्रिन दैट ऑल इज रियल") को वैभाषिक भी कहा जाता है, जो प्रारंभिक बौद्ध धर्म की एक शाखा है। अतः विकल्प C सही है।
- बौद्ध तत्वमीमांसा में एक मौलिक अवधारणा धर्मों, लौकिक(cosmic) कारकों और घटनाओं के अस्तित्व की धारणा है जो किसी व्यक्ति के पिछले कर्मों के प्रभाव में एक व्यक्ति के जीवन प्रवाह को बनाने के लिये क्षणिक रूप से जोड़ती है, जिसे वह अपना व्यक्तित्व मानता है। इन धर्मों की सत्तामीमांसीय वास्तविकता के विषय में विभिन्न प्रारंभिक बौद्ध शाखाओं में मतभेद उत्पन्न हुए।
- जबकि, सभी बौद्धों की तरह, सर्वास्तिवादी हर चीज को अनुभवजन्य मानते हैं जो कि नश्वर है, वे मानते हैं कि धर्म कारक शाश्वत रूप से मौजूद वास्तविकताएंँ हैं। माना जाता है कि धर्म क्षणिक रूप से कार्य करते हैं, विश्व की अनुभवजन्य घटना का निर्माण करते हैं, जो भ्रामक है लेकिन अनुभवजन्य विश्व के बाहर मौजूद है। इसके विपरीत, सौत्रांतिकों (जिनके लिये सूत्र या शास्त्र, आधिकारिक हैं) ने कहा कि धर्म कारक शाश्वत नहीं बल्कि क्षणिक हैं और केवल वास्तव में विद्यमान धर्म ही वर्तमान में कार्य कर रहे हैं।
- सर्वास्तिवाद शाखा को दूसरी शताब्दी-सीई की टीका महाविभा ("महान व्याख्या") के कारण वैभाषिक के रूप में भी जाना जाता है। बौद्ध धर्म की महायान परंपरा में अपने रूपांतरण से पहले, इस पाठ पर अपने अभिधर्मकोष में 4वीं- या 5वीं शताब्दी के महत्त्वपूर्ण बौद्ध विचारक वसुबंधु द्वारा टिप्पणी की गई थी। इस प्रकार, सर्वास्तिवाद शाखा के तत्त्व महायान विचारधारा को प्रभावित करने लगे।
Question 13:
अहमद शाह अब्दाली के भारत पर आक्रमण करने और पानीपत की तीसरी लड़ाई लड़ने का तात्कालिक कारण क्या था?
वह मराठों द्वारा लाहौर से अपने वायसराय तैमूर शाह के निष्कासन का बदला लेना चाहता था।
उसे जालंधर के कुंठाग्रस्त राज्यपाल आदिन बेग खान ने पंजाब पर आक्रमण करने के लिये आमंत्रित किया।
वह मुगल प्रशासन को चहार महल (गुजरात, औरंगाबाद, सियालकोट और पसरूर) के राजस्व का भुगतान न करने के लिये दंडित करना चाहता था।
वह दिल्ली की सीमाओं तक के पंजाब के सभी उपजाऊ मैदानों को हड़पकर उनका विलय अपने राज्य में करना चाहता था।
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- वर्ष 1758 में रघुनाथ राव के अधीन मराठा बलों ने पंजाब में प्रवेश किया और अहमद शाह अब्दाली के पुत्र तैमूर को वहाँ से बाहर निकाल दिया। अब्दाली ने अपने पुत्र को पंजाब का राज्यपाल नियुक्त किया था जिसे अपदस्थ कर मराठों ने आदीन बेग खान को अपना राज्यपाल नियुक्त कर दिया। मराठों की पंजाब विजय अब्दाली के लिये सीधी चुनौती थी और अब्दाली ने इस चुनौती को स्वीकार कर लिया।
- परिणामस्वरूप मराठों और अहमद शाह अब्दाली के बीच वर्ष 1761 में पानीपत की तीसरी लड़ाई लड़ी गई। इस युद्ध में अफगानों की जीत हुई और मराठों की अपने शासन के अधीन भारत को एकजुट करने की महत्त्वाकांक्षा को भी धक्का लगा। अतः विकल्प A सही है।
Question 14:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| नीति |
संबंधित गवर्नर जनरल |
| निष्क्रियता की नीति |
जॉन लॉरेंस |
| प्राउड रिज़र्व की नीति (Policy of Proud Reserve |
ऑकलैंड |
| घेरे की नीति |
वॉरेन हेस्टिंग्स |
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- जॉन लॉरेंस (1864-69) ने निष्क्रियता की नीति अपनाई जो प्रथम अफगान युद्ध की प्रतिक्रिया, व्यावहारिक ज्ञान तथा सीमांत क्षेत्रों की समस्या के गहन अध्ययन एवं स्वतंत्रता के लिये अफगानिस्तान के जुनून का परिणाम थी। अतः युग्म 1 सही सुमेलित है।
- लिटन ने 'प्राउड रिज़र्व की नीति' अपनाई जिसका उद्देश्य सीमांत क्षेत्रों की रक्षा करना था। लिटन के अनुसार अफगानिस्तान के साथ संबंधों को अब अस्पष्ट नहीं छोड़ा जा सकता था।
- वर्ष 1836 में गवर्नर-जनरल बनकर भारत आए ऑकलैंड ने फॉरवर्ड नीति को अपनाया। इसका तात्पर्य यह था कि भारत में कंपनी को ब्रिटिश भारत की सीमा को संभावित रूसी हमले से बचाने के लिये स्वयं पहल करनी होगी। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- वॉरेन हेस्टिंग्स ने ब्रिटिश शासन के दौरान उस महत्त्वपूर्ण अवधि हेतु गवर्नर जनरल के रूप में कार्यभार संभाला जब अंग्रेज़ों को मराठों, मैसूर और हैदराबाद जैसी ताकतों का सामना करना पड़ा था।
- उसने घेरे की नीति का पालन किया जिसका उद्देश्य कंपनी की सीमाओं की रक्षा के लिये बफर ज़ोन बनाना था। अतः युग्म 3 सही सुमेलित है।
Question 15:
भारतीय इतिहास में प्रयुक्त शब्द 'आयंगर' के बारे में निम्नलिखित कथनों में से कौन- सा सही है?
आयंगर, प्राचीन भारत में चोल सेना में युद्ध करने वाले योद्धाओं का एक समूह था।
आयंगर, व्यापारियों का एक समूह था जो 18वीं शताब्दी में भारत से यूरोप में मसालों के निर्यात में संलग्न था।
आयंगर, हिमालय में कठोर तपस्या और ध्यान करने वाले तपस्वियों का एक संप्रदाय था।
आयंगर, विजयनगर में ग्राम प्रशासन के पदाधिकारी थे।
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- आयंगर प्रणाली विजयनगर साम्राज्य में ग्राम प्रशासन की एक प्रमुख विशेषता थी। आयंगर के नाम से जाने जाने वाले 12 पदाधिकारियों का एक निकाय गाँव के प्रशासन के विभिन्न मामलों को देखता था। अतः विकल्प D सही है।
- इनको कर मुक्त भूमि मान्यम दी गई थी।
Question 16:
निम्नलिखित में से कितने विद्वान अकबर के दरबार में नवरत्न के रूप में सुशोभित थे?
- राजा टोडरमल
- मुल्ला दो-प्याज़ा
- फैज़ी
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1
1, 2 और 3
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
मुगल शासक अकबर के दरबार में नौ बुद्धिजीवी थे जिन्हें नवरत्न या नौ रत्न कहा जाता था।
अकबर के दरबार के नवरत्न:
- मुल्ला दो प्याज़ा: उन्होंने अकबर के सलाहकार के रूप में कार्य किया।
- राजा टोडरमल: पूरे मुगल साम्राज्य में सबसे प्रतिष्ठित वित्त मंत्री।
- फैज़ी: मुगल दरबार के एक प्रसिद्ध कवि और विद्वान।
- राजा बीरबल: उन्होंने अकबर के दरबार में दरबारी विदूषक की भूमिका निभाई।
- अबुल फज़ल: अपने कार्य, अकबरनामा के लेखन के लिये प्रसिद्ध।
- तानसेन: हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के सबसे दिग्गजों में से एक।
- अब्दुल रहीम खान-ए-खाना: मुगल साम्राज्य में सबसे प्रतिष्ठित कवियों और सैन्य प्रमुखों में से एक।
- राजा मान सिंह: अकबर की सेना के एक भरोसेमंद सैन्य प्रमुख।
- फकीर अज़ियाओ-दीन: वह एक सूफी फकीर और सलाहकार थे।
उपर्युक्त तीनों विद्वान अकबर के दरबार में नवरत्न के पद पर सुशोभित थे।
Question 17:
मुगलों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- बाबर ने अपने प्रशासन में मनसबदारी प्रणाली की शुरुआत की थी।
- हुमायूँ ने चार-बाग और सममित रूप से बनाए गए उद्यानों की शुरुआत की थी।
- अकबर ने दिल्ली में एक नया शहर बसाया जिसका नाम उसने “दीनपनाह” रखा था।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- अकबर ने अपने प्रशासन में मनसबदारी प्रणाली की शुरुआत की थी। इस प्रणाली में प्रत्येक अधिकारी को एक पद सौंपा गया था। इन श्रेणियों को जात और सवार में विभाजित किया गया था।
- जात- यह अधिकारी की व्यक्तिगत स्थिति एवं वेतन को निश्चित करता था।
- सवार-इससे इंगित होता है कि एक अधिकारी को कितने घुड़सवार सैनिकों को अपने अंतर्गत रखना आवश्यक है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- 16वीं शताब्दी में चार-बाग बगीचा प्रणाली को बाबर द्वारा ईरान से भारतीय उपमहाद्वीप में लाया गया था। इस परंपरा से मुगल उद्यानों का विकास हुआ जिसकी उत्कृष्टता को ताजमहल में देखा जा सकता है। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- हुमायूँ वर्ष 1530 में गद्दी पर बैठा और 1533 में उसने एक नये शहर दीनपनाह की स्थापना की थी। अतः कथन 3 सही नहीं है।
Question 18:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| साहित्य |
लेखक |
| 1.तबकात-ए नासिरी |
अमीर खुसरो |
| 2.शाहनामा |
फिरदौसी |
| 3.नुह सिपहर |
मिन्हाज-उस-सिराज |
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
इनमें से कोई भी युग्म नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- तबकात-ए नासिरी को वर्ष 1260 में मिन्हाज-ए-सिराज द्वारा फारसी में लिखा गया था। अतः युग्म 1 सही सुमेलित नहीं है।
- शाहनामा, फारसी कवि फिरदौसी द्वारा लिखित एक महाकाव्य कविता है। लगभग 50,000 दोहे (दो-पंक्ति छंद) से युक्त यह ग्रंथ विश्व की सबसे बड़ी महाकाव्य कविताओं में से एक है और एक ही लेखक द्वारा रचित यह सबसे लंबी महाकाव्य कविता है। अतः युग्म 2 सही सुमेलित है।
- अमीर खुसरो प्रतिभाशाली लेखक थे और उन्होंने किरान-उस-सादैन, मिफ्ताहुल-फुतूह, शीरी व खुसरो, हश्त-बहिश्त, दवल रानी खिज्र खाँ या इश्किया या खिज्रनाम, मतलौल अनवर, खज़ाइन-उल-फुतूह एवं नुह सिपहर के रूप में प्रमुख रचनाएँ कीं। अतः युग्म 3 सही सुमेलित नहीं है।
Question 19:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| विदेशी यात्री |
निवास स्थान
|
| 1.निकोलो डी कोंटी |
पुर्तगाल |
| 2.डुआर्टे बारबोसा |
इटली |
| 3.अब्दुर रज्ज़ाक |
मोरक्को |
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
इनमें से कोई भी युग्म नहीं
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
भारत सदियों से विदेशी यात्रियों के लिये एक गंतव्य रहा है जिससे खोजकर्त्ताओं, व्यापारी, विद्वान और साहसी लोग यहाँ आकर्षित हुए हैं। विजयनगर साम्राज्य का दौरा करने वाले विदेशी यात्री निम्नलिखित थे:
|
यात्रियों का नाम
|
निवास स्थान
|
|
अबू अब्दुल्ला/इब्न बतूता
|
मोरक्को
|
|
निकोलो डी कोंटी
|
इटली। अतः युग्म 1 सही सुमेलित नहीं है।
|
|
अब्दुर रज्ज़ाक
|
फारस। अतः युग्म 3 सही सुमेलित नहीं है।
|
|
अथानासियस निकितिन
|
रूस
|
|
लुडविको डी वोर्थेमा
|
इटली
|
|
डुआर्टे बारबोसा
|
पुर्तगाल। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
|
|
डोमिंगो पायस
|
पुर्तगाल
|
|
फर्नाओ नुनिज़
|
पुर्तगाल
|
|
मार्को पोलो
|
वेनिस गणराज्य
|
Question 20:
निम्नलिखित विद्वानों पर विचार कीजिये:
- अल्लासानी पेडन्ना
- नंदी थिम्मन
- तेनाली रामकृष्ण
उपर्युक्त में से कितने विद्वान कृष्णदेवराय के दरबार में अष्टदिग्गज के रूप में सुशोभित थे?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
अष्टदिग्गज सम्राट कृष्णदेवराय के दरबार में आठ महान तेलुगू विद्वानों और कवियों को दी जाने वाली सामूहिक उपाधि थी।
ये विद्वान थे:
- अल्लासानी पेद्दना। अतः विकल्प 1 सही है
- नंदी थिम्मन। अतः विकल्प 2 सही है।
- मदय्यागरी मल्लाना
- धृजति
- पिंगली सुराण
- रामराजभुसंडु
- तेनाली रामकृष्ण। अतः विकल्प 3 सही है।
Question 21:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
- तकावी ऋण – अलाउद्दीन खिलजी
- बटाईदारी कृषि प्रणाली – गयासुद्दीन तुगलक
- खेती वाली भूमि को मापना– सिकंदर लोधी
उपर्युक्त युग्मों में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
कोई भी युग्म नही
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीनों युग्म
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- मोहम्मद बिन तुगलक ने एक नए कृषि विभाग, दीवान-ए-अमीर-कोही की स्थापना की। उसने एक योजना शुरू की थी जिसके तहत किसानों को बीज खरीदने और खेती का विस्तार करने के लिये तकावी ऋण दिया गया था। अतः युग्म 1 सही नहीं है।
- गयासुद्दीन तुगलक ने भारत में बटाईदारी प्रणाली की शुरुआत की थी। उसने सबसे पहले सिंचाई के लिये कुएँ और नहरें खुदवाना शुरू किया था। अतः युग्म 2 सही है।
- अलाउद्दीन खिलजी एक शक्तिशाली शासक था। उसने दिल्ली सल्तनत की सीमाओं को विंध्य से आगे दक्कन तक विस्तारित किया था। वह एक महान प्रशासक था। अपनी सेना को बनाए रखने के लिये, अलाउद्दीन खिलजी ने खेती वाली भूमि को मापने का आदेश दिया था। ऐसा करने वाला वह पहला शासक था। इसने भूमि को विभाजित कर उर्वरता के अनुसार भू-राजस्व को निर्धारित किया था। अतः युग्म 3 सही नहीं है।
- उसके अन्य सुधारों में शामिल थे:
- भ्रष्टाचार को रोकने के लिये उसने घोड़ों की पहचान निर्धारित करने के साथ सैनिकों के वर्णनात्मक रोस्टर की प्रणाली शुरू की थी।
- उसने आवश्यक वस्तुओं की कीमतें तय की थीं जो सामान्य बाज़ार दरों से कम थीं।
- उसने कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाई थी।
- राजस्व को नकद में एकत्र करने पर बल दिया गया था न कि वस्तु के रूप में।
- उसने हिंदुओं के प्रति भेदभावपूर्ण नीतियों का पालन किया और हिंदू समुदाय पर जजिया, चराई कर और गृह कर आरोपित किया।
Question 22:
दिल्ली सल्तनत के प्रशासन के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
- दीवान-ए-इंशा: पत्राचार विभाग
- दीवान-ए-अर्ज़: वित्त विभाग
- दीवान-ए-रिसालत: वाणिज्य विभाग
उपर्युक्त युग्मों में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
कोई भी युग्म नहीं
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीनों युग्म
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
|
विभाग
|
अर्थ
|
कार्य
|
|
दीवान-ए-रिसालत
|
धार्मिक मामलों का विभाग
|
विदेशी और राजनयिक मामलों से संबंधित
|
|
दीवान-ए-कज़ा
|
न्याय विभाग
|
न्यायिक मामलों से संबंधित
|
|
दीवान-ए-खैरात
|
दान विभाग
|
दान के मामलों से संबंधित
|
|
दीवान-ए-अर्ज़
|
सैन्य विभाग
|
शाही सेना को बनाए रखने और सैनिकों की भर्ती से संबंधित। इसे बलबन द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
|
|
दीवान-ए-कोही
|
कृषि विभाग
|
राज्य में कृषि गतिविधियों के प्रबंधन से संबंधित। इस विभाग की स्थापना मुहम्मद बिन तुगलक ने की थी।
|
|
दीवान-ए-इंशा
|
पत्राचार विभाग
|
शाही पत्राचार से संबंधित। सुल्तानों द्वारा निर्धारित नियम ही कानून का आधार थे।
|
|
दीवान-ए-बंदगान
|
दास विभाग
|
दासों के मामलों से संबंधित
|
अतः युग्म 1 सही है और युग्म 2 तथा 3 सही नहीं हैं।
Question 23:
तुर्की शासकों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- दिल्ली सल्तनत की स्थापना में तुर्की शासकों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- वे शुरू में हिंदुओं के प्रति अपनी धार्मिक सहिष्णुता के लिये जाने जाते थे।
- तुर्की शासकों ने भारत में इक्ता प्रणाली की शुरुआत की थी।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- तुर्की शासकों (विशेषकर कुतुब-उद-दीन ऐबक) ने दिल्ली सल्तनत की स्थापना में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अतः विकल्प 1 सही है।
- तुर्की शासक हिंदुओं के प्रति धार्मिक सहिष्णुता के लिये नहीं जाने जाते थे, वे हिंदू मंदिरों के विनाश के लिये ज़िम्मेदार थे। अतः विकल्प 2 सही नहीं है।
- तुर्की शासकों ने भारत में इक्ता प्रणाली (एक भू-राजस्व प्रणाली) की शुरूआत की थी। अतः विकल्प 3 सही है।
Question 24:
तीन साम्राज्यों (पाल, प्रतिहार और राष्ट्रकूट) के काल के दौरान सांस्कृतिक विकास के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
- पाल वंश के शासक संस्कृत साहित्य एवं नालंदा विश्वविद्यालय के महान संरक्षक थे।
- राष्ट्रकूटों ने कन्नड़ जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था।
- प्रतिहारों को फारसी साहित्य एवं कला को बढ़ावा देने के लिये जाना जाता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- पाल वंश के शासक वास्तव में संस्कृत साहित्य के महान संरक्षक थे और उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अतः विकल्प 1 सही है।
- राष्ट्रकूटों ने कन्नड़ जैसी क्षेत्रीय भाषाओं के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया था। अतः विकल्प 2 सही है।
- प्रतिहारों को फारसी साहित्य एवं कला को बढ़ावा देने के लिये नहीं जाना जाता है बल्कि उन्होंने हिंदू परंपराओं को संरक्षण प्रदान किया था। अतः विकल्प 3 सही नहीं है।
Question 25:
संघर्ष काल (गज़नवी, राजपूत और तुर्की) के दौरान गज़नवी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- महमूद गज़नवी ने भारत पर कई बार आक्रमण किया और सोमनाथ मंदिर को लूटा।
- फिरदौसी, महमूद के दरबार में एक कवि था।
- गज़नी के महमूद ने भारतीय उपमहाद्वीप में फारसी संस्कृति के प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
उपर्युक्त जानकारी के आधार पर सही विकल्प चुनिये:
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2, और 3
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- गज़नी के महमूद ने भारत पर कई बार आक्रमण किया और सोमनाथ मंदिर को लूटा। अतः कथन 1 सही है।
- फिरदौसी, महमूद के दरबार में एक कवि था। अतः कथन 2 सही है।
- गज़नी के महमूद ने भारतीय उपमहाद्वीप में फारसी संस्कृति के प्रसार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। अतः कथन 3 सही है।
Question 26:
निम्नलिखित में से किस शहर को अक्सर 'जैन काशी' के रूप में जाना जाता है?
हम्पी
वैशाली
मूडबिद्री
उज्जैन
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
कर्नाटक के दो तटीय शहर मूडबिद्री और करकला, हज़ारों साल पहले के अपने प्राचीन जल निकायों को पुनर्जीवित कर रहे हैं।
- ये जल निकाय इन शहरों की प्राकृतिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं, जो अपने जैन मंदिरों एवं मठों के लिये भी जाने जाते हैं।
- मूडबिद्री शहर को 'जैन काशी' (जैनियों का बनारस) के रूप में जाना जाता है। यह जैन मंदिरों (बसदि और निशिदि) के साथ-साथ मठों का भी केंद्र है।
अतः विकल्प C सही है।
Question 27:
भारत छोड़ो आंदोलन (QIM) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- कम्युनिस्टों ने भारत छोड़ो आंदोलन का समर्थन किया।
- आंदोलन में भाग लेने के दौरान हिंदू महासभा और युवा सबसे आगे थे।
- गांधी ने समानांतर सरकारों के रूप में जनता द्वारा हिंसा की निंदा करने के लिये उपवास शुरू किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही नहीं है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 2
केवल 1, 2 और 3
सभी कथन सही हैं।
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
भारत छोड़ो आंदोलन: जन भागीदारी की सीमा:
- युवा विशेषकर स्कूल और कॉलेजों के छात्र सबसे आगे रहे।
- मज़दूरों ने हड़तालें कीं और दमन का सामना किया।
- सभी तबकों के किसान आंदोलन के केंद्र बिंदु थे। कुछ ज़मीदारों ने भी भाग लिया। इन किसानों की आक्रमण रणनीति सत्ता के प्रतीकों पर केंद्रित थी और जिसमें ज़मीदार विरोधी हिंसा का पूर्ण अभाव था।
- भूमिगत कार्यकर्त्ताओं को आश्रय देकर मुसलमानों ने मदद की। आंदोलन के दौरान कोई सांप्रदायिक झड़प नहीं हुई।
- कम्युनिस्ट आंदोलन में शामिल नहीं हुए; नाजी जर्मनी द्वारा रूस (जहाँ कम्युनिस्ट सत्ता में थे) पर हमला किये जाने के मद्देनजर, कम्युनिस्टों ने जर्मनी के खिलाफ ब्रिटिश युद्ध का समर्थन करना शुरू कर दिया और 'साम्राज्यवादी युद्ध' 'पीपुल्स वॉर' बन गया। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- मुस्लिम लीग ने इस आंदोलन का विरोध किया, उन्हें डर था कि अगर उस समय अंग्रेज़़ भारत छोड़कर चले गए, तो अल्पसंख्यकों को हिंदुओं द्वारा प्रताड़ित किया जाएगा।
- हिंदू महासभा ने आंदोलन का बहिष्कार किया। रियासतों ने धीमी प्रतिक्रिया दिखाई। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- गांधी का उपवास: फरवरी 1943 में, गांधी ने हिंसा की निंदा करने के लिये सरकार का आह्वान किया; उपवास राज्य की हिंसा के खिलाफ निर्देशित किया गया था। अतः कथन 3 सही नहीं है।
- अनशन के समाचार की लोकप्रिय प्रतिक्रिया तत्काल और जबरदस्त थी। हड़तालों, प्रदर्शनों और हड़तालों के माध्यम से देश और विदेश में विरोध प्रदर्शन आयोजित किये गए। वायसराय की कार्यकारी परिषद के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया।
Question 28:
गोलमेज सम्मेलन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- प्रथम गोलमेज सम्मेलन में इस बात पर सहमति हुई कि रक्षा और वित्त को छोड़कर सभी विभागों को स्थानांतरित कर दिया जाएगा।
- द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भारत के संवैधानिक भविष्य पर चर्चा हुई और निर्णय लिया गया।
- गोलमेज सम्मेलन ने 1935 के भारत सरकार अधिनियम के लिये मसौदा विधेयक प्रस्तावित किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 3
केवल 2 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर : B
व्याख्या:
- प्रथम गोलमेज सम्मेलन: सम्मेलन में कुछ विशेष प्राप्त नहीं हुआ। आम तौर पर यह सहमति थी कि भारत को एक संघ के रूप में विकसित होना था, रक्षा और वित्त के संबंध में सुरक्षा उपाय होने थे, जबकि अन्य विभागों को स्थानांतरित किया जाना था। अतः कथन 1 सही है।
- दूसरा गोलमेज सम्मेलन: कई प्रतिनिधि समूहों के बीच समझौतों में असहमति का मतलब था कि सम्मेलन से भारत के संवैधानिक भविष्य के बारे में कोई ठोस परिणाम नहीं निकलेगा। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- तीसरा गोलमेज सम्मेलन: इसमें भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस और गांधी ने भाग नहीं लिया था। इसे अधिकांश अन्य भारतीय नेताओं द्वारा अनदेखा किया गया था।
- सिफारिशें मार्च 1933 में एक श्वेत पत्र में प्रकाशित हुईं और बाद में ब्रिटिश संसद में इस पर बहस हुई। सिफारिशों का विश्लेषण करने और भारत के लिये एक नया अधिनियम तैयार करने के लिये एक संयुक्त प्रवर समिति का गठन किया गया था और उस समिति ने फरवरी 1935 में एक मसौदा विधेयक पेश किया, जिसे जुलाई 1935 में भारत सरकार अधिनियम 1935 के रूप में लागू किया गया था। अतः कथन 3 सही है।
Question 29:
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिये:
- रॉयल इंडियन नेवी में विद्रोह
- भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत
- द्वितीय गोलमेज सम्मेलन
उपरोक्त घटनाओं का सही कालानुक्रमिक क्रम क्या है?
1 – 2– 3
2 – 1 – 3
3 – 2 – 1
3 – 1 – 2
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर : (c)
व्याख्या:
- रॉयल इंडियन नेवी विद्रोह: यह फरवरी 1946 में शुरू हुआ, जब रेटिंग्स के नाम से जाने जाने वाले गैर-कमीशन अधिकारियों और नाविकों के एक वर्ग ने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह किया। यह बेहतर भोजन और आवास की मांग को लेकर हड़ताल के रूप में शुरू हुआ। सरदार वल्लभ भाई पटेल और मुहम्मद अली ज़िन्ना के हस्तक्षेप से विद्रोह समाप्त हो गया। विद्रोहियों ने 23 फरवरी, 1946 को आत्मसमर्पण कर दिया। महात्मा गांधी ने अगस्त 1942 में अंग्रेज़ों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन नामक आंदोलन का एक नया चरण शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने जनता को 'करो या मरो' का नारा दिया और उन्हें अहिंसक तरीके से विरोध करने के लिये कहा। गांधी और अन्य नेताओं को जेल में डाल दिया गया था, लेकिन आंदोलन ने अपना काम कर दिखाया।
- द्वितीय गोलमेज सम्मेलन: सितंबर 1931 से दिसंबर 1931 के दौरान लंदन में एक द्वितीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित किया गया था। यहाँ, गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय काॅन्ग्रेस (INC) का प्रतिनिधित्व किया था। यह एकमात्र गोलमेज सम्मेलन था जिसमें काॅन्ग्रेस ने भाग लिया था। अतः विकल्प (c) सही है।
Question 30:
'स्वराजवादियों' और 'नों चेंजर्स' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- कॉन्ग्रेस के एक वर्ग के रूप में 'स्वराजवादियों' ने विधान परिषदों में प्रवेश का विरोध किया था और स्वराज के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु प्रतिरोध जारी रखने पर बल दिया था।
- कॉन्ग्रेस के एक वर्ग के रूप में 'नो चेंजर्स' ने विधान परिषदों को राजनीतिक संघर्ष के माध्यम के रूप में मानते हुए इनमें प्रवेश करने पर बल दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- गांधी की गिरफ्तारी (मार्च 1922) के बाद, राष्ट्रवादियों के बीच विघटन और अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई थी। ऐसे में कॉन्ग्रेस के लोगों में इस बात पर बहस शुरू हो गई कि संक्रमण काल में क्या किया जाए और यह आंदोलन का निष्क्रिय चरण था।
- विधान परिषदों में प्रवेश की वकालत करने वालों को 'स्वराजवादियों' के रूप में जाना जाने लगा, जबकि 'नो-चेंजर्स' ने विधान परिषदों में प्रवेश का विरोध करने के साथ रचनात्मक कार्यों पर बल देने, बहिष्कार और असहयोग को जारी रखने की वकालत की थी। अतः कथन 1 और 2 सही नहीं हैं।
Question 31:
भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अनुसार द्वैध शासन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- इसमें दो स्तर (अर्थात कार्यकारी पार्षद और मंत्रियों द्वारा) पर शासन का संचालन होना था।
- इसमें कार्यकारी पार्षदों के विपरीत, मंत्रियों को विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी बनाया गया था।
- इसके तहत 'आरक्षित' और 'स्थानांतरित' नामक विषयों की दो सूचियों का प्रावधान किया गया था।
- आरक्षित विषयों के विपरीत, स्थानांतरित विषयों के संबंध में गवर्नर जनरल हस्तक्षेप कर सकता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 2
केवल 1, 2 और 3
1, 2, 3 और 4
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार और भारत सरकार अधिनियम, 1919:
- द्वैध शासन का आशय दो स्तर पर शासन (कार्यकारी पार्षदों और लोकप्रिय मंत्रियों) की शुरुआत होना था।
- गवर्नर को प्रांत में कार्यकारी प्रमुख बनाया गया था। अतः कथन 1 सही है।
- इसके तहत विषयों को दो सूचियों में विभाजित किया गया था: 'आरक्षित' जिसमें कानून और व्यवस्था, वित्त, भू-राजस्व, सिंचाई आदि जैसे विषय शामिल थे और 'हस्तांतरित' विषय जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्थानीय सरकार, उद्योग, कृषि, उत्पाद शुल्क आदि शामिल थे। अतः कथन 3 सही है।
- आरक्षित विषयों को गवर्नर द्वारा नौकरशाहों की अपनी कार्यकारी परिषद के माध्यम से प्रशासित किया जाना था और 'हस्तांतरित विषयों को विधान परिषद के निर्वाचित सदस्यों में से मनोनीत मंत्रियों द्वारा प्रशासित किया जाना था।
- मंत्रियों को विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी बनाया गया था और विधानमंडल द्वारा उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किये जाने पर उन्हें इस्तीफा देना पड़ता था जबकि कार्यकारी पार्षदों को विधानमंडल के प्रति जवाबदेह नहीं बनाया गया था। अतः कथन 2 सही है।
- प्रांतों में संवैधानिक तंत्र की विफलता के मामले में गवर्नर हस्तांतरित विषयों का प्रशासन भी अपने हाथ में ले सकता था।
- भारत का राज्य सचिव और गवर्नर जनरल आरक्षित विषयों के संबंध में हस्तक्षेप कर सकते थे जबकि हस्तांतरित विषयों के संबंध में उनके हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित थी। अतः कथन 4 सही नहीं है।
Question 32:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| पुस्तकें |
लेखक |
| 1.बंदी जीवन |
शरत चंद्र चट्टोपाध्याय |
| 2.पाथेर दबी |
शचींद्रनाथ सान्याल |
| 3.द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब |
भगवती चरण वोहरा |
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- बंदी जीवन (कैद का जीवन) शचींद्रनाथ सान्याल की रचना है। अतः युग्म 1 सही सुमेलित नहीं है।
- पाथेर दबी (द राइट ऑफ वे, या डिमांड्स ऑफ द रोड) शरत चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखित एक बंगाली उपन्यास है। इसे पहली बार वर्ष 1926 में एक उपन्यास के रूप में प्रकाशित किया गया था। यह किताब पाथेर दबी नामक एक गुप्त समाज के बारे में है जिसका लक्ष्य भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना है। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- द फिलॉसफी ऑफ द बॉम्ब को भगवती चरण वोहरा द्वारा लिखा गया था। अतः युग्म 3 सही सुमेलित है।
Question 33:
निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिये:
- अगस्त घोषणा
- कामागाटामारू प्रकरण
- बाल्कन युद्ध
- बंगाल के विभाजन की घोषणा
निम्नलिखित में से कौन-सा उपर्युक्त घटनाओं के घटित होने का सही कालानुक्रक्रम है?
4, 2, 1 3
4, 3 2, 1
1, 2, 3, 4
3, 1, 4, 2
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- मुस्लिम लीग के रवैये में बदलाव के कई कारण थे। मुस्लिम लीग (1912) के कलकत्ता अधिवेशन में भारत के अनुकूल स्वशासन की प्रणाली हेतु अन्य समूहों के साथ काम करने के लिये लीग ने प्रतिबद्धता जताई थी।
- वर्ष 1911 में बंगाल विभाजन की घोषणा से ऐसा मुस्लिम वर्ग नाराज़ हो गया था जिसने विभाजन का समर्थन किया था।
- बाल्कन (1912-13) और इटली के साथ (1911 के दौरान) युद्धों में तुर्की (खलीफा द्वारा शासित, जिसने सभी मुसलमानों के धार्मिक-राजनीतिक नेतृत्त्व का दावा किया था) की मदद करने से ब्रिटेन की अस्वीकृति से मुस्लिम वर्ग नाराज़ था।
- वर्ष 1917 की मांटेग्यू की अगस्त घोषणा: वर्ष 1917 में ब्रिटिश सरकार ने प्रशासन में भारतीयों की भागीदारी बढ़ाने और क्रमिक रूप से स्वशासन की ओर बढ़ने की नीति की घोषणा की थी। इसका तात्पर्य यह था कि भारतीय राष्ट्रवादियों की स्वशासन की मांग को अब देशद्रोही घटना नहीं मानी जाएगी।
- कामागाटामारू प्रकरण- 1914: कामागाटामारू एक जहाज़ का नाम था जो सिंगापुर से वैंकूवर तक 370 यात्रियों को ले जा रहा था। इसमें मुख्य रूप से सिक्ख और पंजाबी मुस्लिम अप्रवासी थे। दो महीने की अनिश्चितता के बाद उन्हें कनाडा प्राधिकरण द्वारा वापस कर दिया गया था।
- आमतौर पर यह माना जाता था कि कनाडाई अधिकारी ब्रिटिश सरकार से प्रभावित थे। यह जहाज़ अंततः सितंबर 1914 में कलकत्ता पहुँचा।
अतः विकल्प B सही है।
Question 34:
निम्नलिखित में से कौन "असम केसरी" के नाम से प्रसिद्ध है?
बाल गंगाधर तिलक
अंबिकागिरी रायचौधरी
मोहनदास करमचंद गांधी
सरोजिनी नायडू
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- अंबिकागिरी रायचौधरी (1885-1967) एक असमिया कवि, सामाजिक कार्यकर्त्ता और भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्हें असम केसरी के नाम से जाना जाता है। अतः विकल्प B सही उत्तर है।
Question 35:
असहयोग आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- महात्मा गांधी ने वर्ष 1920 में कॉन्ग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में असहयोग संबंधी प्रस्ताव प्रस्तुत किया था।
- इस आंदोलन के दौरान अल्लूरी सीताराम राजू ने केरल में आदिवासियों का नेतृत्व किया था।
- इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जे.एम. सेनगुप्ता ने असम में चाय बागानों के मज़दूरों का समर्थन किया था।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
महात्मा गांधी ने मार्च 1920 में एक घोषणापत्र जारी किया था, जिसमें असहयोग आंदोलन के सिद्धांत की घोषणा की गई थी। उन्होंने लोगों से अस्पृश्यता निवारण हेतु कार्य करने के साथ हाथ से कताई, बुनाई सहित स्वदेशी सिद्धांतों और व्यवहारों को अपनाने का आग्रह किया था।
- सी.आर.दास ने वर्ष 1920 में नागपुर में कॉन्ग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में असहयोग संबंधी प्रस्ताव जारी किया था और इस आंदोलन को बढ़ावा देने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- अल्लूरी सीताराम राजू ने आंध्र प्रदेश में आदिवासियों का नेतृत्व किया था और उनकी मांगों को असहयोग आंदोलन के साथ समन्वित किया था। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- बंगाली राष्ट्रवादी नेता जे.एम. सेनगुप्ता ने असम में चाय बागान मज़दूरों के विरोध आंदोलन में शामिल होकर हड़ताल में उनका समर्थन किया था। अतः कथन 3 सही है।
Question 36:
सुबिका पेंटिंग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- यह चित्रकला शैली मणिपुर में कुकी समुदाय के सांस्कृतिक इतिहास से संबंधित है।
- यह पेंटिंग हस्तनिर्मित कागज़ अथवा वृक्ष की छाल पर बनाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
प्राचीन सुबिका पेंटिंग:
- मणिपुर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने हेतु मणिपुर की प्राचीन सुबिका पेंटिंग शैली,जो विलुप्ति की कगार पर है, को पुनर्जीवित करने के लिये व्यापक प्रयास किये जा रहे हैं।
- सुबिका पेंटिंग शैली मैतेई समुदाय के सांस्कृतिक इतिहास से संबंधित है तथा अपनी छह जीवित पांडुलिपियों; सुबिका, सुबिका अचौबा, सुबिका लाईशाबा, सुबिका चौदित, सुबिका चेइथिल तथा थेंगराखेल सुबिका के माध्यम से अस्तित्त्व में हैं। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- यह पेंटिंग हस्तनिर्मित कागज़ पर बनाई जाती हैं तथा पांडुलिपियों के लिये आवश्यक सामग्री, जैसे हस्तनिर्मित कागज़ अथवा वृक्ष की छाल पर तैयार की जाती है। अतः कथन 2 सही है।
Question 37:
बंगाल विभाजन के पीछे वास्तविक ब्रिटिश मंशा के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
बंगाल प्रशासन के लिये बहुत बड़ा हो गया था, इसलिये प्रशासनिक सुविधा विभाजन के पीछे का कारण थी।
विभाजन से असम के विकास में मदद मिलेगी।
भारतीय राष्ट्रवाद के मुख्य केंद्र बंगाल को कमज़ोर करने की ब्रिटिश इच्छा।
ढाका नए हिंदू बहुसंख्यक प्रांत की राजधानी बन सकता था।
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- विभाजन के लिये दिया गया आधिकारिक कारण यह था कि बंगाल प्रशासन के लिये बहुत बड़ा हो गया था और यह विभाजन असम के विकास में मदद करेगा। हालाँकि, विभाजन योजना के पीछे असली मकसद भारतीय राष्ट्रवाद के मुख्य केंद्र बंगाल को कमज़ोर करने की ब्रिटिश इच्छा को देखा गया था। यह बंगालियों को भाषा और धर्म के आधार पर विभाजित करके तथा बंगालियों को बंगाल में अल्पसंख्यक बनाकर प्राप्त किया जाना था।
- उस समय के वायसराय लॉर्ड कर्जन ने यह तर्क देकर मुसलमानों को लुभाने की कोशिश की कि ढाका नए मुस्लिम बहुसंख्यक प्रांत की राजधानी बन सकता है, जो उन्हें पुराने मुस्लिम वाइसराय और राजाओं के दिनों से अनुभव नहीं की गई एकता प्रदान करेगा। अतः विकल्प C सही है।
Question 38:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजियेः
| संगठन |
संस्थापक |
| 1. इंडियन सोशियोलॉजिस्ट |
श्यामजी कृष्ण वर्मा |
| 2. बंदे मातरम् |
मैडम भीकाजी कामा |
| 3. युगांतर |
बारीन्द्र कुमार घोष |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन- सा/से सही सुमेलित है/हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- श्यामजी कृष्ण वर्मा ने इंडियन होम रूल सोसाइटी और इंडिया हाउस की स्थापना की तथा वर्ष 1905 में लंदन में द सोशियोलॉजिस्ट नामक पत्रिका का प्रकाशन किया। अतः युग्म 1 सही सुमेलित है।
- मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस और ज़िनेवा में महत्त्वपूर्ण कार्य किये और बंदे मातरम् नामक पत्रिका का प्रकाशन किया। अतः युग्म 2 सही सुमेलित है।
- युगांतर एक बंगाली क्रांतिकारी समाचार पत्र था जिसकी शुरुआत वर्ष 1906 में कलकत्ता में बारीन्द्र कुमार घोष, अभिनाश भट्टाचार्य और भूपेन्द्रनाथ दत्त ने की थी। अतः युग्म 3 सही सुमेलित है।
Question 39:
हर्ष के साम्राज्य के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- हर्ष ने उज्जैन को अपनी शक्ति का केंद्र बनाया था।
- हर्ष का शासनकाल चीनी तीर्थयात्री फाह्यान की यात्रा के कारण ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण है।
- हर्षवर्धन ने इलाहाबाद में कुंभ मेले की शुरुआत की।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- हर्षवर्द्धन ने 606 से 647 ई. तक उत्तरी भारत पर शासन किया।
- हर्ष ने कन्नौज को अपनी शक्ति का केंद्र बनाया और वहाँ से सभी दिशाओं में अपना प्रभाव बढ़ाया। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- हर्ष का शासनकाल चीनी तीर्थयात्री ह्वेन त्सांग की यात्रा के कारण ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण है, जिन्होंने 629 ई. में चीन छोड़ दिया और भारत की यात्रा की। वह बिहार स्थित बौद्ध विश्वविद्यालय नालंदा में अध्ययन करने आये थे। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- फाह्यान की भारत यात्रा चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान हुई थी।
- हर्षवर्द्धन ने 644 ईसा पूर्व में इलाहाबाद में मेले के आयोजन की शुरुआत की। अतः कथन 3 सही है।
Question 40:
निम्नलिखित जनजातियों पर विचार कीजिये:
- कोली
- पद्दारी
- बकरवाल
उपर्युक्त जातीय जनजातियों में से कितनी जम्मू-कश्मीर से संबंधित हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- संविधान (जम्मू-कश्मीर) अनुसूचित जनजातियाँ आदेश (संशोधन) विधेयक, 2024
- इस विधेयक का उद्देश्य विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों (ST) की सूची में जम्मू-कश्मीर की चार जातीय समूहों को शामिल करना है।
- अनुसूचित जनजातियों की सूची में गड्डा ब्राह्मण, कोली, पद्दारी जनजाति तथा पहाड़ी जातीय समूह जैसे जातीय समूहों को शामिल किया जाएगा।
- इन समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान कर यह विधेयक उनके सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक सशक्तीकरण को सुनिश्चित करेगा।
- महत्त्व:
- इस विधेयक में यह सुनिश्चित किया गया कि जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जनजातियों की सूची में इन समुदायों को शामिल करने तथा उन्हें आरक्षण प्रदान करने के दौरान गुज्जर और बकरवाल जैसे मौजूदा अनुसूचित जनजाति समुदायों को उपलब्ध आरक्षण के वर्तमान स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- गुज्जर और बकरवाल खानाबदोश समूह हैं तथा वे गर्मियों में अपने पशुओं के साथ ऊँचाई वाले इलाकों की ओर चले जाते हैं एवं सर्दी के आगमन से पहले अपनी वापसी सुनिश्चित करते हैं।
- अतः विकल्प C सही है।
Question 41:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजियेः
| संगठन |
संस्थापक |
| 1. इंडियन होम रूल सोसाइटी |
श्यामजी कृष्ण वर्मा |
| 2. अनुशीलन समिति |
वी.डी. सावरकर |
| 3. अभिनव भारत |
प्रमोद मित्तर |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन- सा/से सही सुमेलित है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 2
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- श्यामजी कृष्ण वर्मा ने वर्ष 1905 में लंदन में ‘इंडियन होमरूल सोसाइटी’ की स्थापना की। अतः युग्म 1 सही सुमेलित है।
- ‘अनुशीलन समिति’ की स्थापना वर्ष 1902 में कलकत्ता में प्रमोद मित्तर ने की थी। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- ‘अभिनव भारत’ का नाम अभिनव भारत सोसायटी के नाम पर रखा गया था, जो विनायक दामोदर सावरकर द्वारा स्थापित एक संगठन है। अतः युग्म 3 सही सुमेलित नहीं है।
अतः विकल्प A सही है।
Question 42:
ब्रिटिश भारत में प्रारंभिक राजनीतिक संघों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- पूना सार्वजनिक सभा की स्थापना बदरुद्दीन तैयबजी ने की थी।
- बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन की शुरुआत महादेव गोविंद रानाडे द्वारा की गई थी।
- इंडियन लीग की शुरुआत वर्ष 1875 में सिसिर कुमार घोष ने की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- पूना सार्वजनिक सभा की स्थापना वर्ष 1867 में महादेव गोविंद रानाडे और अन्य लोगों द्वारा सरकार एवं लोगों के बीच मध्यस्थता स्थापित करने के उद्देश्य से की गई थी। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन की शुरुआत वर्ष 1885 में बदरुद्दीन तैयबजी, फिरोज़शाह मेहता और के.टी. तेलंग द्वारा की गई थी। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- इंडियन लीग की शुरुआत वर्ष 1875 में सिसिर कुमार घोष द्वारा "लोगों में राष्ट्रवाद की भावना को बढ़ावा देने" तथा राजनीतिक शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई थी। अतः कथन 3 सही है।
Question 43:
उन्होंने बालिकाओं की शिक्षा से आगे बढ़कर कई सामाजिक बुराइयों पर सवाल उठाए और उन्हें खत्म करने की दिशा में काम किया। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये महिला सेवा मंडल की शुरुआत की। उन्होंने विधवाओं के अमानवीयकरण के खिलाफ सख्ती से अभियान चलाया और विधवा पुनर्विवाह की वकालत की, विधवाओं के सिर मुंडवाने की अमानवीय प्रथा की निंदा करने के लिये एक सफल नाई की हड़ताल का आयोजन किया। उन्होंने बालहत्या प्रतिबंधक गृह (शिशु हत्या को रोकने के लिये घर) नामक एक घर की स्थापना की, जहाँ अविवाहित माताएँ और विधवाएँ जो दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में गर्भवती हो जाती थीं वे अपने शिशुओं या स्वयं को मारने के बजाय सुरक्षित प्रसव करवा सकती थीं। उन्होंने अपने स्वयं के जल भंडार को सभी के लिये खोलकर अस्पृश्यता की बुराई के खिलाफ एक मिसाल कायम की। निम्नलिखित में से किस समाज सुधारक के महान कार्यों का ऊपर वर्णन किया गया है?
सरला देवी चौधरानी
सावित्रीबाई फुले
कॉर्नेलिया सोराबजी
इनमे से कोई भी नहीं
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- वर्ष 1852 में सावित्रीबाई ने महिलाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिये ‘महिला सेवा मंडल’ की शुरुआत की। सावित्रीबाई ने एक महिला सभा का आह्वान किया, जहाँ सभी जातियों के सदस्यों का स्वागत किया गया और सभी से एक साथ मंच पर बैठने की अपेक्षा की गई। उन्होंने वर्ष 1854 में ‘काव्या फुले’ और वर्ष 1892 में ‘बावन काशी सुबोध रत्नाकर’ का प्रकाशन किया।अपनी कविता ‘गो, गेट एजुकेशन’ में वह उत्पीड़ित समुदायों से शिक्षा प्राप्त करने और उत्पीड़न की जंजीरों से मुक्त होने का आग्रह करती हैं।
- उन्होंने विधवा पुनर्विवाह का समर्थन करते हुए बाल विवाह के खिलाफ एक साथ अभियान चलाया।
- उन्होंने वर्ष 1873 में पहला सत्यशोधक विवाह शुरू किया- दहेज, ब्राह्मण पुजारी या ब्राह्मणवादी रीति-रिवाज़ के बिना विवाह। उन्होंने वर्ष 1848 में फुले ने पूना में लड़कियों, शूद्रों एवं अति-शूद्रों के लिये एक स्कूल शुरू किया।
- 1850 के दशक में फुले दंपत्ति ने दो शैक्षिक ट्रस्टों की शुरुआत की- नेटिव फीमेल स्कूल (पुणे) और ‘द सोसाइटी फॉर प्रोमोटिंग द एजुकेशन ऑफ महार’- जिसके तहत कई स्कूल शामिल थे।
- वर्ष 1853 में उन्होंने गर्भवती विधवाओं के लिये सुरक्षित प्रसव हेतु और सामाजिक मानदंडों के कारण शिशुहत्या की प्रथा को समाप्त करने के लिये एक देखभाल केंद्र खोला। बालहत्या प्रतिबंधक गृह (शिशु हत्या निवारण गृह) उनके ही घर में शुरू हुआ।
- सत्यशोधक समाज (द ट्रुथ-सीकर्स सोसाइटी) की स्थापना 24 सितंबर, 1873 को ज्योतिराव-सावित्रीबाई और अन्य समान विचारधारा वाले लोगों द्वारा की गई थी।उन्होंने समाज में सामाजिक परिवर्तनों की वकालत की तथा प्रचलित परंपराओं के खिलाफ कदम उठाया जिनमें आर्थिक विवाह, अंतर-जातीय विवाह, बाल विवाह का उन्मूलन और विधवा पुनर्विवाह शामिल हैं। अतः विकल्प B सही है।
Question 44:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| आंदोलन |
प्रतिपादक |
| 1. जस्टिस आंदोलन |
सी.एन. मुदलियार |
| 2. आत्म सम्मान आंदोलन |
ई.वी. रामास्वामी नायकर |
| 3. अरुविप्पुरम आंदोलन |
नारायण गुरू |
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- जस्टिस आंदोलन: मद्रास प्रेसीडेंसी में यह आंदोलन सी.एन. मुदलियार, टी.एम. नायर और पी. त्यागराज द्वारा शुरू किया गया था। जिसमें उन्होंने विधायिका में गैर-ब्राह्मणों के लिये नौकरियाँ और प्रतिनिधित्व सुरक्षित करने पर बल दिया था। अतः युग्म 1 सही सुमेलित है।
- आत्म-सम्मान आंदोलन: इस आंदोलन की शुरुआत ई.वी. रामास्वामी नायकर और बलिजा नायडू के द्वारा वर्ष 1920 के दशक के मध्य में की गई थी। इस आंदोलन का उद्देश्य ब्राह्मणवादी धर्म और संस्कृति को अस्वीकार करना था, जिसे नायकर निम्न जातियों के शोषण का प्रमुख साधन मानते थे। अतः युग्म 2 सही सुमेलित है।
- अरुविप्पुरम आंदोलन: नारायण गुरु, जो स्वयं एझावा जाति से संबंध रखते थे, ने नेय्यर नदी से एक पत्थर लिया और इसे वर्ष 1888 में शिवरात्रि के दिन अरुविप्पुरम में शिवलिंग के रूप में स्थापित किया। इसका उद्देश्य यह प्रदर्शित करना था, कि एक मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा पर उच्च जातियों का एकाधिकार नहीं है।
- इस आंदोलन (अरुविप्पुरम आंदोलन) ने प्रसिद्ध कवि कुमारन आशान को आकर्षित किया। अतः युग्म 3 सही सुमेलित है।
Question 45:
बालशास्त्री जांभेकर के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- उन्होंने वर्ष 1832 में दर्पण नामक समाचार पत्र शुरू किया था।
- वह एलफिंस्टन कॉलेज में हिंदी के पहले प्रोफेसर थे।
- उन्होंने वर्ष 1849 में परमहंस मंडली की स्थापना की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
बालशास्त्री जांभेकर (वर्ष 1812-46) मुंबई में पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक सुधार के अग्रदूत थे, उन्होंने ब्राह्मणवादी रूढ़िवादी प्रथाओं का विरोध किया और लोकप्रिय हिंदू धर्म में सुधार करने का प्रयास किया था।
- उन्होंने वर्ष 1832 में दर्पण नामक समाचार पत्र शुरू किया था। मराठी पत्रकारिता के जनक के रूप में जाने जाने वाले जांभेकर ने लोगों को विधवा पुनर्विवाह जैसे सामाजिक सुधारों के बारे में जागरूक करने एवं लोगों में जीवन के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करने के लिये दर्पण नामक समाचार पत्र का उपयोग किया था। अतः कथन 1 सही है।
- वह महाराष्ट्र में वर्ष 1849 में स्थापित एलफिंस्टन कॉलेज के संस्थापक एवं हिंदी के पहले प्रोफेसर थे। अतः कथन 2 सही है।
- परमहंस मंडली की शुरुआत दादोबा पांडुरंग, मेहताजी दुर्गाराम और अन्य लोगों द्वारा एक गुप्त समाज के रूप में की गई थी। अतः कथन 3 सही नहीं है।
Question 46:
इन्होंने भारतीय राजकुमारों के राजनीतिक प्रशिक्षण के लिये काठियावाड़ में एक राजकोट कॉलेज की स्थापना की थी । इन्होंने भारत के सांख्यिकीय सर्वेक्षण और कृषि तथा वाणिज्य विभाग की स्थापना भी की। निरीक्षण के उद्देश्य से 1872 में अंडमान द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर में अपराधी बस्ती का दौरा करते समय, उनकी हत्या एक अफगान अपराधी शेर अली अफरीदी ने की थी, जिसने चाकू का इस्तेमाल किया था। निम्नलिखित में से किस गवर्नर जनरल/वायसराय से उपरोक्त विशेषताएँ संबंधित हैं?
लॉर्ड मेयो
लॉर्ड लिटन
लार्ड रिपन
लॉर्ड लैंसडाउन
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
लॉर्ड मेयो 1869-72:
- भारतीय राजकुमारों के राजनीतिक प्रशिक्षण के लिये काठियावाड़ में राजकोट कॉलेज और अजमेर में मेयो कॉलेज की स्थापना की।
- भारत के सांख्यिकीय सर्वेक्षण की स्थापना।
- कृषि और वाणिज्य विभाग की स्थापना।
- सरकारी रेलवे की शुरुआत की ।
- लॉर्ड मेयो ने जेल सुधारों, विशेष रूप से अंडमान द्वीप समूह में अपराधी अधिवासों के लिये उनका कार्य प्रमुख है। उनके कार्यकाल का सबसे महत्वपूर्ण कानूनी सुधार 1872 में भारतीय साक्ष्य अधिनियम का पारित होना था। इस अधिनियम ने पूर्व कि विसंगतियों और भेदभाव को दूर किया एवं सभी भारतीयों के लिये लागू कानून का एक मानक प्रारूप प्रस्तुत किया।। पूर्व में कानून व्यवस्था को विभेदित किया गया था जिसे जाति, समुदाय और सामाजिक समूह के अनुसार लागू किया गया था।
- निरीक्षण के उद्देश्य से 1872 में अंडमान द्वीप समूह में पोर्ट ब्लेयर में अपराधी अधिवासों का दौरा करते समय, उनकी हत्या एक अफगान अपराधी शेर अली अफरीदी ने की थी, जिसने चाकू का इस्तेमाल किया था। अतः विकल्प A सही है।
Question 47:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| महिला संगठन |
महिला नेता |
| 1.भारत स्त्री महामंडल |
रमाबाई रानाडे |
| 2.भारत महिला परिषद |
सरला देवी चौधुरानी |
| 3.आर्य महिला समाज |
पंडिता रमाबाई सरस्वती |
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- वर्ष 1910 में सरला देवी चौधुरानी ने इलाहाबाद में भारत स्त्री महामंडल की पहली सभा की थी। अतः युग्म 1 सही सुमेलित नहीं है।
- रमाबाई रानाडे ने वर्ष 1904 में बॉम्बे में मूल संगठन, नेशनल सोशल कॉन्फ्रेंस के तहत लेडीज़ सोशल कॉन्फ्रेंस (भारत महिला परिषद) की स्थापना की थी। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- पंडित रमाबाई सरस्वती ने महिलाओं की सेवा के लिये आर्य महिला समाज की स्थापना की थी। उन्होंने अंग्रेज़ी शिक्षा आयोग के समक्ष भारतीय महिलाओं के लिये शैक्षिक पाठ्यक्रम में सुधार की वकालत की थी। अतः युग्म 3 सही सुमेलित है।
Question 48:
लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा शुरू किये गए 'व्यपगत सिद्धांत' के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
- सतारा राज्य पर कब्ज़ा करने के लिये व्यपगत सिद्धांत को लागू किया गया था।
- इसने अंग्रेज़ों को किसी भी रियासत पर कब्ज़ा करने की अनुमति दी, यदि शासक बिना किसी प्राकृतिक उत्तराधिकारी के मर गया है।
- व्यपगत सिद्धांत, अवध राज्य पर लागू किया गया था।
उचित विकल्प का चयन कीजिये:
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2, और 3
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- व्यपगत सिद्धांत 19वीं शताब्दी के मध्य में भारत के गवर्नर-जनरल लॉर्ड डलहौज़ी द्वारा शुरू की गई एक विवादास्पद नीति थी।
- इस सिद्धांत का उद्देश्य उन रियासतों पर कब्ज़ा करना था, जिनके शासक के निधन पर उनके पास कोई प्राकृतिक उत्तराधिकारी नहीं था, चाहे वह दत्तक हो या जैविक।
- डलहौज़ी के अनुसार, यदि किसी शासक का बिना किसी पुरुष उत्तराधिकारी के निधन हो जाता है, तो राज्य की संप्रभुता "विलय" हो जाएगी या ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा उस पर कब्ज़ा कर लिया जाएगा।
- सतारा राज्य पर व्यपगत सिद्धांत का उपयोग करके कब्ज़ा कर लिया गया था। अतः कथन 1 सही है।
- व्यपगत सिद्धांत ने अंग्रेज़ों को किसी भी रियासत पर कब्ज़ा करने की अनुमति दी, यदि शासक की मृत्यु बिना किसी प्राकृतिक उत्तराधिकारी के हुई हो। अतः कथन 2 सही है।
- व्यपगत सिद्धांत अवध पर भी लागू हुआ, कुशासन का आरोप लगाकर इसका विलय कर लिया गया। अतः कथन 3 सही है।
Question 49:
निम्नलिखित में से कौन ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में रैयतवारी बंदोबस्त की शुरुआत से संबंधित था/थे?
- लॉर्ड कार्नवालिस
- एलेग्जेंडर रीड
- थॉमस मुनरो
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
केवल 1
केवल 1 और 3
केवल 2 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
अंग्रेज़ी ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारत में शुरू किया गया भूमि बंदोबस्त इस प्रकार हैं:
- स्थायी बंदोबस्त (1793):
- इसकी शुरुआत लॉर्ड कार्नवालिस ने की थी। अतः 1 सही नहीं है।
- राजाओं और तालुकदारों को ज़मींदारों के रूप में मान्यता दी गई और किसानों से लगान वसूल करने और कंपनी को राजस्व देने के लिये कहा गया।
- भुगतान की जाने वाली राशि स्थायी रूप से निर्धारित की गई थी।
- महालवारी बंदोबस्त (1822):
- यह उत्तर पश्चिमी प्रांतों (आगरा, अवध और पंजाब के क्षेत्र) में होल्ट मैकेंज़ी द्वारा तैयार किया गया था।
- कलेक्टर गाँव-गाँव गए, भूमि का निरीक्षण किया, खेतों की माप की और विभिन्न समूहों के रीति-रिवाजों और अधिकारों को दर्ज किया।
- इस मांग को समय-समय पर संशोधित किया जाना था।
- राजस्व एकत्र करने और इसे कंपनी को भुगतान करने का प्रभार ज़मींदार के बजाय ग्राम प्रधान को दिया गया था।
- रैयतवारी व्यवस्था (1820): इसकी शुरुआत दक्षिण भारत में कैप्टन एलेक्जेंडर रीड और थॉमस मुनरो ने की थी। अतः 2 और 3 सही हैं।
- इस प्रणाली ने सरकार को राजस्व वसूली के लिये सीधे किसान (रैयत) से संपर्क की अनुमति दी और किसान को खेती के लिये नई भूमि छोड़ने या प्राप्त करने की स्वतंत्रता दी।
Question 50:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- मृदा के स्वरूप और उपज की गुणवत्ता के आधार पर भूमि राजस्व का मूल्यांकन।
- युद्ध में चलती-फिरती तोपों का उपयोग।
- तंबाकू और लाल मिर्च की खेती।
उपर्युक्त में से कौन-सी अंग्रेज़ों की भारत को देन थी/थीं?
केवल 1
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- भू-राजस्व की प्रणाली शेरशाह ने शुरू की थी, जिसके तहत एक व्यवस्थित सर्वेक्षण द्वारा भूमि का आकलन और संपूर्ण खेती योग्य भूमि की माप की जाती थी। अकबर के शासन के दौरान, मुगल साम्राज्य में इस प्रणाली को अधिक विस्तृत रूप में लागू किया गया। अकबर ने भूमि की माप के मानकीकरण की प्रणाली का पालन किया जैसे- प्रति बीघा भूमि पर उपज का पता लगाना और उस उत्पाद में राज्य के हिस्से का निर्धारण। अत: कथन 1 सही नहीं है।
- पानीपत की पहली लड़ाई (1526) में बाबर ने इब्राहिम लोदी की सेना के खिलाफ तोपों का इस्तेमाल किया। राणा सांगा की सेना के खिलाफ वर्ष 1528 में खानवा के युद्ध में बाबर ने इनका इस्तेमाल किया था। अत: कथन 2 सही नहीं है।
- माना जाता है कि मिर्च मैक्सिकन मूल की है जिसका समय 3500 ईसा पूर्व के आस-पास है। यह क्रिस्टोफर कोलंबस द्वारा दुनिया के बाकी हिस्सों में ले जाई गई थी, जिसने वर्ष 1493 में अमेरिका की खोज की थी। बाद में यह पुर्तगाल में लोकप्रिय हुई। 1498 ईस्वी में वास्को-डी-गामा भारतीय तट पर पहुँचा और भारत में मिर्च की शुरुआत की। तंबाकू एक ऐसा पौधा है जो उत्तर और दक्षिण अमेरिका में देशी रूप से उगता है। अत: कथन 3 सही नहीं है।
Question 51:
चित्रकला की क्षेत्रीय शैलियों के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
|
|
क्षेत्रीय चित्रकारी
|
विशिष्टताएँ
|
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1.
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चित्रकला की मेवाड़ शैली
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साहिबदीन और 'तमाशा' चित्रों का चित्रण
|
|
2.
|
किशनगढ़ की चित्रकला शैली
|
कामुकता और विद्वता
|
|
3.
|
कांगड़ा की चित्रकला शैली
|
बनी-ठणी की चित्रकला
|
|
4.
|
बशोली की चित्रकला शैली
|
चित्रकला की पहाड़ी शैलियाँ
|
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
केवल तीन युग्म
सभी चारों युग्म
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- चित्रकला की क्षेत्रीय शैलियाँ: उप-साम्राज्यवादी शैलियों ने मध्यकाल में अपनी शैली विकसित करके अपनी एक जगह और पहचान बनाई। उन्होंने अपनी भारतीय जड़ों को बनाए रखने के साथ चटकीले रंग-बिरंगे चित्रों के प्रति अपने लगाव के साथ चित्रकारी जारी रखा। इस समय अवधि के दौरान उभरे विभिन्न शैलियों में से थे:
- चित्रकला की राजस्थानी शैली:
- चित्रकला की मेवाड़ शैली: इसमें साहिबदीन की असाधारण चित्रकला (इस अवधि की मेवाड़ चित्रकला रसिकप्रिया, रामायण और भागवत पुराण साहित्यिक ग्रंथों के साहिबदीन के चित्रण पर केंद्रित थी) का प्रभुत्व है। इसके उत्तरकालीन चित्रों में मेवाड़ के दरबारी जीवन का चित्रण किया गया है। इस अवधि का अनूठा बिंदु असाधारण 'तमाशा' चित्रकला है जिसमें अभूतपूर्व विस्तार के साथ दरबार की औपचारिकताओं, दरबारी समारोह और नगर के दृश्यों को दर्शाया गया है। अतः युग्म 1 सही है।
- चित्रकला की किशनगढ़ शैली: किशनगढ़ की चित्रकला, सबसे रोमांटिक किंवदंतियों - सावंत सिंह और उनकी प्रेयसी बनी-ठणी, उनके जीवन और मिथकों, रोमांस और भक्ति के बीच के परस्पर संबंध से जुड़ी हुई हैं। कभी-कभी यह तर्क दिया जाता है कि 'बनी-ठणी' नामक महिला, राधा के चरित्र से मिलती-जुलती है। राधा और कृष्ण के बीच भक्ति और प्रेम संबंधों पर कई चित्रकारी भी बनाई गई है। अतः युग्म 2 और 3 सही नहीं हैं।
- पहाड़ी चित्रकला शैलियाँ: चित्रकला की यह शैली उप-हिमालयी राज्यों में विकसित हुई है। पहाड़ी चित्रों को दो समूहों में बांटा जा सकता है: जम्मू या डोगरा शैली: उत्तरी बशोली शृंखला तथा कांगड़ा शैली: दक्षिणी शृंखला
- बशोली शैली: 17वीं शताब्दी में पहाड़ी शैली में बनाए गए चित्रों को बशोली शैली कहा जाता है। चित्रकला का यह प्रारंभिक चरण था जिसकी विशेषता कमल की पंखुडियों सदृश बड़ी-बड़ी आँखों और घटते चले जाने वाले बालों की रेखा के साथ भाव अभिव्यक्ति करने वाले चेहरे चित्रित किये जाते थे। इन चित्रों में अनेक प्राथमिक रंगों का प्रयोग किया जाता था। अतः युग्म 4 सही है।
Question 52:
आर्यभट्ट और उनके कार्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- आर्यभट्ट ने लगभग 499 ई. में आर्यभट्टीय की रचना की थी जिसमें खगोल विज्ञान की अवधारणाओं का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था।
- बड़ी दशमलव संख्याओं को अक्षरों से निरूपित करने की विधि, संख्या सिद्धांत, ज्यामिति, त्रिकोणमिति तथा बीजगणित को उनके द्वारा समझाया गया।
- आर्यभट्ट ने अपनी पुस्तक में बताया कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमती है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- आर्यभट्ट ने लगभग 499 ई. में आर्यभट्टीय की रचना की जिसमें गणित के साथ-साथ खगोल विज्ञान की अवधारणाओं का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था। अतः कथन 1 सही है।
- इस पुस्तक के चार खंड थे: बड़ी दशमलव संख्याओं को वर्णमाला द्वारा दर्शाने की विधि, संख्या सिद्धांत, ज्यामिति, त्रिकोणमिति और खगोल विज्ञान पर आधारित बीजगणित। उन दिनों खगोल विज्ञान को खगोल शास्त्र भी कहा जाता था। खगोल नालन्दा की प्रसिद्ध खगोलीय प्रयोगशाला थी जहाँ आर्यभट्ट ने अध्ययन किया था। अतः कथन 2 सही है।
- आर्यभट्ट ने अपनी पुस्तक में बताया कि पृथ्वी गोल है और अपनी धुरी पर घूमती है। उन्होंने त्रिभुज के क्षेत्रफल का एक सूत्र बनाया तथा बीजगणित का आविष्कार किया। आर्यभट्ट द्वारा दिया गया पाई का मान यूनानियों द्वारा दिये गए मान से कहीं अधिक सटीक है। अतः कथन 3 सही है।
Question 53:
'चरक संहिता' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- चरक संहिता मुख्य रूप से औषधीय प्रयोजनों के लिये पौधों और जड़ी-बूटियों के उपयोग से संबंधित है।
- इसमें पाचन, चयापचय और प्रतिरक्षा प्रणाली पर व्यापक लेख की रचना की गयी है।
- चरक ने अपनी पुस्तक में उपचार के बजाय रोगों की रोकथाम पर अधिक बल दिया है और इस पुस्तक में आनुवंशिकी का उल्लेख नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन से सही हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- चरक संहिता मुख्य रूप से औषधीय प्रयोजनों के लिये पौधों और जड़ी-बूटियों के उपयोग से संबंधित है। एक तरह से यह मुख्य रूप से निम्नलिखित आठ घटकों वाले विज्ञान के रूप में आयुर्वेद से संबंधित है:
- काया चिकित्सा (सामान्य चिकित्सा)
- कौमार-भृत्य (बाल रोग)
- शल्य चिकित्सा (सर्जरी)
- सालक्य तंत्र (नेत्र विज्ञान/ईएनटी)
- बूटा विद्या (दानव विज्ञान/मनोरोग)
- अगाडा तंत्र (विष विज्ञान)
- रसायन तंत्र (अमृत)
- वाजीकरण तंत्र (कामोत्तेजक)। अतः कथन 1 सही है।
- चरक संहिता में पाचन, चयापचय और प्रतिरक्षा प्रणाली पर व्यापक लेख की रचना की गयी है। चरक इस बात पर बल देते हैं कि मानव शरीर की कार्यप्रणाली तीन दोषों पर निर्भर करती है: 1. पित्त, 2. कफ और 3. वायु। अतः कथन 2 सही है।
- ये दोष रक्त, मांस और मज्जा की सहायता से उत्पन्न होते हैं और इन तीनों दोषों के बीच असंतुलन के कारण शरीर रोगी हो जाता है।
- इस संतुलन को बहाल करने के लिये दवाओं का उपयोग किया जा सकता है। चरक ने अपनी पुस्तक में उपचार के बजाय रोगों की रोकथाम पर अधिक बल दिया है और इस पुस्तक में आनुवंशिकी का उल्लेख मिलता है। अतः कथन 3 सही नहीं है।
Question 54:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
पुस्तक - लेखक
- शुल्वसूत्र - बौधायन
- गणितकौमुदी - ब्रम्हगुप्त
- गणित सार संग्रह - महावीराचार्य
- सिद्धांत शिरोमणि - भास्कराचार्य
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
केवल तीन युग्म
सभी चार युग्म
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- गणित पर लिखित सबसे पहली पुस्तक शुल्वसूत्र थी जिसे बौधायन ने ईसा पूर्व छठी शताब्दी में लिखा था। शुल्वसूत्र में 'पाई' और पाइथागोरस प्रमेय के समान कुछ अवधारणाओं का भी उल्लेख मिलता है। पाई का उपयोग वर्तमान में वृत्त के क्षेत्रफल और परिधि की गणना के लिये किया जाता है। अतः युग्म 1 सही सुमेलित है।
- मध्यकाल में नारायण पंडित ने गणित पर कार्य किया जिसमें गणितकौमुदी और बीजाग्नितावतम्स शामिल हैं। नीलकंठ सोमसुत्वन ने तंत्रसंग्रह की रचना की, जिसमें त्रिकोणमितीय कार्यों के नियम शामिल हैं। ज्योतिर्विद नीलकंठ ने बड़ी संख्या में फारसी तकनीकी शब्दों को समझने के लिये तजिक का संकलन किया था। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- 9वीं शताब्दी ईस्वी में महावीराचार्य ने गणित सार संग्रह की रचना की जो पूरी तरह से गणित को समर्पित पहली पाठ्यपुस्तक है। अतः युग्म 3 सही सुमेलित है।
- भास्कराचार्य 12वीं शताब्दी ईस्वी में अग्रणी गणितज्ञों में से एक थे।
- उनकी पुस्तक सिद्धांत शिरोमणि चार खंडों में विभाजित है:
- लीलावती (अंकगणित से संबंधित)
- बीजगणित (बीजगणित से संबंधित)
- गोलाध्याय (गोलक के बारे में)
- ग्रहगणित (ग्रहों का गणित) अतः युग्म 4 सही सुमेलित है।
Question 55:
आदि शंकराचार्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- उन्होंने विशिष्टाद्वैत के सिद्धांत का प्रतिपादन किया।
- 'स्टैच्यू ऑफ इक्वलिटी' का संबंध आदि शंकराचार्य से है।
- उन्होंने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार हेतु भारत के चार कोनों शृंगेरी, पुरी, द्वारका और बद्रीनाथ में चार मठों की स्थापना की।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
कोई नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- आदि शंकराचार्य ने अद्वैत (अद्वैतवाद) के सिद्धांत का प्रतिपादन किया। अद्वैत वेदांतियों के अनुसार, उपनिषद अद्वैत के एक मौलिक सिद्धांत को प्रकट करते हैं जिसे 'ब्रह्मन' कहा जाता है, जो सभी वस्तुओं की वास्तविकता है। अद्वैतवादी ब्रह्मन को व्यक्तित्व और अनुभवजन्य बहुलता से परे समझते हैं। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिये आदि शंकराचार्य ने भारत के चार कोनों शृंगेरी, पुरी, द्वारका और बद्रीनाथ में चार मठों की स्थापना की। अतः कथन 3 सही है।
- हाल ही में भारत के प्रधानमंत्री ने 11वीं सदी के भक्ति संत श्री रामानुजाचार्य की 1,000वीं जयंती पर उनकी स्मृति में हैदराबाद के बाह्य क्षेत्र में ‘स्टैच्यू ऑफ इक्वेलिटी’ का उद्घाटन किया। अतः कथन 2 सही नहीं है।
Question 56:
यह एक प्रेम कहानी है जो, हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र से लेकर उत्तर भारत की भौगोलिक दशाओं और विशेषताओं जिनमें पठारों, भ्रंश घाटियों तथा मैदानों के साथ-साथ वन एवं वनस्पतियों का वर्णन करती है। यह परवर्ती गुप्त काल के महान महाकाव्यों में से एक थी।
निम्नलिखित में से किस पुस्तक का वर्णन ऊपर किया गया है?
कुमारसंभवम्
रघुवंशम्
मेघदूतम्
ऋतुसंहार
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- संस्कृत काव्य: इस विधा को काव्य या कविता कहा जाता है। नाटक खंड के विपरीत जहाँ कहानी पाठ का मुख्य केंद्रण होती है, काव्य की विधा शैली, भाषण की आकृति आदि पर अधिक ध्यान केंद्रित करती है। सबसे महान संस्कृत कवियों में से एक कालिदास हैं जिन्होंने कुमारसंभवम् (कुमार का जन्म) और रघुवंशम् (रघुओं का वंश) की रचना की थी। इन्होंने मेघदूतम् ( संदेशवाहक मेघ) और ऋतुसंहारम् (ऋतुओं का मिश्रण) नामक दो छोटे महाकाव्यों की रचना भी की थी। अतः विकल्प C सही है।
- मेघदूतम्, कालिदास की एक संस्कृत काव्य रचना है, यह एक रहस्यमय व्यक्ति के पृथ्वी पर निर्वासित होने की कहानी बताती है जो अपनी पत्नी को एक गुजरते मेघ के माध्यम से संदेश भेजता है।
- यह मेघ उन स्थानों का सुंदरता का वर्णन करता है जहाँ से वह गुज़रता है। यह रचना अपने गीतात्मक सौंदर्य, प्रकृति वर्णन और मानवीय भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिये प्रशंसित है।
Question 57:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- शूद्रक द्वारा लिखित सारिपुत्रप्रकरण को शास्त्रीय संस्कृत नाटक का पहला उदाहरण माना जाता है।
- अश्वघोष ने सबसे पहले अपने नाटक मृच्छकटिकम में संघर्ष के सार का परिचय दिया था।
- कूथियट्टम (कूडियट्टम) भारत का सबसे पुराना रंगमंच और जीवंत परंपरा है जो केरल में 10वीं शताब्दी ईस्वी से जीवंत है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2
केवल 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- प्रख्यात दार्शनिक अश्वघोष द्वारा रचित सारिपुत्रप्रकरण को शास्त्रीय संस्कृत नाटक का पहला उदाहरण माना जाता है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- शूद्रक ने सबसे पहले अपने नाटक मृच्छकटिकम में संघर्ष का सार प्रस्तुत किया था। इस नाटक में नायक और नायिका के अलावा पहली बार एक प्रतिपक्षी को दिखाया गया है। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- कूथियाट्टम (कूडियाट्टम) भारत का सबसे पुराना रंगमंच और जीवंत परंपरा है जो केरल में 10वीं शताब्दी ईस्वी से जीवंत है।
- इसमें पूरी तरह से नाट्य शास्त्र में निर्धारित नियमों का पालन होता है और केरल की चाक्यार तथा नांबियार जातियों का पारंपरिक विशेषाधिकार है। अतः कथन 3 सही है।
Question 58:
दर्शन की वेदांत शाखा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- ब्रह्मसूत्र इस दर्शन का आधार बना।
- शंकराचार्य, भक्ति को मोक्ष प्राप्ति का मार्ग मानते हैं।
- रामानुजन, ज्ञान को मोक्ष प्राप्ति का मुख्य साधन मानते हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीनों
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- वेदांत दर्शन का आधार बनने वाला सबसे पुराना ग्रंथ बादरायण का ब्रह्मसूत्र था जिसे ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में रचित और संकलित किया गया था। यह दर्शन प्रतिपादित करता है कि ब्रह्म ही जीवन की वास्तविकता है और बाकी सब कुछ मिथ्या या माया है। अतः कथन 1 सही है।
- शंकराचार्य ने उपनिषदों और भगवदगीता पर टीकाएँ लिखी हैं। उनके परिवर्तनों से अद्वैत वेदांत का विकास हुआ। इस विचारधारा के एक अन्य प्रमुख दार्शनिक रामानुजन थे। इनके द्वारा ब्रह्म को निर्गुण माना गया है। इन्होंने ज्ञान को मोक्ष प्राप्ति का मुख्य साधन माना है। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- रामानुज का दार्शनिक आधार शुद्ध अद्वैतवाद था तथा हिंदू परंपरा में इसे विशिष्टाद्वैत कहा गया है। इसमें ब्रह्मा को कुछ गुणों से युक्त माना गया है। इसमें आस्था से प्रेम करने तथा भक्ति करने को मोक्ष प्राप्त करने का मार्ग माना गया है। अतः कथन 3 सही नहीं है।
Question 59:
मीमांसा दर्शन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- इसकी स्थापना जैमिनी ने की थी।
- यह दर्शन तर्क, व्याख्या और अनुप्रयोग की कला पर बल देता है।
- इसमें कर्मकांडों को करने तथा वैदिक कर्मकांडों के पीछे के औचित्य और तर्क को समझने के द्वारा ही मोक्ष प्राप्ति को स्वीकार किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
मीमांसा दर्शन:
- 'मीमांसा' शब्द का शाब्दिक अर्थ तर्क, व्याख्या और अनुप्रयोग की कला है। यह दर्शन, संहिता और ब्राह्मण ग्रंथों के विश्लेषण पर केंद्रित है जो वेदों के भाग हैं। अतः कथन 2 सही है।
- इनका तर्क है कि वेदों में शाश्वत सत्य समाहित है और ये सभी ज्ञान के भंडार हैं। यदि किसी को धार्मिक पुण्य प्राप्त करना है, स्वर्ग और मोक्ष प्राप्त करना है तो उसे वेदों द्वारा निर्धारित सभी कर्त्तव्यों को पूरा करना होगा।
- जैमिनी सूत्र को मीमांसा दर्शन का विस्तार से वर्णन करने वाला ग्रंथ माना जाता है जिसकी रचना तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में हुई थी। अतः कथन 1 सही है।
- उनका तर्क है कि अनुष्ठान करने से मोक्ष संभव है लेकिन वैदिक अनुष्ठानों के औचित्य और तर्क को समझना भी आवश्यक है। अतः कथन 3 सही है।
Question 60:
ज्ञानेश्वर, नामदेव, एकनाथ और तुकाराम, वैष्णववाद के निम्नलिखित किस संप्रदाय से संबंधित थे?
वरकरी पंथ
रामानंदी संप्रदाय
ब्रह्म संप्रदाय
निम्बार्क संप्रदाय
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- वरकरी पंथ:
- इस संप्रदाय के अनुयायी विठोबा के रूप में भगवान विष्णु के भक्त हैं और इनकी पूजा का केंद्र महाराष्ट्र के पंढरपुर में विठोबा मंदिर है। इस संप्रदाय में शराब और तंबाकू के प्रति सख्त परहेज किया जाता है।
- इनकी वार्षिक धार्मिक तीर्थयात्रा, वारी काफी लोकप्रिय होती है। वारी के दौरान संतों की पादुकाओं को समाधि से पंढरपुर तक पालकी में ले जाया जाता है।
- इस तीर्थयात्रा के दौरान रिंगन और धावा जैसे कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।
- इस संप्रदाय के प्रमुख व्यक्तियों में ज्ञानेश्वर (1275-1296), नामदेव (1270-1350), एकनाथ (1533-1599) और तुकाराम (1598-1650) शामिल हैं। अतः विकल्प A सही है।
- रामानंदी संप्रदाय:
- ये अद्वैत विद्वान रामानंद की शिक्षाओं का पालन करते हैं। यह एशिया में हिंदू धर्म के तहत सबसे बड़ा मठवासी समूह है
- इसके दो उपसमूह त्यागी और नागा हैं।
- ब्रह्म संप्रदाय:
- यह भगवान विष्णु, परंब्रह्म या ब्रह्मांड निर्माता से संबंधित हैं।
- इसके संस्थापक माधवाचार्य थे। चैतन्य महाप्रभु द्वारा प्रचारित गौड़ीय वैष्णव धर्म, ब्रह्म संप्रदाय से संबंधित है। इस्कॉन इस संप्रदाय से संबंधित है।
- निम्बार्क संप्रदाय:
- इसे हम्सा संप्रदाय और कुमार संप्रदाय के रूप में भी जाना जाता है इसके अनुयायी राधा और कृष्ण देवताओं की पूजा करते हैं।
Question 61:
शास्त्रीय नृत्य विधाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- जातिस्वरम, शब्दम भरतनाट्यम या अग्नि नृत्य के मूल तत्त्व हैं।
- मांडूक शब्दम और तरंगम कुचिपुड़ी नृत्य से संबंधित हैं।
- बाटू नृत्य, पल्लवी और थरिजम ओडिसी नृत्य के मूल तत्त्व हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
भारतीय शास्त्रीय नृत्य के रूप:
- संगीत नाटक अकादमी के अनुसार, वर्तमान में भारत में आठ शास्त्रीय नृत्य विधाएँ अस्तित्त्व में हैं।
भरतनाट्यम:
- इस नृत्य विधा की उत्पत्ति तमिलनाडु में मंदिर नर्तकियों या 'देवदासियों' के एकल नृत्य प्रस्तुति 'सादिर' में देखी जा सकती है, इसलिये इसे 'दाशीअट्टम' भी कहा जाता था।
- उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्व में, तंजावुर के चार नृत्य शिक्षकों ने भरतनाट्यम गायन के तत्त्वों को परिभाषित किया। वे हैं:
- जातिस्वरम– यह नृत्त घटक है और अभिव्यक्ति रहित है, इसमें विभिन्न मुद्राएँ और गतियाँ सम्मिलित हैं।
- शब्दम्–यह गीत में अभिनय को अभिव्यक्त शब्दों के साथ समाविष्ट करने वाला नाटकीय तत्त्व है। सामान्यतः इसे ईश्वर की प्रशंसा में प्रयुक्त किया जाता है।
- भरतनाट्यम को प्राय: 'अग्नि नृत्य' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह मानव शरीर में अग्नि की अभिव्यक्ति है। भरतनाट्यम में अधिकांँश मुद्राएंँ लहराती हुई आग की लपटों से सादृश्य रखती हैं। अतः कथन 1 सही है।
कुचिपुड़ी:
- विजयनगर और गोलकुंडा शासकों के संरक्षण में इस नृत्य विधा को विशिष्ट महत्त्व प्राप्त हुआ।
- कुचिपुड़ी नृत्य विधा में लास्य और तांडव दोनों तत्त्व महत्त्वपूर्ण हैं। समूह प्रदर्शनों के अतिरिक्त, कुचिपुड़ी में कुछ लोकप्रिय एकल तत्त्व भी हैं। उनमें से कुछ हैं:
- मांडूक शबदम – एक मेंढक की कहानी कहता है।
- तरंगम – नर्तक अपने करतब को एक पीतल की तश्तरी के किनारों पर पाँव रख कर तथा अपने सिर पर जल पात्र या दीयों के एक समूह को संतुलित रखते हुए प्रस्तुत करता है।
- जल चित्र नृत्यम – इस प्रदर्शन में, नर्तक नृत्य करते हुए अपने पैर के अंगूठों से सतह पर चित्र बनाता है। अतः कथन 2 सही है।
ओडिसी: उदयगिरि-खंडगिरी की गुफाएंँ ओडिसी नृत्य के कुछ प्रारंभिक उदाहरण प्रदान करती हैं। ओडिसी नृत्य के तत्वों में शामिल हैं:
- मंगलाचरण या प्रारंभ, जिसमें पृथ्वी माता को पुष्प अर्पित किया जाता है।
- नृत्य युक्त बाटु नृत्य, इसमें त्रिभंग और चौक आसन होता है।
- पल्लवी, जिसमें चेहरे के भाव और गीत का प्रतिरूप सम्मिलित होता है।
- थारिझम, जिसमें समापन से पूर्व शुद्ध नृत्य सम्मिलित होता है। अतः कथन 3 सही है।
Question 62:
निम्नलिखित पर विचार कीजिये:
- सुजनी
- काशीदाकारी
- कोंडापल्ली बोम्मलु
उपर्युक्त में से कौन-सी कढ़ाई तकनीक है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 1 और 3
केवल 2
1, 2 और 3
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
कढ़ाई एक सजावटी कला है जिसमें सुई और धागे का उपयोग करके कपड़े पर डिज़ाइन या निश्चित पैटर्न में सिलाई करना शामिल है।
- काशीदाकारी: यह कश्मीर घाटी की सबसे प्रसिद्ध कढ़ाई है। ‘काशीदाकारी’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ‘सुई के कार्य’ से है। इसमें पुष्प प्रतिरूप वाले सरल चेन टाँके का उपयोग किया जाता है। अतः विकल्प 1 सही है।
- सुजनी: बिहार का सुजनी कढ़ाई कार्य, एक कपड़ा अभिव्यंजक कला उत्पाद है, जिसे GI पंजीकरण अधिनियम के तहत संरक्षण दिया गया है। इस कार्य में उपयोग किया जाने वाला कपड़ा आमतौर पर लाल या सफेद होता है। इसमें मुख्य रूपांकन की रेखा को एक मोटी चेन जैसी सिलाई के साथ प्रदर्शित किया जाता है। अतः विकल्प 2 सही है।
- कोंडापल्ली बोम्मलु खिलौने: कोंडापल्ली खिलौने भारतीय राज्य आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा के पास कृष्णा ज़िले के कोंडापल्ली में लकड़ी से बने खिलौने हैं। इन्हें मुलायम लकड़ी का उपयोग करके बनाया जाता है। इसमें लकड़ी के टुकड़े को नमी रहित बनाने के लिये गर्म किया जाता है। इसके बाद खिलौने के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग तराशकर एक साथ चिपका दिया जाता है। अतः विकल्प 3 सही नहीं है।
Question 63:
यह शैली विशिष्ट प्रकार की आलंकारिक चित्रकारी के लिये प्रसिद्ध है। मराठा शासकों ने 18वीं शताब्दी में इसको अत्यधिक संरक्षण प्रदान किया। चित्रकला की यह शैली इस विषय में अद्वितीय है कि उत्तर भारत में मुख्य रूप से वस्त्र और चर्मपत्र का प्रयोग होता है, जबकि इन्हें अधिकतर कांँच और लकड़ी के तख्ते पलगई पदम/बोर्ड पर चित्रित किया गया है। यह शैली उत्कृष्ट रंग पैटर्न और स्वर्ण-पत्र का उदारतापूर्वक प्रयोग करने के कारण भी अद्वितीय है। इस काल में चिरकालिक प्रभाव उत्पन करने के लिये अलंकरणों हेतु कई प्रकार के रत्नों और तराशे हुए काँचो का प्रयोग किया गया है।
निम्नलिखित में से कौन-सी लोक चित्रकारी उपर्युक्त उल्लेखित लोक-कला की विशेषताओं का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
पट्टचित्र
पटुआ कला
तंजौर चित्रकला
फड़ चित्रकला
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- पट्टचित्र: ओडिशा की एक पारंपरिक चित्रकारी है। इस चित्रकारी का आधार उपचारित वस्त्र होता था, जिसमें प्रयोग किये गये रंग प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त होते थे। कोई पेंसिल या चारकोल का उपयोग नहीं किया जाता था, बल्कि इसके स्थान पर लाल या पीले रंग से बाह्य रेखा निर्मित करने के लिये ब्रश का प्रयोग किया जाता था और उसके उपरांत रंग भरे जाते थे। इन चित्रों के विषय जगन्नाथ और वैष्णव पंथ से प्रेरित हैं।
- पटुआ कला: बंगाल की चित्रकला है। इन चित्रकलाओं को पटो पर निर्मित किया जाता था और कई पीढ़ियों तक स्क्रॉल चित्रकार या पटुआ, भोजन या पैसे के बदले अपनी कहानियाँ गाने के लिये विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रमण करते थे। परंपरागत रूप से इन्हें कपड़े पर चित्रित किया जाता था एवं धार्मिक कहानियों को वर्णित किया जाता था; आज के समय में इनका उपयोग राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर टिप्पणी करने के लिये प्रयोग किया जाता है।
- तंजौर चित्रकला: तंजावुर या तंजौर शैली विशिष्ट प्रकार की आलंकारिक चित्रकलाओं के लिये प्रसिद्ध है। मराठा शासकों ने 18वीं शताब्दी में इसको अत्यधिक संरक्षण प्रदान किया। चित्रकला की यह शैली इस विषय में अद्वितीय है कि उत्तर भारत में मुख्य रूप से वस्त्र और चर्मपत्र का प्रयोग होता है, जबकि इन्हें अधिकतर कांँच और लकड़ी के तख्ते पलगई पदम/बोर्ड पर चित्रित किया गया है।
- वे उत्कृष्ट रंग पैटर्न और स्वर्ण-पत्र का उदारतापूर्वक प्रयोग करने के कारण भी अद्वितीय हैं। इस काल में चिरकालिक प्रभाव उत्पन्न करने के लिये अलंकरणों हेतु कई प्रकार के रत्नों और तराशे हुए काँचो का प्रयोग किया गया है। अधिकतर चित्रकलाओं में मुस्कुराते हुए कृष्ण की विभिन्न मुद्राओं और उनके जीवन की प्रमुख घटनाओं को चित्रित किया गया है।
- यह चित्रकला महान संरक्षक महाराज सरफोजी के संरक्षण में अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँची। अतः विकल्प C सही है।
- फड़ चित्रकला: यह चित्रकला मुख्य रूप से राजस्थान में पाई जाती है और यह कुंडलित चित्रकारी (स्क्रॉल पैंटिंग) है। इसमें फड़ नामक कपड़े के एक लंबे टुकड़े पर शाकीय रंगों से चित्रण किया जाता है। इसमें मानव आकृतियों की आंँखें बड़ी-बड़ी होती हैं और चेहरे गोल होते हैं।
Question 64:
राष्ट्रीय आयुष मिशन के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
- आयुर्वेद: स्कूली बच्चों के लिये आयुष के माध्यम से स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देना
- सुप्रजा: आयुष आधारित वृद्धावस्था कार्यक्रम
- वयोमित्र: मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल के लिये आयुष
दिये गए युग्मों में से कितने सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- हाल ही में राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) की क्षेत्रीय समीक्षा बैठक का उद्घाटन किया गया।
- इस बैठक में राष्ट्रीय आयुष मिशन के निम्नलिखित ठोस कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला गया:
- आयुर्वेद: आयुष के माध्यम से स्कूली बच्चों के लिये स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना। अतः युग्म 1 सही है।
- सुप्रजा: मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल के लिये आयुष।
- वयोमित्र: आयुष आधारित वृद्धावस्था कार्यक्रम; ऑस्टियो आर्थराइटिस और अन्य मस्कुलोस्केलेटल विकारों की रोकथाम एवं प्रबंधन। अतः युग्म 3 सही नहीं है।
- इस मिशन को ज़रूरतमंद जनता को सूचित विकल्प प्रदान करने के लिये स्वास्थ्य सुविधाओं को मज़बूत और बेहतर बनाकर पूरे देश में आयुष स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ प्रदान करने के विज़न एवं उद्देश्यों के साथ कार्यान्वित किया जा रहा है।
- इस मिशन के तहत आयुष मंत्रालय वर्ष 2023-24 तक राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकारों के सहयोग से 12,500 आयुष स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के संचालन की दिशा काम कर रहा है।
Question 65:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
चित्रकला - स्थान
- सित्तनवासल गुफा चित्रकला - ओडिशा
- रावण छाया चित्रकला - तमिलनाडु
- लेपाक्षी मंदिर चित्रकला - केरल
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीनों युग्म
कोई भी युग्म नहीं
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- सित्तनवासल गुफा (अरिवर कोइल) चित्रकला: तमिलनाडु में पहली शताब्दी ईसा पूर्व से 10 वीं शताब्दी ईस्वी तक के प्रसिद्ध शैलकृत गुफा मंदिर, जैन धर्म पर आधारित पेंटिंग के लिये जाने जाते हैं। अतः युग्म 1 सही सुमेलित नहीं है।
- रावण छाया शैल आश्रय: ओडिशा के क्योंझर ज़िले में स्थित एक शैल आश्रय पर ये प्राचीन भित्ति चित्र आधी खुली छतरी के आकार में हैं। ऐसा माना जाता है कि यह आश्रय स्थल शिकार करने वालों का शाही ठिकाना था। इसकी सबसे उल्लेखनीय पेंटिंग एक शाही जुलूस की है जो 7वीं शताब्दी ईस्वी की है। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- लेपाक्षी मंदिर चित्रकला: आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित, इन भित्ति चित्रों को 16वीं शताब्दी में लेपाक्षी के वीरभद्र मंदिर की दीवारों पर बनाया गया था। विजयनगर काल के दौरान निर्मित इन चित्रों में रामायण, महाभारत और विष्णु के अवतारों पर आधारित धार्मिक विषयों को शामिल किया गया है। अतः युग्म 3 सही सुमेलित नहीं है।
Question 66:
भारत में प्रागैतिहासिक चित्रकला के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- प्रागैतिहासिक चित्रों के प्रथम रूपांकन को छत्तीसगढ़ की जोगीमारा गुफाओं में खोजा गया था।
- उच्च पुरापाषाण काल में समूह शिकार को चित्रित करना सामान्य दृश्य है।
- ताम्रपाषाण काल के अधिकांश चित्रों में युद्ध के दृश्य चित्रित हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीनों
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
प्रागैतिहासिक चित्रकला को आमतौर पर चट्टानों पर चित्रित किया जाता था और पत्थरों पर इस उत्कीर्णन को पेट्रोग्लिफ्स कहा जाता था।
- प्रागैतिहासिक चित्रों के प्रथम रूपांकन को मध्य प्रदेश की भीमबेटका गुफाओं में खोजा गया था। अतः कथन 1 सही नहीं है।
प्रागैतिहासिक चित्रकला के तीन प्रमुख चरण हैं:
- उच्च पुरापाषाण काल (40,000-10,000 ईसा पूर्व): इस दौरान गुफाओं की दीवारें क्वार्टजाइट से बनी थीं, इसलिये रंग हेतु खनिजों का उपयोग किया जाता था। इस काल में सफेद, गहरे लाल और हरे रंग का उपयोग बड़े जानवरों जैसे बाइसन, हाथी, गैंडा, बाघ आदि को चित्रित करने के लिये किया जाता था। लाल रंग का उपयोग शिकारियों के लिये किया जाता था और हरे रंग का उपयोग ज्यादातर नर्तकियों के लिये किया जाता था।
- मध्यपाषाण काल (10,000-4000 ईसा पूर्व): इस काल में मुख्य रूप से लाल रंग का प्रयोग देखा गया। उच्च पुरापाषाण काल की तुलना में इस काल में चित्रों का आकार छोटा हो गया। इन चित्रों में चित्रित सबसे आम दृश्यों में से एक समूह शिकार है और कई अन्य चित्रों में चराई गतिविधि के दृश्य दर्शाए गए हैं। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- ताम्रपाषाण काल: इस काल में हरे और पीले रंगों के प्रयोग वाले चित्रों की संख्या में वृद्धि देखी गई। इस दौरान अधिकतर पेंटिंग्स में युद्ध के दृश्य दर्शाए गए हैं। इसके साथ ही घोड़ों और हाथियों पर सवार पुरुषों के चित्र भी मिलते हैं। इनमें से कुछ के पास धनुष और तीर भी दिखाए गए हैं जिनसे युद्ध की तैयारी का संकेत मिलता है। अतः कथन 3 सही है।
Question 67:
होयसल मंदिरों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- कर्नाटक के बेलूर, हलेबिड और सोमनाथपुर के होयसल मंदिरों को UNESCO की विश्व धरोहर सूची में जोड़ा गया है।
- चेन्नकेशव मंदिर का निर्माण होयसल राजा विष्णुवर्धन ने चोलों पर अपनी विजय के उपलक्ष्य में करवाया था।
- सोमनाथपुर का केशव मंदिर एक सुंदर त्रिकुटा मंदिर है जो भगवान कृष्ण को तीन रूपों- जनार्दन, केशव और वेणुगोपाल को समर्पित है।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
केवल एक
सिर्फ दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- होयसल के पवित्र मंदिर समूह, कर्नाटक के बेलूर, हलेबिड और सोमनाथपुर के प्रसिद्ध होयसल मंदिर को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) की विश्व विरासत सूची में जोड़ा गया है। यह समावेशन भारत में 42वें UNESCO विश्व धरोहर स्थल का प्रतीक है। अतः कथन 1 सही है।
- हाल ही में शांतिनिकेतन, जो पश्चिम बंगाल के बीरभूम ज़िले में स्थित है, को भी UNESCO की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया था।
- बेलूर में चेन्नाकेशव मंदिर:
- इसका निर्माण होयसल राजा विष्णुवर्धन ने 1116 ई. में चोलों पर अपनी विजय के उपलक्ष्य में करवाया था। अतः कथन 2 सही है।
- बेलुरु (जिसे पुराने समय में वेलपुरी, वेलूर और बेलापुर के नाम से भी जाना जाता था) यागाची नदी के तट पर स्थित है तथा यह होयसल साम्राज्य की राजधानियों में से एक था।
- सोमनाथपुर का केशव मंदिर:
- यह एक सुंदर त्रिकुटा मंदिर है जो भगवान कृष्ण के तीन रूपों- जनार्दन, केशव और वेणुगोपाल को समर्पित है।
- इसमें केशव की मूर्ति गायब है और जनार्दन तथा वेणुगोपाल की मूर्तियाँ क्षतिग्रस्त हैं।
Question 68:
दक्षिण भारत में मंदिर वास्तुकला के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- दक्षिण भारत में मंदिर वास्तुकला पल्लव शासक, नरसिम्हावर्मन के अधीन शुरू हुई थी।
- 7वीं शताब्दी के एक पल्लव स्थल को वर्ष 1984 में "महाबलीपुरम के स्मारकों के समूह" नाम से यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- दक्षिण भारत में मंदिर वास्तुकला पल्लव शासक, महेंद्रवर्मन के अधीन शुरू हुई। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- पल्लव वंश के दौरान विकसित मंदिरों को कालानुक्रमिक रूप से चार चरणों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
- महेंद्र समूह: यह पल्लव मंदिर वास्तुकला का पहला चरण था। इनके अधीन, मंदिरों को मंडप के रूप में जाना जाता था (नागर शैली के विपरीत जिसमें मंडप का तात्पर्य केवल सभा कक्ष होता था) ।
- नरसिम्हा समूह: यह दक्षिण भारत में मंदिर वास्तुकला के विकास के दूसरे चरण का प्रतिनिधित्व करता है।
- राजसिम्हा समूह: यह पल्लव मंदिर वास्तुकला का तीसरा चरण था। इस दौरान चट्टानों को काटकर बनाए गए मंदिरों के स्थान पर वास्तविक संरचनात्मक मंदिरों का विकास शुरू हुआ था।
- नंदिवर्मन समूह: यह पल्लव काल के दौरान मंदिर विकास का चौथा चरण था। इस दौरान बनाए गए मन्दिर आकार में छोटे थे। इसकी विशेषताएँ मंदिर वास्तुकला की द्रविड़ शैली के लगभग समान थीं।
- पल्लव राजवंश के पतन के बाद, चोल साम्राज्य के तहत मंदिर वास्तुकला की एक नई शैली विकसित हुई जिसे द्रविड़ शैली के रूप में जाना जाता है।
- तमिलनाडु में पल्लव राजवंश के अधीन प्राचीन बंदरगाह शहर मामल्लपुरम में कई अद्भुत वास्तुकलाओं का विकास हुआ। 7वीं शताब्दी के इस पल्लव स्थल को वर्ष 1984 में "महाबलीपुरम के स्मारकों का समूह" नाम से यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। अतः कथन 2 सही है।
Question 69:
UNESCO के अनुसार निम्नलिखित में से कौन सा अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर का उदाहरण नहीं है?
कुटियट्टम, भारत का संस्कृत रंगमंच
रामलीला, भारत की रामायण का पारंपरिक प्रदर्शन
ताज महल, भारत का एक मकबरा
योग, भारत का एक शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक अभ्यास
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
हाल ही में UNESCO ने बोत्सवाना में अंतर-सरकारी समिति के अपने 18वें बैठक के दौरान आधिकारिक तौर पर गुजरात के प्रतिष्ठित गरबा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर (ICH) की अपनी प्रतिष्ठित प्रतिनिधि सूची में शामिल किया।
- अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर से तात्पर्य उन प्रथाओं, प्रतिनिधित्वों, अभिव्यक्तियों, ज्ञान, कौशल तथा संबंधित उपकरणों, वस्तुओं, कलाकृतियों एवं सांस्कृतिक स्थलों से है जिन्हें समुदाय, समूह व व्यक्ति अपनी सांस्कृतिक धरोहर के हिस्से के रूप में पहचानते हैं।
- ताज महल एक मूर्त सांस्कृतिक धरोहर है क्योंकि यह एक इमारत, ऐतिहासिक स्थल, स्मारक व कलाकृति है। अतः विकल्प C सही है।

Question 70:
पार्थेनन मूर्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- ग्रीस संग्रहालय में रखी पार्थेनन मूर्तियाँ 30 से अधिक प्राचीन पत्थर की मूर्तियों का संग्रह है।
- ये कलाकृतियाँ एथेंस के स्वर्ण युग के महत्त्वपूर्ण अवशेष हैं।
- ये कलाकृतियाँ देवी आर्टेमिस को समर्पित हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- पार्थेनॉन मूर्तियों के बारे में :
- ब्रिटिश संग्रहालय में रखी पार्थेनन मूर्तियाँ पत्थर की ग्रीस की 30 से अधिक प्राचीन मूर्तियों का संग्रह है, जो 2,000 वर्ष से अधिक पुरानी हैं।अतः कथन 1 सही नहीं है।
- मूल रूप से एथेंस में एक्रोपोलिस पहाड़ी पर पार्थेनन मंदिर की दीवारों और मैदानों को सजाने वाली ये कलाकृतियाँ एथेंस के स्वर्ण युग के महत्त्वपूर्ण अवशेष हैं, मंदिर का निर्माण 432 ईसा पूर्व में पूरा हुआ था।अतः कथन 2 सही है।
- देवी एथेना को समर्पित, पार्थेनन सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्त्व की प्रतीक हैं। अतः कथन 3 सही नहीं है।
Question 71:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- गांधार कला शैली कृष्णा नदी के तट के समानांतर क्षेत्रों में विकसित हुई थी।
- मथुरा कला शैली तीनों धर्मों-बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और जैन धर्म के विषयों से प्रभावित थी।
- अमरावती कला शैली का विकास पंजाब की पश्चिमी सीमा के क्षेत्रों में हुआ था।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही नहीं हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीनों
कोई भी नहीं
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- गांधार कला शैली पंजाब की पश्चिमी सीमा पर (आधुनिक पेशावर और अफगानिस्तान के पास) विकसित हुई। ग्रीक आक्रमणकारी अपने साथ ग्रीक और रोमन मूर्तिकारों की परंपराएँ लेकर आए, जिसने इस क्षेत्र की स्थानीय परंपराओं को प्रभावित किया। इस प्रकार गांधार कला शैली को ग्रीको-इंडियन कला शैली के नाम से भी जाना जाने लगा। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- पहली और तीसरी शताब्दी ईस्वी के बीच की अवधि में मथुरा कला शैली यमुना नदी के तट के समानांतर क्षेत्रों में विकसित हुई थी। मथुरा कला शैली की मूर्तियाँ उस समय के तीनों धर्मों - बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और जैन धर्म की कहानियों और छवियों से प्रभावित थीं। अतः कथन 2 सही है।
- भारत के दक्षिणी भागों में सातवाहन शासकों के संरक्षण में कृष्णा नदी के तट के समानांतर क्षेत्रों में अमरावती कला शैली विकसित हुई। अन्य दो कला शैलियों में जहाँ एकल छवियों पर ध्यान केंद्रित किया गया वहीं अमरावती कला शैली में गतिशील छवियों के उपयोग पर अधिक बल दिया गया। अतः कथन 3 सही नहीं है।
Question 72:
यह चित्र आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले में स्थित हैं; ये भित्ति चित्र 16वीं शताब्दी में लेपाक्षी वीरभद्र मंदिर की दीवारों पर चित्रित किये गए थे। विजयनगर काल के दौरान निर्मित, यह चित्र रामायण, महाभारत और विष्णु के अवतारों पर आधारित एक धार्मिक विषय का अनुगमन करते हैं। इन चित्रों में प्राथमिक रंगों, विशेष रूप से नीले रंग का पूर्ण अभाव दिखाई देता है। जबकि गुणवत्ता के स्तर पर इस चित्रकला में गिरावट दिखाई देती है। इन चित्रांकनों में वेशभूषा, आकृतियों और विवरणों को काले रंग से रेखांकित किया गया था।
निम्नलिखित में से कौन-सी चित्रकला शैली इन विशेषताओं को समाहित करती हैं?
रावण छाया शैल आश्रय
लेपाक्षी चित्रकला
बाग गुफा चित्रकला
केरल की म्यूरल चित्रकला
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- 16वीं शताब्दी में आंध्र प्रदेश के अनंतपुर ज़िले में स्थित लेपाक्षी भित्ति चित्रों का चित्रण लेपाक्षी वीरभद्र मंदिर की दीवारों पर किया गया था।
- विजयनगर काल के दौरान निर्मित, यह चित्र रामायण, महाभारत और विष्णु के अवतारों पर आधारित एक धार्मिक विषय का अनुगमन करते हैं। इन चित्रों में प्राथमिक रंगों में, विशेष रूप से नीले रंग का पूर्ण अभाव दिखाई देता है। जबकि गुणवत्ता के स्तर पर इस चित्रकला में गिरावट दिखाई देती है। इनकी वेशभूषा, आकृतियों और विवरणों को काले रंग से रेखांकित किया गया था।
अतः विकल्प B सही है।
Question 73:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
शिखर के प्रकार - विशेषताएँ
- रेखा-प्रसाद - आधार चौड़ा और ऊँचाई में छोटा
- फम्साना - आधार पर वर्गाकार और दीवारें अंदर की ओर मुड़ी हुई
- वल्लभी - छत गुंबददार कक्षों में उभरी हुई
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीनों युग्म
कोई भी युग्म नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या: मंदिर वास्तुकला की नागर शैली में शिखर सामान्यतः तीन प्रकार के होते थे:
- लैटिना या रेखा-प्रसाद: ये आधार पर चौकोर थे और दीवारें शीर्ष पर एक बिंदु तक अंदर की ओर मुड़ी हुई थीं। अतः युग्म 1 सही सुमेलित नहीं है।
- फमसाना: इनका आधार व्यापक था और लैटिना की तुलना में यह ऊँचाई में छोटे थे। ये एक सीधी रेखा में ऊपर की ओर झुके होते थे। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- वल्लभी: इनका आधार आयताकार था जिसकी छत गुंबददार कक्षों में उभरी हुई थी। इन्हें वैगन-वॉल्टेड छतें भी कहा जाता था। अतः युग्म 3 सही सुमेलित है।
Question 74:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये :
महत्त्वपूर्ण स्थल - प्रमुख पुरातात्विक खोज
- धोलावीरा - डॉकयार्ड
- लोथल - बाँध
- चन्हुदड़ो - बिना दुर्ग का शहर
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीनों युग्म
कोई भी युग्म नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- धोलावीरा,गुजरात - विशाल जल भंडार, अद्वितीय जल संचयन प्रणाली, बाँध और तटबंध, एक विज्ञापन बोर्ड की तरह 10 बड़े आकार के संकेतों से युक्त शिलालेख। यह खोजा जाने वाला नवीनतम IVC शहर है। अतः युग्म 1 सही सुमेलित नहीं है।
- लोथल,गुजरात - नौसैनिक व्यापार के लिये एक महत्त्वपूर्ण स्थल, इसमें एक डॉकयार्ड, चावल की भूसी, अग्नि वेदियाँ, चित्रित जार, आधुनिक शतरंज, घोड़े और जहाज की टेराकोटा मूर्तियाँ, 45, 90 और 180 डिग्री के कोण मापने के उपकरण के संकेत। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- चन्हुदड़ो (भारत का लंकाशायर) वर्तमान पाकिस्तान में स्थित है - बिना दुर्ग वाला एकमात्र सिंधु शहर। यहाँ मनके बनाने के कारखाने तथा लिपस्टिक के प्रयोग के साक्ष्य मिले हैं। अतः युग्म 3 सही सुमेलित है।

Question 75:
अभिलेखों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- सोहगौरा ताम्रलेख(ताम्रपत्र), यह पूर्व अशोक कालीन ब्राह्मी लिपि में उकीर्णित अभिलेख है जिसमें दुर्भिक्ष राहत प्रयासों का उल्लेख किया गया है।
- हाथीगुम्फा गुफालेख, कलिंग शासक खारवेल के बारे में जानकारी का मुख्य स्रोत है।
- ऐहोल अभिलेख, ओडिशा के पुलकेशिन के दरबारी कवि द्वारा लिखा गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 1 और 2
1, 2 और 3
केवल 3
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
महत्त्वपूर्ण प्राचीन शिलालेख और अभिलेख:
- सोहगौरा ताम्रलेख: सोहगौरा ताम्रलेख के रूप में प्रसिद्ध सबसे पुराना ज्ञात ताम्रपत्र अभिलेख है, यह एक मौर्य अभिलेख है जिसमें दुर्भिक्ष राहत प्रयासों का उल्लेख मिलता है। यह भारत में बहुत कम संख्या में पाए गए पूर्व अशोक ब्राह्मी अभिलेखों में से एक है। अतः कथन 1 सही है।
- हाथीगुम्फा गुफालेख: हाथीगुम्फा गुफालेख, जिसे उड़ीसा में उदयगिरि की खंडगिरि गुफाओं के हाथी गुफा शिलालेख के रूप में भी जाना जाता है, को दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के दौरान राजा खारवेल द्वारा उत्कीर्णित किया गया था। यह कलिंग शासक खारवेल के बारे में जानकारी का प्रमुख स्रोत है।
- ऐहोल अभिलेख: कर्नाटक में अवस्थित ऐहोल, चालुक्यों की प्रथम राजधानी थी। यह शिलालेख संस्कृत में लिखा गया है, जिसकी लिपि कन्नड़ है। इस अभिलेख में पुलकेशिन द्वितीय द्वारा हर्षवर्धन की पराजय तथा पल्लवों पर चालुक्यों की विजय का उल्लेख मिलता है। इसमें राजधानी को ऐहोल से बादामी स्थानांतरित करने का भी उल्लेख है। यह पुलकेशिन द्वितीय के दरबारी कवि रविकीर्ति द्वारा उत्कीर्णित किया गया था , जिसने 610 से 642 ईसवी तक शासन किया था। अतः कथन 3 सही नहीं है।
Question 76:
निम्नलिखित में से किस राज्य ने सर्दियों के महीनों के दौरान कंबाला भैंस दौड़ का आयोजन किया, जब किसान अपनी धान की फसल काटते हैं?
तमिलनाडु
कर्नाटक
आंध्र प्रदेश
केरल
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- कंबाला एक भैंस दौड़ है जो सर्दियों के महीनों के दौरान तटीय कर्नाटक के ज़िलों (उडुपी और दक्षिण कन्नड़) में तब आयोजित की जाती है जब किसान अपनी धान की फसल काटते हैं।
- यह दौड़ कीचड़ और जल से भरे दो समानांतर ट्रैक पर आयोजित की जाती है। भैंसों की प्रत्येक जोड़ी के पास ट्रैक पर जानवरों को नियंत्रित करने और आदेश देने के लिये एक जॉकी या 'कंबाला धावक' भी होगा।
- प्रत्येक चरण में जीतने वाली टीम चैंपियन बनने तक उच्च राउंड के लिये क्वालीफाई करती है।
अतः विकल्प B सही है।
Question 77:
निम्नलिखित विद्वानों पर विचार कीजिये:
- अमरसिंह
- वराहमिहिर
- कालिदास
उपर्युक्त में से कितने विद्वान चंद्रगुप्त द्वितीय के नौ रत्नों में शामिल थे?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
"नवरत्न" शब्द नौ असाधारण विद्वानों और सलाहकारों के एक समूह को संदर्भित करता है जो चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार का हिस्सा थे। ये नौ व्यक्ति साहित्य, खगोल विज्ञान, गणित, चिकित्सा एवं कला सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता हेतु प्रसिद्ध थे।
इन नौ रत्नों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:
- अमरसिंह: अमरसिंह संस्कृत के विद्वान और कवि थे तथा उनका अमरकोश संस्कृत के मूल पहलुओं, समानार्थक शब्दों एवं पर्यायवाची शब्दों की शब्दावली है। अतः विकल्प 1 सही है।
- धन्वंतरि: वे एक महान चिकित्सक थे।
- हरिषेण: उन्हें प्रयाग प्रशस्ति या इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख की रचना करने के लिये जाना जाता है।
- कहपंक :कहपंक एक ज्योतिषी थे।
- संकू: संकू वास्तुकला के क्षेत्र से संबंधित थे।
- वराहमिहिर: वराहमिहिर उज्जैन में रहते थे और उन्होंने तीन महत्त्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं: पंचसिद्धांतिका, बृहत् संहिता एवं बृहत् जातक। अतः विकल्प 2 सही है।
- कालिदास: एक प्रसिद्ध संस्कृत कवि और नाटककार, जिन्हें प्राचीन भारत के महानतम साहित्यकारों में से एक माना जाता है। अतः विकल्प 3 सही है।
- वररुचि: यह व्याकरणशास्त्री होने के साथ संस्कृत के विद्वान थे।
- वेतालभट्ट: वेतालभट्ट एक जादूगर थे।
Question 78:
प्राचीन भारतीय इतिहास में प्रयुक्त शब्द ‘विदथ’ का अभिप्राय है?
आर्थिक, सामाजिक और सैन्य उद्देश्यों हेतु वैदिक काल की लोक सभा।
ब्रह्मांड के निर्माता को संदर्भित करने के लिये जैन धर्म में प्रयुक्त एक शब्द।
प्राचीन भारतीय ग्रंथों में कृषि से संबंधित देवता।
वास्तविकता की परम प्रकृति के उल्लेख से संबंधित बौद्ध शब्द।
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
सभा और समिति:
- 'सभा' शब्द ऋगवैदिक काल में एक समूह को संदर्भित करता था। 'जन' के बड़े सदस्यों द्वारा 'सभा' में भाग लिया जाता था। इस सभा में 'सभावती' के नाम से जानी जाने वाली महिलाओं द्वारा भी भाग लिया जाता था। हालाँकि उत्तर वैदिक काल में महिलाओं ने 'सभा' में भाग लेना बंद कर दिया था।
- 'सभा' में संगीत, नृत्य और जादू-टोना के साथ-साथ जुआ भी खेला जाता था। इस सभा द्वारा प्रशासनिक और न्यायिक कार्य किये जाने के साथ दैनिक जीवन के मामलों पर चर्चा की जाती थी।
- लोगों की सभा में किये जाने वाले राजनीतिक कार्य और विचार-विमर्श को 'समिति' द्वारा निष्पादित किया जाता था। राजनीतिक कार्य के अलावा 'समिति' दार्शनिक मुद्दों पर भी चर्चा करती थी। सभा में प्रार्थना और धार्मिक समारोह प्रमुख विषय के रुप में शामिल होते थे। हालाँकि इस सभा को पूर्व वैदिक काल के अंत में जाकर महत्त्व मिला।
विदथ:
- यह सबसे पुरानी जनजातीय सभा थी। ऋग्वेद में ‘विदथ’ शब्द का 122 बार उल्लेख हुआ है और इसलिये यह सबसे महत्त्वपूर्ण सभा प्रतीत होती है। इस सभा का उद्देश्य धर्मनिरपेक्ष, सैन्य, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक उद्देश्यों के लिये निर्णय लेना था। इन सभाओं में महिलाओं की समान भागीदारी थी।
- विभिन्न कुलों और कबीलों ने अपने देवताओं की पूजा के लिये ‘विदथ’ का एक सामान्य आधार के रूप में इस्तेमाल किया था। अतः विकल्प A सही है।
Question 79:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| चोल साम्राज्य के दौरान विभिन्न कर |
संबंधित क्षेत्र |
| 1.तत्तर पट्टम |
सुनारों पर कर |
| 2.वन्नार पराई |
धोबियों पर कर |
| 3.पसि पत्तम |
मछली पकड़ने पर आरोपित कर |
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
इनमें से कोई भी युग्म नहीं
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- स्थानीय करों में कई प्रकार के कर शामिल थे, जिनमें गाँव और नाडु स्तर पर सिंचाई श्रम पर (वेट्टी/वेट्टिनाई) सबसे लोकप्रिय था।
- व्यापार और कारीगरों पर लगने वाले अनेक कर मौजूद थे, जिनमें शामिल हैं:
- कुंकम (एक टोल), तत्तर पट्टम (सुनार पर कर)। अतः युग्म 1 सही सुमेलित है।
- कुराई काकू (कपड़े पर कर)
- वेरिलाई (पान के पत्तों पर शुल्क)
- वन्नार पराई (धोबियों पर कर)। अतः युग्म 2 सही सुमेलित है।
- पसि पत्तम (मछली पकड़ने पर लगने वाला कर)। अतः युग्म 3 सही सुमेलित है।
Question 80:
प्राचीन भारत के निम्नलिखित बंदरगाहों पर विचार कीजिये:
- कोरकई
- कावेरीपट्टनम
- टोंडी
उपर्युक्त में से कौन पांड्य साम्राज्य से संबंधित था/थे?
केवल 1
केवल 1 और 2
केवल 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
|
पांड्य:
इसमें आधुनिक तिरुनेलवेली, मदुरै, रामनाद ज़िले और दक्षिण त्रावणकोर शामिल थे।
|
राजधानी: मदुरै
|
बंदरगाह: कोरकई
अतः विकल्प 1 सही है।
|
|
चोल:
इसमें तमिलनाडु के आधुनिक तंजौर और तिरुचिरापल्ली ज़िले शामिल थे।
|
राजधानी:उरैयुर
|
बंदरगाह: कावेरीपट्टनम
अतः विकल्प 2 सही नहीं है।
|
|
चेर:
इसमें मुख्य रूप से केरल तट शामिल था।
|
राजधानी: करुवर
|
बंदरगाह: टोंडी
अतः विकल्प 3 सही नहीं है।
|
Question 81:
निम्नलिखित अभिलेखों पर विचार कीजिये:
- रुम्मिनदेई स्तंभ अभिलेख
- निगालीसागर स्तंभ अभिलेख
- सारनाथ सिंह शीर्ष अभिलेख
उपरोक्त में से कौन लघु स्तंभ अभिलेख है/हैं?
केवल 1 और 3
केवल 1 और 2
केवल 2
1, 2 और 3
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- लघु स्तंभ अभिलेख:
- रुम्मिनदेई स्तंभ अभिलेख: अशोक की लुंबिनी यात्रा तथा लुंबिनी को कर से छूट का विवरण। अतः विकल्प 1 सही है।
- निगालीसागर स्तंभ अभिलेख, नेपाल: इसमें उल्लेख है कि अशोक ने बुद्ध कोणकामना के स्तूप की ऊँचाई को दोगुना करवाया था। अतः विकल्प 2 सही है।
- प्रमुख स्तंभ शिलालेख:
- सारनाथ सिंह स्तंभ: इसे वाराणसी के पास अशोक द्वारा धम्मचक्रप्रवर्तन या बुद्ध के प्रथम उपदेश की स्मृति में बनाया गया था। अतः विकल्प 3 सही नहीं है।
Question 82:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| महाजनपद |
राजधानी |
| 1.अंग |
कौशांबी |
| 2.कोसल |
वैशाली |
| 3.वत्स |
चंपा |
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- अंग: अंग, मगध के पूर्व और राजमहल पहाड़ियों के पश्चिम में स्थित था। इसकी राजधानी चंपा थी। यह वर्तमान बिहार के मुंगेर और भागलपुर के ज़िलों में स्थित है। अतः युग्म 1 सही सुमेलित नहीं है।
- कोसल: शतपथ ब्राह्मण कोसल महाजनपदों का वर्णन देता है। इसकी राजधानी श्रावस्ती, मगध के उत्तर-पश्चिम में स्थित, वर्तमान पूर्वी उत्तर प्रदेश के नज़दीक स्थित थी। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- वत्स: वत्स ऋग्वैदिक काल का प्रतीत होता है। ऐसा कहा जाता है कि यह कौरवों की एक शाखा थी, जो हस्तिनापुर से स्थानांतरित होकर कौशांबी में बस गई थी। अतः युग्म 3 सही सुमेलित नहीं है।

Question 83:
‘भारतीय ऋग्वैदिक संस्कृति’ के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- वशिष्ठ ने गायत्री मंत्र की रचना की।
- शूद्र शब्द का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।
- ऋग्वेद में सबसे महत्त्वपूर्ण देवता अग्नि है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
केवल 1 और 2
1, 2 और 3
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- ऋग्वैदिक काल में राजा की सहायता पुरोहित करते थे। ऋग्वैदिक काल में जिन दो पुरोहितों ने प्रमुख भूमिका निभाई वे वशिष्ठ और विश्वामित्र थे। वशिष्ठ रूढ़िवादी थे और विश्वामित्र उदारवादी थे। विश्वामित्र ने आर्य जगत को व्यापक बनाने के लिये गायत्री मन्त्र की रचना की। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- ऋग्वैदिक काल में जनजातीय समाज ईरान की तरह ही तीन व्यावसायिक समूहों, योद्धाओं, पुजारियों और आम लोगों में विभाजित था। शूद्र शब्द का उल्लेख पहली बार ऋग्वेद में उसकी दसवें अध्याय में किया गया है, जो इसको सबसे अंतिम में जोड़ा गया है। अतः कथन 2 सही है।
- ऋग्वेद में सबसे महत्त्वपूर्ण देवता इंद्र हैं, जिन्हें पुरंदर या आवास इकाइयों (dwelling units) का विध्वंसक कहा जाता है। दूसरा स्थान अग्नि का है। अतः कथन 3 सही नहीं है।
Question 84:
महापाषाणकालीन संरचना के प्रकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- डोलमेन एक महापाषाण संरचना है जो दो या दो से अधिक सहायक पत्थरों पर एक बड़े कैपस्टोन को रखकर बनाई गई है, जिसमें नीचे एक कक्ष होता है।
- सिस्ट एक छोटे पत्थर से निर्मित ताबूत जैसा बॉक्स या अस्थि-पेटी है जिसका उपयोग मृतकों के शवों को रखने के लिये किया जाता है।
- स्टोन सर्कल्स या पत्थर के घेरे को आमतौर पर "क्रॉमलेक (Cromlechs)" कहा जाता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- डोलमेन: डोलमेन एक महापाषाण संरचना है जो दो या दो से अधिक सहायक पत्थरों पर एक बड़े कैपस्टोन को रखकर बनाई जाती है, जो नीचे एक कक्ष बनाती है, कभी-कभी यह तीन तरफ से बंद होती है। इसका अक्सर मकबरे या समाधि कक्ष के रूप में उपयोग किया गया। अतः कथन 1 सही है।
- सिस्ट: सिस्ट एक छोटा पत्थर से निर्मित ताबूत जैसा बॉक्स या अस्थि-पेटी है जिसका उपयोग मृतकों के शवों को रखने के लिये किया जाता है। इस प्रकार की अंत्येष्टि प्रक्रिया पूरी तरह से भूमिगत थी। ये एकल और बहु-कक्षीय सिस्ट थे। अतः कथन 2 सही है।
- स्टोन सर्कल्स: स्टोन सर्कल्स या पत्थर के घेरे को आमतौर पर "क्रॉमलेक" (वेल्श भाषा का शब्द) कहा जाता है। अतः कथन 3 सही है।
Question 85:
निम्नलिखित स्थलों पर विचार कीजिये:
- मेहरगढ़
- बुर्जहोम
- चिरांद
उपर्युक्त में से कौन-से नवपाषाणकालीन स्थल हैं?
केवल 1 और 3
केवल 1 और 2
केवल 2
1, 2 और 3
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- नवीन पाषाण युग या नवपाषाण युग की शुरुआत 9,000 ईसा पूर्व में हुई थी। भारतीय उपमहाद्वीप में एकमात्र ज्ञात नवपाषाणकालीन बस्ती, जिसका निर्माण 7,000 ईसा पूर्व का माना जाता है, मेहरगढ़ में स्थित है, जो पाकिस्तान के एक प्रांत बलूचिस्तान में स्थित है। अतः विकल्प 1 सही है।
- उत्तरपश्चिम में, कश्मीरी नवपाषाण संस्कृति को उसके आवासीय गड्ढों, चीनी मिट्टी की विस्तृत शृंखला, पत्थर और हड्डी के औज़ारों की विविधता तथा माइक्रोलिथ की पूर्ण अनुपस्थिति द्वारा प्रतिष्ठित किया गया था। इसका सबसे महत्त्वपूर्ण स्थल बुर्ज़होम है, जिसका अर्थ है– ‘श्रीनगर से 16 किमी. उत्तर-पश्चिम में स्थित बर्च का स्थान’। अतः विकल्प 2 सही है।
- भारत में दूसरी जगह जहाँ हड्डियों के काफी औज़ार मिले हैं, वह है– चिरांद, जो गंगा के उत्तरी तट पर पटना से 40 किमी. पश्चिम में स्थित है। अतः विकल्प 3 सही है।
Question 86:
हड़प्पा पुरातत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- ए. कनिंघम को वर्ष 1853 में हड़प्पन मुहर की खोज।
- जॉन मार्शल द्वारा वर्ष 1931 में मोहनजोदड़ों की खुदाई कराई गई।
- मोरीटिमर व्हीलर द्वारा वर्ष 1946 में हड़प्पा स्थल की खुदाई कराई गई।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
हड़प्पा पुरातत्व का कालक्रम
(वर्ष)
- 1853 ए. कनिंघम द्वारा हड़प्पाकालीन मुहर की खोज। अतः कथन 1 सही है।
- 1921 दया राम साहनी द्वारा हड़प्पा स्थल की खुदाई कराई गई।
- 1931 जॉन मार्शल के द्वारा मोहनजोदड़ों की खुदाई कराई गई। अतः कथन 2 सही है।
- 1938 मैके के द्वारा उसी आकार की खुदाई कराई गई।
- 1940 वत्स के द्वारा हड़प्पा स्थल की खुदाई कराई गई।
- 1946 मॉर्टिमर व्हीलर के द्वारा हड़प्पा स्थल की खुदाई कराई गई। अतः कथन 3 सही है।
Question 87:
जल्लीकट्टू के बारे में निम्नलिखित में से कितने कथन सही हैं/हैं?
- यह सांडों को वश में करने का एक खेल है जो तमिलनाडु में पोंगल उत्सव के एक भाग के रूप में प्रचलित है।
- भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पशु क्रूरता के आधार पर इसे प्रतिबंधित कर दिया गया है।
- इसका उल्लेख प्राचीन तमिल महाकाव्य शिल्प्पादिकारम में मिलता है।
नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- जल्लीकट्टू सांडों को वश में करने का एक पारंपरिक खेल है जिसमें प्रतिभागी सांड के कूबड़ को पकड़कर उस पर लटकने का प्रयास करते हैं जबकि सांड भागने की कोशिश करता है।
- यह तमिलनाडु में जनवरी के दूसरे सप्ताह में फसल उत्सव पोंगल के दौरान मनाया जाता है। अतः कथन 1 सही है।
- भारतीय पशु कल्याण बोर्ड और अन्य पशु अधिकार समूहों की एक याचिका के बाद, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पशु क्रूरता के आधार पर 2014 में जल्लीकट्टू पर प्रतिबंध लगा दिया था।
- हालाँकि 2017 में तमिलनाडु सरकार ने जलीकट्टू को अनुमति देने के लिये एक अध्यादेश पारित किया, जिसे बाद में 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- जलीकट्टू का संदर्भ तमिल साहित्य के पाँच महान महाकाव्यों में से एक शिल्प्पादिकारम में वर्णित है, जो संगम काल (300 ईसा पूर्व) में लिखा गया था। अतः कथन 3 सही है।
Question 88:
मेदाराम जथारा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार किजिये:
- मेदाराम जथारा विश्व की सबसे बड़ी जनजातीय धार्मिक सभा है, जो मेदाराम में द्विवार्षिक (प्रत्येक दो वर्ष में) रूप से 'माघ' (फरवरी) महीने में पूर्णिमा के दिन आयोजित की जाती है।
- मेदाराम जथारा जनजातीय देवी-देवताओं सम्मक्का और सरलम्मा की वीरता की याद दिलाता है, जिन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1
केवल 2
1 और 2 दोनों
न तो 1 और न ही 2
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- मेदाराम जथारा (मुख्य रूप से कोया जनजाति द्वारा मनाया जाता है) विश्व की सबसे बड़ी जनजातीय धार्मिक सभा है जिसे द्विवार्षिक (दो वर्ष में एक बार) रूप से आयोजित किया जाता है, जिसमें मेदाराम में 'माघ' (फरवरी) के महीने में पूर्णिमा के दिन इस चार दिवसीय महोत्सव पर लगभग 10 मिलियन लोग एकत्रित होते हैं। अतः कथन 1 सही है।
- मेदाराम तेलंगाना के एतुरनगरम वन्यजीव अभयारण्य में एक दूरस्थ स्थान है।
- मेदाराम जथारा जनजातीय देवी-देवताओं सम्मक्का और सरलम्मा की वीरता की याद दिलाता है, जिन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। अतः कथन 2 सही है।
- यह एक ऐसा त्योहार है जिसका कोई वैदिक या ब्राह्मण प्रभाव नहीं है।
- बाघों के समूह के बीच एक नवजात शिशु के रूप में पाई गई सम्मक्का बड़ी होकर एक आदिवासी मुखिया बन गई और उसने पगिदिद्दा राजू (काकतीय सामंती प्रधान) से विवाह किया, जिनकी दो पुत्रियाँ, सरक्का व नागुलम्मा तथा जम्पन्ना नाम का एक पुत्र था।
- जथारा के दौरान लोग देवी-देवताओं को अपने शारीरिक भार के बराबर मात्रा में गुड़ के रूप में बांगरम (स्वर्ण) चढ़ाते हैं और जम्पन्ना वागु (धारा) में पवित्र स्नान करते हैं।
Question 89:
भारत में अजंता गुफाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- अजंता, वर्धा नदी पर सह्याद्रि पर्वतमाला में चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाओं की एक श्रृंखला है।
- अजंता की गुफाओं का निर्माण वाकाटक राजाओं के संरक्षण में किया गया था।
- अजंता की गुफाओं के चित्रों में नीले रंग की अनुपस्थिति इसकी एक उल्लेखनीय विशेषता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीनों
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- अजंता गुफाएँ, महाराष्ट्र में औरंगाबाद के पास वाघोरा नदी के समीप सह्याद्रि पर्वतमाला में चट्टानों को काटकर बनाई गई गुफाओं की एक श्रृंखला है। यहाँ कुल 29 गुफाएँ हैं जिनमें से 25 का उपयोग विहार या आवासीय गुफाओं के रूप में किया जाता था जबकि अन्य का चैत्य या प्रार्थना कक्ष के रूप में उपयोग किया जाता था। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- अजंता की गुफाओं का निर्माण वाकाटक राजाओं के संरक्षण में किया गया था। अतः कथन 2 सही है।
- इन गुफाओं की आकृतियाँ फ्रेस्को पेंटिंग तकनीक का उपयोग करके बनाई गई थीं और यह प्रकृतिवाद को प्रदर्शित करती हैं। इनके रंग स्थानीय वनस्पतियों और खनिजों से प्राप्त प्रेरित थे। इन चित्रों की बाहरी रेखा लाल रंग से बनाई गई और फिर भीतरी भाग को चित्रित किया गया। इन चित्रों में नीले रंग की अनुपस्थिति इनकी एक प्रमुख विशेषता है। अतः कथन 3 सही है।
Question 90:
'मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- इसका पूर्व नाम राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार था।
- यह युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च खेल पुरस्कार है।
- पहले विजेता शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद थे।
नीचे दिये गए कूट के अनुसार सही उत्तर का चुनाव कीजिये:
केवल 1 और 2
केवल 2 और 3
केवल 1
1,2 और 3
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- वर्ष 2021 में सरकार ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के नाम पर देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदल दिया। अत: कथन 1 सही है।
- यह चार साल की अवधि में किसी खिलाड़ी द्वारा खेल के क्षेत्र में शानदार और सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च खेल पुरस्कार है। अत: कथन 2 सही है।
- इस पुरस्कार में एक पदक, एक प्रमाण पत्र और 7.5 लाख रुपये का नकद पुरस्कार शामिल है।
- खेल रत्न पुरस्कार वर्ष 1991-1992 में स्थापित किया गया था और पहले प्राप्तकर्त्ता शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद थे। अतः कथन 3 सही है।
- अन्य विजेताओं में लियेंडर पेस, सचिन तेंदुलकर, धनराज पिल्लई, पुलेला गोपीचंद, अभिनव बिंद्रा, अंजू बॉबी जॉर्ज, मैरी कॉम और रानी रामपाल हैं।
Question 91:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| धार्मिक संप्रदाय |
संस्थापक |
| 1.लिंगायतवाद |
बसवन्ना |
| 2.नाथपंथ |
गोरखनाथ |
| 3.आजीवक |
मक्खलि गोशाल |
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 3
Explanation
उत्तर: C
व्याख्या:
- लिंगायतवाद: इसे वीरशैववाद के रूप में भी जाना जाता है, यह एक विशिष्ट शैव परंपरा है जिसमें लिंग के रूप में भगवान शिव पर केंद्रित पूजा के माध्यम से एकेश्वरवाद में विश्वास किया जाता है। इसमें वेदों के अधिकार और जाति व्यवस्था को अस्वीकार किया गया है। इस परंपरा की स्थापना 12वीं शताब्दी ईस्वी में बसवन्ना द्वारा की गई थी। अतः युग्म 1 सही सुमेलित है।
- नाथपंथी: जिन्हें सिद्ध सिद्धांत के रूप में भी जाना जाता है, इस पंथ के लोग गोरखनाथ और मत्स्येंद्रनाथ की शिक्षाओं का पालन करते हैं तथा शिव के एक रूप आदिनाथ की पूजा करते हैं। वे किसी के शरीर को पूर्ण वास्तविकता के साथ जागृत करने हेतु हठ योग की तकनीक में विश्वास रखते हैं। अतः युग्म 2 सही सुमेलित है।
- आजीवक: इस संप्रदाय की स्थापना 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में मक्खलि गोशाल ने की थी। यह नियतिवाद (भाग्य) सिद्धांत के इर्द-गिर्द घूमता है। इसका मानना है कि कोई स्वतंत्र इच्छा नहीं है और जो कुछ भी हुआ है या हो रहा है या होगा वह पूरी तरह से पूर्व निर्धारित है एवं ब्रह्मांडीय सिद्धांतों पर आधारित है। अतः युग्म 3 सही सुमेलित है।
Question 92:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| साहित्य |
लेखक |
| 1.मुद्राराक्षस |
शूद्रक |
| 2.मृच्छकटिकम् |
विशाखदत्त |
| 3.मालविकाग्निमित्रम् |
कालिदास |
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
) सभी तीन
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- मुद्राराक्षस: यह एक राजनीतिक नाटक है और इसमें भारत में राजा चंद्रगुप्त मौर्य के सत्ता में आने का वर्णन किया गया है। इसे विशाखदत्त ने लिखा था। अतः युग्म 1 सही सुमेलित नहीं है।
- मृच्छकटिकम्: इसमें युवा ब्राह्मण चारुदत्त और धनी वैश्या के प्रेम प्रसंग को दर्शाया गया है। इसे शूद्रक द्वारा लिखा गया था। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- मालविकाग्निमित्रम्: यह रानी की दासी मालविका और पुष्यमित्र शुंग के पुत्र अग्निमित्र की प्रेम कहानी है। इसे कालिदास द्वारा लिखा गया था। अतः युग्म 3 सही सुमेलित है।
Question 93:
जैन धर्म के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- महावीर, जैन धर्म के संस्थापक थे।
- इसमें आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार नहीं किया गया है।
- स्थानकवासी और मूर्तिपूजक जैन धर्म के अंतर्गत दिगंबर संप्रदाय के उपसंप्रदाय हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
जैन धर्म का कोई एक संस्थापक नहीं है बल्कि अलग-अलग समय में गुरु या तीर्थंकर के माध्यम से इसका प्रसार किया गया।
- महावीर से पहले जैन धर्म में 23 तीर्थंकर या महान विद्वान पुरुष थे। यह आमतौर पर गलत धारणा है कि महावीर जैन धर्म के संस्थापक थे, इसके बजाय वह अंतिम और 24वें तीर्थंकर थे। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- जैन धर्म में बौद्ध धर्म की तरह वेदों की सत्ता को अस्वीकार किया गया। हालाँकि बौद्ध धर्म के विपरीत, इसमें आत्मा के अस्तित्व में विश्वास किया गया है। आत्मा, जैन दर्शन का मूल और मौलिक केंद्र बिंदु है। इनके अनुसार आत्मा अस्तित्व का अनुभव कराने के साथ ज्ञान प्राप्त कराने में सहायक है। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- जैन धर्म की दो प्रमुख प्राचीन उपपरंपराएँ हैं:
- दिगंबर (उप-संप्रदायों में तेरापंथी, तारनपंथी तथा बीसपंथी शामिल हैं)।
- श्वेतांबर (उप-संप्रदायों में स्थानकवासी और मूर्तिपूजक शामिल हैं)। अतःकथन 3 सही नहीं है।
Question 94:
हीनयान बौद्ध धर्म के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- इसका तात्पर्य ‘बड़ा पहिया’ है।
- इसके अनुयायी व्यक्तिगत निर्वाण प्राप्ति में विश्वास करते हैं और आत्म-अनुशासन के माध्यम से इसे प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
- स्थाविरवाद, हीनयान के उपसंप्रदायों में से एक है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई नहीं
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
हीनयान:
- इसका तात्पर्य ‘छोटा पहिया’ है। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- इस संप्रदाय में बुद्ध के मूल अनुयायी शामिल हैं। यह काफी हद तक एक रूढ़िवादी संप्रदाय है।
- वे बुद्ध की मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते थे।
- वे व्यक्तिगत मोक्ष में विश्वास करने के साथ आत्म-अनुशासन एवं ध्यान के माध्यम से व्यक्तिगत निर्वाण प्राप्त करने का प्रयास करते थे। अतः कथन 2 सही है।
- इस प्रकार हीनयान का अंतिम लक्ष्य निर्वाण है।
- हीनयान के उपसंप्रदायों में से एक स्थाविरवाद या थेरवाद है। अतः कथन 3 सही है।
- हीनयान के अनुयायियों ने लोगों के साथ बातचीत करने के लिये पाली भाषा का उपयोग किया।
- सम्राट अशोक ने हीनयान संप्रदाय को संरक्षण दिया क्योंकि महायान संप्रदाय बहुत बाद में अस्तित्व में आया।
- हीनयान संप्रदाय अपने मूल स्वरूप में वर्तमान समय में लगभग अस्तित्वहीन है।
Question 95:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- इंडो-पार्थियन शासक गोंडोफर्नेस के शासनकाल के दौरान सेंट थॉमस भारत आया था।
- गोंडोफर्नेस अराकोसिया, काबुल और गांधार के क्षेत्रों (जो वर्तमान में अफगानिस्तान और पाकिस्तान में हैं) का शासक था।
- सेंट थॉमस को भारत में ईसाई धर्म लाने का श्रेय दिया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2
केवल 1 और 3
1, 2, और 3
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- इंडो-पार्थियन शासक गोंडोफर्नेस के शासनकाल के दौरान सेंट थॉमस भारत आया था। अतः कथन 1 सही है।
- गोंडोफर्नेस अराकोसिया, काबुल और गांधार के क्षेत्रों (जो वर्तमान में अफगानिस्तान और पाकिस्तान में हैं) का शासक था। सिक्कों और अभिलेखों से इसके बारे में जानकारी मिलती है। अतः कथन 2 सही है।
- ईसा मसीह के अनुयायियों ने ईसाई धर्म को विश्व के विभिन्न हिस्सों में फैलाना शुरू किया। यीशु के बारह अनुयायियों में से एक, सेंट थॉमस ने भारत की यात्रा की और यहाँ पर ईसाई धर्म का प्रसार किया था। अतः कथन 3 सही है।
Question 96:
भारत के मध्यकालीन इतिहास के संबंध में 'फना' शब्द का तात्पर्य है:
भक्तों का अल्लाह के साथ आध्यात्मिक विलय
युद्ध में मृत्यु
आदर्श मानव
दान
Correct Answer : 1
Explanation
उत्तर: A
व्याख्या:
- ‘फना' सूफीवाद का शब्द है, जो एक रहस्यमयी इस्लामी विश्वास प्रथा है, यह भक्त की आध्यात्मिक अवधारणा को संदर्भित करता है, जो पूर्ण और निःस्वार्थ रूप से ईश्वर के साथ आध्यात्मिक विलय की स्थिति को प्राप्त करता है। अतः विकल्प A सही है।
Question 97:
कबीर दास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- वे माधवाचार्य के शिष्य थे।
- वे सगुण काव्य धारा संत थे।
- उनकी रचनाएँ प्रसिद्ध पुस्तक "बीजक" में संकलित हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही नहीं हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
कबीर दास (1440-1510 ई.) का परिचय:
- वह भक्ति आंदोलन के दौरान रामानंद के शिष्य थे। अतः कथन 1 सही नहीं है।
- वह भक्ति आंदोलन की निर्गुण काव्य धारा के संत थे और उन्होंने हिंदू तथा इस्लाम जैसे प्रमुख धर्मों के रूढ़िवादी विचारों की खुले तौर पर आलोचना की। अतः कथन 2 सही नहीं है।
- उनकी कविताओं को "बानी" (उच्चारण) या 'दोहे' कहा जाता है। उनकी रचनाएँ प्रसिद्ध पुस्तक "बीजक" में संकलित हैं। अतः कथन 3 सही है।
Question 98:
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- हिंदू धर्म में देवताओं की त्रिमूर्ति की अवधारणा गुप्तकाल में विकसित हुई थी।
- गुप्तकाल में बड़ी संख्या में अस्पृश्य लोगों का उदय हुआ था जिन्हें चांडाल के रूप में जाना जाता था।
- सती का प्रथम प्रमाण गुप्तकाल के ऐरण अभिलेख में मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
केवल 1 और 2
केवल 2
केवल 1 और 3
1, 2 और 3
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- जीवन, मृत्यु और विनाश से जुड़े तीन देवताओं की अवधारणा "त्रिमूर्ति" या "त्रयी" के रूप में पहली बार गुप्त काल के दौरान अस्तित्व में आयी थी। नव-हिंदू धर्म के अनुसार त्रिमूर्ति के रूप में ब्रह्मा-विष्णु-महेश्वर की अवधारणा का प्रतिपादन हुआ था। अतः कथन 1 सही है।
- समाज में पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व से पहले चांडाल वर्ग अस्तित्व में था। 5वीं शताब्दी ईस्वी तक इनकी संख्या काफी अधिक होने और इनकी दयनीय स्थिति के कारण चीनी तीर्थयात्री फाह्यान का ध्यान इनकी ओर आकर्षित हुआ था। फाह्यान के अनुसार चांडाल गाँव के बाहर रहते थे और माँस का सेवन करते थे। अतः कथन 2 सही है।
- सती का प्रथम प्रमाण गुप्तकाल के ऐरण अभिलेख से मिलता है। यह एक ऐसी प्रथा है जिसमें एक विधवा अपने पति की चिता पर आत्मदाह कर लेती थी। बाद की शताब्दियों में यह प्रथा और भी अधिक प्रचलित हुई थी। अतः कथन 3 सही है।
Question 99:
जैन धर्म की शिक्षाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये:
- हमारे सभी निर्णय आवश्यक रूप से सापेक्ष, सशर्त और सीमित होते हैं।
- सम्यक ज्ञान, सम्यक विश्वास और सम्यक कर्म जैन धर्म के तीन रत्न हैं।
- जैन धर्म ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं करता है।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
केवल एक
केवल दो
सभी तीन
इनमें से कोई भी नहीं
Correct Answer : 2
Explanation
उत्तर: B
व्याख्या:
- स्याद्वाद (शायद/संभावना का सिद्धांत) के अनुसार, हमारे सभी निर्णय सापेक्ष, सशर्त और सीमित होते हैं। इसके अनुसार, भविष्यवाणी के सात तरीके उपलब्ध हैं। पूर्ण पुष्टि और पूर्ण निषेध दोनों गलत हैं। सभी निर्णय सशर्त होते हैं। अतः कथन 1 सही है।
- जैन धर्म का मुख्य उद्देश्य सांसारिक बंधनों से मुक्ति प्राप्त करना है। इसके अनुसार ऐसी मुक्ति के लिए किसी अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं है। इसे सम्यक ज्ञान, सम्यक विश्वास और सम्यक कर्म के माध्यम से प्राप्त किया जा सकता है। इन तीनों को जैन धर्म के तीन रत्न या त्रिरत्न माना जाता है। अतः कथन 2 सही है।
- जैन धर्म में ईश्वर के अस्तित्व को मान्यता दी गई है लेकिन उन्हें जिन से नीचे माना गया है। अतः कथन 3 सही नहीं है।
Question 100:
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिये:
| बोधिसत्व |
प्रतिनिधित्व
|
| 1. वज्रपाणि |
ध्यानी-बोधिसत्व |
| 2. मंजुश्री |
भविष्य के बुद्ध |
| 3. मैत्रेय |
पाप और बुराई का शत्रु |
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
केवल एक युग्म
केवल दो युग्म
सभी तीन युग्म
इनमें से कोई भी युग्म नहीं
Correct Answer : 4
Explanation
उत्तर: D
व्याख्या:
- बोधिसत्व का आशय ऐसे प्रबुद्ध प्राणी से है जिन्होंने दूसरों को ज्ञान प्राप्त करने में मदद करने के लिये अपनी स्वर्ग प्राप्ति में विलंब किया है। कई अलग-अलग बोधिसत्व हैं।
- वज्रपाणि: वज्रपाणि महायान बौद्ध धर्म में सबसे पहले के बोधिसत्वों में से एक हैं। वह पाप और बुराई के दुश्मन के रूप में वज्र धारण करते हैं। अतः युग्म 1 सही सुमेलित नहीं है।
- मंजुश्री (समझ के प्रेरक): मंजुश्री महायान बौद्ध धर्म में उत्कृष्ट ज्ञान से संबंधित एक बोधिसत्व है। उन्हें कभी-कभी ध्यानी-बोधिसत्व के रूप में जाना जाता है। अतः युग्म 2 सही सुमेलित नहीं है।
- मैत्रेय: भविष्य के बुद्ध। अतः युग्म 3 सही सुमेलित नहीं है।
- अवलोकितेश्वर: इन्हें पद्मपाणि के नाम से भी जाना जाता है।
- क्षितिगर्भ: नश्वर लोगों के संरक्षक।
- अमिताभ: स्वर्ग के बुद्ध।